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पर्यटकों के लिए सालभर खुली रहेगी नेलांग घाटी:भारत-चीन सीमा पर बढ़ेगा टूरिज्म, उत्तराखंड में मिलेगा लद्धाख जैसा अनुभव

पर्यटकों के लिए सालभर खुली रहेगी नेलांग घाटी:भारत-चीन सीमा पर बढ़ेगा टूरिज्म, उत्तराखंड में मिलेगा लद्धाख जैसा अनुभव

उत्तराखंड की फेमस नेलांग घाटी का अब पर्यटक पूरे साल लुत्फ उठा सकेंगे। सरकार के इस फैसले से सीमांत इलाके में जहां पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ, बदलते मौसम और लद्दाख जैसा अनुभव लेने का मौका मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों को पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। अब तक सीमित समय के लिए खुलने वाली यह घाटी अब हर मौसम में पर्यटकों को प्रकृति की अलौकिक अनुभव उपलब्ध कराएगी। यहां आने वाले पर्यटक मौसम के बदलते हर पल के साथ सर्दियों में बर्फीले नजारों का आनंद ले सकेंगे। भारत-चीन सीमा के पास स्थित यह घाटी पर्यटकों को अपनी अनोखी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण का अनुभव कराएगी। अनौखी भौगोलिक संरचना के कारण यह जगह एडवेंचर और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहेगी। सालभर खुलने से अब यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रशासन ने इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम और नियम तय किए हैं। पर्यटकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही घाटी में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। चीन सीमा से सटे इस संवेदनशील जगह को देखते हुए निगरानी और गाइडलाइन का पालन भी पर्यटकों के लिए अनिवार्य होगा। इस पहल से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा। पहले जानिए नेलांग घाटी क्यों है खास… शांत माहौल के लिए बेहद खास
नेलांग घाटी अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल के लिए बेहद खास मानी जाती है। भारत-चीन सीमा के पास स्थित यह घाटी बर्फ से ढकी चोटियों, चौड़ी घाटियों और साफ आसमान के कारण किसी विदेशी लोकेशन जैसी अनुभूति देती है। इसकी भौगोलिक बनावट लद्दाख जैसी होने के कारण यह और भी आकर्षक बन जाती है। हर पल बदलता है मौसम
यह घाटी एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां ट्रैकिंग, नेचर वॉक और फोटोग्राफी का अलग ही रोमांच देखने को मिलता है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां का मौसम और नजारे हर पल बदलते रहते हैं, जो पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव देते हैं। बर्फबारी के बीच मिलेगा अद्भुत अनुभव
पर्यटक यहां का रोमांच तय नियमों के तहत आसानी से उठा सकते हैं। प्रशासन द्वारा निर्धारित परमिट लेकर और गाइड के साथ यात्रा करने से सफर सुरक्षित और सुविधाजनक बनता है। खासकर सर्दियों में बर्फबारी के बीच 4×4 वाहनों से यात्रा करना एक अद्भुत अनुभव देता है। प्रकृति के करीब समय बिताने का मिलता है मौका
इसके अलावा यहां का शांत और भीड़-भाड़ से दूर वातावरण सुकून की तलाश करने वालों के लिए भी खास है। प्रकृति के करीब समय बिताने, नई जगहों को एक्सप्लोर करने और एडवेंचर का आनंद लेने के लिए नेलांग घाटी तेजी से पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र होने के लिए परमिट जरूरी
नेलांग घाटी जाने के लिए प्रशासन द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यह इलाका संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में आता है, इसलिए बिना परमिट किसी भी पर्यटक को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती। परमिट जारी करने की जिम्मेदारी उत्तराखंड वन विभाग के पास है। इसके लिए पर्यटक उत्तरकाशी के वन प्रभाग कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। साथ ही जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन की सुविधा शुरू होने की संभावना है। परमिट के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इनमें वैध फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी शामिल हैं। इसके अलावा वाहन की जानकारी, यात्रा करने वाले पर्यटकों की सूची, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क विवरण भी देना होगा। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही परमिट जारी किया जाता है। तय नियमों और समय सीमा के भीतर ही पर्यटकों को घाटी में प्रवेश और वापसी की अनुमति दी जाती है, जिससे सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे। सुबह मिलेगा घाटी में प्रवेश
नेलांग घाटी जाने के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं। प्रतिदिन सीमित संख्या में ही पर्यटकों को अनुमति दी जाएगी, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और सुरक्षा बनी रहे। घाटी में प्रवेश केवल सुबह निर्धारित समय पर ही दिया जाएगा और सभी पर्यटकों को शाम तक वापस लौटना अनिवार्य होगा। इससे संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी आसान बनी रहती है। यात्रा के दौरान गाइड और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में फोटोग्राफी पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। सर्दियों में यात्रा के लिए विशेष नियम होंगे लागू
शीतकालीन पर्यटन को ध्यान में रखते हुए SOP में अतिरिक्त नियम भी जोड़े गए हैं। बर्फबारी के दौरान केवल 4×4 या अधिकृत वाहनों को ही घाटी में जाने की अनुमति दी जाएगी। खराब मौसम की स्थिति में परमिट को अस्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। यह फैसला पूरी तरह पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। पर्यटकों को गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और सुरक्षा उपकरण साथ रखना अनिवार्य होगा। ऊंचाई और ठंड को देखते हुए यह तैयारी बेहद जरूरी मानी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से रेस्क्यू टीम भी तैनात रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। परमिट व्यवस्था से पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी
यह इलाका भारत-चीन सीमा के पास स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है, जहां सुरक्षा के लिहाज से सख्त निगरानी जरूरी होती है। साथ ही घाटी की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। सीमित संख्या में पर्यटकों को अनुमति देने से पर्यावरण पर दबाव कम रहता है और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। परमिट सिस्टम का एक अहम उद्देश्य पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम को देखते हुए नियंत्रित और व्यवस्थित यात्रा जरूरी मानी जाती है। अब पर्यटक तय नियमों का पालन करते हुए हर मौसम में इस खूबसूरत घाटी का आनंद ले सकेंगे। ऐसे पहुंचे नेलांग घाटी
नेलांग घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको देहरादून पहुंचना होगा, जो इसका सबसे नजदीकी बड़ा शहर है। देहरादून देश के प्रमुख शहरों से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। देहरादून से सड़क मार्ग के जरिए उत्तरकाशी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से आगे का सफर पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है, जो बेहद खूबसूरत भी है। उत्तरकाशी से आगे भटवाड़ी होते हुए हर्षिल पहुंचा जाता है। हर्षिल तक निजी वाहन या टैक्सी से आराम से यात्रा की जा सकती है और यह पड़ाव यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। हर्षिल से आगे भैरोंघाटी चेकपोस्ट आता है, जहां से नेलांग घाटी का रास्ता शुरू होता है। यहां से आगे जाने के लिए परमिट अनिवार्य है और बिना अनुमति किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। ————— ये खबर भी पढ़ें… शांति की खोज में उत्तराखंड पहुंच रहे इजराइली:युद्ध के कारण संख्या पहले से कम हुई, टूरिस्ट बोला- यहां आकर सेफ फील करते हैं इजराइल में जारी युद्ध और लगातार बने तनावपूर्ण हालात के बीच वहां के लोग शांति की खोज में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पहुंच रहे हैं। यहां पर स्थित कसार देवी क्षेत्र इजराइली टूरिस्टों के लिए ऐसा सुरक्षित और शांत ठिकाना बना हुआ है, जहां वे कुछ समय के लिए युद्ध के माहौल से दूर सुकून के पल बिता रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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नेलांग घाटी अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल के लिए बेहद खास मानी जाती है। भारत-चीन सीमा के पास स्थित यह घाटी बर्फ से ढकी चोटियों, चौड़ी घाटियों और साफ आसमान के कारण किसी विदेशी लोकेशन जैसी अनुभूति देती है। इसकी भौगोलिक बनावट लद्दाख जैसी होने के कारण यह और भी आकर्षक बन जाती है। हर पल बदलता है मौसम
यह घाटी एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां ट्रैकिंग, नेचर वॉक और फोटोग्राफी का अलग ही रोमांच देखने को मिलता है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां का मौसम और नजारे हर पल बदलते रहते हैं, जो पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव देते हैं। बर्फबारी के बीच मिलेगा अद्भुत अनुभव
पर्यटक यहां का रोमांच तय नियमों के तहत आसानी से उठा सकते हैं। प्रशासन द्वारा निर्धारित परमिट लेकर और गाइड के साथ यात्रा करने से सफर सुरक्षित और सुविधाजनक बनता है। खासकर सर्दियों में बर्फबारी के बीच 4×4 वाहनों से यात्रा करना एक अद्भुत अनुभव देता है। प्रकृति के करीब समय बिताने का मिलता है मौका
इसके अलावा यहां का शांत और भीड़-भाड़ से दूर वातावरण सुकून की तलाश करने वालों के लिए भी खास है। प्रकृति के करीब समय बिताने, नई जगहों को एक्सप्लोर करने और एडवेंचर का आनंद लेने के लिए नेलांग घाटी तेजी से पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र होने के लिए परमिट जरूरी
नेलांग घाटी जाने के लिए प्रशासन द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यह इलाका संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में आता है, इसलिए बिना परमिट किसी भी पर्यटक को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती। परमिट जारी करने की जिम्मेदारी उत्तराखंड वन विभाग के पास है। इसके लिए पर्यटक उत्तरकाशी के वन प्रभाग कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। साथ ही जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन की सुविधा शुरू होने की संभावना है। परमिट के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इनमें वैध फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी शामिल हैं। इसके अलावा वाहन की जानकारी, यात्रा करने वाले पर्यटकों की सूची, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क विवरण भी देना होगा। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही परमिट जारी किया जाता है। तय नियमों और समय सीमा के भीतर ही पर्यटकों को घाटी में प्रवेश और वापसी की अनुमति दी जाती है, जिससे सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे। सुबह मिलेगा घाटी में प्रवेश
नेलांग घाटी जाने के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं। प्रतिदिन सीमित संख्या में ही पर्यटकों को अनुमति दी जाएगी, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और सुरक्षा बनी रहे। घाटी में प्रवेश केवल सुबह निर्धारित समय पर ही दिया जाएगा और सभी पर्यटकों को शाम तक वापस लौटना अनिवार्य होगा। इससे संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी आसान बनी रहती है। यात्रा के दौरान गाइड और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में फोटोग्राफी पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। सर्दियों में यात्रा के लिए विशेष नियम होंगे लागू
शीतकालीन पर्यटन को ध्यान में रखते हुए SOP में अतिरिक्त नियम भी जोड़े गए हैं। बर्फबारी के दौरान केवल 4×4 या अधिकृत वाहनों को ही घाटी में जाने की अनुमति दी जाएगी। खराब मौसम की स्थिति में परमिट को अस्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। यह फैसला पूरी तरह पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। पर्यटकों को गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और सुरक्षा उपकरण साथ रखना अनिवार्य होगा। ऊंचाई और ठंड को देखते हुए यह तैयारी बेहद जरूरी मानी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से रेस्क्यू टीम भी तैनात रहेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। परमिट व्यवस्था से पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी
यह इलाका भारत-चीन सीमा के पास स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है, जहां सुरक्षा के लिहाज से सख्त निगरानी जरूरी होती है। साथ ही घाटी की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। सीमित संख्या में पर्यटकों को अनुमति देने से पर्यावरण पर दबाव कम रहता है और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। परमिट सिस्टम का एक अहम उद्देश्य पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम को देखते हुए नियंत्रित और व्यवस्थित यात्रा जरूरी मानी जाती है। अब पर्यटक तय नियमों का पालन करते हुए हर मौसम में इस खूबसूरत घाटी का आनंद ले सकेंगे। ऐसे पहुंचे नेलांग घाटी
नेलांग घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको देहरादून पहुंचना होगा, जो इसका सबसे नजदीकी बड़ा शहर है। देहरादून देश के प्रमुख शहरों से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। देहरादून से सड़क मार्ग के जरिए उत्तरकाशी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से आगे का सफर पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है, जो बेहद खूबसूरत भी है। उत्तरकाशी से आगे भटवाड़ी होते हुए हर्षिल पहुंचा जाता है। हर्षिल तक निजी वाहन या टैक्सी से आराम से यात्रा की जा सकती है और यह पड़ाव यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। हर्षिल से आगे भैरोंघाटी चेकपोस्ट आता है, जहां से नेलांग घाटी का रास्ता शुरू होता है। यहां से आगे जाने के लिए परमिट अनिवार्य है और बिना अनुमति किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। ————— ये खबर भी पढ़ें… शांति की खोज में उत्तराखंड पहुंच रहे इजराइली:युद्ध के कारण संख्या पहले से कम हुई, टूरिस्ट बोला- यहां आकर सेफ फील करते हैं इजराइल में जारी युद्ध और लगातार बने तनावपूर्ण हालात के बीच वहां के लोग शांति की खोज में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पहुंच रहे हैं। यहां पर स्थित कसार देवी क्षेत्र इजराइली टूरिस्टों के लिए ऐसा सुरक्षित और शांत ठिकाना बना हुआ है, जहां वे कुछ समय के लिए युद्ध के माहौल से दूर सुकून के पल बिता रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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