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हाईकोर्ट ने रेप केस में वॉइस सैंपल जांच सही ठहराई:निष्पक्ष ट्रायल के लिए इसे जरूरी बताया, पीड़िता की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने रेप केस में वॉइस सैंपल जांच सही ठहराई:निष्पक्ष ट्रायल के लिए इसे जरूरी बताया, पीड़िता की याचिका खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बलात्कार और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में कॉल रिकॉर्डिंग और वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच को सही ठहराया है। कोर्ट ने पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने 1 मई 2024 को दी थी अनुमति
ग्वालियर के विशेष न्यायाधीश (अत्याचार) ने 1 मई 2024 को आरोपी के आवेदन पर पेन ड्राइव में मौजूद कॉल रिकॉर्डिंग की जांच और आरोपी व पीड़िता के वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच की अनुमति दी थी। निष्पक्ष सुनवाई के लिए साक्ष्य का अधिकार जरूरी
जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार है। केवल ट्रायल शुरू होने के आधार पर जांच से इनकार नहीं किया जा सकता। पीड़िता ने जांच को बताया अनावश्यक देरी
पीड़िता की ओर से कहा गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में वॉइस सैंपल जांच की अनुमति ट्रायल को अनावश्यक रूप से लंबा करने का प्रयास है।
याचिका में कहा गया कि आरोपी का आवेदन स्पष्ट नहीं है। कॉल रिकॉर्डिंग की तारीख, समय और उसकी प्रामाणिकता का उल्लेख नहीं किया गया, इसलिए जांच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।

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याचिका में कहा गया कि आरोपी का आवेदन स्पष्ट नहीं है। कॉल रिकॉर्डिंग की तारीख, समय और उसकी प्रामाणिकता का उल्लेख नहीं किया गया, इसलिए जांच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।

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