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Mandla Road Work Danger | Poles, Trees Left Mid-Street

Mandla Road Work Danger | Poles, Trees Left Mid-Street

मंडला शहर में नगर पालिका की ओर से करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इसी काम के तहत नेहरू स्मारक से बिंझिया तिराहा तक 94 लाख रुपए की लागत से 800 मीटर लंबी सड़क का डामरीकरण और चौड़ीकरण किया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य

.

सड़क बनाते समय रास्ते में आने वाले बिजली के खंभों और पेड़ों को हटाया ही नहीं गया और उनके आसपास ही डामर बिछा दिया गया। अब ये पेड़ और खंभे सड़क के बिल्कुल बीच में आ गए हैं, जो आने-जाने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार गाड़ियों के इनसे टकराने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों ने जताई भारी नाराजगी

शहर के लोगों ने इस काम को लेकर काफी गुस्सा जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क सुरक्षित नहीं है, तो ऐसी सड़क का क्या फायदा? लोगों ने इसे जनता की जान के साथ खिलवाड़ बताया है।

पेड़ के आसपास डामरीकरण कर दिया गया है।

नगर पालिका का क्या है तर्क?

नगर पालिका के सीएमओ गजानन नाफड़े का कहना है कि बिजली कंपनी को खंभे हटाने के लिए पहले ही कह दिया गया है और इसके लिए पैसे भी जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने सफाई दी कि बारिश शुरू होने से पहले डामर का काम निपटाना जरूरी था, इसलिए काम को बीच में नहीं रोका गया।

बिजली के पोल भी नहीं हटाए गए और डामर डाल दिया गया।

बिजली के पोल भी नहीं हटाए गए और डामर डाल दिया गया।

सवाल अब भी बरकरार

अब सवाल यह उठता है कि जब तक सड़क से ये रुकावटें दूर नहीं की गईं, तब तक डामर बिछाने की इतनी जल्दी क्या थी? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? फिलहाल यह सड़क लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा मुसीबत का सबब बनी हुई है।

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मंडला शहर में नगर पालिका की ओर से करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इसी काम के तहत नेहरू स्मारक से बिंझिया तिराहा तक 94 लाख रुपए की लागत से 800 मीटर लंबी सड़क का डामरीकरण और चौड़ीकरण किया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य

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सड़क बनाते समय रास्ते में आने वाले बिजली के खंभों और पेड़ों को हटाया ही नहीं गया और उनके आसपास ही डामर बिछा दिया गया। अब ये पेड़ और खंभे सड़क के बिल्कुल बीच में आ गए हैं, जो आने-जाने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार गाड़ियों के इनसे टकराने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों ने जताई भारी नाराजगी

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पेड़ के आसपास डामरीकरण कर दिया गया है।

नगर पालिका का क्या है तर्क?

नगर पालिका के सीएमओ गजानन नाफड़े का कहना है कि बिजली कंपनी को खंभे हटाने के लिए पहले ही कह दिया गया है और इसके लिए पैसे भी जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने सफाई दी कि बारिश शुरू होने से पहले डामर का काम निपटाना जरूरी था, इसलिए काम को बीच में नहीं रोका गया।

बिजली के पोल भी नहीं हटाए गए और डामर डाल दिया गया।

बिजली के पोल भी नहीं हटाए गए और डामर डाल दिया गया।

सवाल अब भी बरकरार

अब सवाल यह उठता है कि जब तक सड़क से ये रुकावटें दूर नहीं की गईं, तब तक डामर बिछाने की इतनी जल्दी क्या थी? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? फिलहाल यह सड़क लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा मुसीबत का सबब बनी हुई है।

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