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E-Raktkosh Registration Mandatory for Blood Banks

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नई दिल्ली1 घंटे पहलेलेखक: एम. रियाज हाशमी

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सरकार ने कहा है कि राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

देशभर के ब्लड बैंकों पर अब सरकार की ‘डिजिटल’ नजर रहेगी। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर्स के लिए ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद देशभर में खून की उपलब्धता का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम तैयार करना और कालाबाजारी रोकना है।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ‘ई-रक्तकोष’ को सीधे निरीक्षण (इंस्पेक्शन) प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है। यानी जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर पोर्टल पर दर्ज डेटा और वास्तविक स्टॉक का मिलान करेंगे। डेटा में हेराफेरी मिलने पर पहली बार सख्त कार्रवाई होगी।

राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। डोनर्स का रिकॉर्ड भी अब ‘आभा आईडी’ या आधार से जोड़ा जा सकेगा, जिससे पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी होगी।

तब सिर्फ सलाह थी, नियम नहीं…

2022 में निर्देश ‘एडवाइजरी’ थे, जिसे मानना जरूरी नहीं था। दंड का प्रावधान न होने से मनमानी बढ़ी।

पोर्टल के डेटा को नियमित जांच (इंस्पेक्शन) का हिस्सा नहीं बनाया, जवाबदेही तय नहीं हुई।

राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी निष्क्रिय रहीं और छोटे केंद्रों के पास डिजिटल ट्रेनिंग का अभाव था।

इस बार नियम बदला, कार्रवाई का डर…

पोर्टल से जुड़ना विकल्प नहीं, अब अनिवार्य हो गया। अनुपालन न होने पर लाइसेंस पर गाज गिरेगी।

ब्लड स्टॉक पर देशभर में एक क्लिक पर नजर संभव होगी। मेडिकल इमरजेंसी में मरीज भटकेंगे नहीं।

जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

………………..

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पूरी दुनिया में एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। 6 महीने से 5 साल के लगभग 40% बच्चे, 37% गर्भवती महिलाएं और 15 से 49 वर्ष की 30% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 200 करोड़ लोग एनीमिया से प्रभावित हैं। इसका मतलब है दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी एनीमिया से जूझ रही है। यह आंकड़ा डायबिटीज के रोगियों से भी कहीं ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…

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सरकार ने कहा है कि राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

देशभर के ब्लड बैंकों पर अब सरकार की ‘डिजिटल’ नजर रहेगी। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर्स के लिए ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद देशभर में खून की उपलब्धता का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम तैयार करना और कालाबाजारी रोकना है।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ‘ई-रक्तकोष’ को सीधे निरीक्षण (इंस्पेक्शन) प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है। यानी जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर पोर्टल पर दर्ज डेटा और वास्तविक स्टॉक का मिलान करेंगे। डेटा में हेराफेरी मिलने पर पहली बार सख्त कार्रवाई होगी।

राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। डोनर्स का रिकॉर्ड भी अब ‘आभा आईडी’ या आधार से जोड़ा जा सकेगा, जिससे पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी होगी।

तब सिर्फ सलाह थी, नियम नहीं…

2022 में निर्देश ‘एडवाइजरी’ थे, जिसे मानना जरूरी नहीं था। दंड का प्रावधान न होने से मनमानी बढ़ी।

पोर्टल के डेटा को नियमित जांच (इंस्पेक्शन) का हिस्सा नहीं बनाया, जवाबदेही तय नहीं हुई।

राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी निष्क्रिय रहीं और छोटे केंद्रों के पास डिजिटल ट्रेनिंग का अभाव था।

इस बार नियम बदला, कार्रवाई का डर…

पोर्टल से जुड़ना विकल्प नहीं, अब अनिवार्य हो गया। अनुपालन न होने पर लाइसेंस पर गाज गिरेगी।

ब्लड स्टॉक पर देशभर में एक क्लिक पर नजर संभव होगी। मेडिकल इमरजेंसी में मरीज भटकेंगे नहीं।

जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।

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