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दतिया में 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं श्रद्धालु:तारा माता मंदिर में रात में होती है तांत्रिक साधना

दतिया में 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं श्रद्धालु:तारा माता मंदिर में रात में होती है तांत्रिक साधना

चैत्र नवरात्र के अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना हो रही है। लेकिन दतिया में स्थित पंचम कवि की टोरिया इन दिनों खास चर्चा में है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित देवी तारा माता का यह प्राचीन मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है,बल्कि तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है। करीब 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचने वाले इस धाम का वातावरण दिन में भक्ति से सराबोर रहता है, लेकिन रात होते ही यहां का माहौल रहस्यमयी हो जाता है। मान्यता है कि रात्रिकाल में साधक यहां तंत्रोक्त विधि से साधना करते हैं और मां तारा अपने उपासकों को सिद्धि व मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद देती हैं। भैरव साधना से तारा साधना तक का सफर
इतिहास के अनुसार, पंचम कवि की टोरिया पहले भैरव साधना के लिए प्रसिद्ध स्थल था। बाद में संवत 1997 में पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज ने यहां देवी तारा माता की स्थापना कर इसे तारा साधना का प्रमुख केंद्र बना दिया। तभी से यह स्थान साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं मां तारा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी तारा दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं, जिन्हें नील सरस्वती भी कहा जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि वशिष्ठ ने भी तारा साधना कर अद्वितीय ज्ञान और शक्ति प्राप्त की थी। दतिया में भी वर्षों से साधक विशेष रूप से मंगलवार और रात्रि के समय साधना करते आ रहे हैं। आस्था के साथ रहस्य का संगम
मंदिर परिसर में शिवालय, काली मंदिर, हनुमान और गणेश जी के प्राचीन विग्रह भी मौजूद हैं। दिन में यहां भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन रात में एकांत साधना के चलते यह स्थान रहस्यमय बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धाम जागृत है और सच्चे मन से साधना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। चैत्र नवरात्र के चलते इन दिनों तारा माता धाम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आस्था,रहस्य और तंत्र साधना के अनूठे संगम के कारण दतिया का यह धाम प्रदेश ही नहीं,बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

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चैत्र नवरात्र के अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना हो रही है। लेकिन दतिया में स्थित पंचम कवि की टोरिया इन दिनों खास चर्चा में है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित देवी तारा माता का यह प्राचीन मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है,बल्कि तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध माना जाता है। करीब 200 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचने वाले इस धाम का वातावरण दिन में भक्ति से सराबोर रहता है, लेकिन रात होते ही यहां का माहौल रहस्यमयी हो जाता है। मान्यता है कि रात्रिकाल में साधक यहां तंत्रोक्त विधि से साधना करते हैं और मां तारा अपने उपासकों को सिद्धि व मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद देती हैं। भैरव साधना से तारा साधना तक का सफर
इतिहास के अनुसार, पंचम कवि की टोरिया पहले भैरव साधना के लिए प्रसिद्ध स्थल था। बाद में संवत 1997 में पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज ने यहां देवी तारा माता की स्थापना कर इसे तारा साधना का प्रमुख केंद्र बना दिया। तभी से यह स्थान साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं मां तारा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी तारा दस महाविद्याओं में दूसरी महाविद्या हैं, जिन्हें नील सरस्वती भी कहा जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि वशिष्ठ ने भी तारा साधना कर अद्वितीय ज्ञान और शक्ति प्राप्त की थी। दतिया में भी वर्षों से साधक विशेष रूप से मंगलवार और रात्रि के समय साधना करते आ रहे हैं। आस्था के साथ रहस्य का संगम
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