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Indian Army BrahMos Missile Upgrade

Indian Army BrahMos Missile Upgrade

नई दिल्ली44 मिनट पहले

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भारतीय सेना 800 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। फिलहाल सेना के पास 450 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रक्षा अधिकारियों ने बताया कि सेना इस नए वर्जन का बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव को लेकर रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में जल्द मंजूरी मिल सकती है।

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान एयरफोर्स के कई ठिकानों को निशाना बनाया था।

मिसाइल फोर्स और ड्रोन पर बढ़ रहा फोकस

रक्षा बल एक समर्पित मिसाइल फोर्स बनाने और मिसाइलों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सेना अपने वर्कशॉप में ड्रोन का बड़े पैमाने पर निर्माण भी कर रही है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की अहमियत को और बढ़ा दिया है।

नई पीढ़ी के युद्ध को देखते हुए सेना बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल शामिल कर रही है। इसके तहत आर्टिलरी और इन्फैंट्री यूनिट्स में विशेष ड्रोन रेजिमेंट और प्लाटून बनाए जा रहे हैं।

भारत-रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसका अधिकांश हिस्सा अब स्वदेशी हो चुका है। यह मिसाइल तीनों सेनाओं के पास है और इसे हवा, समुद्र और जमीन से हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज NPOM के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।

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ये खबर भी पढ़ें…

भारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत:भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूला

सेना का फोकस अब केवल महंगी मिसाइलों पर नहीं, बल्कि इनके ‘मिनी मॉडल्स’ के बड़े भंडार पर है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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भारतीय सेना 800 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। फिलहाल सेना के पास 450 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रक्षा अधिकारियों ने बताया कि सेना इस नए वर्जन का बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव को लेकर रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में जल्द मंजूरी मिल सकती है।

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान एयरफोर्स के कई ठिकानों को निशाना बनाया था।

मिसाइल फोर्स और ड्रोन पर बढ़ रहा फोकस

रक्षा बल एक समर्पित मिसाइल फोर्स बनाने और मिसाइलों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सेना अपने वर्कशॉप में ड्रोन का बड़े पैमाने पर निर्माण भी कर रही है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की अहमियत को और बढ़ा दिया है।

नई पीढ़ी के युद्ध को देखते हुए सेना बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल शामिल कर रही है। इसके तहत आर्टिलरी और इन्फैंट्री यूनिट्स में विशेष ड्रोन रेजिमेंट और प्लाटून बनाए जा रहे हैं।

भारत-रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसका अधिकांश हिस्सा अब स्वदेशी हो चुका है। यह मिसाइल तीनों सेनाओं के पास है और इसे हवा, समुद्र और जमीन से हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज NPOM के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।

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