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CMHO Sanjay Mishra Suspended | Financial Irregularities Jabalpur

CMHO Sanjay Mishra Suspended | Financial Irregularities Jabalpur

जबलपुर में दैनिक भास्कर की खबर का बड़ा असर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के डीपीएमयू में पहले स्टॉक रजिस्टर गायब होने और फिर वित्तीय अनियमितताओं की आंच जब जबलपुर से भोपाल पहुंची, तो आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीएमएचओ डॉ. संजय मि

.

इस कार्रवाई के बाद जबलपुर संभाग और जिला, दोनों स्तरों पर पद खाली हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गायब स्टॉक रजिस्टर और खरीदी में पाई गई बड़ी अनियमितताओं के चलते यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले गुरुवार को जबलपुर कलेक्टर ने स्टोरकीपर को निलंबित करते हुए डीपीएम को सिहोरा अटैच किया था।

कई करोड़ का घोटाला

स्वास्थ्य विभाग में हुए फर्जीवाड़े के बाद शुक्रवार रात ज्वाइंट डायरेक्टर और सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित कर दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि स्टोर में सामान की खरीद-फरोख्त के दौरान सामान पहुंचा ही नहीं, लेकिन कागजों में 1 करोड़ रुपए से अधिक के बिल चढ़ा दिए गए।

इनमें से 93 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। इसके साथ ही डीपीएमयू का स्टॉक रजिस्टर, जो अक्टूबर 2025 से गायब था, उसे लेकर पूर्व डीपीएमयू आदित्य तिवारी ने पत्राचार किया था। इसी आधार पर शासन की ओर से यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

दरअसल, दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग में खरीदी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टॉक रजिस्टर गायब होना और उसमें की गई एंट्री को लेकर भी सवाल उठ रहे थे, जिसकी जांच डिप्टी कलेक्टर को सौंपी गई थी। 31 मार्च 2026 को जब जांच टीम स्टोर पहुंची, तो वहां एंट्री तो मिली, लेकिन सामान गायब था।

मामले को लेकर ये बातें भी जानिए

  • एंट्री: 17 मार्च को 6 बिल और 24 मार्च को 7 बिल (कुल 13 बिल) रजिस्टर में दर्ज किए गए।
  • कुल रकम: इन 13 बिलों की कुल राशि 1,00,74,998 रुपए थी।
  • भुगतान: नियम विरुद्ध जाकर 12 बिलों का 93,04,998 रुपए का पेमेंट भी कर दिया गया।
  • हकीकत: स्टोर में सामान भौतिक रूप से उपलब्ध ही नहीं था।
  • कलेक्टर के निर्देश पर जब डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी ने जांच की तो जिम्मेदारों के बयान ने उनकी मिलीभगत की पोल खोल दी।
  • जवाहर लोधी (फार्मासिस्ट) ने कहा कि समान नहीं आया था, मैंने सिर्फ DPM आदित्य तिवारी के कहने पर स्टॉक रजिस्टर में एंट्री की थी।
  • नीरज कौरव (स्टोर कीपर) ने कहा कि समान भंडार गृह में है।” (जांच में यह जानकारी पूरी तरह भ्रामक और झूठी निकली)।
  • आदित्य तिवारी (DPM) ने कहा कि सामान आंशिक रूप से मिला है।” (जबकि जांच दल को मौके पर एक भी सामान नहीं मिला)।

पर्यवेक्षीय पद पर होते हुए घोर लापरवाही बरती

जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. संजय मिश्रा (CMHO), आदित्य तिवारी (DPM), जवाहर लोधी और नीरज कौरव को इस गंभीर वित्तीय अनियमितता का मुख्य जिम्मेदार माना है। कार्रवाई के दौरान आदेश में कहा कि डॉ. संजय मिश्रा ने पर्यवेक्षीय पद पर होते हुए घोर लापरवाही बरती। उनकी निष्ठा संदिग्ध है और इस कृत्य से शासन की छवि खराब हुई है।

बहरहाल डॉ. संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक कार्यालय, भोपाल तय किया गया है। नियमों के तहत उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

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जबलपुर में दैनिक भास्कर की खबर का बड़ा असर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के डीपीएमयू में पहले स्टॉक रजिस्टर गायब होने और फिर वित्तीय अनियमितताओं की आंच जब जबलपुर से भोपाल पहुंची, तो आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीएमएचओ डॉ. संजय मि

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इस कार्रवाई के बाद जबलपुर संभाग और जिला, दोनों स्तरों पर पद खाली हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, गायब स्टॉक रजिस्टर और खरीदी में पाई गई बड़ी अनियमितताओं के चलते यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले गुरुवार को जबलपुर कलेक्टर ने स्टोरकीपर को निलंबित करते हुए डीपीएम को सिहोरा अटैच किया था।

कई करोड़ का घोटाला

स्वास्थ्य विभाग में हुए फर्जीवाड़े के बाद शुक्रवार रात ज्वाइंट डायरेक्टर और सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित कर दिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि स्टोर में सामान की खरीद-फरोख्त के दौरान सामान पहुंचा ही नहीं, लेकिन कागजों में 1 करोड़ रुपए से अधिक के बिल चढ़ा दिए गए।

इनमें से 93 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। इसके साथ ही डीपीएमयू का स्टॉक रजिस्टर, जो अक्टूबर 2025 से गायब था, उसे लेकर पूर्व डीपीएमयू आदित्य तिवारी ने पत्राचार किया था। इसी आधार पर शासन की ओर से यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

दरअसल, दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा था कि स्वास्थ्य विभाग में खरीदी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टॉक रजिस्टर गायब होना और उसमें की गई एंट्री को लेकर भी सवाल उठ रहे थे, जिसकी जांच डिप्टी कलेक्टर को सौंपी गई थी। 31 मार्च 2026 को जब जांच टीम स्टोर पहुंची, तो वहां एंट्री तो मिली, लेकिन सामान गायब था।

मामले को लेकर ये बातें भी जानिए

  • एंट्री: 17 मार्च को 6 बिल और 24 मार्च को 7 बिल (कुल 13 बिल) रजिस्टर में दर्ज किए गए।
  • कुल रकम: इन 13 बिलों की कुल राशि 1,00,74,998 रुपए थी।
  • भुगतान: नियम विरुद्ध जाकर 12 बिलों का 93,04,998 रुपए का पेमेंट भी कर दिया गया।
  • हकीकत: स्टोर में सामान भौतिक रूप से उपलब्ध ही नहीं था।
  • कलेक्टर के निर्देश पर जब डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी ने जांच की तो जिम्मेदारों के बयान ने उनकी मिलीभगत की पोल खोल दी।
  • जवाहर लोधी (फार्मासिस्ट) ने कहा कि समान नहीं आया था, मैंने सिर्फ DPM आदित्य तिवारी के कहने पर स्टॉक रजिस्टर में एंट्री की थी।
  • नीरज कौरव (स्टोर कीपर) ने कहा कि समान भंडार गृह में है।” (जांच में यह जानकारी पूरी तरह भ्रामक और झूठी निकली)।
  • आदित्य तिवारी (DPM) ने कहा कि सामान आंशिक रूप से मिला है।” (जबकि जांच दल को मौके पर एक भी सामान नहीं मिला)।

पर्यवेक्षीय पद पर होते हुए घोर लापरवाही बरती

जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. संजय मिश्रा (CMHO), आदित्य तिवारी (DPM), जवाहर लोधी और नीरज कौरव को इस गंभीर वित्तीय अनियमितता का मुख्य जिम्मेदार माना है। कार्रवाई के दौरान आदेश में कहा कि डॉ. संजय मिश्रा ने पर्यवेक्षीय पद पर होते हुए घोर लापरवाही बरती। उनकी निष्ठा संदिग्ध है और इस कृत्य से शासन की छवि खराब हुई है।

बहरहाल डॉ. संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक कार्यालय, भोपाल तय किया गया है। नियमों के तहत उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

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