Friday, 10 Jul 2026 | 10:39 PM

Trending :

जामुन स्मूथी रेसिपी: घर में आसानी से बनी जैमी जैमीन से बनी ये पैमाइश, इनके भी बच्चे होंगे फैन फिल्म प्रोमोशन के लिए देहरादून पहुंचीं हुमा कुरैशी:बोलीं-छोटे बजट की फिल्म 'बेबी डू डाई डू', दर्शकों का प्यार ही फिल्म का प्रचार E20 Petrol Damage? Companies Must Replace Parts Free! कनखजूरा भगाने के उपाय: बारिश शुरू ही किचन-बाथरूम में आ गई कनखजूरा? 2 रुपये के देसी उपाय बिना किसी रुकावट के हवा में प्लेन की खिड़की टूटी,पैसेंजर का सिर-कंधे बाहर निकले:आसपास बैठे पैसेंजर्स ने अंदर खींचा, मैसिडोनिया के आकाश में हादसा फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है
EXCLUSIVE

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

भारतीय फुटबॉल के लिए एएफसी एशियन कप 2027 क्वालीफायर का हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ मैच एक खास पल का गवाह बना। भारत ने मैच 2-1 से जीतकर टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया। यह भारत की प्रतियोगिता में पहली और कोच्चि के मैदान पर भी पहली जीत रही। भारत की ओर से रयान विलियम्स (4’) और आकाश मिश्रा (50’) ने गोल किए। ऑस्ट्रेलियाई मूल के 32 वर्षीय रयान इस मैच में भारत के लिए डेब्यू कर रहे थे। 2014 में अराता इजुमी के बाद वह भारत के लिए खेलने वाले पहले विदेशी मूल के खिलाड़ी बने। रयान का पोर्ट्समाउथ और फुलहम जैसे इंग्लिश क्लबों से होते हुए कोच्चि तक का सफर अपनी जड़ों की ओर लौटने की कहानी है।
रयान का जन्म ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुआ था और 2019 में वह ऑस्ट्रेलिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेल चुके थे। भारत से उनका नाता उनकी मां ऑड्रे से जुड़ता है, जो मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के एक एंग्लो-इंडियन परिवार से ताल्लुक रखती हैं।
रयान की रगों में भारतीय फुटबॉल का पुराना इतिहास दौड़ता है। उनके सगे नाना, लिंकी ग्रोस्टेट ने 1956 की प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बॉम्बे की तरफ से खेलते हुए मजबूत बंगाल के खिलाफ विजयी गोल दागा था। अपनी जड़ों की इसी पुकार ने रयान को 2022 में भारत खींचा, जब वह इंडियन सुपर लीग में बेंगलुरु एफसी से जुड़े। यहीं खेलते हुए भारतीय दिग्गज सुनील छेत्री ने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए प्रेरित किया। चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है, इसलिए नीली जर्सी पहनने के लिए रयान को अपना ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट हमेशा के लिए छोड़ना पड़ा। यह एक बहुत बड़ा फैसला था। उन्हें भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के इस थका देने वाले सफर में तीन साल का वक्त लग गया। नियमों के मुताबिक, उन्हें लगातार 365 दिनों तक भारत में ही रहना था। इसके लिए उन्होंने अपने ऑफ-सीजन में भी परिवार से दूर भारत में ही रुकने का त्याग किया। एक समय ऐसा भी आया जब कागजी अड़चनों को देखकर कई लोगों ने उन्हें यह विचार छोड़ने की सलाह दी। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी पत्नी ने उनका हौसला बढ़ाया और तय किया कि वे भारत में ही रुकेंगे और इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।
इस लंबे इंतजार में रयान को निराशा भी झेलनी पड़ी। पिछले साल नवंबर में बांग्लादेश दौरे पर गई टीम के कैंप में वह मौजूद थे। रात 12 बजे की डेडलाइन निकल जाने के बाद, देर रात करीब 2 बजे उन्हें कागजी मंजूरी (एनओसी) मिल पाई, जिसके चलते वह अपना पहला मैच खेलने से चूक गए। भारत को अब अपना स्थायी घर मान चुके रयान का कहना है ‘घर वहीं है, जहां आपका दिल है।’ भविष्य में उनका सपना कोचिंग के जरिए भारत के युवा खिलाड़ियों को तराशना है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
राजस्थान के युवक की ईरान के हमले में मौत:क्रूड ऑयल टैंकर पर गिरी थी मिसाइल, 3 दिन से शव ढूंढ रही एजेंसी

March 4, 2026/
12:25 pm

अमेरिका-इजराइल और ईरान की वॉर में राजस्थान के एक युवक की मौत हो गई। नागौर जिले का रहने वाला युवक...

डिप्टी सीएम के साथ दो मंत्रियों की बनी समिति:कलेक्टरों को निर्देश- रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल की कालाबाजारी रोकने सख्त कदम उठाएं

March 11, 2026/
12:05 am

मध्य प्रदेश सरकार ने कलेक्टरों से कहा है कि रसोई गैस की कालाबाजारी रोकने के कदम उठाएं और स्टॉक की...

GT vs CSK Live Score: Follow Gujarat Titans vs Chennai Super Kings IPL 2026 updates and scorecard from Ahmedabad. (Picture Credit: X/@IPL)

May 21, 2026/
6:53 pm

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 18:53 IST जैसा कि कई दिनों तक सस्पेंस जारी रहा, स्थानीय स्वशासन मंत्री केएम शाजी ने...

US Scientist Death Missing Mystery; Nuclear Space

April 16, 2026/
2:21 pm

वॉशिंगटन डीसी53 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के...

मूवी रिव्यू: राजा शिवाजी:स्वराज्य की भावना को भव्यता से दिखाती फिल्म, रितेश देशमुख का सधा निर्देशन और स्टारकास्ट का असरदार अभिनय इसकी ताकत

May 1, 2026/
1:50 pm

महाराष्ट्र दिवस के मौके पर रिलीज हुई ‘राजा शिवाजी’ सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि स्वराज्य और मराठा अस्मिता को...

दावा- शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक ने वुहान लैब को फंडिंग दी:अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा- डॉ. फॉसी ने कसम खाकर झूठ बोला

June 20, 2026/
5:38 am

अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कार्यालय में अपने अंतिम दिन बड़े वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी पर गंभीर...

राजनीति

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

भारतीय फुटबॉल के लिए एएफसी एशियन कप 2027 क्वालीफायर का हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ मैच एक खास पल का गवाह बना। भारत ने मैच 2-1 से जीतकर टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया। यह भारत की प्रतियोगिता में पहली और कोच्चि के मैदान पर भी पहली जीत रही। भारत की ओर से रयान विलियम्स (4’) और आकाश मिश्रा (50’) ने गोल किए। ऑस्ट्रेलियाई मूल के 32 वर्षीय रयान इस मैच में भारत के लिए डेब्यू कर रहे थे। 2014 में अराता इजुमी के बाद वह भारत के लिए खेलने वाले पहले विदेशी मूल के खिलाड़ी बने। रयान का पोर्ट्समाउथ और फुलहम जैसे इंग्लिश क्लबों से होते हुए कोच्चि तक का सफर अपनी जड़ों की ओर लौटने की कहानी है।
रयान का जन्म ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुआ था और 2019 में वह ऑस्ट्रेलिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेल चुके थे। भारत से उनका नाता उनकी मां ऑड्रे से जुड़ता है, जो मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के एक एंग्लो-इंडियन परिवार से ताल्लुक रखती हैं।
रयान की रगों में भारतीय फुटबॉल का पुराना इतिहास दौड़ता है। उनके सगे नाना, लिंकी ग्रोस्टेट ने 1956 की प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बॉम्बे की तरफ से खेलते हुए मजबूत बंगाल के खिलाफ विजयी गोल दागा था। अपनी जड़ों की इसी पुकार ने रयान को 2022 में भारत खींचा, जब वह इंडियन सुपर लीग में बेंगलुरु एफसी से जुड़े। यहीं खेलते हुए भारतीय दिग्गज सुनील छेत्री ने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए प्रेरित किया। चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है, इसलिए नीली जर्सी पहनने के लिए रयान को अपना ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट हमेशा के लिए छोड़ना पड़ा। यह एक बहुत बड़ा फैसला था। उन्हें भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के इस थका देने वाले सफर में तीन साल का वक्त लग गया। नियमों के मुताबिक, उन्हें लगातार 365 दिनों तक भारत में ही रहना था। इसके लिए उन्होंने अपने ऑफ-सीजन में भी परिवार से दूर भारत में ही रुकने का त्याग किया। एक समय ऐसा भी आया जब कागजी अड़चनों को देखकर कई लोगों ने उन्हें यह विचार छोड़ने की सलाह दी। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी पत्नी ने उनका हौसला बढ़ाया और तय किया कि वे भारत में ही रुकेंगे और इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।
इस लंबे इंतजार में रयान को निराशा भी झेलनी पड़ी। पिछले साल नवंबर में बांग्लादेश दौरे पर गई टीम के कैंप में वह मौजूद थे। रात 12 बजे की डेडलाइन निकल जाने के बाद, देर रात करीब 2 बजे उन्हें कागजी मंजूरी (एनओसी) मिल पाई, जिसके चलते वह अपना पहला मैच खेलने से चूक गए। भारत को अब अपना स्थायी घर मान चुके रयान का कहना है ‘घर वहीं है, जहां आपका दिल है।’ भविष्य में उनका सपना कोचिंग के जरिए भारत के युवा खिलाड़ियों को तराशना है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.