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Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

तेल अवीव6 मिनट पहले

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इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है।

लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की

ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ईरान की मिसाइल हमलों में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।

डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ।

डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ।

इजराइल ने माना- ईरानी मिसाइलें रोकने में नाकाम रहे

डिमोना में स्थित शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु रिसर्च सेंटर को आम तौर पर ‘डिमोना रिएक्टर’ कहा जाता है। माना जाता है कि यहां इजराइल के परमाणु हथियार मौजूद हैं, हालांकि इजराइल ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया।

यह देश के सबसे सुरक्षित इलाके माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इजराइली सेना ने खुद माना कि उसने इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। ऐसे में यहां हुए हमले से आसपास रहने वाले लोगों में डर फैल गया है।

इजराइल बोला- अब तक 400 ईरानी मिसाइलें रोकीं

इजराइल का दावा है कि वह ज्यादातर मिसाइलों को रोक लेता है। इजराइली वायुसेना के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद से अब तक ईरान 400 मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें से 92 प्रतिशत को हवा में ही रोक लिया गया।

हालांकि शनिवार रात की यह घटना दिखाती है कि कोई भी सुरक्षा सिस्टम 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता। अब जांच की जा रही है कि आखिर ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे पार कर गईं।

इजराइल के पास कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आयरन डोम छोटे रॉकेट रोकने के लिए है। डेविड्स स्लिंग मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिए इस्तेमाल होता है। सबसे एडवांस सिस्टम एरो-3 है, जो अंतरिक्ष के पास ही मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा अमेरिका का THAAD सिस्टम भी वहां तैनात है।

इसके बावजूद ये मिसाइलें अंदर तक पहुंच गईं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ऑपरेशन की नाकामी हो सकती है, यानी सिस्टम सही था लेकिन उसे इस्तेमाल करने में चूक हुई।

इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक खत्म होने की आशंका

एक और बड़ी चिंता यह भी सामने आ रही है कि कहीं इजराइल अपने सबसे महंगे और ताकतवर इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल बचाकर तो नहीं कर रहा। पिछले साल ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई में काफी मिसाइलें खर्च हो चुकी थीं, इसलिए स्टॉक कम होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि इजराइली सेना ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त मिसाइलें हैं और वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। फिर भी अगर युद्ध लंबा चलता है, तो दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डिमोन पर हुए हमले की घटना को ‘चमत्कार’ बताया, क्योंकि इतने बड़े हमले के बावजूद कोई मौत नहीं हुई। उन्होंने लोगों से कहा कि अलर्ट मिलते ही तुरंत बंकर में जाएं और लापरवाही न करें।

इन हमलों में करीब 175 लोग घायल हुए, जिनमें से कम से कम 10 की हालत गंभीर है। कई लोग इसलिए बच गए क्योंकि वे समय रहते बम शेल्टर में पहुंच गए थे।

कोई भी डिफेंस सिस्मट फुल प्रूफ नहीं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल काम होता है। एरो-3 जैसे सिस्टम को सीधे मिसाइल से टकराना पड़ता है, जो ऐसा है जैसे दो गोलियां हवा में टकराएं। अगर मिसाइल रास्ता बदल दे या हवा में हल्का सा बदलाव हो जाए, तो उसे रोकना और मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा कुछ मिसाइलें हवा में ऊपर जाकर कई छोटे हिस्सों में टूट जाती हैं, जिन्हें पूरी तरह रोकना और भी कठिन होता है। इनके टुकड़े भी जमीन पर गिरकर नुकसान पहुंचाते हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि चाहे सिस्टम कितना भी मजबूत क्यों न हो, युद्ध की स्थिति में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। साथ ही यह भी साफ हो रहा है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इजराइल के लिए अपने संसाधनों को संभालकर इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती बन सकता है। ————————————-

दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया

ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया।

अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है।

लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की

ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ईरान की मिसाइल हमलों में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।

डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ।

डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ।

इजराइल ने माना- ईरानी मिसाइलें रोकने में नाकाम रहे

डिमोना में स्थित शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु रिसर्च सेंटर को आम तौर पर ‘डिमोना रिएक्टर’ कहा जाता है। माना जाता है कि यहां इजराइल के परमाणु हथियार मौजूद हैं, हालांकि इजराइल ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया।

यह देश के सबसे सुरक्षित इलाके माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इजराइली सेना ने खुद माना कि उसने इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। ऐसे में यहां हुए हमले से आसपास रहने वाले लोगों में डर फैल गया है।

इजराइल बोला- अब तक 400 ईरानी मिसाइलें रोकीं

इजराइल का दावा है कि वह ज्यादातर मिसाइलों को रोक लेता है। इजराइली वायुसेना के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद से अब तक ईरान 400 मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें से 92 प्रतिशत को हवा में ही रोक लिया गया।

हालांकि शनिवार रात की यह घटना दिखाती है कि कोई भी सुरक्षा सिस्टम 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता। अब जांच की जा रही है कि आखिर ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे पार कर गईं।

इजराइल के पास कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आयरन डोम छोटे रॉकेट रोकने के लिए है। डेविड्स स्लिंग मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिए इस्तेमाल होता है। सबसे एडवांस सिस्टम एरो-3 है, जो अंतरिक्ष के पास ही मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा अमेरिका का THAAD सिस्टम भी वहां तैनात है।

इसके बावजूद ये मिसाइलें अंदर तक पहुंच गईं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ऑपरेशन की नाकामी हो सकती है, यानी सिस्टम सही था लेकिन उसे इस्तेमाल करने में चूक हुई।

इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक खत्म होने की आशंका

एक और बड़ी चिंता यह भी सामने आ रही है कि कहीं इजराइल अपने सबसे महंगे और ताकतवर इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल बचाकर तो नहीं कर रहा। पिछले साल ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई में काफी मिसाइलें खर्च हो चुकी थीं, इसलिए स्टॉक कम होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि इजराइली सेना ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त मिसाइलें हैं और वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। फिर भी अगर युद्ध लंबा चलता है, तो दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डिमोन पर हुए हमले की घटना को ‘चमत्कार’ बताया, क्योंकि इतने बड़े हमले के बावजूद कोई मौत नहीं हुई। उन्होंने लोगों से कहा कि अलर्ट मिलते ही तुरंत बंकर में जाएं और लापरवाही न करें।

इन हमलों में करीब 175 लोग घायल हुए, जिनमें से कम से कम 10 की हालत गंभीर है। कई लोग इसलिए बच गए क्योंकि वे समय रहते बम शेल्टर में पहुंच गए थे।

कोई भी डिफेंस सिस्मट फुल प्रूफ नहीं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल काम होता है। एरो-3 जैसे सिस्टम को सीधे मिसाइल से टकराना पड़ता है, जो ऐसा है जैसे दो गोलियां हवा में टकराएं। अगर मिसाइल रास्ता बदल दे या हवा में हल्का सा बदलाव हो जाए, तो उसे रोकना और मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा कुछ मिसाइलें हवा में ऊपर जाकर कई छोटे हिस्सों में टूट जाती हैं, जिन्हें पूरी तरह रोकना और भी कठिन होता है। इनके टुकड़े भी जमीन पर गिरकर नुकसान पहुंचाते हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि चाहे सिस्टम कितना भी मजबूत क्यों न हो, युद्ध की स्थिति में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। साथ ही यह भी साफ हो रहा है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इजराइल के लिए अपने संसाधनों को संभालकर इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती बन सकता है। ————————————-

दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया

ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया।

अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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