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Simrol Jal Nikasi Marg Badhit: High Court Yan

Simrol Jal Nikasi Marg Badhit: High Court Yan

डॉ. अंबेडकर नगर (महू) तहसील के सिमरोल गांव में सरकारी भूमि और प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली पर कथित अतिक्रमण को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर इस रिट याचिका में सर्वे नंबर 890 पर दर्ज सार्

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राजस्व अभिलेखों के अनुसार सर्वे नंबर 890 सरकारी नाले/प्राकृतिक जल मार्ग के रूप में दर्ज है, जो क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसून के दौरान इस मार्ग से भारी मात्रा में वर्षा जल बहता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कॉलोनाइजर राजू पेंड्रावाला, अनुराग पांडिया और उनकी फर्म पेंड्रावाल एस्टेट ने सर्वे नंबर 889 स्थित अपनी निजी भूमि पर ‘विराज ग्रीन्स’ नामक आवासीय कॉलोनी विकसित करते समय उससे सटी सरकारी भूमि (सर्वे नंबर 890) पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया। आरोप है कि प्राकृतिक जल निकासी मार्ग में मिट्टी और निर्माण मलबा डालकर उसे संकरा कर दिया गया, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट ऋषि कुमार चौकसे ने तर्क दिए कि इस प्रकार का अवैध कब्जा न केवल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है, बल्कि इससे आसपास के रहवासियों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और पास स्थित एक सरकारी कन्या छात्रावास को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से बड़े नुकसान की आशंका जताई गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला कलेक्टर और सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ (Public Land Protection Cell) को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। कानूनी आधार के रूप में याचिका में मप्र हाई कोर्ट के पूर्व निर्णय ग्राम पंचायत धूमा बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2021) का हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि ‘निस्तार भूमि’, ‘चरनोई’, ‘तालाब’, ‘नदी’ या अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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राजस्व अभिलेखों के अनुसार सर्वे नंबर 890 सरकारी नाले/प्राकृतिक जल मार्ग के रूप में दर्ज है, जो क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसून के दौरान इस मार्ग से भारी मात्रा में वर्षा जल बहता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कॉलोनाइजर राजू पेंड्रावाला, अनुराग पांडिया और उनकी फर्म पेंड्रावाल एस्टेट ने सर्वे नंबर 889 स्थित अपनी निजी भूमि पर ‘विराज ग्रीन्स’ नामक आवासीय कॉलोनी विकसित करते समय उससे सटी सरकारी भूमि (सर्वे नंबर 890) पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया। आरोप है कि प्राकृतिक जल निकासी मार्ग में मिट्टी और निर्माण मलबा डालकर उसे संकरा कर दिया गया, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट ऋषि कुमार चौकसे ने तर्क दिए कि इस प्रकार का अवैध कब्जा न केवल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है, बल्कि इससे आसपास के रहवासियों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और पास स्थित एक सरकारी कन्या छात्रावास को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से बड़े नुकसान की आशंका जताई गई है।

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