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Not every popular brand makes investors rich; learn the story of Hasbro and Games Workshop.

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लंदन17 मिनट पहले

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लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया।- प्रतीकात्मक फोटो

अगर ‘नर्ड इकोनॉमी’ (दिमागी और शौकिया खेलों का बाजार) के लिए कोई सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, तो वह यकीनन लॉकडाउन का दौर था। उस वक्त घरों में बंद उपभोक्ताओं के पास पर्याप्त समय और खर्च करने के लिए पैसा थे। लेकिन हर कंपनी लॉकडाउन के बाद मिले इस मौके को भुनाने में कामयाब नहीं रही।

एक ही उभरते बाजार ने एक कंपनी ने निवेशकों का पैसा पांच साल तीन गुना कर दिया, जबकि दूसरी का रिटर्न सिर्फ 2% रहा। गेम्स वर्कशॉप और हैस्ब्रो की कहानी बताती है कि किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहकों की वफादारी और प्रोडक्ट्स की कमी बनाए रखने की क्षमता होती है। दरअसल, लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया। लेकिन सभी इस बूम का फायदा बराबर नहीं उठा पाए।

ब्रिटिश कंपनी ‘गेम्स वर्कशॉप’ और अमेरिकी दिग्गज है हैस्ब्रो, दोनों एक ही बाजार में थे, लेकिन तकदीर और हालात इन्हें बिल्कुल अलग-अलग मुकाम पर ले गई। गेम्स वर्कशॉप साई-फाई (साइंस फिक्शन) और फैंटेसी थीम पर आधारित मिनिएचर फिगर गेम्स बनाती है। यह एक ऐसा शौक है, जो एक बार लग जाए तो छूटता नहीं है। हैस्ब्रो के पास मैजिक: द गैदरिंग (एमटीजी) और डंजन्स एंड ड्रैगन्स (डी एंड डी) जैसे ब्रांड हैं, जिनके दीवाने दुनियाभर में करोड़ों में हैं। इस दशक में गेम्स वर्कशॉप के निवेशकों ने डिविडेंड समेत अपना पैसा तीन गुना किया और कंपनी लंदन के एफटीएसई 100 ब्लू-चिप इंडेक्स में शामिल हो गई। दूसरी तरफ हैस्ब्रो में 2020 की शुरुआत में लगाया 1 डॉलर आज भी सिर्फ 1.02 डॉलर ही है। यानी पांच साल में लगभग शून्य रिटर्न।

हैस्ब्रो की सबसे बड़ी गलती थी स्कारसिटी यानी संसाधनों की कमी की इकोनॉमी को न समझना। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों ने 2022 में कहा था कि कंपनी बहुत ज्यादा एमटीजी कार्ड छाप रही है। इससे सेकंडरी मार्केट बर्बाद हो रहा है और खिलाड़ियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इस कार्ड-प्रिंटिंग रणनीति पर कुछ शेयरधारकों ने इस साल कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी किया है। हैस्ब्रो की एक और समस्या यह है कि वह अब भी बच्चों के खिलौनों के कारोबार से बंधी है। नर्फ गन, स्क्रैबल और माई लिट्ल पोनी इसमें शामिल है। यह बाजार मुश्किल दौर में है। इस डिवीजन की बिक्री पिछले 15 में से 14 तिमाहियों में घटी है। हालांकि ‘विजार्ड्स ऑफ द कोस्ट’ डिवीजन, जो एमटीजी डी एंड डी बनाती है, का पहली तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन 51% रहा और एमटीजी की आमदनी सालाना एक-तिहाई से ज्यादा बढ़ी। लेकिन नर्ड इकॉनमी में सफलता का रास्ता नाजुक है। यहां के ग्राहक वफादार हैं, मगर बगावत पर उतर आएं तो बॉयकॉट से भी नहीं चूकते। एआई से दूर, ट्रेंड की परवाह नहीं, फिर भी शानदार रिटर्न

गेम्स वर्कशॉप के सीईओ केविन राउंट्री ने जनवरी में निवेशकों को बताया था कि उनकी टीम का कोई भी अधिकारी अभी एआई को लेकर उत्साहित नहीं है। इस हफ्ते कंपनी को सफाई देनी पड़ी कि उनके वॉरहैमर स्पेस मरीन की फिगर में दिखी छठी उंगली एआई जनरेटेड नहीं थी। इसके बावजूद या शायद इसीलिए गेम्स वर्कशॉप का शेयर 32 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड करता है। दूसरी तरफ हैस्ब्रो सिर्फ 15 गुना पर है। नर्ड्स भीड़ के पीछे नहीं चलते। अभी तक यही रणनीति काम आ रही है।

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लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया।- प्रतीकात्मक फोटो

अगर ‘नर्ड इकोनॉमी’ (दिमागी और शौकिया खेलों का बाजार) के लिए कोई सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, तो वह यकीनन लॉकडाउन का दौर था। उस वक्त घरों में बंद उपभोक्ताओं के पास पर्याप्त समय और खर्च करने के लिए पैसा थे। लेकिन हर कंपनी लॉकडाउन के बाद मिले इस मौके को भुनाने में कामयाब नहीं रही।

एक ही उभरते बाजार ने एक कंपनी ने निवेशकों का पैसा पांच साल तीन गुना कर दिया, जबकि दूसरी का रिटर्न सिर्फ 2% रहा। गेम्स वर्कशॉप और हैस्ब्रो की कहानी बताती है कि किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहकों की वफादारी और प्रोडक्ट्स की कमी बनाए रखने की क्षमता होती है। दरअसल, लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया। लेकिन सभी इस बूम का फायदा बराबर नहीं उठा पाए।

ब्रिटिश कंपनी ‘गेम्स वर्कशॉप’ और अमेरिकी दिग्गज है हैस्ब्रो, दोनों एक ही बाजार में थे, लेकिन तकदीर और हालात इन्हें बिल्कुल अलग-अलग मुकाम पर ले गई। गेम्स वर्कशॉप साई-फाई (साइंस फिक्शन) और फैंटेसी थीम पर आधारित मिनिएचर फिगर गेम्स बनाती है। यह एक ऐसा शौक है, जो एक बार लग जाए तो छूटता नहीं है। हैस्ब्रो के पास मैजिक: द गैदरिंग (एमटीजी) और डंजन्स एंड ड्रैगन्स (डी एंड डी) जैसे ब्रांड हैं, जिनके दीवाने दुनियाभर में करोड़ों में हैं। इस दशक में गेम्स वर्कशॉप के निवेशकों ने डिविडेंड समेत अपना पैसा तीन गुना किया और कंपनी लंदन के एफटीएसई 100 ब्लू-चिप इंडेक्स में शामिल हो गई। दूसरी तरफ हैस्ब्रो में 2020 की शुरुआत में लगाया 1 डॉलर आज भी सिर्फ 1.02 डॉलर ही है। यानी पांच साल में लगभग शून्य रिटर्न।

हैस्ब्रो की सबसे बड़ी गलती थी स्कारसिटी यानी संसाधनों की कमी की इकोनॉमी को न समझना। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों ने 2022 में कहा था कि कंपनी बहुत ज्यादा एमटीजी कार्ड छाप रही है। इससे सेकंडरी मार्केट बर्बाद हो रहा है और खिलाड़ियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इस कार्ड-प्रिंटिंग रणनीति पर कुछ शेयरधारकों ने इस साल कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी किया है। हैस्ब्रो की एक और समस्या यह है कि वह अब भी बच्चों के खिलौनों के कारोबार से बंधी है। नर्फ गन, स्क्रैबल और माई लिट्ल पोनी इसमें शामिल है। यह बाजार मुश्किल दौर में है। इस डिवीजन की बिक्री पिछले 15 में से 14 तिमाहियों में घटी है। हालांकि ‘विजार्ड्स ऑफ द कोस्ट’ डिवीजन, जो एमटीजी डी एंड डी बनाती है, का पहली तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन 51% रहा और एमटीजी की आमदनी सालाना एक-तिहाई से ज्यादा बढ़ी। लेकिन नर्ड इकॉनमी में सफलता का रास्ता नाजुक है। यहां के ग्राहक वफादार हैं, मगर बगावत पर उतर आएं तो बॉयकॉट से भी नहीं चूकते। एआई से दूर, ट्रेंड की परवाह नहीं, फिर भी शानदार रिटर्न

गेम्स वर्कशॉप के सीईओ केविन राउंट्री ने जनवरी में निवेशकों को बताया था कि उनकी टीम का कोई भी अधिकारी अभी एआई को लेकर उत्साहित नहीं है। इस हफ्ते कंपनी को सफाई देनी पड़ी कि उनके वॉरहैमर स्पेस मरीन की फिगर में दिखी छठी उंगली एआई जनरेटेड नहीं थी। इसके बावजूद या शायद इसीलिए गेम्स वर्कशॉप का शेयर 32 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड करता है। दूसरी तरफ हैस्ब्रो सिर्फ 15 गुना पर है। नर्ड्स भीड़ के पीछे नहीं चलते। अभी तक यही रणनीति काम आ रही है।

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