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स्मोकिंग और एयर पॉल्यूशन से क्यों बढ़ता है टीबी का खतरा? एक्सपर्ट से जानें सटीक जवाब!

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Why do smoking and air pollution increase the risk of TB: टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) कई देशों में अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, खासकर उन इलाकों में जहां जनसंख्या घनत्व ज्यादा है और पर्यावरणीय जोखिम भी अधिक हैं. यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है, लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति को एक्टिव टीबी नहीं होती. कई वजहें हैं जो इन्फेक्शन को एक्टिव बीमारी में बदलने में भूमिका निभाती हैं, जिनमें से दो सबसे अहम हैं तंबाकू का सेवन और प्रदूषित हवा में रहना. दोनों ही फेफड़ों और इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं, जिससे शरीर में टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है. डॉ. तेजश्विनी दीपक, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, बेंगलुरु से जानिए आपको क्या पता होना चाहिए…

धूम्रपान फेफड़ों की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है
धूम्रपान फेफड़ों की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है तंबाकू पीने से फेफड़ों पर कई बुरे असर होते हैं, जिससे टीबी का खतरा बढ़ जाता है. सिगरेट का धुआं शरीर में जहरीले केमिकल पहुंचाता है, जो सांस की नलियों की परत को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो जाती है और इन्फेक्शन आसानी से पकड़ लेता है. धूम्रपान से इम्यून सेल्स जैसे मैक्रोफेज और लिम्फोसाइट्स भी कमजोर हो जाते हैं, जो टीबी के बैक्टीरिया को पहचानने और खत्म करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

इसके अलावा, धूम्रपान से रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज बनती हैं, जो फेफड़ों के टिशू को और नुकसान पहुंचाती हैं और शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत कम कर देती हैं. वायु प्रदूषण और टीबी का खतरा वायु प्रदूषण, खासकर बारीक कण जैसे पीएम2.5 और पीएम10, भी टीबी का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है. ये छोटे-छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं, जिससे सूजन और इम्यूनिटी कमजोर होती है. लंबे समय तक ऐसे प्रदूषकों के संपर्क में रहने से फेफड़ों के टिशू को नुकसान होता है और इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है.

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे दूसरे प्रदूषक भी सांस की नलियों को चिढ़ाते हैं और फेफड़ों की सेहत को और कमजोर करते हैं. इन जोखिमों से बचना टीबी से बचाव के लिए जरूरी है.

तंबाकू के धुएं से बचना, ज्यादा प्रदूषित इलाकों में मास्क पहनना, घर में वेंटिलेशन सुधारना और धूल-धुएं के संपर्क को कम करना फेफड़ों की सेहत को बचा सकता है और शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत बढ़ा सकता है. पब्लिक हेल्थ कैंपेन जो टीबी के बारे में जागरूकता और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देते हैं, वे टीबी के मामलों को कम करने और सांस की सेहत सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

 Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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धूम्रपान फेफड़ों की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है
धूम्रपान फेफड़ों की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है तंबाकू पीने से फेफड़ों पर कई बुरे असर होते हैं, जिससे टीबी का खतरा बढ़ जाता है. सिगरेट का धुआं शरीर में जहरीले केमिकल पहुंचाता है, जो सांस की नलियों की परत को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो जाती है और इन्फेक्शन आसानी से पकड़ लेता है. धूम्रपान से इम्यून सेल्स जैसे मैक्रोफेज और लिम्फोसाइट्स भी कमजोर हो जाते हैं, जो टीबी के बैक्टीरिया को पहचानने और खत्म करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

इसके अलावा, धूम्रपान से रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज बनती हैं, जो फेफड़ों के टिशू को और नुकसान पहुंचाती हैं और शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत कम कर देती हैं. वायु प्रदूषण और टीबी का खतरा वायु प्रदूषण, खासकर बारीक कण जैसे पीएम2.5 और पीएम10, भी टीबी का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है. ये छोटे-छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं, जिससे सूजन और इम्यूनिटी कमजोर होती है. लंबे समय तक ऐसे प्रदूषकों के संपर्क में रहने से फेफड़ों के टिशू को नुकसान होता है और इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है.

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे दूसरे प्रदूषक भी सांस की नलियों को चिढ़ाते हैं और फेफड़ों की सेहत को और कमजोर करते हैं. इन जोखिमों से बचना टीबी से बचाव के लिए जरूरी है.

तंबाकू के धुएं से बचना, ज्यादा प्रदूषित इलाकों में मास्क पहनना, घर में वेंटिलेशन सुधारना और धूल-धुएं के संपर्क को कम करना फेफड़ों की सेहत को बचा सकता है और शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत बढ़ा सकता है. पब्लिक हेल्थ कैंपेन जो टीबी के बारे में जागरूकता और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देते हैं, वे टीबी के मामलों को कम करने और सांस की सेहत सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

 Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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