Tuesday, 08 Sep 2026 | 11:28 PM

Trending :

EXCLUSIVE

यूपी का एपस्टीन! पत्नी लाती थी बच्चे, JE पति करता कुकर्म, फिर डार्क वेब पर बिकती थीं चीखें, अब सजा ए मौत

authorimg

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के सूखे, शांत और आधे-अधूरे सपनों से भरे बुंदेलखंड में बसे शहर बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर ने बहुत कुछ देखा है. गरीबी, पलायन, सूखा और संघर्ष… लेकिन जो सच साल 2020 के बाद धीरे-धीरे सामने आया, उसने इन शहरों की आत्मा तक को झकझोर दिया. यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि उस अंधेरे की है, जो इंसान के भीतर पलता है और मौका मिलते ही राक्षस बनकर बाहर आ जाता है. यह कहानी है सिंचाई विभाग के एक निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की, एक ऐसा दंपती जिसने भरोसे को हथियार बनाया, मासूमियत को जाल में फंसाया और इंसानियत को शर्मसार कर दिया.

यह है मामला
हम बात कर रहे हैं चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की. इस दंपति ने सबसे भयानक मिसाल पेश की है. 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचने वाले इस दरिंदे दंपती को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है. सीबीआई की जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ बाल यौन शोषण का नहीं था, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश था. आइए जानते हैं सबकुछ.
एक दम शांत दिखने वाला खूंखार शख्स
रामभवन बाहर से बिल्कुल साधारण आदमी लगता था. सरकारी नौकरी, पढ़ा-लिखा चेहरा, कम बोलने वाला स्वभाव. उसने कभी विभागीय आवास की मांग नहीं की. हमेशा किराए के मकान में रहा. मोहल्ले वाले कहते थे- अलग-थलग रहता है, ज्यादा मेलजोल नहीं. वहीं, उसकी पत्नी दुर्गावती भी चुपचाप रहने वाली महिला के रूप में जानी जाती थी. शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी. बाहर से देखने पर वे एक सामान्य, निःसंतान दंपती लगते थे, जो अपनी दुनिया में सिमटा हुआ था. मगर, इस चुप्पी के पीछे एक खौफनाक योजना धीरे-धीरे आकार ले रही थी.

बच्चों के सामने बिछाया लालसा का जाल
दुर्गावती ने अपने आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया. 5 से 16 साल उम्र के बच्चों को महंगा मोबाइल, घड़ी या चॉकलेट का लालच देती. बेचारे बच्चे समझते कितनी अच्छी आंटी हैं. उनके लिए ये सामान किसी खजाने से कम नहीं था. वह बच्चों से अपनापन जताती. कभी मिठाई देती, कभी पेन, कभी कपड़े. धीरे-धीरे बच्चे उसके घर आने लगे. पड़ोसियों को यह सब कुछ सामान्य लगता था. मगर, हर बार जब घर का दरवाजा बंद होता, तो एक बच्चे की मासूमियत छीन ली जाती थी.

हवस से बड़ा था लालच
रामभवन का मकसद केवल हवस को मिटाना नहीं था. बल्कि वह पैसे का भूखा था. उसने अपराध को कारोबार बना दिया था. घर के अंदर बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते. फिर वे फाइलें इंटरनेट के उस अंधेरे हिस्से में पहुंचाई जातीं, जहां पहचान छुपाकर गुनाह खरीदे-बेचे जाते हैं. वह डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के जरिए इन वीडियो को बेचता था. ईमेल की जांच की गई तो सामने आया कि वह देश-विदेश के कई गिरोहों के संपर्क में था. यह कोई अकेला अपराध नहीं था- यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा संगठित अपराध था. अगर कोई बच्चा किसी तरह का विरोध करता तो उसे उन्हीं तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता. साथ ही परिवारों को भी धमकी दी जाती. इस पर गरीब परिवार, जिनके पास इज्जत ही सबसे बड़ी पूंजी थी, खामोश हो जाते और इसी खामोशी में कई साल बीत गए.

इंटरपोल से आया पहला संकेत
17 अक्टूबर 2020 को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक चौंकाने वाली सूचना मिली. यह सूचना अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से आई थी. एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरें थीं. डिजिटल ट्रैकिंग से पता चला कि इनका स्रोत बुंदेलखंड का एक सरकारी इंजीनियर है. 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ. जांच की कमान डीएसपी अमित कुमार को सौंपी गई. अब तक जो अंधेरा घर की चारदीवारी में छुपा था, वह जांच की रोशनी में आने लगा.

इस दिन हुआ था गिरफ्तार
16 नवंबर 2020 को इस पूरे मामले से परदा हट गया. चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी को सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने चुपचाप घेर लिया. दरवाजा खुला तो अंदर जो मिला, उसने जांच अधिकारियों तक को हिला दिया. 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सेक्स टॉयज, 8 लाख रुपये नकद और डिजिटल फोल्डरों में छुपी 66 वीडियो और 600 से ज्यादा तस्वीरें. कुछ ही दिनों बाद दुर्गावती भी गिरफ्तार कर ली गई.

गवाही ऐसी कि कांप गई रूह
अब यह मामला केवल स्थानीय पुलिस का नहीं रहा था. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध का केस बन चुका था. जांच के दौरान कई बच्चों को मेडिकल जांच के लिए एम्स दिल्ली भेजा गया. डॉक्टरों की टीम ने जो देखा, उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया. कोर्ट में जब उन्होंने गवाही दी, तो शब्द कांप रहे थे. कुछ बच्चों की आंखों में स्थायी डर था. कुछ शारीरिक रूप से गंभीर रूप से आहत थे. मगर, सबसे गहरा घाव उनके मन पर था. कई बच्चे अब भी अंधेरे कमरे से डरते थे. किसी अजनबी की मुस्कान उन्हें सिहरन दे जाती थी. कोर्ट में पेश हुए 25 पीड़ित बच्चों ने जब बयान दिए, तो पूरा माहौल भारी हो गया. यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, यह मासूमियत की चीख थी.

  • 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई.
  • 2023 में आरोप तय हुए. रामभवन और दुर्गावती ने खुद को निर्दोष बताया.
  • 5 जून 2023 से विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई.
  • 74 गवाह पेश हुए. बच्चे, डॉक्टर, शिक्षक, डिजिटल विशेषज्ञ सब शामिल थे.

हर गवाही के साथ अपराध का एक नया पहलू सामने आता. हर डिजिटल सबूत अदालत के सामने एक और दरवाजा खोलता, जिसके पीछे घिनौनी सच्चाई छुपी थी.

अब मिला न्याय
20 फरवरी 2026 का सबसे ज्यादा दिन अहम था. इसी दिन इन मासूमों को न्याय मिला. बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में 163 पन्नों का फैसला पढ़ा गया. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने दोनों दोषियों को मौत होने तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. वहीं, हर पीड़ित बच्चे को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने को कहा. राज्य और केंद्र सरकार को 10-10 लाख रुपये सहायता देने का आदेश दिया. फैसले के समय कोर्ट में सन्नाटा था. यह केवल सजा नहीं थी. यह समाज की ओर से एक संदेश था कि मासूमियत के खिलाफ अपराध को बख्शा नहीं जाएगा.

समाज के लिए सवाल

  1. क्या हम अपने आसपास के बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत हैं?
  2. क्या डिजिटल दुनिया के अंधेरे को हम समझते हैं?
  3. क्या गरीबी बच्चों को सबसे आसान शिकार बना देती है?
  4. जिन बच्चों की हंसी छिन गई, उनका बचपन कौन लौटाएगा?

बुंदेलखंड की सूखी हवा अब भी वैसी ही चलती है. मंदिरों की घंटियां अब भी बजती हैं. स्कूलों में बच्चे अब भी खेलते हैं. मगर, इस घटना ने सिखाया है कि राक्षस कभी-कभी साधारण चेहरे के पीछे छुपा होता है. यह कहानी डराती है, क्योंकि यह किसी भूत की नहीं, बल्कि इंसान के भीतर के अंधेरे की है और शायद यही सबसे बड़ा खौफ है कि कभी-कभी खतरा बाहर नहीं, हमारे बीच ही रहता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Nashik TCS Conversion Plea Reaches Supreme Court

April 16, 2026/
6:43 pm

नासिक54 मिनट पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS ऑफिस से जुड़ा धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार...

सोनिया गांधी के स्वास्थ्य के लिए की विशेष प्रार्थना:मंदसौर में खेड़ापति बालाजी मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ हुआ

March 27, 2026/
12:26 pm

मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के स्वास्थ्य संबंधी खबरों के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके शीघ्र...

'पहले हीरोइन थी और अब हीरोइन की मां है':अक्षय कुमार ने सुनाया रवीना टंडन का शूटिंग का पुराना किस्सा; एक्ट्रेस की तारीफ भी की

June 12, 2026/
9:50 am

90 के दशक में अक्षय कुमार और रवीना टंडन की जोड़ी काफी फेमस रही थी। 22 साल बाद अब दोनों...

ईशान कर सकते हैं SRH की कप्तानी:कमिंस बैक इंजरी के कारण शुरुआती मैचों से बाहर; झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी दिलाई

March 17, 2026/
7:31 am

सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस की गैरमौजूदगी में विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन IPL 2026 की शुरुआत में टीम...

authorimg

March 25, 2026/
7:11 am

Last Updated:March 25, 2026, 07:11 IST Delhi Divine Multispeciality Hospital: दिल्ली में वजीराबाद बुराड़ी का डिवाइन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल को डॉ....

इम्तियाज अली बुर्का और पर्दा प्रथा के खिलाफ:कहा- महिलाएं जब कहती हैं वो इसमें कंफर्टेबल हैं, तो ये पिछड़े समाज की निशानी, जमकर हुई आलोचना

June 20, 2026/
10:59 am

इन दिनों फिल्म मैं वापस आऊंगा से चर्चा में बने हुए डायरेक्टर इम्तियाज अली ने बुर्का और पर्दा प्रथा पर...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

यूपी का एपस्टीन! पत्नी लाती थी बच्चे, JE पति करता कुकर्म, फिर डार्क वेब पर बिकती थीं चीखें, अब सजा ए मौत

authorimg

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के सूखे, शांत और आधे-अधूरे सपनों से भरे बुंदेलखंड में बसे शहर बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर ने बहुत कुछ देखा है. गरीबी, पलायन, सूखा और संघर्ष… लेकिन जो सच साल 2020 के बाद धीरे-धीरे सामने आया, उसने इन शहरों की आत्मा तक को झकझोर दिया. यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि उस अंधेरे की है, जो इंसान के भीतर पलता है और मौका मिलते ही राक्षस बनकर बाहर आ जाता है. यह कहानी है सिंचाई विभाग के एक निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की, एक ऐसा दंपती जिसने भरोसे को हथियार बनाया, मासूमियत को जाल में फंसाया और इंसानियत को शर्मसार कर दिया.

यह है मामला
हम बात कर रहे हैं चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की. इस दंपति ने सबसे भयानक मिसाल पेश की है. 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचने वाले इस दरिंदे दंपती को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है. सीबीआई की जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ बाल यौन शोषण का नहीं था, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश था. आइए जानते हैं सबकुछ.
एक दम शांत दिखने वाला खूंखार शख्स
रामभवन बाहर से बिल्कुल साधारण आदमी लगता था. सरकारी नौकरी, पढ़ा-लिखा चेहरा, कम बोलने वाला स्वभाव. उसने कभी विभागीय आवास की मांग नहीं की. हमेशा किराए के मकान में रहा. मोहल्ले वाले कहते थे- अलग-थलग रहता है, ज्यादा मेलजोल नहीं. वहीं, उसकी पत्नी दुर्गावती भी चुपचाप रहने वाली महिला के रूप में जानी जाती थी. शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी. बाहर से देखने पर वे एक सामान्य, निःसंतान दंपती लगते थे, जो अपनी दुनिया में सिमटा हुआ था. मगर, इस चुप्पी के पीछे एक खौफनाक योजना धीरे-धीरे आकार ले रही थी.

बच्चों के सामने बिछाया लालसा का जाल
दुर्गावती ने अपने आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया. 5 से 16 साल उम्र के बच्चों को महंगा मोबाइल, घड़ी या चॉकलेट का लालच देती. बेचारे बच्चे समझते कितनी अच्छी आंटी हैं. उनके लिए ये सामान किसी खजाने से कम नहीं था. वह बच्चों से अपनापन जताती. कभी मिठाई देती, कभी पेन, कभी कपड़े. धीरे-धीरे बच्चे उसके घर आने लगे. पड़ोसियों को यह सब कुछ सामान्य लगता था. मगर, हर बार जब घर का दरवाजा बंद होता, तो एक बच्चे की मासूमियत छीन ली जाती थी.

हवस से बड़ा था लालच
रामभवन का मकसद केवल हवस को मिटाना नहीं था. बल्कि वह पैसे का भूखा था. उसने अपराध को कारोबार बना दिया था. घर के अंदर बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते. फिर वे फाइलें इंटरनेट के उस अंधेरे हिस्से में पहुंचाई जातीं, जहां पहचान छुपाकर गुनाह खरीदे-बेचे जाते हैं. वह डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के जरिए इन वीडियो को बेचता था. ईमेल की जांच की गई तो सामने आया कि वह देश-विदेश के कई गिरोहों के संपर्क में था. यह कोई अकेला अपराध नहीं था- यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा संगठित अपराध था. अगर कोई बच्चा किसी तरह का विरोध करता तो उसे उन्हीं तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता. साथ ही परिवारों को भी धमकी दी जाती. इस पर गरीब परिवार, जिनके पास इज्जत ही सबसे बड़ी पूंजी थी, खामोश हो जाते और इसी खामोशी में कई साल बीत गए.

इंटरपोल से आया पहला संकेत
17 अक्टूबर 2020 को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक चौंकाने वाली सूचना मिली. यह सूचना अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से आई थी. एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरें थीं. डिजिटल ट्रैकिंग से पता चला कि इनका स्रोत बुंदेलखंड का एक सरकारी इंजीनियर है. 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ. जांच की कमान डीएसपी अमित कुमार को सौंपी गई. अब तक जो अंधेरा घर की चारदीवारी में छुपा था, वह जांच की रोशनी में आने लगा.

इस दिन हुआ था गिरफ्तार
16 नवंबर 2020 को इस पूरे मामले से परदा हट गया. चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी को सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने चुपचाप घेर लिया. दरवाजा खुला तो अंदर जो मिला, उसने जांच अधिकारियों तक को हिला दिया. 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सेक्स टॉयज, 8 लाख रुपये नकद और डिजिटल फोल्डरों में छुपी 66 वीडियो और 600 से ज्यादा तस्वीरें. कुछ ही दिनों बाद दुर्गावती भी गिरफ्तार कर ली गई.

गवाही ऐसी कि कांप गई रूह
अब यह मामला केवल स्थानीय पुलिस का नहीं रहा था. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध का केस बन चुका था. जांच के दौरान कई बच्चों को मेडिकल जांच के लिए एम्स दिल्ली भेजा गया. डॉक्टरों की टीम ने जो देखा, उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया. कोर्ट में जब उन्होंने गवाही दी, तो शब्द कांप रहे थे. कुछ बच्चों की आंखों में स्थायी डर था. कुछ शारीरिक रूप से गंभीर रूप से आहत थे. मगर, सबसे गहरा घाव उनके मन पर था. कई बच्चे अब भी अंधेरे कमरे से डरते थे. किसी अजनबी की मुस्कान उन्हें सिहरन दे जाती थी. कोर्ट में पेश हुए 25 पीड़ित बच्चों ने जब बयान दिए, तो पूरा माहौल भारी हो गया. यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, यह मासूमियत की चीख थी.

  • 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई.
  • 2023 में आरोप तय हुए. रामभवन और दुर्गावती ने खुद को निर्दोष बताया.
  • 5 जून 2023 से विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई.
  • 74 गवाह पेश हुए. बच्चे, डॉक्टर, शिक्षक, डिजिटल विशेषज्ञ सब शामिल थे.

हर गवाही के साथ अपराध का एक नया पहलू सामने आता. हर डिजिटल सबूत अदालत के सामने एक और दरवाजा खोलता, जिसके पीछे घिनौनी सच्चाई छुपी थी.

अब मिला न्याय
20 फरवरी 2026 का सबसे ज्यादा दिन अहम था. इसी दिन इन मासूमों को न्याय मिला. बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में 163 पन्नों का फैसला पढ़ा गया. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने दोनों दोषियों को मौत होने तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. वहीं, हर पीड़ित बच्चे को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने को कहा. राज्य और केंद्र सरकार को 10-10 लाख रुपये सहायता देने का आदेश दिया. फैसले के समय कोर्ट में सन्नाटा था. यह केवल सजा नहीं थी. यह समाज की ओर से एक संदेश था कि मासूमियत के खिलाफ अपराध को बख्शा नहीं जाएगा.

समाज के लिए सवाल

  1. क्या हम अपने आसपास के बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत हैं?
  2. क्या डिजिटल दुनिया के अंधेरे को हम समझते हैं?
  3. क्या गरीबी बच्चों को सबसे आसान शिकार बना देती है?
  4. जिन बच्चों की हंसी छिन गई, उनका बचपन कौन लौटाएगा?

बुंदेलखंड की सूखी हवा अब भी वैसी ही चलती है. मंदिरों की घंटियां अब भी बजती हैं. स्कूलों में बच्चे अब भी खेलते हैं. मगर, इस घटना ने सिखाया है कि राक्षस कभी-कभी साधारण चेहरे के पीछे छुपा होता है. यह कहानी डराती है, क्योंकि यह किसी भूत की नहीं, बल्कि इंसान के भीतर के अंधेरे की है और शायद यही सबसे बड़ा खौफ है कि कभी-कभी खतरा बाहर नहीं, हमारे बीच ही रहता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.