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surat migrant workers return home dut to gas shortage inflation

surat migrant workers return home dut to gas shortage inflation

सूरत8 मिनट पहले

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सूरत रेलवे स्टेशन पर मौजूद प्रवासी मजदूरों की भीड़।

देश में एलपीजी गैस कि कमी से चलते गुजरात से अब प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। सूरत के रेलवे स्टेशनों पर बिहार और यूपी लौटने वाले लोगों की लाइनें लगी हैं।

दरअसल, रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। इनके अलावा यूपी-बिहार के हजारों स्टूडेंट्‌स भी अपने घर लौट रहे हैं।

दैनिक भास्कर ने ऐसे ही कुछ प्रवासियों से बात की। लोगों ने बताया कि छोटे सिलेंडर के लिए पहले गैस ₹100 किलो मिलती थी, लेकिन अब ₹300-₹400 किलो मिल रही है।

वहीं, घरेलू सिलेंडर के रेट ₹5 हजार पहुंच गए हैं। फ्लैट में चूल्हा जलाने पर मनाही है। ऐसे में हम लोगों के सामने भूखा मरने की नौबत आ गई है।

रेलवे स्टेशन पर भीड़ की 5 तस्वीरें…

सूरत के उधना रेलवे स्टेशन के बाहर लगी यात्रियों की लंबी लाइन।

सूरत के उधना रेलवे स्टेशन के बाहर लगी यात्रियों की लंबी लाइन।

सूरत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगी लाइनें।

सूरत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लगी लाइनें।

ट्रेनों में भीड़ को कंट्रोल करने के लिए रेलवे ने भी तैयारी शुरू कर दी हैं।

ट्रेनों में भीड़ को कंट्रोल करने के लिए रेलवे ने भी तैयारी शुरू कर दी हैं।

सूरत रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए प्रवासी मजदूरों की भीड़।

सूरत रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए प्रवासी मजदूरों की भीड़।

प्लेटफार्म में भीड़ के चलते सैकड़ों लोग स्टेशन के बाहर भी जमा हैं।

प्लेटफार्म में भीड़ के चलते सैकड़ों लोग स्टेशन के बाहर भी जमा हैं।

ज्यादातर लोगों के पास गैस कनेक्शन नहीं

टेक्सटाइल और डायमंड हब होने के चलते सूरत शहर में यूपी-बिहार में लाखों की संख्या में श्रमिक रहते हैं। ये लोग रोज कमाकर खाने वाले हैं और छोटे किराये के कमरों में रहते हैं।

इनमें से ज्यादातर लोगों के पास आधिकारिक गैस कनेक्शन नहीं होता है। इनके परिवार छोटे गैस सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। लेकिन, अब गैस की कमी के चलते इनके चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। और लोग अपने गांव वापस लौट रहे हैं।

बिहार के मजदूर बोले- पड़ोसी मदद करते, लेकिन कबतक

दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में बिहार के एक प्रवासी मजदूर ने कहा- जब से गैस की कमी शुरू हुई है, हमें खाने-पीने में दिक्कत हो रही है। गैस खत्म होने पर हमारे आस-पास के लोग हमारी हालत देखकर कभी-कभी हमें खाना दे देते हैं, लेकिन हम कब तक दूसरों पर निर्भर रह सकते हैं? वे एक-दो बार ही मदद कर सकते हैं, इससे ज्यादा नहीं।

इसलिए हम गांव जा रहे हैं और वहां जाकर काम ढूंढेंगे। कंपनी के मालिकों का कहना है कि वे भी गैस का इंतजाम नहीं करवा पा रहे हैं। इसलिए हमने कंपनी को भी बता दिया है कि हम गांव जा रहे हैं। हमारे पास राशन तो है, लेकिन खाना पकाने के लिए गैस नहीं।

बिहार जा रहीं महिला बोलीं- काम ठप्प होने लगा है

बिहार लौट रहीं नूतनबेन ने कहा- गैस की समस्या के कारण मैं अपने बच्चों के साथ भागलपुर जा रही हूं। गैस की कमी से यहां कामकाज भी ठप होने लगा है। पिछले तीन-चार दिनों से बहुत परेशानी हो रही है। गैस नहीं होने पर बच्चों के लिए किस तरह खाने का इंतजाम कर रही थी, यह सिर्फ मैं ही जानती हूं।

दो-तीन बार तो पड़ोसियों के घर जाकर थोड़ा बहुत खाना पकाया, लेकिन ऐसे रोज तो नहीं कर सकते। पड़ोसियों के घर भी गैस खत्म होने लगी है। जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तब हम लौट आएंगे।

—————

गैस संकट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

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दरअसल, रसोई गैस की कमी के चलते राज्य में रेस्टोरेंट-ढाबा और दूसरे खाने-पीने के स्टॉल चलाने वालों का रोजगार ठप होने लगा है। इनके अलावा यूपी-बिहार के हजारों स्टूडेंट्‌स भी अपने घर लौट रहे हैं।

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इनमें से ज्यादातर लोगों के पास आधिकारिक गैस कनेक्शन नहीं होता है। इनके परिवार छोटे गैस सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। लेकिन, अब गैस की कमी के चलते इनके चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। और लोग अपने गांव वापस लौट रहे हैं।

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इसलिए हम गांव जा रहे हैं और वहां जाकर काम ढूंढेंगे। कंपनी के मालिकों का कहना है कि वे भी गैस का इंतजाम नहीं करवा पा रहे हैं। इसलिए हमने कंपनी को भी बता दिया है कि हम गांव जा रहे हैं। हमारे पास राशन तो है, लेकिन खाना पकाने के लिए गैस नहीं।

बिहार जा रहीं महिला बोलीं- काम ठप्प होने लगा है

बिहार लौट रहीं नूतनबेन ने कहा- गैस की समस्या के कारण मैं अपने बच्चों के साथ भागलपुर जा रही हूं। गैस की कमी से यहां कामकाज भी ठप होने लगा है। पिछले तीन-चार दिनों से बहुत परेशानी हो रही है। गैस नहीं होने पर बच्चों के लिए किस तरह खाने का इंतजाम कर रही थी, यह सिर्फ मैं ही जानती हूं।

दो-तीन बार तो पड़ोसियों के घर जाकर थोड़ा बहुत खाना पकाया, लेकिन ऐसे रोज तो नहीं कर सकते। पड़ोसियों के घर भी गैस खत्म होने लगी है। जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तब हम लौट आएंगे।

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