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जबलपुर के पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मियों से किया था विवाद:हाईकोर्ट में खोली गई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट, बढ़ सकती है प्रभात साहू की मुश्किलें

जबलपुर के पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मियों से किया था विवाद:हाईकोर्ट में खोली गई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट, बढ़ सकती है प्रभात साहू की मुश्किलें

सितंबर 2025 में जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू का वाहन चेंकिग के दौरान एक पुलिस आरक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को सुरक्षा कैसे देंगे। मामले पर चीफ जस्टिस की कोर्ट ने जांच के लिए एसटीएफ को निर्देश दिए थे, जहां जांच के बाद गुरुवार को एसटीएफ की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष खोली गई। एसटीएफ ने कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू पर पुलिस आरक्षक ने जो आरोप लगाए थे, वह सही थे। जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दी गई है, लिहाजा अब भाजपा नेता प्रभात साहू सहित 5 पर मुकदमा चलेगा। बता दें कि इस विवाद के बाद प्रभात साहू की शिकायत पर लार्जगंज थाने में दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि पूर्व महापौर की शिकायत पर दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिसकर्मियों ने निलंबन की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की थी। कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि पूर्व महापौर के द्वारा वर्दी फाड़ने का स्पष्ट वीडियो भी वायरल होने के बावजूद उनके व समर्थकों के विरुद्ध राजनीतिक दबाव में नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। यह था पूरा घटनाक्रम जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थाना अंतर्गत बल्देव बाग के समीप वाहन सितंबर 2025 को चेकिंग दौरान पुलिसकर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए रोका था। पूर्व महापौर अपना परिचय देते हुए पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता करने लगे। इसके कुछ ही देर बाद समर्थकों की भीड़ एकत्र हो गया। याचिका में आरोप है कि सरेराह पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो में आरोपियों की शिनाख्त स्पष्ट थी।

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जबलपुर के पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मियों से किया था विवाद:हाईकोर्ट में खोली गई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट, बढ़ सकती है प्रभात साहू की मुश्किलें

सितंबर 2025 में जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू का वाहन चेंकिग के दौरान एक पुलिस आरक्षक के बीच जमकर विवाद हुआ। मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि जब थानों में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम जनता को सुरक्षा कैसे देंगे। मामले पर चीफ जस्टिस की कोर्ट ने जांच के लिए एसटीएफ को निर्देश दिए थे, जहां जांच के बाद गुरुवार को एसटीएफ की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष खोली गई। एसटीएफ ने कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू पर पुलिस आरक्षक ने जो आरोप लगाए थे, वह सही थे। जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दी गई है, लिहाजा अब भाजपा नेता प्रभात साहू सहित 5 पर मुकदमा चलेगा। बता दें कि इस विवाद के बाद प्रभात साहू की शिकायत पर लार्जगंज थाने में दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि पूर्व महापौर की शिकायत पर दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिसकर्मियों ने निलंबन की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि पूर्व महापौर प्रभात साहू ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की थी। कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि पूर्व महापौर के द्वारा वर्दी फाड़ने का स्पष्ट वीडियो भी वायरल होने के बावजूद उनके व समर्थकों के विरुद्ध राजनीतिक दबाव में नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। यह था पूरा घटनाक्रम जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार पूर्व महापौर प्रभात साहू को लार्डगंज थाना अंतर्गत बल्देव बाग के समीप वाहन सितंबर 2025 को चेकिंग दौरान पुलिसकर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए रोका था। पूर्व महापौर अपना परिचय देते हुए पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता करने लगे। इसके कुछ ही देर बाद समर्थकों की भीड़ एकत्र हो गया। याचिका में आरोप है कि सरेराह पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो में आरोपियों की शिनाख्त स्पष्ट थी।

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