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रोज़ एक ही खाना खाने से कम होता है वजन! शोध में हुआ खुलासा, मिल गया वेट लूज़ करने का सबसे सिंपल तरीका

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Benefits of eating same food daily : आजकल वजन घटाने के लिए लोग नए-नए डाइट प्लान और फैंसी वर्कआउट आजमाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सबसे आसान तरीका आपकी थाली में ही छिपा है? हाल ही में हुए एक दिलचस्प शोध ने सभी को चौंका दिया है. ‘हेल्थ साइकोलॉजी’ (Health Psychology) जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, जो लोग रोजाना एक ही तरह का भोजन (Repeat Meals) करते हैं और अपनी कैलोरी की मात्रा को स्थिर रखते हैं, वे दूसरों की तुलना में तेजी से वजन कम कर पाते हैं.

Weight loss tips in Hindi : आजकल वजन घटाने के लिए लोग नए-नए डाइट प्लान और फैंसी वर्कआउट आजमाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सबसे आसान तरीका आपकी थाली में ही छिपा है? हाल ही में हुए एक दिलचस्प शोध ने सभी को चौंका दिया है. ‘हेल्थ साइकोलॉजी’ (Health Psychology) जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, जो लोग रोजाना एक ही तरह का भोजन (Repeat Meals) करते हैं और अपनी कैलोरी की मात्रा को स्थिर रखते हैं, वे दूसरों की तुलना में तेजी से वजन कम कर पाते हैं.

इस शोध के दौरान विशेषज्ञों ने 112 वयस्कों के खाने की आदतों का गहराई से विश्लेषण किया. ये सभी प्रतिभागी 12 हफ्तों के एक विशेष वेट लॉस प्रोग्राम का हिस्सा थे. परिणामों में देखा गया कि जिन लोगों ने अपने भोजन में बहुत अधिक बदलाव करने के बजाय एक ही रूटीन को फॉलो किया, उन्होंने उन लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा वजन घटाया जो हर दिन अलग-अलग तरह के पकवान खाते थे.

अध्ययन में वजन घटाने की इस सफलता को दो पैमानों पर मापा गया—पहला ‘कैलोरी स्थिरता’ (Caloric Stability) और दूसरा ‘भोजन की पुनरावृत्ति’ (Dietary Repetition). शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अपने भोजन को बार-बार दोहराते थे, उनके शरीर के वजन में औसतन 5.9% की कमी आई. वहीं, जो लोग अपनी डाइट में बहुत अधिक वैरायटी रखते थे, वे केवल 4.3% वजन ही कम कर सके. यह अंतर बताता है कि सादगी ही सफलता की कुंजी है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि जब हम रोज एक ही जैसा खाना खाते हैं, तो हमारे दिमाग को ‘फूड चॉइस’ यानी क्या खाएं, इसका फैसला लेने में कम मेहनत करनी पड़ती है. क्लीवलैंड क्लिनिक की डायटीशियन क्रिस्टिन किर्कपैट्रिक का कहना है कि खाने में निरंतरता और पूर्वानुमान (Predictability) होने से लोग बेहतर चुनाव कर पाते हैं. इससे अनहेल्दी जंक फूड या ओवरईटिंग की गुंजाइश काफी कम हो जाती है.

स्टडी में एक और अहम बात सामने आई कैलोरी का उतार-चढ़ाव. शोध के अनुसार, रोजाना की कैलोरी में हर 100 कैलोरी का बदलाव वजन घटने की रफ्तार को 0.6% तक कम कर देता है. इसका मतलब है कि अगर आप हफ्ते के दिनों में कम खाते हैं और वीकेंड पर ज्यादा, तो आपकी मेहनत पर पानी फिर सकता है. वजन कम करने के लिए शरीर को एक स्थिर और तय कैलोरी बजट की आदत डालना बहुत जरूरी है.

फैमिली मेडिसिन फिजिशियन डॉ. डेविड कटलर कहते हैं कि ज्यादातर लोग वैसे भी हफ्ते भर में घूम-फिरकर वही 20 से 30 खाद्य पदार्थ ही खाते हैं. ऐसे में सफल वेट लॉस करने वाले लोग बस उन विकल्पों को थोड़ा और सीमित और हेल्दी कर देते हैं. जब आप जानते हैं कि आपके खाने में कितनी कैलोरी है, तो उसे मैनेज करना बहुत आसान हो जाता है. यह ‘सिंपल फूड चॉइस’ आपको कठिन माहौल में भी अपने लक्ष्य पर टिकाए रखती है.

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने एक सावधानी भी साझा की है. किर्कपैट्रिक के अनुसार, यह फॉर्मूला तभी काम करता है जब आपके ‘फिक्स मील’ पोषक तत्वों से भरपूर हों. अगर आप रोज एक ही चीज खा रहे हैं और उसमें जरूरी विटामिन्स या प्रोटीन की कमी है, तो शरीर में पोषण का अभाव हो सकता है. इसलिए, अपना ‘गो-टू मील’ चुनते समय फाइबर और प्रोटीन का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि कमजोरी महसूस न हो.

यह शोध साबित करता है कि वजन घटाने के सफर में ‘वैरायटी’ से ज्यादा ‘कंसिस्टेंसी’ यानी निरंतरता मायने रखती है. हालांकि यह अध्ययन पूरी तरह से अनुशासन और रूटीन पर आधारित है, लेकिन यह उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो डाइट प्लान बनाने के झंझट से थक चुके हैं. तो अगर आप भी वजन घटाना चाहते हैं, तो अपनी पसंदीदा हेल्दी डिश चुनें और उसे अपना डेली पार्टनर बना लें!

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Weight loss tips in Hindi : आजकल वजन घटाने के लिए लोग नए-नए डाइट प्लान और फैंसी वर्कआउट आजमाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका सबसे आसान तरीका आपकी थाली में ही छिपा है? हाल ही में हुए एक दिलचस्प शोध ने सभी को चौंका दिया है. ‘हेल्थ साइकोलॉजी’ (Health Psychology) जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, जो लोग रोजाना एक ही तरह का भोजन (Repeat Meals) करते हैं और अपनी कैलोरी की मात्रा को स्थिर रखते हैं, वे दूसरों की तुलना में तेजी से वजन कम कर पाते हैं.

इस शोध के दौरान विशेषज्ञों ने 112 वयस्कों के खाने की आदतों का गहराई से विश्लेषण किया. ये सभी प्रतिभागी 12 हफ्तों के एक विशेष वेट लॉस प्रोग्राम का हिस्सा थे. परिणामों में देखा गया कि जिन लोगों ने अपने भोजन में बहुत अधिक बदलाव करने के बजाय एक ही रूटीन को फॉलो किया, उन्होंने उन लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा वजन घटाया जो हर दिन अलग-अलग तरह के पकवान खाते थे.

अध्ययन में वजन घटाने की इस सफलता को दो पैमानों पर मापा गया—पहला ‘कैलोरी स्थिरता’ (Caloric Stability) और दूसरा ‘भोजन की पुनरावृत्ति’ (Dietary Repetition). शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अपने भोजन को बार-बार दोहराते थे, उनके शरीर के वजन में औसतन 5.9% की कमी आई. वहीं, जो लोग अपनी डाइट में बहुत अधिक वैरायटी रखते थे, वे केवल 4.3% वजन ही कम कर सके. यह अंतर बताता है कि सादगी ही सफलता की कुंजी है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि जब हम रोज एक ही जैसा खाना खाते हैं, तो हमारे दिमाग को ‘फूड चॉइस’ यानी क्या खाएं, इसका फैसला लेने में कम मेहनत करनी पड़ती है. क्लीवलैंड क्लिनिक की डायटीशियन क्रिस्टिन किर्कपैट्रिक का कहना है कि खाने में निरंतरता और पूर्वानुमान (Predictability) होने से लोग बेहतर चुनाव कर पाते हैं. इससे अनहेल्दी जंक फूड या ओवरईटिंग की गुंजाइश काफी कम हो जाती है.

स्टडी में एक और अहम बात सामने आई कैलोरी का उतार-चढ़ाव. शोध के अनुसार, रोजाना की कैलोरी में हर 100 कैलोरी का बदलाव वजन घटने की रफ्तार को 0.6% तक कम कर देता है. इसका मतलब है कि अगर आप हफ्ते के दिनों में कम खाते हैं और वीकेंड पर ज्यादा, तो आपकी मेहनत पर पानी फिर सकता है. वजन कम करने के लिए शरीर को एक स्थिर और तय कैलोरी बजट की आदत डालना बहुत जरूरी है.

फैमिली मेडिसिन फिजिशियन डॉ. डेविड कटलर कहते हैं कि ज्यादातर लोग वैसे भी हफ्ते भर में घूम-फिरकर वही 20 से 30 खाद्य पदार्थ ही खाते हैं. ऐसे में सफल वेट लॉस करने वाले लोग बस उन विकल्पों को थोड़ा और सीमित और हेल्दी कर देते हैं. जब आप जानते हैं कि आपके खाने में कितनी कैलोरी है, तो उसे मैनेज करना बहुत आसान हो जाता है. यह ‘सिंपल फूड चॉइस’ आपको कठिन माहौल में भी अपने लक्ष्य पर टिकाए रखती है.

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने एक सावधानी भी साझा की है. किर्कपैट्रिक के अनुसार, यह फॉर्मूला तभी काम करता है जब आपके ‘फिक्स मील’ पोषक तत्वों से भरपूर हों. अगर आप रोज एक ही चीज खा रहे हैं और उसमें जरूरी विटामिन्स या प्रोटीन की कमी है, तो शरीर में पोषण का अभाव हो सकता है. इसलिए, अपना ‘गो-टू मील’ चुनते समय फाइबर और प्रोटीन का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि कमजोरी महसूस न हो.

यह शोध साबित करता है कि वजन घटाने के सफर में ‘वैरायटी’ से ज्यादा ‘कंसिस्टेंसी’ यानी निरंतरता मायने रखती है. हालांकि यह अध्ययन पूरी तरह से अनुशासन और रूटीन पर आधारित है, लेकिन यह उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो डाइट प्लान बनाने के झंझट से थक चुके हैं. तो अगर आप भी वजन घटाना चाहते हैं, तो अपनी पसंदीदा हेल्दी डिश चुनें और उसे अपना डेली पार्टनर बना लें!

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