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नई दिल्ली20 मिनट पहले

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सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल। File

भारत ने युद्धों की बदलती रणनीति को देखते हुए अत्याधुनिक ‘हाइपरसोनिक’ मिसाइल तकनीक पर काम तेज कर दिया है। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने एक कार्यक्रम में बताया है कि देश जल्द ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल’ और ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ से लैस होगा।

इनकी रफ्तार सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल से दोगुनी होगी। इसकी खासियतों की वजह से दुनिया का कोई डिफेंस सिस्टम इन्हें रोक नहीं पाएगा। डीआरडीओ प्रमुख के अनुसार, ग्लाइड मिसाइल का पहला परीक्षण जल्द संभव है।

स्क्रैमजेट इंजन पर आधारित क्रूज मिसाइल को लेकर भी बड़ी कामयाबी मिली है। हाल ही में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन का 1,000 सेकंड से ज्यादा समय तक परीक्षण सफल रहा है। औपचारिक मंजूरी मिलने के 5 साल में इस मिसाइल प्रणाली को सेना के बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य है। भारत एंटी-शिप मिसाइल भी विकसित कर रहा है। यह मिसाइल ब्रह्मोस की तुलना में और ज्यादा तेज होगी। इसके तीसरे चरण का परीक्षण इसी महीने किया जाना है।

चीन-रूस इस तकनीक में आगे

रूस के पास ‘जिरकॉन’ और ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। चीन के पास ‘डीएफ-जेडएफ’ है, जो तैनात की जा चुकी हैं। वहीं, अमेरिका इस तकनीक में थोड़ा पीछ रह गया है। अमेरिका के पास टॉमहॉक तकनीक की ‘सुपरसोनिक’ मिसाइलें हैं। लेकिन हाल के सालों में हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स जैसे एजीएम-183 एआरआरडब्ल्यू असफल रहे हैं।

अग्नि-6: सरकार की हरी झंडी मिलते ही काम शुरू

डीआरडीओ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अग्नि-6 मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीकी रूप से टीम पूरी तरह तैयार है। जैसे ही सरकार से हरी झंडी मिलेगी, हम इस पर काम शुरू कर देंगे।

यह अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक ‘इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल’ होगी। माना जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी, जिससे यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकेगी।

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सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल। File

भारत ने युद्धों की बदलती रणनीति को देखते हुए अत्याधुनिक ‘हाइपरसोनिक’ मिसाइल तकनीक पर काम तेज कर दिया है। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने एक कार्यक्रम में बताया है कि देश जल्द ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल’ और ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ से लैस होगा।

इनकी रफ्तार सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल से दोगुनी होगी। इसकी खासियतों की वजह से दुनिया का कोई डिफेंस सिस्टम इन्हें रोक नहीं पाएगा। डीआरडीओ प्रमुख के अनुसार, ग्लाइड मिसाइल का पहला परीक्षण जल्द संभव है।

स्क्रैमजेट इंजन पर आधारित क्रूज मिसाइल को लेकर भी बड़ी कामयाबी मिली है। हाल ही में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन का 1,000 सेकंड से ज्यादा समय तक परीक्षण सफल रहा है। औपचारिक मंजूरी मिलने के 5 साल में इस मिसाइल प्रणाली को सेना के बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य है। भारत एंटी-शिप मिसाइल भी विकसित कर रहा है। यह मिसाइल ब्रह्मोस की तुलना में और ज्यादा तेज होगी। इसके तीसरे चरण का परीक्षण इसी महीने किया जाना है।

चीन-रूस इस तकनीक में आगे

रूस के पास ‘जिरकॉन’ और ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। चीन के पास ‘डीएफ-जेडएफ’ है, जो तैनात की जा चुकी हैं। वहीं, अमेरिका इस तकनीक में थोड़ा पीछ रह गया है। अमेरिका के पास टॉमहॉक तकनीक की ‘सुपरसोनिक’ मिसाइलें हैं। लेकिन हाल के सालों में हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स जैसे एजीएम-183 एआरआरडब्ल्यू असफल रहे हैं।

अग्नि-6: सरकार की हरी झंडी मिलते ही काम शुरू

डीआरडीओ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अग्नि-6 मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीकी रूप से टीम पूरी तरह तैयार है। जैसे ही सरकार से हरी झंडी मिलेगी, हम इस पर काम शुरू कर देंगे।

यह अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक ‘इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल’ होगी। माना जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी, जिससे यह एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकेगी।

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