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सिर्फ बीमारी का पता ही नहीं लगाता MRI, अब इलाज में भी हो रहा इस्तेमाल, डॉक्टर से जानिए 5 बड़ी बातें

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MRI for Precision Surgery: एमआरआई एक एडवांस स्कैनिंग है, जिसके जरिए कई गंभीर बीमारियों का पता लगाया जाता है. रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक बंसल के अनुसार MRI अब केवल बीमारी की जांच के लिए नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कई तरह की सर्जरी और कीमोथेरेपी की निगरानी के लिए किया जा रहा है. यह ट्रीटमेंट को ज्यादा इफेक्टिव बनाने में मदद कर रहा है.

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एमआरआई के जरिए कई तरह की सर्जरी भी की जाती हैं.

Critical Facts About MRI: जब भी लोगों को कोई अंदरूनी समस्या होती है, तब मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI कराने की सलाह दी जाती है. यह एक तरह की स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफ तस्वीर बन जाती है. लंबे समय से इसे केवल एक डायग्नोस्टिक टूल यानी बीमारी का पता लगाने वाली मशीन माना गया है, लेकिन अब MRI का इस्तेमाल कई तरह के ट्रीटमेंट में भी किया जा रहा है. अब MRI सिर्फ यह नहीं बताता कि बीमारी कहाँ है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों के सटीक इलाज का एक हिस्सा बन चुका है. कैंसर से लेकर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर तक MRI डॉक्टर्स के लिए एक गाइड की तरह काम कर रहा है. चलिए डॉक्टर से जानते हैं कि एमआरआई का इस्तेमाल किन-किन ट्रीटमेंट में किया जा रहा है.

दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि पहले सर्जन एक्स-रे या सीटी स्कैन की मदद से ऑपरेशन करते थे, लेकिन अब इंट्रा-ऑपरेटिव MRI का इस्तेमाल हो रहा है. इसका मतलब है कि ऑपरेशन के दौरान ही मरीज का MRI किया जाता है. इससे सर्जन्स को रियल टाइम में पता चलता है कि ट्यूमर का कितना हिस्सा निकल चुका है और कितना बाकी है. इसी तरह MRI-गाइडेड बायोप्सी के जरिए डॉक्टर शरीर के उस सटीक बिंदु से सैंपल लेते हैं, जहां बीमारी मौजूद है. इससे गलत रिपोर्ट की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि अब फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (MRgFUS) में भी एमआरआई का यूज किया जा रहा है. इसमें MRI का उपयोग बिना किसी चीर-फाड़ के ट्यूमर को नष्ट करने के लिए किया जाता है. डॉक्टर MRI के जरिए ट्यूमर की सटीक लोकेशन देखते हैं और फिर हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासाउंड किरणों को उसी बिंदु पर केंद्रित करते हैं. इससे ट्यूमर कोशिकाएं जलकर नष्ट हो जाती हैं. यह तकनीक विशेष रूप से गर्भाशय के फाइब्रॉएड और पार्किंसंस रोग के कारण होने वाले कंपन के इलाज में असरदार साबित हो रही है.

एक्सपर्ट के मुताबिक MRI अब सिर्फ कैंसर का पता नहीं लगाता, बल्कि यह भी बताता है कि दी जा रही कीमोथेरेपी कितनी प्रभावी है. फंक्शनल MRI के जरिए डॉक्टर देख सकते हैं कि दवा शरीर के भीतर ट्यूमर पर कैसा असर कर रही है. अगर ट्यूमर नहीं सिकुड़ रहा, तो डॉक्टर समय रहते इलाज का तरीका बदल सकते हैं. इससे मरीज का कीमती समय और पैसा दोनों बचते हैं और उसे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. इसके अलावा हार्ट डिजीज के मामले में कार्डियक MRI एक गेम-चेंजर है. यह न केवल दिल की बनावट दिखाता है, बल्कि यह भी मापता है कि दिल की मांसपेशियां कितनी सक्रिय हैं और ब्लड फ्लो कैसा है. हार्ट अटैक के बाद दिल का कितना हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और क्या उसे दोबारा ठीक किया जा सकता है. इसका सटीक फैसला अब कार्डियक MRI की मदद से लिया जा रहा है, जो एंजियोग्राफी से भी ज्यादा डिटेल्ड जानकारी देता है.

डॉक्टर के मुताबिक कैंसर के इलाज में रेडिएशन देते समय सबसे बड़ी चुनौती स्वस्थ कोशिकाओं को बचाना होती है. नई MRI-Linac मशीनें रेडिएशन के दौरान लगातार तस्वीरें लेती रहती हैं. चूंकि मरीज के सांस लेने से ट्यूमर की स्थिति थोड़ी बदल सकती है, इसलिए MRI तुरंत रेडिएशन की बीम को एडजस्ट कर देता है. इससे केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला होता है और आस-पास के स्वस्थ अंग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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एमआरआई के जरिए कई तरह की सर्जरी भी की जाती हैं.

Critical Facts About MRI: जब भी लोगों को कोई अंदरूनी समस्या होती है, तब मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI कराने की सलाह दी जाती है. यह एक तरह की स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफ तस्वीर बन जाती है. लंबे समय से इसे केवल एक डायग्नोस्टिक टूल यानी बीमारी का पता लगाने वाली मशीन माना गया है, लेकिन अब MRI का इस्तेमाल कई तरह के ट्रीटमेंट में भी किया जा रहा है. अब MRI सिर्फ यह नहीं बताता कि बीमारी कहाँ है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों के सटीक इलाज का एक हिस्सा बन चुका है. कैंसर से लेकर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर तक MRI डॉक्टर्स के लिए एक गाइड की तरह काम कर रहा है. चलिए डॉक्टर से जानते हैं कि एमआरआई का इस्तेमाल किन-किन ट्रीटमेंट में किया जा रहा है.

दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि पहले सर्जन एक्स-रे या सीटी स्कैन की मदद से ऑपरेशन करते थे, लेकिन अब इंट्रा-ऑपरेटिव MRI का इस्तेमाल हो रहा है. इसका मतलब है कि ऑपरेशन के दौरान ही मरीज का MRI किया जाता है. इससे सर्जन्स को रियल टाइम में पता चलता है कि ट्यूमर का कितना हिस्सा निकल चुका है और कितना बाकी है. इसी तरह MRI-गाइडेड बायोप्सी के जरिए डॉक्टर शरीर के उस सटीक बिंदु से सैंपल लेते हैं, जहां बीमारी मौजूद है. इससे गलत रिपोर्ट की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि अब फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (MRgFUS) में भी एमआरआई का यूज किया जा रहा है. इसमें MRI का उपयोग बिना किसी चीर-फाड़ के ट्यूमर को नष्ट करने के लिए किया जाता है. डॉक्टर MRI के जरिए ट्यूमर की सटीक लोकेशन देखते हैं और फिर हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासाउंड किरणों को उसी बिंदु पर केंद्रित करते हैं. इससे ट्यूमर कोशिकाएं जलकर नष्ट हो जाती हैं. यह तकनीक विशेष रूप से गर्भाशय के फाइब्रॉएड और पार्किंसंस रोग के कारण होने वाले कंपन के इलाज में असरदार साबित हो रही है.

एक्सपर्ट के मुताबिक MRI अब सिर्फ कैंसर का पता नहीं लगाता, बल्कि यह भी बताता है कि दी जा रही कीमोथेरेपी कितनी प्रभावी है. फंक्शनल MRI के जरिए डॉक्टर देख सकते हैं कि दवा शरीर के भीतर ट्यूमर पर कैसा असर कर रही है. अगर ट्यूमर नहीं सिकुड़ रहा, तो डॉक्टर समय रहते इलाज का तरीका बदल सकते हैं. इससे मरीज का कीमती समय और पैसा दोनों बचते हैं और उसे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. इसके अलावा हार्ट डिजीज के मामले में कार्डियक MRI एक गेम-चेंजर है. यह न केवल दिल की बनावट दिखाता है, बल्कि यह भी मापता है कि दिल की मांसपेशियां कितनी सक्रिय हैं और ब्लड फ्लो कैसा है. हार्ट अटैक के बाद दिल का कितना हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और क्या उसे दोबारा ठीक किया जा सकता है. इसका सटीक फैसला अब कार्डियक MRI की मदद से लिया जा रहा है, जो एंजियोग्राफी से भी ज्यादा डिटेल्ड जानकारी देता है.

डॉक्टर के मुताबिक कैंसर के इलाज में रेडिएशन देते समय सबसे बड़ी चुनौती स्वस्थ कोशिकाओं को बचाना होती है. नई MRI-Linac मशीनें रेडिएशन के दौरान लगातार तस्वीरें लेती रहती हैं. चूंकि मरीज के सांस लेने से ट्यूमर की स्थिति थोड़ी बदल सकती है, इसलिए MRI तुरंत रेडिएशन की बीम को एडजस्ट कर देता है. इससे केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला होता है और आस-पास के स्वस्थ अंग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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