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फल खाने का भी होता है बेस्ट टाइम ! आयुर्वेद में बताया गया है यह नियम, अच्छी सेहत के लिए जानना जरूरी

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Ayurveda Rules for Fruits: अधिकतर फलों को कभी भी सुबह खाली पेट या सूर्यास्त के बाद नहीं खाना चाहिए. नाश्ते के बाद या दोपहर के वक्त इनका सेवन सबसे उपयुक्त माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार फल और दूध का कॉम्बिनेशन शरीर में टॉक्सिन पैदा कर सकता है, जिससे पाचन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इन कॉम्बिनेशंस से बचना चाहिए.

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आयुर्वेद में कहा गया है कि फल सूर्यास्त के बाद नहीं खाने चाहिए.

Best Way To Eat Fruits: फलों का सेवन करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि इनमें अनगिनत पोषक तत्व होते हैं. फल शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और बीमारियों से बचाते हैं. आयुर्वेद में कुछ फलों को औषधि समान माना गया है. अक्सर हम फलों को सेहतमंद मानकर किसी भी समय और किसी भी तरीके से खा लेते हैं. हालांकि आयुर्वेद का मानना है कि गलत समय या गलत कॉम्बिनेशन के साथ खाए गए फल शरीर में विषाक्त पदार्थ पैदा कर सकते हैं. आयुर्वेद मनुष्य की शारीरिक प्रवृत्ति के आधार पर आहार के चयन पर जोर देता है. अगर फलों का सेवन सही नियमों के साथ किया जाए, तो ये न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं, बल्कि ओज और जीवनी शक्ति में भी वृद्धि करते हैं.

आयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो हमेशा ताजा और मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए. पूरी तरह पके हुए फल ही खाने चाहिए. उदाहरण के लिए पका हुआ आम दोपहर या शाम के समय खाने पर शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि कच्चा आम शरीर में पित्त दोष को बढ़ा सकता है. कच्चे आम का सेवन सीधे करने के बजाय उसे चटनी या सब्जी के रूप में लेना आयुर्वेद में बेहतर माना गया है. इसी तरह फलों को हमेशा उनकी प्राकृतिक अवस्था में ही खाना चाहिए, क्योंकि अधूरा पका फल पाचन में भारी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

लोगों को अपने शरीर की प्रकृति के हिसाब से फल खाने चाहिए. केला साल भर उपलब्ध रहता है, लेकिन शरीर में कफ दोष को बढ़ाने वाला माना जाता है. इसलिए जिन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति कफ प्रधान है या जिन्हें खांसी-जुकाम की समस्या रहती है, उन्हें केले का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. इसके अलावा वात दोष वाले व्यक्तियों के लिए खजूर और अंगूर जैसे मीठे व खट्टे फल अत्यंत लाभदायक होते हैं. आयुर्वेद यह भी सलाह देता है कि एक समय में एक ही प्रकार का फल खाना बेहतर होता है, ताकि पाचन अग्नि उन्हें आसानी से पचा सके.

समय की बात करें तो फलों को कभी भी सुबह एकदम खाली पेट नहीं खाना चाहिए. बेहतर होगा कि आप नाश्ता करने के कुछ समय बाद या दोपहर के भोजन के बीच में फल लें. सूरज ढलने के बाद फलों का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि शाम के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और फल ठीक से पच नहीं पाते. इसके अलावा फलों के साथ दूध का मेल जैसे मैंगो शेक या बनाना शेक विरुद्ध आहार की श्रेणी में आता है. दूध और फलों का संयोग पाचन को बिगाड़कर त्वचा रोगों और एलर्जी का कारण बन सकता है.

फलों के रस की तुलना में उन्हें चबाकर खाना कहीं अधिक गुणकारी है. फलों का रस निकालने की प्रक्रिया में उनका महत्वपूर्ण फाइबर छिलके के रूप में बाहर निकल जाता है, जिससे केवल मीठा रस बचता है. यह फिल्टर रस शरीर में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है और पूर्ण पोषण नहीं दे पाता. चबाकर खाने से लार के एंजाइम फलों के साथ मिलकर बेहतर पाचन सुनिश्चित करते हैं. आयुर्वेद के इन सरल नियमों को अपनाकर आप फलों से अधिकतम पोषण प्राप्त कर सकते हैं और बीमारियों से दूर रह सकते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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आयुर्वेद में कहा गया है कि फल सूर्यास्त के बाद नहीं खाने चाहिए.

Best Way To Eat Fruits: फलों का सेवन करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि इनमें अनगिनत पोषक तत्व होते हैं. फल शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और बीमारियों से बचाते हैं. आयुर्वेद में कुछ फलों को औषधि समान माना गया है. अक्सर हम फलों को सेहतमंद मानकर किसी भी समय और किसी भी तरीके से खा लेते हैं. हालांकि आयुर्वेद का मानना है कि गलत समय या गलत कॉम्बिनेशन के साथ खाए गए फल शरीर में विषाक्त पदार्थ पैदा कर सकते हैं. आयुर्वेद मनुष्य की शारीरिक प्रवृत्ति के आधार पर आहार के चयन पर जोर देता है. अगर फलों का सेवन सही नियमों के साथ किया जाए, तो ये न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं, बल्कि ओज और जीवनी शक्ति में भी वृद्धि करते हैं.

आयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो हमेशा ताजा और मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए. पूरी तरह पके हुए फल ही खाने चाहिए. उदाहरण के लिए पका हुआ आम दोपहर या शाम के समय खाने पर शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि कच्चा आम शरीर में पित्त दोष को बढ़ा सकता है. कच्चे आम का सेवन सीधे करने के बजाय उसे चटनी या सब्जी के रूप में लेना आयुर्वेद में बेहतर माना गया है. इसी तरह फलों को हमेशा उनकी प्राकृतिक अवस्था में ही खाना चाहिए, क्योंकि अधूरा पका फल पाचन में भारी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

लोगों को अपने शरीर की प्रकृति के हिसाब से फल खाने चाहिए. केला साल भर उपलब्ध रहता है, लेकिन शरीर में कफ दोष को बढ़ाने वाला माना जाता है. इसलिए जिन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति कफ प्रधान है या जिन्हें खांसी-जुकाम की समस्या रहती है, उन्हें केले का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. इसके अलावा वात दोष वाले व्यक्तियों के लिए खजूर और अंगूर जैसे मीठे व खट्टे फल अत्यंत लाभदायक होते हैं. आयुर्वेद यह भी सलाह देता है कि एक समय में एक ही प्रकार का फल खाना बेहतर होता है, ताकि पाचन अग्नि उन्हें आसानी से पचा सके.

समय की बात करें तो फलों को कभी भी सुबह एकदम खाली पेट नहीं खाना चाहिए. बेहतर होगा कि आप नाश्ता करने के कुछ समय बाद या दोपहर के भोजन के बीच में फल लें. सूरज ढलने के बाद फलों का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि शाम के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और फल ठीक से पच नहीं पाते. इसके अलावा फलों के साथ दूध का मेल जैसे मैंगो शेक या बनाना शेक विरुद्ध आहार की श्रेणी में आता है. दूध और फलों का संयोग पाचन को बिगाड़कर त्वचा रोगों और एलर्जी का कारण बन सकता है.

फलों के रस की तुलना में उन्हें चबाकर खाना कहीं अधिक गुणकारी है. फलों का रस निकालने की प्रक्रिया में उनका महत्वपूर्ण फाइबर छिलके के रूप में बाहर निकल जाता है, जिससे केवल मीठा रस बचता है. यह फिल्टर रस शरीर में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है और पूर्ण पोषण नहीं दे पाता. चबाकर खाने से लार के एंजाइम फलों के साथ मिलकर बेहतर पाचन सुनिश्चित करते हैं. आयुर्वेद के इन सरल नियमों को अपनाकर आप फलों से अधिकतम पोषण प्राप्त कर सकते हैं और बीमारियों से दूर रह सकते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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