Sunday, 23 Aug 2026 | 01:31 AM

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Indore Fire Brigade Response Time Under Scrutiny in Fatal Accident

Indore Fire Brigade Response Time Under Scrutiny in Fatal Accident

इंदौर के बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में बुधवार की सुबह एक मकान में आग लग गई। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया और उनकी गर्भवती बहू सहित 8 लोगों की इस हादसे में जान चली गई। लेकिन इस मलबे के नीचे कई सवाल दबे हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल-

.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फायर ब्रिगेड सूचना देने के करीब एक घंटे बाद पहुंची। नजदीकी फायर स्टेशन घटनास्थल से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है। ऐसे में महज इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लगना कई सवाल खड़े कर रहा है।

दूसरी ओर फायर स्टेशन के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि पहली सूचना सुबह 4 बजकर 1 मिनट पर मिली और अगले ही मिनट दमकल को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। 17 मिनट में टीम मौके पर पहुंच गई।

इन दोनों दावों के बीच सच्चाई क्या है? क्या ये 8 जिंदगियां बचाई जा सकती थीं, क्या फायर ब्रिगेड की लापरवाही से आग समय पर काबू नहीं हो सका? इन सवालों की पड़ताल भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर की।

इस रिपोर्ट में पढ़िए इस काली रात की पूरी कहानी

तड़के 3:30 बजे : जब चार्जिंग पॉइंट बना ‘यमराज’

हादसे के चश्मदीद और पड़ोसी अभिषेक ने बताया कि वह करीब सवा तीन बजे उठे थे। उस समय कार चार्जिंग पर लगी हुई थी और उसके बोनट से हल्का धुआं निकलना शुरू हुआ। पहले लगा कि यह मामूली धुआं है, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैलने लगी। उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को जगाया।

करीब 15 मिनट में लोग इकट्ठा हो गए और फायर ब्रिगेड को फोन किया गया, लेकिन तुरंत कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। अगर समय पर दमकल पहुंच जाती, तो आग नीचे ही सीमित रह सकती थी। आग धीरे-धीरे ऊपर बढ़ी और करीब एक घंटे में दूसरी मंजिल तक पहुंच गई।

पक्ष-1 : रहवासियों का आरोप- देरी ने ली जान

रहवासियों और पार्षद राजीव जैन का कहना है कि सूचना देने के करीब एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शी अभिषेक ने कहा, अगर गाड़ी समय पर आ जाती तो आग केवल ग्राउंड फ्लोर तक रहती। एक घंटे के इंतजार में आग सेकंड फ्लोर तक पहुंच गई और वहां सो रहे लोग अंदर ही फंस गए।

पक्ष-2 : फायर कंट्रोल रूम का लॉगबुक- समय पर पहुंचे

दैनिक भास्कर की टीम ने किला मैदान स्थित फायर कंट्रोल रूम जाकर पड़ताल की, जहां ड्यूटी पर मौजूद मुकेश पाटीदार ने लॉग बुक दिखाते हुए बताया कि पहला कॉल सुबह 4:01 बजे आया था। 4:02 बजे गांधी हॉल स्टेशन को सूचना दी गई, वहां से गाड़ी रवाना हुई और 4:19 बजे घटनास्थल पर पहुंच गई। यानी फायर ब्रिगेड का दावा है कि उनका रिस्पॉन्स टाइम मात्र 17 मिनट था।

फायर कंट्रोल रूम को पहली सूचना देने वाले कलश जैन का नाम कंट्रोल रूम के लॉग बुक में दर्ज है। उन्होंने भास्कर को फोन पर बताया कि उन्होंने 3 बजकर 55 मिनट पर कॉल किया था। यानी लॉग बुक में इंट्री के टाइम से 6 मिनट पहले। उन्होंने ये भी कहा कि पहली गाड़ी जो आग बुझाने आई वो कम से कम कॉल लगाने के आधे घंटे बाद ही आई थी।

गलियों का चक्रव्यूह और ‘डिजिटल लॉक’ की त्रासदी

जांच में यह भी सामने आया कि केवल सिस्टम की सुस्ती ही नहीं, बल्कि शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस हादसे के लिए जिम्मेदार है।

  • तंग गलियां : फायर ब्रिगेड की गाड़ियां ग्रेटर बृजेश्वरी की संकरी गलियों में फंस गईं। पीछे के रास्ते से पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी वाहन फंस गया और उसे रिवर्स करने में कीमती समय बर्बाद हुआ।
  • डिजिटल लॉक और जाली : आग लगने के बाद घर की बिजली गुल हो गई, जिससे ऑटोमैटिक डिजिटल लॉक जाम हो गए। लोग अंदर से दरवाजा नहीं खोल सके और बाहर से खिड़कियों पर लगी लोहे की जालियों ने बचाव के रास्ते बंद कर दिए।
आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई।

आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई।

5 किमी की दूरी और ‘गोल्डन ऑवर’

गांधी हॉल फायर स्टेशन से घटनास्थल की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। फायर ब्रिगेड का दावा है कि यह दूरी 17 मिनट में तय की गई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने 3:30 बजे से ही फोन करना शुरू कर दिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंट्रोल रूम को सूचना देरी से मिली या कॉल रिसीव करने में ही देर हुई? यह अब भी जांच का विषय है।

कई सवाल अभी बाकी हैं…

माना जा रहा है कि घर के अंदर गैस सिलेंडर फटने के बाद आग की तीव्रता कई गुना बढ़ गई। ऐसे में 15-20 मिनट की देरी भी घातक साबित हो सकती है। 8 लोगों की मौत ने इंदौर के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब बड़ा सवाल यही है-अगर फायर ब्रिगेड का दावा सही है, तो मोहल्ले के लोग झूठ क्यों बोलेंगे? और अगर रहवासी सही हैं, तो कंट्रोल रूम की लॉग बुक में दर्ज समय किसका है?

इन सबके बीच किशनगंज से आए वे 6 रिश्तेदार, जो खुशियां मनाने आए थे, आज कफन में लिपटे हैं। सिमरन, जो अपने आने वाले बच्चे के सपने देख रही थी, वह इस ‘डिजिटल पिंजरे’ से बाहर नहीं निकल सकी।

हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… इंदौर में EV चार्जिंग के दौरान घर जला, 8 मौतें:4 घायल; सिलेंडरों में भी ब्लास्ट, डिजिटल लॉक नहीं खुले, लोग अंदर फंसे रह गए

4 फैक्टर, जो बने 8 लोगों की मौत की वजह:ई-कार की चार्जिंग में शॉर्ट सर्किट, डिजिटल लॉक, घर में रखा केमिकल और 15 कमर्शियल सिलेंडर

12 PHOTOS में देखिए इंदौर ईवी हादसा:तिमंजिला मकान में गर्भवती बहू समेत 8 लोगों की मौत; शॉर्ट सर्किट के साथ सिलेंडर भी फटे

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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फायर ब्रिगेड सूचना देने के करीब एक घंटे बाद पहुंची। नजदीकी फायर स्टेशन घटनास्थल से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है। ऐसे में महज इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लगना कई सवाल खड़े कर रहा है।

दूसरी ओर फायर स्टेशन के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि पहली सूचना सुबह 4 बजकर 1 मिनट पर मिली और अगले ही मिनट दमकल को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। 17 मिनट में टीम मौके पर पहुंच गई।

इन दोनों दावों के बीच सच्चाई क्या है? क्या ये 8 जिंदगियां बचाई जा सकती थीं, क्या फायर ब्रिगेड की लापरवाही से आग समय पर काबू नहीं हो सका? इन सवालों की पड़ताल भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर की।

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तड़के 3:30 बजे : जब चार्जिंग पॉइंट बना ‘यमराज’

हादसे के चश्मदीद और पड़ोसी अभिषेक ने बताया कि वह करीब सवा तीन बजे उठे थे। उस समय कार चार्जिंग पर लगी हुई थी और उसके बोनट से हल्का धुआं निकलना शुरू हुआ। पहले लगा कि यह मामूली धुआं है, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैलने लगी। उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को जगाया।

करीब 15 मिनट में लोग इकट्ठा हो गए और फायर ब्रिगेड को फोन किया गया, लेकिन तुरंत कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। अगर समय पर दमकल पहुंच जाती, तो आग नीचे ही सीमित रह सकती थी। आग धीरे-धीरे ऊपर बढ़ी और करीब एक घंटे में दूसरी मंजिल तक पहुंच गई।

पक्ष-1 : रहवासियों का आरोप- देरी ने ली जान

रहवासियों और पार्षद राजीव जैन का कहना है कि सूचना देने के करीब एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शी अभिषेक ने कहा, अगर गाड़ी समय पर आ जाती तो आग केवल ग्राउंड फ्लोर तक रहती। एक घंटे के इंतजार में आग सेकंड फ्लोर तक पहुंच गई और वहां सो रहे लोग अंदर ही फंस गए।

पक्ष-2 : फायर कंट्रोल रूम का लॉगबुक- समय पर पहुंचे

दैनिक भास्कर की टीम ने किला मैदान स्थित फायर कंट्रोल रूम जाकर पड़ताल की, जहां ड्यूटी पर मौजूद मुकेश पाटीदार ने लॉग बुक दिखाते हुए बताया कि पहला कॉल सुबह 4:01 बजे आया था। 4:02 बजे गांधी हॉल स्टेशन को सूचना दी गई, वहां से गाड़ी रवाना हुई और 4:19 बजे घटनास्थल पर पहुंच गई। यानी फायर ब्रिगेड का दावा है कि उनका रिस्पॉन्स टाइम मात्र 17 मिनट था।

फायर कंट्रोल रूम को पहली सूचना देने वाले कलश जैन का नाम कंट्रोल रूम के लॉग बुक में दर्ज है। उन्होंने भास्कर को फोन पर बताया कि उन्होंने 3 बजकर 55 मिनट पर कॉल किया था। यानी लॉग बुक में इंट्री के टाइम से 6 मिनट पहले। उन्होंने ये भी कहा कि पहली गाड़ी जो आग बुझाने आई वो कम से कम कॉल लगाने के आधे घंटे बाद ही आई थी।

गलियों का चक्रव्यूह और ‘डिजिटल लॉक’ की त्रासदी

जांच में यह भी सामने आया कि केवल सिस्टम की सुस्ती ही नहीं, बल्कि शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस हादसे के लिए जिम्मेदार है।

  • तंग गलियां : फायर ब्रिगेड की गाड़ियां ग्रेटर बृजेश्वरी की संकरी गलियों में फंस गईं। पीछे के रास्ते से पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी वाहन फंस गया और उसे रिवर्स करने में कीमती समय बर्बाद हुआ।
  • डिजिटल लॉक और जाली : आग लगने के बाद घर की बिजली गुल हो गई, जिससे ऑटोमैटिक डिजिटल लॉक जाम हो गए। लोग अंदर से दरवाजा नहीं खोल सके और बाहर से खिड़कियों पर लगी लोहे की जालियों ने बचाव के रास्ते बंद कर दिए।
आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई।

आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई।

5 किमी की दूरी और ‘गोल्डन ऑवर’

गांधी हॉल फायर स्टेशन से घटनास्थल की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। फायर ब्रिगेड का दावा है कि यह दूरी 17 मिनट में तय की गई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने 3:30 बजे से ही फोन करना शुरू कर दिया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंट्रोल रूम को सूचना देरी से मिली या कॉल रिसीव करने में ही देर हुई? यह अब भी जांच का विषय है।

कई सवाल अभी बाकी हैं…

माना जा रहा है कि घर के अंदर गैस सिलेंडर फटने के बाद आग की तीव्रता कई गुना बढ़ गई। ऐसे में 15-20 मिनट की देरी भी घातक साबित हो सकती है। 8 लोगों की मौत ने इंदौर के सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब बड़ा सवाल यही है-अगर फायर ब्रिगेड का दावा सही है, तो मोहल्ले के लोग झूठ क्यों बोलेंगे? और अगर रहवासी सही हैं, तो कंट्रोल रूम की लॉग बुक में दर्ज समय किसका है?

इन सबके बीच किशनगंज से आए वे 6 रिश्तेदार, जो खुशियां मनाने आए थे, आज कफन में लिपटे हैं। सिमरन, जो अपने आने वाले बच्चे के सपने देख रही थी, वह इस ‘डिजिटल पिंजरे’ से बाहर नहीं निकल सकी।

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