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Statins and Kidney Health: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर्स आमतौर पर स्टैटिन्स दवाएं देते हैं. ये दवाएं खून में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है. कुछ रिसर्च बताती हैं कि ये दवाएं किडनी के लिए भी फायदेमंद होती हैं. हालांकि लंबे समय तक स्टैटिन यूज करने से किडनी डिजीज का रिस्क भी बढ़ सकता है.

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कोलेस्ट्रॉल की दवा स्टैटिन्स का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ा सकता है.

Do Statins Affect Your Kidneys: आजकल हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं. जब कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब डॉक्टर्स मरीजों को रोज स्टैटिन दवा लेने की सलाह देते हैं. स्टैटिन्स दवाओं का इस्तेमाल खून में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है. ये दवाएं कोलेस्ट्रॉल कम करने और हार्ट डिजीज से बचाने में बेहद असरदार मानी जाती हैं. खास बात यह है कि स्टैटिन्स की कीमत काफी कम होती है. इन दवाओं की पूरी स्ट्रिप आपको 20-25 रुपये में मिल जाती है. ये दवाएं लिवर में जाकर उस एंजाइम को रोकती हैं, जो कोलेस्ट्रॉल बनाने में जिम्मेदार होता है. इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के हाई रिस्क मरीजों को अक्सर स्टैटिन्स लिखी जाती हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोलेस्ट्रॉल घटाने के अलावा स्टैटिन्स शरीर को कई अन्य तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं. इनमें से एक किडनी की सुरक्षा है. एक रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों में जिनको पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें स्टैटिन्स लेने से किडनी के कामकाज को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. कई स्टडी बताती हैं कि स्टैटिन्स का उपयोग किडनी डिजीज की प्रोग्रेस को धीमा कर सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) जैसी घटनाओं के जोखिम को कम कर सकता है. अधिकतर रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल स्टैटिन्स को सुरक्षित और फायदेमंद बताते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक एक स्टडी में दावा किया गया कि कई सालों तक स्टैटिन्स लेने से किडनी की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. इस अध्ययन में 40,000 से अधिक मरीजों का 8.4 साल तक अध्ययन किया गया और तुलना की गई कि कौन स्टैटिन्स ले रहा था और कौन नहीं. अध्ययन में यह पाया गया कि स्टैटिन्स लेने वालों में तीन प्रकार की किडनी की समस्याएं ज्यादा थीं. इनमें एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा 30% ज्यादा पाया गया. क्रोनिक किडनी डिजीज का रिस्क 36% ज्यादा देखने को मिला और नेफ्राइटिस या रीनल स्क्लेरोसिस का जोखिम 35% अधिक पाया गया. यह जोखिम केवल बीमारियों वाले मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज का संबंध पाया गया.

स्टैटिन्स के फायदे कई रिसर्च में साबित हो चुके हैं, जबकि कुछ स्टडी में इसे लॉन्ग टर्म के लिए रिस्की भी माना गया है. क्लीनिकल ट्रायल आमतौर पर केवल कुछ सालों के लिए होते हैं और इनमें स्टैटिन्स के शॉर्ट टर्म फायदे दिखाई देते हैं. जब लोग इन दवाइयों को दस साल या उससे अधिक समय तक रोजमर्रा की ज़िंदगी में लेते हैं, तो किडनी पर दीर्घकालिक प्रभाव अलग हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि स्टैटिन्स सीधे किडनी डिजीज का कारण हैं, बल्कि इससे कनेक्शन जुड़ा हुआ है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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कोलेस्ट्रॉल की दवा स्टैटिन्स का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ा सकता है.

Do Statins Affect Your Kidneys: आजकल हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं. जब कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब डॉक्टर्स मरीजों को रोज स्टैटिन दवा लेने की सलाह देते हैं. स्टैटिन्स दवाओं का इस्तेमाल खून में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है. ये दवाएं कोलेस्ट्रॉल कम करने और हार्ट डिजीज से बचाने में बेहद असरदार मानी जाती हैं. खास बात यह है कि स्टैटिन्स की कीमत काफी कम होती है. इन दवाओं की पूरी स्ट्रिप आपको 20-25 रुपये में मिल जाती है. ये दवाएं लिवर में जाकर उस एंजाइम को रोकती हैं, जो कोलेस्ट्रॉल बनाने में जिम्मेदार होता है. इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के हाई रिस्क मरीजों को अक्सर स्टैटिन्स लिखी जाती हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोलेस्ट्रॉल घटाने के अलावा स्टैटिन्स शरीर को कई अन्य तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं. इनमें से एक किडनी की सुरक्षा है. एक रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों में जिनको पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें स्टैटिन्स लेने से किडनी के कामकाज को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. कई स्टडी बताती हैं कि स्टैटिन्स का उपयोग किडनी डिजीज की प्रोग्रेस को धीमा कर सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) जैसी घटनाओं के जोखिम को कम कर सकता है. अधिकतर रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल स्टैटिन्स को सुरक्षित और फायदेमंद बताते हैं.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक एक स्टडी में दावा किया गया कि कई सालों तक स्टैटिन्स लेने से किडनी की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. इस अध्ययन में 40,000 से अधिक मरीजों का 8.4 साल तक अध्ययन किया गया और तुलना की गई कि कौन स्टैटिन्स ले रहा था और कौन नहीं. अध्ययन में यह पाया गया कि स्टैटिन्स लेने वालों में तीन प्रकार की किडनी की समस्याएं ज्यादा थीं. इनमें एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा 30% ज्यादा पाया गया. क्रोनिक किडनी डिजीज का रिस्क 36% ज्यादा देखने को मिला और नेफ्राइटिस या रीनल स्क्लेरोसिस का जोखिम 35% अधिक पाया गया. यह जोखिम केवल बीमारियों वाले मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज का संबंध पाया गया.

स्टैटिन्स के फायदे कई रिसर्च में साबित हो चुके हैं, जबकि कुछ स्टडी में इसे लॉन्ग टर्म के लिए रिस्की भी माना गया है. क्लीनिकल ट्रायल आमतौर पर केवल कुछ सालों के लिए होते हैं और इनमें स्टैटिन्स के शॉर्ट टर्म फायदे दिखाई देते हैं. जब लोग इन दवाइयों को दस साल या उससे अधिक समय तक रोजमर्रा की ज़िंदगी में लेते हैं, तो किडनी पर दीर्घकालिक प्रभाव अलग हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि स्टैटिन्स सीधे किडनी डिजीज का कारण हैं, बल्कि इससे कनेक्शन जुड़ा हुआ है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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