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UPSC AIR 137 Mansi Dagars Self-Study Success Story

UPSC AIR 137 Mansi Dagars Self-Study Success Story

49 मिनट पहले

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15 मार्च को जारी UPSC सिविल सर्विस 2025 रिजल्ट्स में हरियाणा की मानसी डागर ने 137वीं रैंक हासिल की। ये रैंक उन्होंने बिना किसी कोचिंग और प्रोफेश्नल गाइडेंस के सिर्फ सेल्फ स्टडी से हासिल की।

मानसी डागर हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद सोनीपत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की।

उनके घर या रिश्तेदारी में कोई भी ऐसा नहीं था जिससे वो गाइडेंस ले सकें। ऐसे में गूगल-यूट्यूब की हेल्प ली और जाना कि क्या और कहां से पढ़ना है। यूट्यूब से ही समझा कि एग्जाम पैटर्न क्या है और इसे कैसे क्रैक करना है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मानसी बता रही हैं अपना UPSC क्रैक करने का फॉर्मूला…

मानसी ने अपने दूसरे अटेम्‍प्‍ट में UPSC क्लियर किया।

मानसी ने अपने दूसरे अटेम्‍प्‍ट में UPSC क्लियर किया।

सोर्स आइडेंटिफाई कर सेल्फ स्टडी से एग्जाम क्लियर किया

मैंने यूट्यूब और टॉपर्स टॉक से कई टॉपर्स की स्ट्रैटेजी समझी। उनकी वीडियोज देखकर समझा कि क्या और कहां से, खासकर कौनसी किताबों से पढ़ना है। फिर वो किताबें चुनीं जो सबमें कॉमन थीं, जैसे पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत या हिस्ट्री के लिए स्पेक्ट्रम। धीरे-धीरे समझ आने लगा कि क्या जरूरी है और क्या नहीं।

कॉन्सेप्ट क्लियर करना ज्यादा जरूरी

आपने कितने घंटे पढ़ाई की, उससे ज्यादा जरूरी है कि आपके कॉन्सेप्ट कितने क्लियर हैं। मैंने 8 घंटे पढ़ाई की और सारी चीजें अच्छे से समझने की कोशिश की। हम सब यूपीएससी की तैयारी के लिए 12, 15 या 18 घंटे सुनने के आदी हैं, लेकिन 8 घंटे समय भी कम नहीं है।

मैंने इतने घंटे में ही सारा सिलेबस कवर किया। रिवीजन और अपने आपको टेस्ट भी किया। फिर एनालाइज भी किया। ऐसे में अगर कॉन्सेप्ट क्लियर रखते हैं तो सब आसानी से हो जाता है।

बड़े शहरों में डिस्ट्रैक्शन ज्यादा, घर पर तैयारी आसान

तैयारी के लिए बड़े शहरों में जाने की बजाय ऑल यू नीड इज कंसिस्टेंसी एंड कॉन्फिडेंस। साथ ही किसी और की बातों में न आएं, खुद से समझें कि आपके लिए क्या जरूरी है।

बड़े शहरों में सुविधाओं के साथ डिस्ट्रैक्शन भी ज्यादा है, इसलिए मैंने घर पर शांत माहौल में आराम से तैयारी की। इसके लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन इतने सारे रिसोर्सेस हैं, कोचिंग के भी फ्री मटेरियल्स अवेलेबल हैं। आपको पेड प्रोग्राम्स में एनरोल करने की भी जरूरत नहीं।

कई-कई बार प्रैक्टिस की

तीनों (प्री, मेन्स और इंटरव्यू) की डिमांड्स अलग हैं। प्रीलिम्स के लिए तो बेसिक सोर्सेज पर ही निर्भर रहें। इसके अलावा जितना ज्यादा हो सके मॉक टेस्ट प्रैक्टिस करें।

मेन्स के लिए आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करें। ज्यादा से ज्यादा PYQs सोल्व करें।

इंटरव्यू के लिए परिवार या दोस्तों के साथ इंटरव्यू की प्रैक्टिस करें।

तीनों चीजें अलग हैं लेकिन सबमें कॉमन है प्रैक्टिस! प्रैक्टिस हर चीज की करनी पड़ेगी, कई-कई बार करनी पड़ेगी, जैसा कि मैंने किया।

कोचिंग के बिना 8 घंटे सेल्फ स्टडी से क्रैक किया UPSC एग्जाम।

कोचिंग के बिना 8 घंटे सेल्फ स्टडी से क्रैक किया UPSC एग्जाम।

इंट्रस्ट और अपनी समझ के हिसाब से ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना

आपको ऑप्शनल सब्जेक्ट्स चुनते हुए ये ध्यान रखना चाहिए कि आप उस सब्जेक्ट में कितने इंट्रस्टेड हैं, उसको कितना पढ़ सकते हैं। ऑप्शनल सब्जेक्ट डीपर अंडरस्टैंडिंग मांगता है, इसे आपको जनरल स्टडीज से ज्यादा समय देना होगा। ऐसे में सब्जेक्ट ऐसा चुनें जिसे मैनेज करना मुश्किल न हो।

मान लीजिए आपने मैथेमैटिक्स लिया है, तो ये बहुत लेंदी है इसलिए ज्यादा समय मांगता है। ऐसे में जीएस के साथ इसे मैनेज करना मुश्किल है। सब आप पर है कि कैसे जीएस, ऑप्शनल और आंसर राइटिंग के बीच में आप टाइम मैनेज करते हैैं।

ऐसे में आप अपने ग्रेजुएशन सब्जेक्ट को चुन सकते हैं, इससे फायदा होगा क्योंकि आप उससे फैमिलियर होंगे। चूंकि मुझे फिजिक्स के कॉन्सेप्ट और टर्मिनोलॉजी क्लियर थे, तो मैंने वही चुुना था।

फोन को टाइमपास नहीं, तरक्की का टूल बनाया

आप इंटरनेट और फोन का यूज भी कर सकते हैं और टाइम पास के लिए मिस यूज भी कर सकते हैं। आपको फोन यूज करते वक्त बहुुत कॉन्शियस रहना होगा। फोन पर समय बर्बाद करने की बजाय पढ़ने के लिए या ऑनलाइन रिसोर्सेस के लिए इसका इस्तेमाल करें।

मैं ज्यादातक अपडेट्स, न्यूजपेपर या बाकी मटेरियल्स की डिजिटल कॉपी पढ़ने के लिए ही फोन यूज करती थी। मैंने पढ़ने और चीजों को समझने के लिए इंटरनेट और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल किया।

असफलताओं पर अटकी नहीं, उससे आगे बढ़ी

मेरा पिछले अटेंप्ट में एक क्वेश्चन से प्रीलिम्स रह गया था। ‘मेरा नहीं हुआ’, मैं इस पर अटकी नहीं। बल्कि मुझे लगा, ये तो थोड़ी और तैयारी में हो जाएगा। मैंने सोचा अगर इसके इतना करीब आ सकती हूं, तो हो जाएगा। वहीं से मैंने खुद को सीधा मेन्स के लिए तैयार करना शुरू किया। मुझे बस 3 महीने में मेन्स की तैयारी करनी थी। अगर आप भी ऐसे पढ़ाई की धुन में रहते हैं, तो निराशा आप पर ज्यादा हावी नहीं होती।

शेड्यूल हेक्टिक की बजाय आसान रखा

मेरी पढ़ाई स्लॉट्स में होती थी। जब पढ़ना हो तो दो घंटे और जब आसंर राइटिंग की प्रैक्टिस करनी हो तो तीन-साढ़े तीन घंटे देती थी।

पूरे दिन अलग-अलग स्लॉट्स में बस एक ही सब्जेक्ट पढ़ती थी। अगर एक साथ कई सब्जेक्ट्स पढ़ने की कोशिश नहीं करते, तो आप कंफ्यूजन और प्रेशर से बचते हैं। अगर एक दिन में करना भी हो तो एक साथ बस ऑप्शनल और जनरल स्टडीज ही पढ़ती थी, वो भी आधे-आधे दिन के स्लॉट्स में बांटकर।

बैकग्राउंड से अलग चैलेंजिंग सब्जेक्ट्स के लिए यूट्यूब से मदद ली

मैं साइंस बैकग्राउंड से थी तो ह्यूमैनिटीज पर शिफ्ट होने में दिक्कतें आईं। पॉलिटी और संविधान से जुड़े टर्म समझने में दिक्कत होती थी। मैंने यूट्यूब पर अवेलेबल प्लेलिस्ट्स से पढ़ना शुरू किया। कुछ चैप्टर्स ऑनलाइन पढ़ने के बाद धीरे-धीरे सब समझ में आने लगा। आखिर तक मुझे चीजें समझने के लिए यूट्यूब की जरूरत भी कम हो गई। फिर कॉम्प्लैक्स टॉपिक्स भी किताबों से ही समझ में आने लगे।

स्‍टोरी – सोनाली राय

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राजनीति

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49 मिनट पहले

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मानसी डागर हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद सोनीपत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की।

उनके घर या रिश्तेदारी में कोई भी ऐसा नहीं था जिससे वो गाइडेंस ले सकें। ऐसे में गूगल-यूट्यूब की हेल्प ली और जाना कि क्या और कहां से पढ़ना है। यूट्यूब से ही समझा कि एग्जाम पैटर्न क्या है और इसे कैसे क्रैक करना है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मानसी बता रही हैं अपना UPSC क्रैक करने का फॉर्मूला…

मानसी ने अपने दूसरे अटेम्‍प्‍ट में UPSC क्लियर किया।

मानसी ने अपने दूसरे अटेम्‍प्‍ट में UPSC क्लियर किया।

सोर्स आइडेंटिफाई कर सेल्फ स्टडी से एग्जाम क्लियर किया

मैंने यूट्यूब और टॉपर्स टॉक से कई टॉपर्स की स्ट्रैटेजी समझी। उनकी वीडियोज देखकर समझा कि क्या और कहां से, खासकर कौनसी किताबों से पढ़ना है। फिर वो किताबें चुनीं जो सबमें कॉमन थीं, जैसे पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत या हिस्ट्री के लिए स्पेक्ट्रम। धीरे-धीरे समझ आने लगा कि क्या जरूरी है और क्या नहीं।

कॉन्सेप्ट क्लियर करना ज्यादा जरूरी

आपने कितने घंटे पढ़ाई की, उससे ज्यादा जरूरी है कि आपके कॉन्सेप्ट कितने क्लियर हैं। मैंने 8 घंटे पढ़ाई की और सारी चीजें अच्छे से समझने की कोशिश की। हम सब यूपीएससी की तैयारी के लिए 12, 15 या 18 घंटे सुनने के आदी हैं, लेकिन 8 घंटे समय भी कम नहीं है।

मैंने इतने घंटे में ही सारा सिलेबस कवर किया। रिवीजन और अपने आपको टेस्ट भी किया। फिर एनालाइज भी किया। ऐसे में अगर कॉन्सेप्ट क्लियर रखते हैं तो सब आसानी से हो जाता है।

बड़े शहरों में डिस्ट्रैक्शन ज्यादा, घर पर तैयारी आसान

तैयारी के लिए बड़े शहरों में जाने की बजाय ऑल यू नीड इज कंसिस्टेंसी एंड कॉन्फिडेंस। साथ ही किसी और की बातों में न आएं, खुद से समझें कि आपके लिए क्या जरूरी है।

बड़े शहरों में सुविधाओं के साथ डिस्ट्रैक्शन भी ज्यादा है, इसलिए मैंने घर पर शांत माहौल में आराम से तैयारी की। इसके लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन इतने सारे रिसोर्सेस हैं, कोचिंग के भी फ्री मटेरियल्स अवेलेबल हैं। आपको पेड प्रोग्राम्स में एनरोल करने की भी जरूरत नहीं।

कई-कई बार प्रैक्टिस की

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मेन्स के लिए आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करें। ज्यादा से ज्यादा PYQs सोल्व करें।

इंटरव्यू के लिए परिवार या दोस्तों के साथ इंटरव्यू की प्रैक्टिस करें।

तीनों चीजें अलग हैं लेकिन सबमें कॉमन है प्रैक्टिस! प्रैक्टिस हर चीज की करनी पड़ेगी, कई-कई बार करनी पड़ेगी, जैसा कि मैंने किया।

कोचिंग के बिना 8 घंटे सेल्फ स्टडी से क्रैक किया UPSC एग्जाम।

कोचिंग के बिना 8 घंटे सेल्फ स्टडी से क्रैक किया UPSC एग्जाम।

इंट्रस्ट और अपनी समझ के हिसाब से ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना

आपको ऑप्शनल सब्जेक्ट्स चुनते हुए ये ध्यान रखना चाहिए कि आप उस सब्जेक्ट में कितने इंट्रस्टेड हैं, उसको कितना पढ़ सकते हैं। ऑप्शनल सब्जेक्ट डीपर अंडरस्टैंडिंग मांगता है, इसे आपको जनरल स्टडीज से ज्यादा समय देना होगा। ऐसे में सब्जेक्ट ऐसा चुनें जिसे मैनेज करना मुश्किल न हो।

मान लीजिए आपने मैथेमैटिक्स लिया है, तो ये बहुत लेंदी है इसलिए ज्यादा समय मांगता है। ऐसे में जीएस के साथ इसे मैनेज करना मुश्किल है। सब आप पर है कि कैसे जीएस, ऑप्शनल और आंसर राइटिंग के बीच में आप टाइम मैनेज करते हैैं।

ऐसे में आप अपने ग्रेजुएशन सब्जेक्ट को चुन सकते हैं, इससे फायदा होगा क्योंकि आप उससे फैमिलियर होंगे। चूंकि मुझे फिजिक्स के कॉन्सेप्ट और टर्मिनोलॉजी क्लियर थे, तो मैंने वही चुुना था।

फोन को टाइमपास नहीं, तरक्की का टूल बनाया

आप इंटरनेट और फोन का यूज भी कर सकते हैं और टाइम पास के लिए मिस यूज भी कर सकते हैं। आपको फोन यूज करते वक्त बहुुत कॉन्शियस रहना होगा। फोन पर समय बर्बाद करने की बजाय पढ़ने के लिए या ऑनलाइन रिसोर्सेस के लिए इसका इस्तेमाल करें।

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असफलताओं पर अटकी नहीं, उससे आगे बढ़ी

मेरा पिछले अटेंप्ट में एक क्वेश्चन से प्रीलिम्स रह गया था। ‘मेरा नहीं हुआ’, मैं इस पर अटकी नहीं। बल्कि मुझे लगा, ये तो थोड़ी और तैयारी में हो जाएगा। मैंने सोचा अगर इसके इतना करीब आ सकती हूं, तो हो जाएगा। वहीं से मैंने खुद को सीधा मेन्स के लिए तैयार करना शुरू किया। मुझे बस 3 महीने में मेन्स की तैयारी करनी थी। अगर आप भी ऐसे पढ़ाई की धुन में रहते हैं, तो निराशा आप पर ज्यादा हावी नहीं होती।

शेड्यूल हेक्टिक की बजाय आसान रखा

मेरी पढ़ाई स्लॉट्स में होती थी। जब पढ़ना हो तो दो घंटे और जब आसंर राइटिंग की प्रैक्टिस करनी हो तो तीन-साढ़े तीन घंटे देती थी।

पूरे दिन अलग-अलग स्लॉट्स में बस एक ही सब्जेक्ट पढ़ती थी। अगर एक साथ कई सब्जेक्ट्स पढ़ने की कोशिश नहीं करते, तो आप कंफ्यूजन और प्रेशर से बचते हैं। अगर एक दिन में करना भी हो तो एक साथ बस ऑप्शनल और जनरल स्टडीज ही पढ़ती थी, वो भी आधे-आधे दिन के स्लॉट्स में बांटकर।

बैकग्राउंड से अलग चैलेंजिंग सब्जेक्ट्स के लिए यूट्यूब से मदद ली

मैं साइंस बैकग्राउंड से थी तो ह्यूमैनिटीज पर शिफ्ट होने में दिक्कतें आईं। पॉलिटी और संविधान से जुड़े टर्म समझने में दिक्कत होती थी। मैंने यूट्यूब पर अवेलेबल प्लेलिस्ट्स से पढ़ना शुरू किया। कुछ चैप्टर्स ऑनलाइन पढ़ने के बाद धीरे-धीरे सब समझ में आने लगा। आखिर तक मुझे चीजें समझने के लिए यूट्यूब की जरूरत भी कम हो गई। फिर कॉम्प्लैक्स टॉपिक्स भी किताबों से ही समझ में आने लगे।

स्‍टोरी – सोनाली राय

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