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hantavirus outbreak | mv hondius cruise ship | चूहों से इंसान और फिर इंसान से इंसान, हंटावायरस का ये नया स्ट्रेन कितना घातक है? एमवी हाइडियस क्रूज

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Hantavirus Outbreak: युद्ध के अलावा भी एक ख़बर ने इस वक़्त दुनिया को डराया हुआ है. हुआ ये कि एक क्रूज़ शिप निकला लोगों को ऐंटार्कटिका की सैर कराने. क्रूज़ शिप आप जानते ही होंगे समुद्र में तैरते फ़ाइव स्टार होटलों की तरह होते हैं. महंगी-महंगी टिकटें ले कर लोग ये लक्ज़री यात्राएं करते हैं. तो एक ऐसे ही लक्ज़री समुद्री जहाज़ ‘MV हॉन्डियस’ ने ट्रिप निकालना कई देशों से होते हुए लोगों को ऐंटार्कटिका घुमाने का. आलिशान फ़ाइव स्टार होटेल जैसे समुद्री जहाज़ से सबको बर्फ़ से ढके हुए ऐंटार्कटिका पर ले जाना था. ऐंटार्कटिका आप जानते ही होंगे पृथ्वी के बिलकुल दक्षिण महाद्वीप है. दक्षिणी ध्रुव के पास. कोई रहता नहीं है वहां. पहले सांयटिस्ट लोग ही जाते थे एक्सपेरिमेंट करने. लेकिन अब ये महंगे क्रूज़ जहाज़ भी ले जाते हैं पर्यटकों को. ज़्यादा पब्लिक जानती नहीं लेकिन अब हर साल 1 लाख से ज्यादा पर्यटक ऐंटार्कटिका जाते हैं.

क्रूज़ जहाज़ से जाते हैं. वहां कोई होटेल वगैरह नहीं है. लोग जहाज़ पर रहकर सिर्फ़ देखते हैं. कुछ उतरकर बर्फ़ पर पैर भी रखते हैं. बर्फ़ ही बर्फ़ है. ज़मीन नहीं दिखते है. बर्फ़ के ही पहाड़ हैं. पेंगुइन पक्षी रहते हैं उनको देखने जाते हैं लोग. व्हेल देखने जाते हैं. और काफ़ी महंगा ट्रिप होता है ये. कई लाख रुपये लग जाते हैं. जहाज़ भी वहां पर ख़ास तरह के ही जा सकते हैं. क्योंकि कई जगह समुद्र ही बर्फ़ से ढका होता है तो बर्फ को तोड़कर भी आगे बढ़ना पड़ सकता है रास्ते में. तो जहाज़ वैसे चाहिए होते हैं जो ऐसा कर सकें. और नियम भी बहुत सख्त हैं वहां.

ऐंटार्कटिका गए रईसों को हंटावायरस ने घेरा. (Photo : AP)

अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने नियम बनाए हुए हैं, कोई सरकार तो है नहीं वहां किसी देश की. ज्यादा लोग एक जगह पर नहीं उतर सकते वहां पर. पर्यावरण को ख़तरा किसी भी तरह से ना हो इसलिए नियम बनाए हुए हैं. क्योंकि अब वो दुनिया का सबसे साफ इलाक़ा बचा है. सबसे साफ़, सबसे ठंडा और एक तरह से सबसे अनोखा. तो पेंगुइन के साथ फोटो खिंचवाने, बर्फ पर चलने, व्हेल देखने, बर्फ़ के पहाड़ देखने, ये सब करने जाते हैं रईस लोग वहां. कहते हैं कि सपनों जैसा अनुभव होता है. तो ऐसा ही ट्रिप शुरू हुआ 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से. जहाज़ था MV हॉन्डियस.

ऐंटार्कटिका क्रूज़ पर कैसे हुआ हंटावायरस का हमला?

  • MV हॉन्डियस 1 अप्रैल को रवाना हुआ उशुआइया से 147 लोगों के साथ. 147 में 88 यात्री थे और बाक़ी चालक दल के लोग. 23 देशों के लोग थे जो निकले इस ट्रिप पर.
  • ऐंटार्कटिका जाना था, फॉकलैंड आइलैंड्स जाना था, साउथ जॉर्जिया नाम के ख़ूबसूरत टापू पर जाना था, त्रिस्तान दा कुन्या जाना था. ऐसे दूर-दराज़ के द्वीप देखने ये लोग जा रहे थे.
  • लेकिन 6 अप्रैल को क्या हुआ कि नेदरलैंड्स के एक 70 साल के यात्री को बुख़ार आया, सिरदर्द हुआ, पेट भी ख़राब हो गया. जहाज़ बीच समुद्र में था. डॉक्टर होते हैं इन क्रूज़ जहाज़ों पर. तो डॉक्टर ने इलाज शुरू किया, लेकिन यात्री की हालत बिगड़ती चली गई.
  • और 11 अप्रैल को नेदरलैंड्स के 70 साल के उस यात्री को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी और तबीयत ऐसी बिगड़ी कि उनकी मौत हो गई.
  • ख़बर फैली तो सब लोग घबरा गए. लेकिन ये तो पता नहीं था कि तबीयत किस वजह से ख़राब हुई थी उन यात्री की. और जहाज़ पर कोई लैब टेस्ट की व्यवस्था तो थी नहीं.
(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

एक-एक कर ख़राब होने लगी सबकी तबीयत

क्रूज़ कंपनी ने कहा कि प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई है. उनके शव को फ़्रीज़र में रखा गया ताकि जब अगला ऐसा पड़ाव आए जहां से वापस किसी बड़े देश की तरफ़ जाया जा सके तो वहां शव को और उनकी पत्नी जो उनके साथ थीं उनको उतारा जा सके. जहाज़ आगे बढ़ता रहा. लेकिन लोगों में डर बढ़ता भी गया. कुछ लोगों को लगा कि उनकी भी तबीयत कुछ ठीक नहीं है. लेकिन ये भी लगा कि हो सकता है वहम हो रहा है.

चूहों वाला वायरस और क्रूज़ पर लाशें, आखिर MV हॉन्डियस पर क्या हुआ? (Photo : AP)

ख़ैर, फिर जहाज़ त्रिस्तान दा कुन्या द्वीप पर रुका. कुछ नए यात्री वहां से चढ़े. लेकिन जहाज़ पर मौत की खबर फैल रही थी. 24 अप्रैल को जहाज़ सेंट हेलीना द्वीप पर रुका. यहां मृतक के शव को उतारा गया. और उनकी पत्नी भी उतर गईं. पत्नी 69 साल की थी. और जहाज़ पर एक ब्रिटिश यात्री भी बीमार पड़ गया.

ये हुआ तो कई लोग घबरा गए. उन्होंने भी आगे जाने का प्लैन कैंसल कर दिया और कुछ को शायद सेंट हेलीना तक ही जाना था, तो ख़बर ये है कि वहां पर कोई 30-40 यात्री उतर गए जहाज़ से. क्योंकि सेंट हेलीना से बाक़ी दुनिया का कनेक्शन थोड़ा बहतर है और कई देशों तक की उड़ानें हैं सेट हेलीने से तो अमेरिका के, ब्रिटेन के, स्विट्जरलैंड के, जर्मनी के कोई 30-40 लोग वहां उतर गए.

जिस यात्री की मौत हो गई थी समुद्री जहाज़ पर उनकी 69 साल की पत्नी ने 25 अप्रैल को सेंट हेलीना से दक्षिण अफ़्रीका के जोहानेसबर्ग जाने के लिए फ़्लाइट पकड़ी. लेकिन वो प्लेन में ही बेहोश हो गईं. जोहानेसबर्ग प्लेन पहुंचा. जल्दी से उनको अस्पताल ले जाया गया. लेकिन अगले दिन यानी 26 अप्रैल को उनकी वहां मौत हो गई. वहां अस्पताल में टेस्ट किया गया तो उनमें एक ख़तरनाक वायरस पाया गया. हंटावायरस.

Hantavirus: हंटावायरस क्या चीज़ है?

एकदम से हड़कंप मच गया. क्योंकि ये ऐसा वायरस है जो चूहों से फैलता है. चूहों के पेशाब में, मल में या लार में होता है. इंसान चूहे के मल-मूत्र को छू ले या उसके संपर्क में आई धूल उड़कर सांस में चली जाए तो इंसान में जा सकता है.

  • फेफड़ों में सूजन आ सकती है, किडनी ख़राब हो सकती है. लक्षण इसके ऐसे होते हैं कि बुख़ार हो सकता है, सिरदर्द हो सकता है, मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है, खांसी हो सकती है. और बीमारी गंभीर हो जाए तो सांस फूलने लगती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है.
(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

इसकी कोई दवा नहीं बनी है. क्योंकि ये बहुत ही मुश्किल से इंसानों में कभी पहुंचता है. और आमतौर पर ये एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता.

  • हड़कंप इसलिए मचा क्योंकि जिस व्यक्ति की पहले जहाज़ में मौत हुई थी, उसकी पत्नी की जब जोहानेसबर्ग के अस्पताल में मौत हुई तो ये पाया गया कि उनमें जो हंटावायरस मिला वो ऐसा वाला है जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है अगर बहुत क़रीब से किसी का संपर्क हो जाए तो.
  • यानी ये माना गया कि इनके तो पति की भी मौत हुई थी तो वो भी शायद हंटावायरस के इस वाले स्ट्रेन से हुई होगी जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. और ये तो उनकी पत्नी ही थीं, तो इनका तो उनसे काफ़ी क़रीब से संपर्क हुआ ही होगा. और ये दोनों थे उस क्रूज़ जहाज़ पर.
  • हंटावायरस भले ही चूहों से किसी इंसान में आ गया हो, लेकिन ये वो वाला स्ट्रेन आया था जो इंसान से इंसान में फैल सकता है तो ये लोग तो वहां जहाज़ पर कई लोगों के संपर्क में आए होंगे. फिर तो ये ख़बर फैल गई. लेकिन हड़कंप और तेज़ हो गया 2 मई को.
  • 2 मई को जहाज़ पर एक और यात्री की मौत हो गई. वो जर्मनी का नागरिक था, उसकी भी जहाज़ पर तबीयत बिगड़ गई और फिर मौत हो गई. अब तो जहाज़ पर पैनिक मच गया.
  • 3 मई को जहाज़ अफ़्रीका के केप वर्ड पहुंचा. लेकिन ख़बर तो फैल चुकी थी इस जहाज़ MV हॉन्डियस के बारे में. केप वर्ड के अधिकारियों ने जहाज़ को अपने यहां उतरने ही नहीं दिया. डर के मारे जहाज़ को समुद्र में ही रोक लिया गया.

Hantavirus: क्रूज़ पर सवार हर इंसान हो सकता ‘कैरियर’

दुनिया हिल गई. WHO यानी UN के विश्व स्वास्थ्य संगठन को 2 मई को खबर मिली. लैब टेस्ट में पुष्टि हुई कि ये ‘ऐंडीज़’ हंटावायरस है. यानी वो हंटावायरस जो चूहों में होता है और ये वाला ऐंडीज़ हंटावायरस एक बार चूहों से इंसान में आ जाए तो फिर इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. यानी जहाज़ में जो सब लोग हैं उन सब पर ख़तरा था. लेकिन सबसे बडा ख़तरा कौनसा था?

सबसे बड़ा ख़तरा था कि 30-40 यात्री तो जहाज़ से सेंट हेलीना में ही उतर गए थे. वो कहां गए? वो उतरकर किन-किन लोगों के संपर्क में आए होंगे? किस-किस को ट्रैक करेंगे. ख़ैर, पहले तो उन लोगों को ट्रैक करने का काम शुरू हुआ जो जहाज़ से उतर कर अपने-अपने घर निकल लिए थे बीच रास्ते में डर कर.

WHO की चेतावनी और 23 देशों में खौफ, क्या फिर कैद होने वाली है दुनिया? (Photo : AP)

ये 12-13 देशों के लोग थे. यानी ये उन सब जगहों की तरफ़ निकल गए थे. इनमें अमेरिका के थे, ब्रिटेन के थे, स्विट्जरलैंड के थे, जर्मनी के थे, नेदरलैंड्स के थे, सिंगापुर के थे, कनाडा के थे. सबको ट्रैक किया गया. इनमें कुछ लोग घर पहुँचकर अपने डॉक्टर के पास गए तो वहां उनको ट्रैक किया गया. कुछ को स्वास्थ्य अधिकारियों ने ढूँढ लिया.

इनमें एक स्विस यात्री घर पहुंचने के बाद हंटावायरस पॉजिटिव पाया गया. उसको तुरंत सबसे अलग कर के निगरानी में रख लिया गया. अमेरिका के कुछ राज्यों में 2 से 6 यात्रियों की निगरानी हो रही है ऐसी ख़बरें हैं. बता रहे हैं वो ठीक हैं, उनमें कोई लक्षण नहीं मिले हैं.

(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

ब्रिटेन में दो लोगों ने खुद घर पहुँचकर अपने आप को सेल्फ-आइसोलेशन में रखा हुआ है. अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य विभाग सभी को ट्रैक कर रहे हैं और कहा जा रहा है कि 30 से 60 दिन तक, यानी एक से दो महीने तक सबको निगरानी में रखा जाएगा. और जो जहाज़ पर हैं उनकी तो सांसें अटकी ही हुई हैं. जहाज़ केप वर्ड में तो उतरने नहीं दिया गया.

तो जहाज़ स्पेन के कैनरी आइलैंड्स की तरफ़ निकल पड़ा. वहां यात्रियों को उतार कर पूरे जहाज़ को सैनिटाइज़ करने का प्लैन है. अब तक 8 मामले आ चुके हैं जिनमें 5 में हंटावायरस होना कन्फर्म हो चुका है, पुष्टि हो चुके है, 3 मामले और हैं जो संदिग्ध है. 3 मौतें हो चुकी हैं, एक व्यक्ति दक्षिण अफ़्रीका में ICU में है.

जो 30-40 यात्री पहले उतर चुके थे, वो निगरानी में हैं. जहाज़ पर बाकी लोग कैबिन में बंद बैठे हैं. जो डॉक्टर जहाज़ पर इलाज कर रहे थे वो ख़ुद भी बीमार बताए जा रहे हैं. तीन और मरीज़ों को 6 मई को यूरोप के अस्पतालों में भेजा गया. हालांकि WHO के कहना है कि पैनिक करने की ज़रूरत बिलकुल नहीं है.

आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम. जो लोग जहाज़ पर नहीं थे, उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन दुनिया अलर्ट तो हो ही गई. ये भले ही कोरोना की तरह फैलने वाला वायरस ना हो लेकिन दूध की जली है पूरी दुनिया, छाछ भी फूंक-फूंक पर पीने को मजबूर है.

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ऐंटार्कटिका गए रईसों को हंटावायरस ने घेरा. (Photo : AP)

अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने नियम बनाए हुए हैं, कोई सरकार तो है नहीं वहां किसी देश की. ज्यादा लोग एक जगह पर नहीं उतर सकते वहां पर. पर्यावरण को ख़तरा किसी भी तरह से ना हो इसलिए नियम बनाए हुए हैं. क्योंकि अब वो दुनिया का सबसे साफ इलाक़ा बचा है. सबसे साफ़, सबसे ठंडा और एक तरह से सबसे अनोखा. तो पेंगुइन के साथ फोटो खिंचवाने, बर्फ पर चलने, व्हेल देखने, बर्फ़ के पहाड़ देखने, ये सब करने जाते हैं रईस लोग वहां. कहते हैं कि सपनों जैसा अनुभव होता है. तो ऐसा ही ट्रिप शुरू हुआ 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से. जहाज़ था MV हॉन्डियस.

ऐंटार्कटिका क्रूज़ पर कैसे हुआ हंटावायरस का हमला?

  • MV हॉन्डियस 1 अप्रैल को रवाना हुआ उशुआइया से 147 लोगों के साथ. 147 में 88 यात्री थे और बाक़ी चालक दल के लोग. 23 देशों के लोग थे जो निकले इस ट्रिप पर.
  • ऐंटार्कटिका जाना था, फॉकलैंड आइलैंड्स जाना था, साउथ जॉर्जिया नाम के ख़ूबसूरत टापू पर जाना था, त्रिस्तान दा कुन्या जाना था. ऐसे दूर-दराज़ के द्वीप देखने ये लोग जा रहे थे.
  • लेकिन 6 अप्रैल को क्या हुआ कि नेदरलैंड्स के एक 70 साल के यात्री को बुख़ार आया, सिरदर्द हुआ, पेट भी ख़राब हो गया. जहाज़ बीच समुद्र में था. डॉक्टर होते हैं इन क्रूज़ जहाज़ों पर. तो डॉक्टर ने इलाज शुरू किया, लेकिन यात्री की हालत बिगड़ती चली गई.
  • और 11 अप्रैल को नेदरलैंड्स के 70 साल के उस यात्री को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी और तबीयत ऐसी बिगड़ी कि उनकी मौत हो गई.
  • ख़बर फैली तो सब लोग घबरा गए. लेकिन ये तो पता नहीं था कि तबीयत किस वजह से ख़राब हुई थी उन यात्री की. और जहाज़ पर कोई लैब टेस्ट की व्यवस्था तो थी नहीं.
(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

एक-एक कर ख़राब होने लगी सबकी तबीयत

क्रूज़ कंपनी ने कहा कि प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई है. उनके शव को फ़्रीज़र में रखा गया ताकि जब अगला ऐसा पड़ाव आए जहां से वापस किसी बड़े देश की तरफ़ जाया जा सके तो वहां शव को और उनकी पत्नी जो उनके साथ थीं उनको उतारा जा सके. जहाज़ आगे बढ़ता रहा. लेकिन लोगों में डर बढ़ता भी गया. कुछ लोगों को लगा कि उनकी भी तबीयत कुछ ठीक नहीं है. लेकिन ये भी लगा कि हो सकता है वहम हो रहा है.

चूहों वाला वायरस और क्रूज़ पर लाशें, आखिर MV हॉन्डियस पर क्या हुआ? (Photo : AP)

ख़ैर, फिर जहाज़ त्रिस्तान दा कुन्या द्वीप पर रुका. कुछ नए यात्री वहां से चढ़े. लेकिन जहाज़ पर मौत की खबर फैल रही थी. 24 अप्रैल को जहाज़ सेंट हेलीना द्वीप पर रुका. यहां मृतक के शव को उतारा गया. और उनकी पत्नी भी उतर गईं. पत्नी 69 साल की थी. और जहाज़ पर एक ब्रिटिश यात्री भी बीमार पड़ गया.

ये हुआ तो कई लोग घबरा गए. उन्होंने भी आगे जाने का प्लैन कैंसल कर दिया और कुछ को शायद सेंट हेलीना तक ही जाना था, तो ख़बर ये है कि वहां पर कोई 30-40 यात्री उतर गए जहाज़ से. क्योंकि सेंट हेलीना से बाक़ी दुनिया का कनेक्शन थोड़ा बहतर है और कई देशों तक की उड़ानें हैं सेट हेलीने से तो अमेरिका के, ब्रिटेन के, स्विट्जरलैंड के, जर्मनी के कोई 30-40 लोग वहां उतर गए.

जिस यात्री की मौत हो गई थी समुद्री जहाज़ पर उनकी 69 साल की पत्नी ने 25 अप्रैल को सेंट हेलीना से दक्षिण अफ़्रीका के जोहानेसबर्ग जाने के लिए फ़्लाइट पकड़ी. लेकिन वो प्लेन में ही बेहोश हो गईं. जोहानेसबर्ग प्लेन पहुंचा. जल्दी से उनको अस्पताल ले जाया गया. लेकिन अगले दिन यानी 26 अप्रैल को उनकी वहां मौत हो गई. वहां अस्पताल में टेस्ट किया गया तो उनमें एक ख़तरनाक वायरस पाया गया. हंटावायरस.

Hantavirus: हंटावायरस क्या चीज़ है?

एकदम से हड़कंप मच गया. क्योंकि ये ऐसा वायरस है जो चूहों से फैलता है. चूहों के पेशाब में, मल में या लार में होता है. इंसान चूहे के मल-मूत्र को छू ले या उसके संपर्क में आई धूल उड़कर सांस में चली जाए तो इंसान में जा सकता है.

  • फेफड़ों में सूजन आ सकती है, किडनी ख़राब हो सकती है. लक्षण इसके ऐसे होते हैं कि बुख़ार हो सकता है, सिरदर्द हो सकता है, मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है, खांसी हो सकती है. और बीमारी गंभीर हो जाए तो सांस फूलने लगती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है.
(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

इसकी कोई दवा नहीं बनी है. क्योंकि ये बहुत ही मुश्किल से इंसानों में कभी पहुंचता है. और आमतौर पर ये एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता.

  • हड़कंप इसलिए मचा क्योंकि जिस व्यक्ति की पहले जहाज़ में मौत हुई थी, उसकी पत्नी की जब जोहानेसबर्ग के अस्पताल में मौत हुई तो ये पाया गया कि उनमें जो हंटावायरस मिला वो ऐसा वाला है जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है अगर बहुत क़रीब से किसी का संपर्क हो जाए तो.
  • यानी ये माना गया कि इनके तो पति की भी मौत हुई थी तो वो भी शायद हंटावायरस के इस वाले स्ट्रेन से हुई होगी जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. और ये तो उनकी पत्नी ही थीं, तो इनका तो उनसे काफ़ी क़रीब से संपर्क हुआ ही होगा. और ये दोनों थे उस क्रूज़ जहाज़ पर.
  • हंटावायरस भले ही चूहों से किसी इंसान में आ गया हो, लेकिन ये वो वाला स्ट्रेन आया था जो इंसान से इंसान में फैल सकता है तो ये लोग तो वहां जहाज़ पर कई लोगों के संपर्क में आए होंगे. फिर तो ये ख़बर फैल गई. लेकिन हड़कंप और तेज़ हो गया 2 मई को.
  • 2 मई को जहाज़ पर एक और यात्री की मौत हो गई. वो जर्मनी का नागरिक था, उसकी भी जहाज़ पर तबीयत बिगड़ गई और फिर मौत हो गई. अब तो जहाज़ पर पैनिक मच गया.
  • 3 मई को जहाज़ अफ़्रीका के केप वर्ड पहुंचा. लेकिन ख़बर तो फैल चुकी थी इस जहाज़ MV हॉन्डियस के बारे में. केप वर्ड के अधिकारियों ने जहाज़ को अपने यहां उतरने ही नहीं दिया. डर के मारे जहाज़ को समुद्र में ही रोक लिया गया.

Hantavirus: क्रूज़ पर सवार हर इंसान हो सकता ‘कैरियर’

दुनिया हिल गई. WHO यानी UN के विश्व स्वास्थ्य संगठन को 2 मई को खबर मिली. लैब टेस्ट में पुष्टि हुई कि ये ‘ऐंडीज़’ हंटावायरस है. यानी वो हंटावायरस जो चूहों में होता है और ये वाला ऐंडीज़ हंटावायरस एक बार चूहों से इंसान में आ जाए तो फिर इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. यानी जहाज़ में जो सब लोग हैं उन सब पर ख़तरा था. लेकिन सबसे बडा ख़तरा कौनसा था?

सबसे बड़ा ख़तरा था कि 30-40 यात्री तो जहाज़ से सेंट हेलीना में ही उतर गए थे. वो कहां गए? वो उतरकर किन-किन लोगों के संपर्क में आए होंगे? किस-किस को ट्रैक करेंगे. ख़ैर, पहले तो उन लोगों को ट्रैक करने का काम शुरू हुआ जो जहाज़ से उतर कर अपने-अपने घर निकल लिए थे बीच रास्ते में डर कर.

WHO की चेतावनी और 23 देशों में खौफ, क्या फिर कैद होने वाली है दुनिया? (Photo : AP)

ये 12-13 देशों के लोग थे. यानी ये उन सब जगहों की तरफ़ निकल गए थे. इनमें अमेरिका के थे, ब्रिटेन के थे, स्विट्जरलैंड के थे, जर्मनी के थे, नेदरलैंड्स के थे, सिंगापुर के थे, कनाडा के थे. सबको ट्रैक किया गया. इनमें कुछ लोग घर पहुँचकर अपने डॉक्टर के पास गए तो वहां उनको ट्रैक किया गया. कुछ को स्वास्थ्य अधिकारियों ने ढूँढ लिया.

इनमें एक स्विस यात्री घर पहुंचने के बाद हंटावायरस पॉजिटिव पाया गया. उसको तुरंत सबसे अलग कर के निगरानी में रख लिया गया. अमेरिका के कुछ राज्यों में 2 से 6 यात्रियों की निगरानी हो रही है ऐसी ख़बरें हैं. बता रहे हैं वो ठीक हैं, उनमें कोई लक्षण नहीं मिले हैं.

(AI के इस्तेमाल से बना इंफोग्राफिक्स)

ब्रिटेन में दो लोगों ने खुद घर पहुँचकर अपने आप को सेल्फ-आइसोलेशन में रखा हुआ है. अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य विभाग सभी को ट्रैक कर रहे हैं और कहा जा रहा है कि 30 से 60 दिन तक, यानी एक से दो महीने तक सबको निगरानी में रखा जाएगा. और जो जहाज़ पर हैं उनकी तो सांसें अटकी ही हुई हैं. जहाज़ केप वर्ड में तो उतरने नहीं दिया गया.

तो जहाज़ स्पेन के कैनरी आइलैंड्स की तरफ़ निकल पड़ा. वहां यात्रियों को उतार कर पूरे जहाज़ को सैनिटाइज़ करने का प्लैन है. अब तक 8 मामले आ चुके हैं जिनमें 5 में हंटावायरस होना कन्फर्म हो चुका है, पुष्टि हो चुके है, 3 मामले और हैं जो संदिग्ध है. 3 मौतें हो चुकी हैं, एक व्यक्ति दक्षिण अफ़्रीका में ICU में है.

जो 30-40 यात्री पहले उतर चुके थे, वो निगरानी में हैं. जहाज़ पर बाकी लोग कैबिन में बंद बैठे हैं. जो डॉक्टर जहाज़ पर इलाज कर रहे थे वो ख़ुद भी बीमार बताए जा रहे हैं. तीन और मरीज़ों को 6 मई को यूरोप के अस्पतालों में भेजा गया. हालांकि WHO के कहना है कि पैनिक करने की ज़रूरत बिलकुल नहीं है.

आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम. जो लोग जहाज़ पर नहीं थे, उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन दुनिया अलर्ट तो हो ही गई. ये भले ही कोरोना की तरह फैलने वाला वायरस ना हो लेकिन दूध की जली है पूरी दुनिया, छाछ भी फूंक-फूंक पर पीने को मजबूर है.

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