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श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल 81 रुपए तक महंगा:पेट्रोल 398 और डीजल 382 रुपए लीटर हुआ, अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर

श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल 81 रुपए तक महंगा:पेट्रोल 398 और डीजल 382 रुपए लीटर हुआ, अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर

कच्चे तेल की सप्लाई संकट के बीच श्रीलंकाई सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25% तक की बढ़ोतरी की है। आज यानी 22 मार्च को हुई बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में रेगुलर पेट्रोल की कीमत 81 श्रीलंकाई रुपए बढ़कर 398 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 79 रुपए महंगा होकर 382 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है। पिछले दो हफ्तों में यह दूसरी बार है जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते कीमतों में 8% का इजाफा किया था। हालात बिगड़ते देख राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश में ‘4 डे वर्किंग वीक’ (हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम) लागू कर दिया है और कंपनियों से वर्क-फ्रॉम-होम मोड पर लौटने को कहा है। ईंधन बचाने के लिए वर्क-फ्रॉम-होम के निर्देश सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CPC) के एक अधिकारी ने बताया कि कीमतों में इस बड़ी बढ़ोतरी का मकसद देश में ईंधन की खपत को 15 से 20% तक कम करना है। राष्ट्रपति दिसानायके ने पिछले बुधवार से ही सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम करने का आदेश जारी कर दिया था। इसके साथ ही कंपनियों से कहा गया है कि जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जाए ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम निकलें और तेल की बचत हो सके। हॉर्मुज जल मार्ग बंद होने से थमी सप्लाई चेन
श्रीलंका की इस मुश्किल की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध है। युद्ध के चौथे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ ही ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से शांति के समय दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। श्रीलंका अपनी जरूरत का पूरा तेल और बिजली बनाने के लिए कोयला आयात करता है, ऐसे में सप्लाई रुकने से देश के पास स्टॉक खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। 2022 जैसे ‘डिफॉल्ट’ का डर फिर सताने लगा श्रीलंका सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा खिंचता है, तो देश के लिए 2022 के आर्थिक संकट से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि 2022 में विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के बाद श्रीलंका ने अपने 46 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज पर ‘सॉवरेन डिफॉल्ट’ घोषित कर दिया था। हालांकि, बाद में उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2.9 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिला, जिससे स्थिति थोड़ी सुधरी थी, लेकिन अब युद्ध ने फिर से रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सिंगापुर और मलेशिया से होता है तेल का आयात श्रीलंका अपनी रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से मंगवाता है, जबकि रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के लिए वह सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया पर निर्भर है। ईरान द्वारा निर्मित श्रीलंका की इकलौती रिफाइनरी भी अब कच्चे तेल की कमी का सामना कर रही है। सरकार ने पिछले हफ्ते ही ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी थी ताकि जरूरी सेवाओं के लिए स्टॉक बचा कर रखा जा सके।

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श्रीलंका की इस मुश्किल की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध है। युद्ध के चौथे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ ही ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से शांति के समय दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। श्रीलंका अपनी जरूरत का पूरा तेल और बिजली बनाने के लिए कोयला आयात करता है, ऐसे में सप्लाई रुकने से देश के पास स्टॉक खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। 2022 जैसे ‘डिफॉल्ट’ का डर फिर सताने लगा श्रीलंका सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा खिंचता है, तो देश के लिए 2022 के आर्थिक संकट से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि 2022 में विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के बाद श्रीलंका ने अपने 46 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज पर ‘सॉवरेन डिफॉल्ट’ घोषित कर दिया था। हालांकि, बाद में उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2.9 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिला, जिससे स्थिति थोड़ी सुधरी थी, लेकिन अब युद्ध ने फिर से रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सिंगापुर और मलेशिया से होता है तेल का आयात श्रीलंका अपनी रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से मंगवाता है, जबकि रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के लिए वह सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण कोरिया पर निर्भर है। ईरान द्वारा निर्मित श्रीलंका की इकलौती रिफाइनरी भी अब कच्चे तेल की कमी का सामना कर रही है। सरकार ने पिछले हफ्ते ही ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी थी ताकि जरूरी सेवाओं के लिए स्टॉक बचा कर रखा जा सके।

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