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क्या आप भी चीजें रखकर भूल जाते हैं? जानें 3 साइकोलॉजिकल ट्रिक्‍स, जो याददाश्त को बनाती है लोहे सा मजबूत

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Memory Improvement Tricks : अक्‍सर लोगों के साथ यह समस्‍या रहती है कि वे कमरे में जाकर भूल जाते हैं कि वहां क्यों आए या फिर चश्मा सिर पर होने के बावजूद उसे पूरे घर में ढूंढते रहते हैं. थकान भरी जिंदगी और ‘डिजिटल डिस्ट्रैक्शन’ ने हमारी याददाश्त को काफी कमजोर कर दिया है. लेकिन अच्छी बात यह है कि भूलने की इस आदत को किसी दवा से नहीं, बल्कि मनोविज्ञान (Psychology) की कुछ सिंपल ट्रिक्स से बदला जा सकता है. दुनिया के बड़े-बड़े विद्वान और ‘मेमोरी चैंपियंस’ जिन तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, आज हम उन्हीं 3 आसान ट्रिक्स के बारे में जानेंगे जो आपकी याददाश्त को कंप्यूटर जैसी रफ्तार दे सकती हैं.

1. चंकिंग मेथड (The Chunking Method)- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, हमारा मस्तिष्क एक साथ केवल 5 से 9 सूचनाओं को ही याद रख सकता है. ‘चंकिंग’ वह तकनीक है जिसमें बड़ी जानकारी को छोटे-छोटे ‘चंक्स’ या समूहों में बांट दिया जाता है.

उदाहरण: अगर  आपको 10 अंकों का मोबाइल नंबर याद करना है, तो उसे 9812345678 के बजाय 981-234-5678 के रूप में याद करें.

फायदा:हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध बताते हैं कि यह तकनीक जटिल डेटा और सूचियों को याद रखने में सबसे ज्यादा कारगर है.

2. लोकस मेथड या ‘मेमोरी पैलेस’ (The Method of Loci)- यह दुनिया की सबसे पुरानी और प्रभावी मेमोरी ट्रिक्स में से एक है, जिसका उपयोग प्राचीन ग्रीक विद्वान करते थे. इसमें आप अपनी जानकारी को किसी परिचित स्थान (जैसे आपका घर) से जोड़ते हैं.

कैसे करें: कल्पना करें कि आप अपने घर के मुख्य दरवाजे पर खड़े हैं और वहाँ आपने अपनी ‘टू-डू लिस्ट’ की पहली चीज रखी है. फिर सोफे पर दूसरी चीज. जब आपको जानकारी याद करनी होगी, तो आप मन ही मन अपने घर की सैर करेंगे और चीजें खुद-ब-खुद याद आती जाएंगी.

‘जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस तकनीक का अभ्यास करने से मस्तिष्क के उन हिस्सों में सक्रियता बढ़ती है जो यादों को सहेजते हैं.

3. स्पेस रिपिटिशन (Spaced Repetition)- हम अक्सर किसी चीज को रटने की कोशिश करते हैं, जिसे ‘क्रैमिंग’ कहा जाता है. मनोविज्ञान कहता है कि रटा हुआ ज्ञान जल्दी भूल जाता है. इसके बजाय ‘स्पेस रिपिटिशन’ अपनाएं.

कैसे करें: किसी जानकारी को आज पढ़ें, फिर उसे 24 घंटे बाद दोहराएं, फिर एक हफ्ते बाद और फिर एक महीने बाद.
जर्मन मनोवैज्ञानिक हरमन एबिंगहॉस के ‘फॉरगेटेन कर्व’ (Forgetting Curve) सिद्धांत के अनुसार, कुछ अंतराल पर दोहराते रहने से जानकारी ‘शॉर्ट-टर्म मेमोरी’ से निकलकर ‘लॉन्ग-टर्म मेमोरी’ में सुरक्षित हो जाती है.

विशेषज्ञों की राय-

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि याददाश्त केवल ट्रिक्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपकी जीवनशैली भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) और तनाव मुक्त रहना मस्तिष्क की नई कोशिकाओं के निर्माण (Neurogenesis) के लिए अनिवार्य है.

बता दें कि याददाश्त बढ़ाना एक अभ्यास है. अगर  आप इन मनोवैज्ञानिक ट्रिक्स को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं, तो न केवल आपकी एकाग्रता बढ़ेगी बल्कि आप चीजों को लंबे समय तक याद रख पाएंगे. अगली बार जब आप कुछ भूलें, तो परेशान होने के बजाय ‘मेमोरी पैलेस’ में कदम रखें!

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1. चंकिंग मेथड (The Chunking Method)- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, हमारा मस्तिष्क एक साथ केवल 5 से 9 सूचनाओं को ही याद रख सकता है. ‘चंकिंग’ वह तकनीक है जिसमें बड़ी जानकारी को छोटे-छोटे ‘चंक्स’ या समूहों में बांट दिया जाता है.

उदाहरण: अगर  आपको 10 अंकों का मोबाइल नंबर याद करना है, तो उसे 9812345678 के बजाय 981-234-5678 के रूप में याद करें.

फायदा:हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध बताते हैं कि यह तकनीक जटिल डेटा और सूचियों को याद रखने में सबसे ज्यादा कारगर है.

2. लोकस मेथड या ‘मेमोरी पैलेस’ (The Method of Loci)- यह दुनिया की सबसे पुरानी और प्रभावी मेमोरी ट्रिक्स में से एक है, जिसका उपयोग प्राचीन ग्रीक विद्वान करते थे. इसमें आप अपनी जानकारी को किसी परिचित स्थान (जैसे आपका घर) से जोड़ते हैं.

कैसे करें: कल्पना करें कि आप अपने घर के मुख्य दरवाजे पर खड़े हैं और वहाँ आपने अपनी ‘टू-डू लिस्ट’ की पहली चीज रखी है. फिर सोफे पर दूसरी चीज. जब आपको जानकारी याद करनी होगी, तो आप मन ही मन अपने घर की सैर करेंगे और चीजें खुद-ब-खुद याद आती जाएंगी.

‘जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस तकनीक का अभ्यास करने से मस्तिष्क के उन हिस्सों में सक्रियता बढ़ती है जो यादों को सहेजते हैं.

3. स्पेस रिपिटिशन (Spaced Repetition)- हम अक्सर किसी चीज को रटने की कोशिश करते हैं, जिसे ‘क्रैमिंग’ कहा जाता है. मनोविज्ञान कहता है कि रटा हुआ ज्ञान जल्दी भूल जाता है. इसके बजाय ‘स्पेस रिपिटिशन’ अपनाएं.

कैसे करें: किसी जानकारी को आज पढ़ें, फिर उसे 24 घंटे बाद दोहराएं, फिर एक हफ्ते बाद और फिर एक महीने बाद.
जर्मन मनोवैज्ञानिक हरमन एबिंगहॉस के ‘फॉरगेटेन कर्व’ (Forgetting Curve) सिद्धांत के अनुसार, कुछ अंतराल पर दोहराते रहने से जानकारी ‘शॉर्ट-टर्म मेमोरी’ से निकलकर ‘लॉन्ग-टर्म मेमोरी’ में सुरक्षित हो जाती है.

विशेषज्ञों की राय-

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि याददाश्त केवल ट्रिक्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आपकी जीवनशैली भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है. पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) और तनाव मुक्त रहना मस्तिष्क की नई कोशिकाओं के निर्माण (Neurogenesis) के लिए अनिवार्य है.

बता दें कि याददाश्त बढ़ाना एक अभ्यास है. अगर  आप इन मनोवैज्ञानिक ट्रिक्स को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं, तो न केवल आपकी एकाग्रता बढ़ेगी बल्कि आप चीजों को लंबे समय तक याद रख पाएंगे. अगली बार जब आप कुछ भूलें, तो परेशान होने के बजाय ‘मेमोरी पैलेस’ में कदम रखें!

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