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रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार

रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 4% बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ने की उम्मीद बेसेंट ने कहा कि ईरान ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। इस दबाव को कम करने के लिए हम भारत को यह 30 दिनों की छूट दे रहे हैं। उन्होंने कहा- हमें ये उम्मीद है कि इसके बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद में तेजी लाएगा। अमेरिका का मानना है इस उपाय से ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी नहीं होगी। 5 मार्च तक लोड हुए जहाजों का ही तेल खरीद सकेंगे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ ने तेल खरीद के लिए ये लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुके रूसी कच्चे तेल की ही डिलीवरी भारत को की जा सकेगी। यानी, जो जहां पहले से समुद्र में है उनसे सप्लाई होगी। ईरान-इजराइल जंग से कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही मिडिल-ईस्ट में जंग के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है। ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। राजनाथ सिंह बोले- होर्मुज में रुकावट का तेल-गैस सप्लाई पर असर ईरान संघर्ष के असर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है.। ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और ऐसा लगता है कि भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी। जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे के साथ मुकाबला कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए वास्तव में चिंता का विषय है… मुझे और भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है….” कांग्रेस का आरोप- ट्रेड डील साइन नहीं हुई तो अनुमति कैसी कांग्रेस नेता ने पवन खेड़ा ने इस मामले को व्यापार समझौते से जोड़ते हुए X पर पोस्ट कर कहा कि ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं हुए, फिर भी ऐसा लग रहा है जैसे प्रतिबंध लागू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि, अनुमति वहां ली जाती है जहां कोई बंधन होते हैं। बंधन वहां होते हैं जहां कोई समझौता या करार होता है। समझौता वहां होता है जहां हस्ताक्षर हो चुके होते हैं। क्या भारत अमरीका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं? जब हस्ताक्षर ही नहीं हुए, तो समझौता कैसा? जब समझौता ही नहीं, तो बंधन कैसा? जब बंधन ही नहीं, तो अनुमति क्यों? क्या यह एपस्टीन का बंधन है? सरकार ने कहा- तेल खरीदने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं विपक्ष के आरोपों के बाद, सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। सरकार का कहना है कि यह छूट सिर्फ काम आसान करती है, लेकिन भारत की नीति इससे तय नहीं होती।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे, तब भी रूस से भारत में तेल आता रहा। उस समय भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ाई थी। रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है। भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है पिछले साल नवंबर में यूक्रेन के साथ जंग के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था। हालांकि, फरवरी में यह हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई है। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है। भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल? सस्ता विकल्प: रूस भारत को बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है। सप्लाई सिक्योरिटी: मिडिल ईस्ट में तनाव होने पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुक जाती है, रूस एक सुरक्षित विकल्प है। इकोनॉमी पर असर: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई काबू में रहती है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद, भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इस अमेरिकी छूट से सप्लाई चेन को मैनेज करने में मदद मिलेगी। ———————————- ये खबर भी पढ़े… ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला:कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा कैलकुलेशन करने को कहा। पूरी खबर पढ़े…

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रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार

रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 4% बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ने की उम्मीद बेसेंट ने कहा कि ईरान ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। इस दबाव को कम करने के लिए हम भारत को यह 30 दिनों की छूट दे रहे हैं। उन्होंने कहा- हमें ये उम्मीद है कि इसके बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद में तेजी लाएगा। अमेरिका का मानना है इस उपाय से ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी नहीं होगी। 5 मार्च तक लोड हुए जहाजों का ही तेल खरीद सकेंगे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ ने तेल खरीद के लिए ये लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुके रूसी कच्चे तेल की ही डिलीवरी भारत को की जा सकेगी। यानी, जो जहां पहले से समुद्र में है उनसे सप्लाई होगी। ईरान-इजराइल जंग से कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही मिडिल-ईस्ट में जंग के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई है। ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। राजनाथ सिंह बोले- होर्मुज में रुकावट का तेल-गैस सप्लाई पर असर ईरान संघर्ष के असर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है.। ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और ऐसा लगता है कि भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी। जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे के साथ मुकाबला कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए वास्तव में चिंता का विषय है… मुझे और भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है….” कांग्रेस का आरोप- ट्रेड डील साइन नहीं हुई तो अनुमति कैसी कांग्रेस नेता ने पवन खेड़ा ने इस मामले को व्यापार समझौते से जोड़ते हुए X पर पोस्ट कर कहा कि ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं हुए, फिर भी ऐसा लग रहा है जैसे प्रतिबंध लागू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि, अनुमति वहां ली जाती है जहां कोई बंधन होते हैं। बंधन वहां होते हैं जहां कोई समझौता या करार होता है। समझौता वहां होता है जहां हस्ताक्षर हो चुके होते हैं। क्या भारत अमरीका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं? जब हस्ताक्षर ही नहीं हुए, तो समझौता कैसा? जब समझौता ही नहीं, तो बंधन कैसा? जब बंधन ही नहीं, तो अनुमति क्यों? क्या यह एपस्टीन का बंधन है? सरकार ने कहा- तेल खरीदने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं विपक्ष के आरोपों के बाद, सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। सरकार का कहना है कि यह छूट सिर्फ काम आसान करती है, लेकिन भारत की नीति इससे तय नहीं होती।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे, तब भी रूस से भारत में तेल आता रहा। उस समय भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ाई थी। रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है। भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है पिछले साल नवंबर में यूक्रेन के साथ जंग के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था। हालांकि, फरवरी में यह हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई है। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है। भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल? सस्ता विकल्प: रूस भारत को बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है। सप्लाई सिक्योरिटी: मिडिल ईस्ट में तनाव होने पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुक जाती है, रूस एक सुरक्षित विकल्प है। इकोनॉमी पर असर: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई काबू में रहती है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद, भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और इस अमेरिकी छूट से सप्लाई चेन को मैनेज करने में मदद मिलेगी। ———————————- ये खबर भी पढ़े… ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला:कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ हटाकर दोबारा कैलकुलेशन करने को कहा। पूरी खबर पढ़े…

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