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What Is 6/9 Vision Can It Improve to 6/6 | 6/9 विजन क्या होता है और क्या 6/6 तक सुधर सकता है

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6/9 Eyesight Explained: हम अपनी आंखों से इस रंग-बिरंगी दुनिया को देख पाते हैं. आंखों में जरा सी परेशानी हो जाए, तो विजन पर सीधा असर पड़ता है. आजकल लोगों की आंखें कम उम्र में ही कमजोर होने लगी हैं और बड़ी संख्या में बच्चों को भी चश्मा लगाने की जरूरत पड़ रही है. अक्सर लोग सोचते हैं कि आईसाइट कमजोर होने पर चश्मा लगाकर सब ठीक हो जाएगा, लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं होता है. अगर किसी व्यक्ति की आंखों का विजन 6/9 या उससे कम रह जाता है, तो इससे चश्मा और कॉन्टेक्ट लेंस लगाने के बाद भी आंखें नॉर्मल नहीं हो पाती हैं. आज डॉक्टर से जानेंगे कि 6/9 विजन क्या है, इसकी क्या वजह होती है और इसका इलाज क्या है.

नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि आंखों का विजन मापने के लिए दुनियाभर में स्नेलन चार्ट (Snellen Chart) का उपयोग किया जाता है. इसमें 6/6, 6/9, 6/12 जैसी संख्याएं दिखाई जाती हैं. यहां पहला नंबर 6 उस दूरी को दर्शाता है, जिससे व्यक्ति चार्ट पढ़ रहा है. यह 6 मीटर की दूरी होती है. दूसरा नंबर बताता है कि सामान्य विजन वाला व्यक्ति उसी लाइन को कितनी दूरी से पढ़ सकता है. 6/6 को सामान्य या परफेक्ट विजन माना जाता है. अगर किसी का विजन 6/9 है, तो इसका मतलब है कि वह 6 मीटर से जो देख रहा है, उसे सामान्य विजन वाला व्यक्ति 9 मीटर से साफ देख सकता है. यह हल्की कमजोर दृष्टि मानी जाती है और बड़ी संख्या में लोग इससे जूझ रहे हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या होती है 6/9 विजन की वजह?

डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 6/9 विजन अक्सर रिफ्रेक्टिव एरर जैसे मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया या एस्टीग्मेटिज्म की वजह से होता है. कुछ मामलों में यह एम्ब्लियोपिया यानी लेजी आई का संकेत भी हो सकता है. अगर चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस लगाने के बाद भी विजन 6/9 ही बनी रहे और आंख की संरचना सामान्य हो, तो इसे एम्ब्लियोपिया माना जाता है. ऐसी स्थिति में आंख और दिमाग के बीच सही समन्वय न बन पाने की संभावना रहती है. 6/9 विजन वाले लोगों को एक आंख से ब्लर विजन, गहराई का सही अंदाजा न लगा पाना, पढ़ते समय एक आंख बंद करना, आंखों में तनाव या सिरदर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं. कई बार बच्चे शिकायत नहीं करते, क्योंकि उनका दिमाग मजबूत आंख से काम चला लेता है.

एम्ब्लियोपिया का विजन से क्या है कनेक्शन?

एक्सपर्ट के अनुसार एम्ब्लियोपिया एक न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है, जिसमें बचपन के दौरान दिमाग कमजोर आंख से आने वाली धुंधली इमेज को नजरअंदाज करने लगता है और मजबूत आंख पर ज्यादा निर्भर हो जाता है. परिणामस्वरूप कमजोर आंख आलसी (Lazy Eye) बन जाती है, जबकि उसकी बनावट सामान्य हो सकती है. इसके मुख्य कारणों में भेंगापन, दोनों आंखों के नंबर में बड़ा अंतर, दोनों आंखों में ज्यादा रिफ्रैक्टिव एरर या बचपन में मोतियाबिंद जैसी रुकावट शामिल हैं. यह बच्चों में कम विजन का एक प्रमुख कारण है और लगभग 2 से 3% बच्चों को प्रभावित करता है.

क्या 6/9 विजन को 6/6 करना पॉसिबल है?

डॉक्टर तुषार ग्रोवर का कहना है कि जहां तक 6/9 विजन को 6/6 तक सुधारने की बात है, तो यह उम्र और कारण पर निर्भर करता है. 7-8 साल से कम उम्र के बच्चों में इलाज शुरू कर दिया जाए तो सुधार की संभावना बहुत अच्छी होती है और अक्सर नंबर पार्शियल 6/6 तक पहुंच सकता है. बड़े बच्चों और टीनएजर्स में सुधार कम होता है. वयस्कों में सुधार की संभावना काफी कम होती है. हालांकि कई नई टेक्नोलॉजी की मदद से इसमें कुछ हद तक सुधार हो सकता है.

क्या है 6/9 विजन का ट्रीटमेंट?

एक्सपर्ट की मानें तो 6/9 विजन के इलाज में सबसे पहला कदम सही नंबर का चश्मा लगाना है. कई मामलों में केवल चश्मे से ही 30 से 50% तक सुधार हो जाता है. इसके अलावा पैचिंग थेरेपी यानी मजबूत आंख पर रोज कुछ घंटों के लिए पट्टी लगाना, एट्रोपिन ड्रॉप्स, ब्लरिंग लेंस और नई डाइकोप्टिक या कंप्यूटर आधारित विजन थेरेपी का उपयोग किया जाता है. जल्दी पहचान और सही समय पर इलाज से 80 से 90% बच्चों में अच्छा परिणाम मिल सकता है. अगर 6/9 या उससे कम विजन पाया जाए, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, ताकि समस्या को शुरुआती चरण में ही सुधारा जा सके.

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नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि आंखों का विजन मापने के लिए दुनियाभर में स्नेलन चार्ट (Snellen Chart) का उपयोग किया जाता है. इसमें 6/6, 6/9, 6/12 जैसी संख्याएं दिखाई जाती हैं. यहां पहला नंबर 6 उस दूरी को दर्शाता है, जिससे व्यक्ति चार्ट पढ़ रहा है. यह 6 मीटर की दूरी होती है. दूसरा नंबर बताता है कि सामान्य विजन वाला व्यक्ति उसी लाइन को कितनी दूरी से पढ़ सकता है. 6/6 को सामान्य या परफेक्ट विजन माना जाता है. अगर किसी का विजन 6/9 है, तो इसका मतलब है कि वह 6 मीटर से जो देख रहा है, उसे सामान्य विजन वाला व्यक्ति 9 मीटर से साफ देख सकता है. यह हल्की कमजोर दृष्टि मानी जाती है और बड़ी संख्या में लोग इससे जूझ रहे हैं.

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क्या होती है 6/9 विजन की वजह?

डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 6/9 विजन अक्सर रिफ्रेक्टिव एरर जैसे मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया या एस्टीग्मेटिज्म की वजह से होता है. कुछ मामलों में यह एम्ब्लियोपिया यानी लेजी आई का संकेत भी हो सकता है. अगर चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस लगाने के बाद भी विजन 6/9 ही बनी रहे और आंख की संरचना सामान्य हो, तो इसे एम्ब्लियोपिया माना जाता है. ऐसी स्थिति में आंख और दिमाग के बीच सही समन्वय न बन पाने की संभावना रहती है. 6/9 विजन वाले लोगों को एक आंख से ब्लर विजन, गहराई का सही अंदाजा न लगा पाना, पढ़ते समय एक आंख बंद करना, आंखों में तनाव या सिरदर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं. कई बार बच्चे शिकायत नहीं करते, क्योंकि उनका दिमाग मजबूत आंख से काम चला लेता है.

एम्ब्लियोपिया का विजन से क्या है कनेक्शन?

एक्सपर्ट के अनुसार एम्ब्लियोपिया एक न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है, जिसमें बचपन के दौरान दिमाग कमजोर आंख से आने वाली धुंधली इमेज को नजरअंदाज करने लगता है और मजबूत आंख पर ज्यादा निर्भर हो जाता है. परिणामस्वरूप कमजोर आंख आलसी (Lazy Eye) बन जाती है, जबकि उसकी बनावट सामान्य हो सकती है. इसके मुख्य कारणों में भेंगापन, दोनों आंखों के नंबर में बड़ा अंतर, दोनों आंखों में ज्यादा रिफ्रैक्टिव एरर या बचपन में मोतियाबिंद जैसी रुकावट शामिल हैं. यह बच्चों में कम विजन का एक प्रमुख कारण है और लगभग 2 से 3% बच्चों को प्रभावित करता है.

क्या 6/9 विजन को 6/6 करना पॉसिबल है?

डॉक्टर तुषार ग्रोवर का कहना है कि जहां तक 6/9 विजन को 6/6 तक सुधारने की बात है, तो यह उम्र और कारण पर निर्भर करता है. 7-8 साल से कम उम्र के बच्चों में इलाज शुरू कर दिया जाए तो सुधार की संभावना बहुत अच्छी होती है और अक्सर नंबर पार्शियल 6/6 तक पहुंच सकता है. बड़े बच्चों और टीनएजर्स में सुधार कम होता है. वयस्कों में सुधार की संभावना काफी कम होती है. हालांकि कई नई टेक्नोलॉजी की मदद से इसमें कुछ हद तक सुधार हो सकता है.

क्या है 6/9 विजन का ट्रीटमेंट?

एक्सपर्ट की मानें तो 6/9 विजन के इलाज में सबसे पहला कदम सही नंबर का चश्मा लगाना है. कई मामलों में केवल चश्मे से ही 30 से 50% तक सुधार हो जाता है. इसके अलावा पैचिंग थेरेपी यानी मजबूत आंख पर रोज कुछ घंटों के लिए पट्टी लगाना, एट्रोपिन ड्रॉप्स, ब्लरिंग लेंस और नई डाइकोप्टिक या कंप्यूटर आधारित विजन थेरेपी का उपयोग किया जाता है. जल्दी पहचान और सही समय पर इलाज से 80 से 90% बच्चों में अच्छा परिणाम मिल सकता है. अगर 6/9 या उससे कम विजन पाया जाए, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, ताकि समस्या को शुरुआती चरण में ही सुधारा जा सके.

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