Monday, 06 Apr 2026 | 09:16 PM

Trending :

EXCLUSIVE

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

29 जनवरी 2026… असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘मिया मुस्लिम को किसी भी तरह की चिंता मत करो… अगर उन्हें परेशानी होगी तो वे असमंजस छोड़ देंगे…’ असम के विधानसभा चुनाव में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में सीएम हिमंत का यह बयान जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। हालाँकि, इसकी शुरुआत 2023 में डिलिम इंडस्ट्री से हुई थी। यानी पूरे राज्य में 34 मुस्लिम मुस्लिम पवित्र स्थान, जो नतीजे देता है कि पलटने का दम लिखा है। उन रेज़्यूमे के इलाक़े में बदलाव दिए गए हैं, जिससे अब सिर्फ़ 20-22 रेज़्यूमे पर मुस्लिम बचे हैं। तो क्या असम में मुस्लिम नाम का पत्ता कट जाएगा? व्याख्याताओं में शामिल हैं…

प्रश्न 1: असम में मुस्लिम समुदाय की स्थायी संख्या क्या है और 2026 में क्या घटेगी?
उत्तर उत्तर: भारत के असम राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें कुल 31 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। इनमें 16 कांग्रेस के थे और 15 ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एआईयूडीएफ के थे। यह संख्या नतीजे पलटने की ताकत लिखी थी, लेकिन सिर्फ 5 साल बाद शीशे बदल दिए गए।

अब 9 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में मुस्लिम बिश्राम की संख्या 22 रहने का अनुमान है, क्योंकि 2023 में असम में डिलम उद्योग हुआ था। आसान शब्दों में कोनाडो को 126 आदर्श वाक्यों में बदल दिया गया था। इससे मुस्लिम मुसलमानों को वोटों का बड़ा नुकसान होगा। 2011 के अनुसार, असम में मुस्लिम आबादी 34% है, लेकिन प्रतिनिधित्व पहले से ही कम था, अब और घटने वाला है। यानी असम में कोई बड़ा मुस्लिम नेता नहीं है.

प्रश्न 2: असम में डिलिमिटन उद्योग क्या है और असम में क्या हुआ?
उत्तर उत्तर: असम में डिलम वास्तुशिल्प से 126 विधानसभाएं तो चलती ही रहीं, लेकिन उनका अंत बदल दिया गया। सबसे ज्यादा प्रभावशाली मुस्लिम बहुल अरब पर हुआ। पहले 35 प्रमुख मुस्लिम बहुमत वाले, अब ये समूह करीब 20 रह गए हैं। कई मुस्लिम बहुल एशिया में हिंदू बहुल क्षेत्र शामिल हो गए, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र का प्रभाव टूट गया।

  • बारपेटा जिले में मुस्लिम बहुल 8 समुदाय 6 हो गए।
  • बराक घाटी की 15 यात्रा 13 राहें।
  • गोलापारा वेस्ट के चर्च एसटी होटल हो गए, जहां सबसे पहले मुस्लिम विधायक जीते थे।
  • जानिया, बाघबर और चेंगा जैसे मुस्लिम क्षेत्र को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ जोड़ा गया।
  • धुबरी और बिलासीपारा दो मुस्लिम बहुल तीर्थस्थलों में से एक में मर्ज कर दिया गया।

भाषाएँ इसे ‘गेरीमैंडरिंग’ (सीटों की संख्या) बता रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल 35 को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ समग्र मुस्लिम वोट बनाया गया।’ सीपीआई (एम) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने कहा, ‘हिंदू इलाकों को मुस्लिमों से जोड़ा गया और मुस्लिम मतदाताओं को हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्र में विभाजित किया गया।’

प्रश्न 3: इस बदलाव का क्या असर होगा?
उत्तर उत्तर: पॉलिटिकल विशेषज्ञ रशीद किदवई का मानना ​​है कि मुस्लिम वोटरों का ‘पॉलिटिकल फुटप्रिंट’ करीब 30% कम हो गया है। पहले मुस्लिम 30-35 पर क्लासिक थे, अब सिर्फ 20-22 पर। मुस्लिम प्रतिनिधित्व पहले से कम था, अब और घटेगा। अगर मुस्लिम नेता 22 रह गए तो उनकी सामूहिक ताकतें और ताकतें हो जाएंगी।

असम के मुस्लिम (खासकर मिया या बैलर मूल के) में लंबे समय से कोई एक मजबूत, प्रतिष्ठित नेता नहीं पाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव तक AIUDF के बदरुद्दीन अजमल जैसे नेता थे, लेकिन उन्होंने अपनी सीट गंवा दी। अब ना तो कोई नया चेहरा है जो पूरी कम्यूनिटी की बात रख सके, ना ही मुस्लिम मुस्लिम लीडर्स को पाल रही हैं।

बदरुद्दीन अजमल 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव हारे थे

रशीद किदवई ने कहा, ’31 मुस्लिम अपराधी तो हैं, लेकिन वे अपने-अपने क्षेत्र तक सीमित हैं। बैस्ट, पुशबैक और वोटर लिस्ट से नाम कटना जैसी बड़ी हस्तियों पर कोई सामूहिक आवाज नहीं उठती। कांग्रेस के मुस्लिम नेता भी चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बोलने से वोट कम हो जायेंगे। परिणाम? मुस्लिम समुदाय ‘राजनीतिक नो-मैनस लैंड’ में फंस गया है।’

सवाल 4: बीजेपी की रणनीति और मिया मुसलमानों का डर क्या है?
उत्तर उत्तर: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बार-बार कहा, ‘मिया को वोट की जरूरत नहीं।’ यानि बीजेपी मुस्लिम मुस्लिम जनता का विरोध कर रही है। सीएम सरमा ने ये भी कहा, ‘मिया मुसलमानों को किसी भी तरह से परेशान करो.’ अगर वे परेशान होंगे तो असम ठीक हो जाएगा।’ मार्च 2026 में बारपेटा में उन्होंने कहा था, ‘पिछली बार कुछ टांगें तोड़ें, इस बार मार्जिन टूट गया।’

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कई बार आदर्शों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कई बार आदर्शों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं

इससे साफ है कि बीजेपी इस बार 89वीं बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं निकलेगी। बीजेपी ने अपना ‘मुस्लिम वोट’ का बोझ सहयोगी एजीपी पर डाला है। एजीपी ने 26 पर 13 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इससे बीजेपी की यूक्रेनी वाली छवि बनी रहेगी। एजीपी प्रवक्ता कस्तूरी बोरुआ ने कहा, ‘बीजेपी घुसपैठियों और पार्टी के खिलाफ है, लेकिन यह बजरंग मुसलमानों के खिलाफ नहीं है।’

वहीं, 2021 में कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन ने 31 मुस्लिम विधायक जीते थे, लेकिन इस बार कोई गठबंधन नहीं. मुस्लिम कांग्रेस अस्वीकृत है लेकिन अस्वीकृत है। एआईयूडीएफ अकेले लड़ रही है, लेकिन उसकी प्राथमिकता घटी है। वोट बंटाने से भी मुस्लिम हितैषी का चांस कम हो रहा है।

प्रश्न 5: तो क्या असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता साफ होगा?
उत्तर उत्तर: नहीं, असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता बिल्कुल साफ नहीं होगा। रशीद किदवई कहते हैं, ‘2026 के चुनाव में मुस्लिम समुदाय की संख्या 31 से 20-23 के आसपास रहने की संभावना है या अधिकतम 22 राह हो सकती है। पूर्णतया समाप्त (शून्य) होने की कोई छूट नहीं है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं

April 5, 2026/
7:52 am

बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं...

Messi Hits 900 Goals, Inter Miami Out of CONCACAF Cup

March 19, 2026/
9:34 am

1 घंटे पहले कॉपी लिंक अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर और इंटर मियामी के कप्तान लियोनेल मेसी आधिकारिक मैचों में 900...

पत्नी के सामने पति को पीटा, अपहरण का प्रयास:वारंटी पिता की गिरफ्तारी में मुखबिरी का था शक, सामने आया मारपीट का वीडियो

March 16, 2026/
12:09 am

ग्वालियर में पुलिस मुखबिरी के शक के चलते बाइक सवार तीन युवकों ने एक व्यापारी की उसकी पत्नी के सामने...

इंडक्शन-कुकटॉप को इस्तेमाल के बाद तुरंत बंद क्यों नहीं करना चाहिए, जानें एलपीजी संकट में इंडक्शन कुकटॉप के इस्तेमाल का सही तरीका

March 17, 2026/
9:34 am

इन एवेरिट्स कुकिंग टिप्स | छवि: एआई हिंदी में इंडक्शन का उपयोग कैसे करें: इनसेट गैस की कमी के कारण...

पन्ना में अब सरकार चलाएगी शराब दुकानें:ठेकेदार नहीं मिलने पर आबकारी अधिकारी संभालेंगे कमान; आरक्षक-नगर सैनिक बनेंगे सेल्समैन

April 2, 2026/
9:25 pm

मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति के तहत पन्ना जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो...

उत्तराखंड के राज्यपाल के हेलिकॉप्टर में आई तकनीकी खराबी:श्रीनगर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, बजट सत्र में शामिल होने गैरसैंण जा रहे थे

March 8, 2026/
2:29 pm

उत्तराखंड के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हेलिकॉप्टर में उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आ गई। राज्यपाल गैरसैंण...

कॉफ़ी हेयर मास्क

March 22, 2026/
11:05 pm

कॉफ़ी हेयर मास्क | छवि: फ्रीपिकमेटा एआई कॉफ़ी हेयर मास्क: बालों का झड़ना, डैंड्रफ और रूखापन एक आम समस्या बन...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

समझाया: असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक क्या हैं? कैसे 30-35 से 20-22 मंत्रियों तक प्रतिनिधि हो सकते हैं, सिद्धांतकारों से

29 जनवरी 2026… असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘मिया मुस्लिम को किसी भी तरह की चिंता मत करो… अगर उन्हें परेशानी होगी तो वे असमंजस छोड़ देंगे…’ असम के विधानसभा चुनाव में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में सीएम हिमंत का यह बयान जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। हालाँकि, इसकी शुरुआत 2023 में डिलिम इंडस्ट्री से हुई थी। यानी पूरे राज्य में 34 मुस्लिम मुस्लिम पवित्र स्थान, जो नतीजे देता है कि पलटने का दम लिखा है। उन रेज़्यूमे के इलाक़े में बदलाव दिए गए हैं, जिससे अब सिर्फ़ 20-22 रेज़्यूमे पर मुस्लिम बचे हैं। तो क्या असम में मुस्लिम नाम का पत्ता कट जाएगा? व्याख्याताओं में शामिल हैं…

प्रश्न 1: असम में मुस्लिम समुदाय की स्थायी संख्या क्या है और 2026 में क्या घटेगी?
उत्तर उत्तर: भारत के असम राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें कुल 31 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। इनमें 16 कांग्रेस के थे और 15 ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एआईयूडीएफ के थे। यह संख्या नतीजे पलटने की ताकत लिखी थी, लेकिन सिर्फ 5 साल बाद शीशे बदल दिए गए।

अब 9 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में मुस्लिम बिश्राम की संख्या 22 रहने का अनुमान है, क्योंकि 2023 में असम में डिलम उद्योग हुआ था। आसान शब्दों में कोनाडो को 126 आदर्श वाक्यों में बदल दिया गया था। इससे मुस्लिम मुसलमानों को वोटों का बड़ा नुकसान होगा। 2011 के अनुसार, असम में मुस्लिम आबादी 34% है, लेकिन प्रतिनिधित्व पहले से ही कम था, अब और घटने वाला है। यानी असम में कोई बड़ा मुस्लिम नेता नहीं है.

प्रश्न 2: असम में डिलिमिटन उद्योग क्या है और असम में क्या हुआ?
उत्तर उत्तर: असम में डिलम वास्तुशिल्प से 126 विधानसभाएं तो चलती ही रहीं, लेकिन उनका अंत बदल दिया गया। सबसे ज्यादा प्रभावशाली मुस्लिम बहुल अरब पर हुआ। पहले 35 प्रमुख मुस्लिम बहुमत वाले, अब ये समूह करीब 20 रह गए हैं। कई मुस्लिम बहुल एशिया में हिंदू बहुल क्षेत्र शामिल हो गए, जिससे मुस्लिम बहुल क्षेत्र का प्रभाव टूट गया।

  • बारपेटा जिले में मुस्लिम बहुल 8 समुदाय 6 हो गए।
  • बराक घाटी की 15 यात्रा 13 राहें।
  • गोलापारा वेस्ट के चर्च एसटी होटल हो गए, जहां सबसे पहले मुस्लिम विधायक जीते थे।
  • जानिया, बाघबर और चेंगा जैसे मुस्लिम क्षेत्र को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ जोड़ा गया।
  • धुबरी और बिलासीपारा दो मुस्लिम बहुल तीर्थस्थलों में से एक में मर्ज कर दिया गया।

भाषाएँ इसे ‘गेरीमैंडरिंग’ (सीटों की संख्या) बता रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल 35 को हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ समग्र मुस्लिम वोट बनाया गया।’ सीपीआई (एम) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने कहा, ‘हिंदू इलाकों को मुस्लिमों से जोड़ा गया और मुस्लिम मतदाताओं को हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्र में विभाजित किया गया।’

प्रश्न 3: इस बदलाव का क्या असर होगा?
उत्तर उत्तर: पॉलिटिकल विशेषज्ञ रशीद किदवई का मानना ​​है कि मुस्लिम वोटरों का ‘पॉलिटिकल फुटप्रिंट’ करीब 30% कम हो गया है। पहले मुस्लिम 30-35 पर क्लासिक थे, अब सिर्फ 20-22 पर। मुस्लिम प्रतिनिधित्व पहले से कम था, अब और घटेगा। अगर मुस्लिम नेता 22 रह गए तो उनकी सामूहिक ताकतें और ताकतें हो जाएंगी।

असम के मुस्लिम (खासकर मिया या बैलर मूल के) में लंबे समय से कोई एक मजबूत, प्रतिष्ठित नेता नहीं पाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव तक AIUDF के बदरुद्दीन अजमल जैसे नेता थे, लेकिन उन्होंने अपनी सीट गंवा दी। अब ना तो कोई नया चेहरा है जो पूरी कम्यूनिटी की बात रख सके, ना ही मुस्लिम मुस्लिम लीडर्स को पाल रही हैं।

बदरुद्दीन अजमल 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव हारे थे

रशीद किदवई ने कहा, ’31 मुस्लिम अपराधी तो हैं, लेकिन वे अपने-अपने क्षेत्र तक सीमित हैं। बैस्ट, पुशबैक और वोटर लिस्ट से नाम कटना जैसी बड़ी हस्तियों पर कोई सामूहिक आवाज नहीं उठती। कांग्रेस के मुस्लिम नेता भी चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बोलने से वोट कम हो जायेंगे। परिणाम? मुस्लिम समुदाय ‘राजनीतिक नो-मैनस लैंड’ में फंस गया है।’

सवाल 4: बीजेपी की रणनीति और मिया मुसलमानों का डर क्या है?
उत्तर उत्तर: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बार-बार कहा, ‘मिया को वोट की जरूरत नहीं।’ यानि बीजेपी मुस्लिम मुस्लिम जनता का विरोध कर रही है। सीएम सरमा ने ये भी कहा, ‘मिया मुसलमानों को किसी भी तरह से परेशान करो.’ अगर वे परेशान होंगे तो असम ठीक हो जाएगा।’ मार्च 2026 में बारपेटा में उन्होंने कहा था, ‘पिछली बार कुछ टांगें तोड़ें, इस बार मार्जिन टूट गया।’

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कई बार आदर्शों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कई बार आदर्शों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं

इससे साफ है कि बीजेपी इस बार 89वीं बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं निकलेगी। बीजेपी ने अपना ‘मुस्लिम वोट’ का बोझ सहयोगी एजीपी पर डाला है। एजीपी ने 26 पर 13 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इससे बीजेपी की यूक्रेनी वाली छवि बनी रहेगी। एजीपी प्रवक्ता कस्तूरी बोरुआ ने कहा, ‘बीजेपी घुसपैठियों और पार्टी के खिलाफ है, लेकिन यह बजरंग मुसलमानों के खिलाफ नहीं है।’

वहीं, 2021 में कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन ने 31 मुस्लिम विधायक जीते थे, लेकिन इस बार कोई गठबंधन नहीं. मुस्लिम कांग्रेस अस्वीकृत है लेकिन अस्वीकृत है। एआईयूडीएफ अकेले लड़ रही है, लेकिन उसकी प्राथमिकता घटी है। वोट बंटाने से भी मुस्लिम हितैषी का चांस कम हो रहा है।

प्रश्न 5: तो क्या असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता साफ होगा?
उत्तर उत्तर: नहीं, असम से मुस्लिम रिश्ते का पत्ता बिल्कुल साफ नहीं होगा। रशीद किदवई कहते हैं, ‘2026 के चुनाव में मुस्लिम समुदाय की संख्या 31 से 20-23 के आसपास रहने की संभावना है या अधिकतम 22 राह हो सकती है। पूर्णतया समाप्त (शून्य) होने की कोई छूट नहीं है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.