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West Bengal CS SC Slams Judicial Officers Attack

West Bengal CS SC Slams Judicial Officers Attack

नई दिल्ली20 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस घेरा। वहीं गुरुवार को सड़क पर आगजनी की।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हमले के मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नारियाला को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अपने प्लेनरी पावर का इस्तेमाल करते हुए मामले की जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों पर हमला हुआ (1 अप्रैल ) तब चीफ सेक्रेटरी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और यह प्रशासन की बड़ी विफलता है। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रशासन को घेराव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था तो सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए गए? घटना सोची-समझी साजिश लगती है।

सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा

कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कम हो रही है और सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा है।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में राज्य पुलिस ने जिन 26 लोगों को गिरफ्तार किया है उनसे NIA पूछताछ करेगी, चाहे वे जेल (न्यायिक हिरासत) में ही क्यों न हों।

60 लाख दावे-आपत्तियों का निपटारा आज

कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके लगभग 60 लाख दावे और आपत्तियां आज ही निपटा दी जाएंगी। 6 अप्रैल दोपहर तक लगभग 59.15 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है।

कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल पश्चिम बंगाल से नहीं हटाए जाएंगे। CJI ने यह भी कहा कि अगर राज्य की व्यवस्था ठीक से काम नहीं करती है, तो कोर्ट आगे कार्रवाई पर विचार करेगा।

दरअसल, 7 न्यायिक अधिकारी 1 अप्रैल को मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। इनमें तीन महिलाएं थीं। तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया।पुलिस ने इस मामले में 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

मालदा हमले के गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीरें

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

मालदा हिंसा, 2 दिन का घटनाक्रम…

1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए

एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई।

एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई।

मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था।

इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई।

मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा।

यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पूरी खबर पढ़ें…

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ये खबर भी पढ़ें…

पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- हमें पता है उपद्रवी कौन; वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पढ़ें पूरी खबर…

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पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ ऑफिस घेरा। वहीं गुरुवार को सड़क पर आगजनी की।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हमले के मामले में राज्य के चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नारियाला को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अपने प्लेनरी पावर का इस्तेमाल करते हुए मामले की जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों पर हमला हुआ (1 अप्रैल ) तब चीफ सेक्रेटरी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और यह प्रशासन की बड़ी विफलता है। कोर्ट ने पूछा कि जब प्रशासन को घेराव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था तो सुरक्षा के प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए गए? घटना सोची-समझी साजिश लगती है।

सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा

कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कम हो रही है और सरकारी दफ्तरों में राजनीति का असर बढ़ रहा है।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में राज्य पुलिस ने जिन 26 लोगों को गिरफ्तार किया है उनसे NIA पूछताछ करेगी, चाहे वे जेल (न्यायिक हिरासत) में ही क्यों न हों।

60 लाख दावे-आपत्तियों का निपटारा आज

कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके लगभग 60 लाख दावे और आपत्तियां आज ही निपटा दी जाएंगी। 6 अप्रैल दोपहर तक लगभग 59.15 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है।

कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल पश्चिम बंगाल से नहीं हटाए जाएंगे। CJI ने यह भी कहा कि अगर राज्य की व्यवस्था ठीक से काम नहीं करती है, तो कोर्ट आगे कार्रवाई पर विचार करेगा।

दरअसल, 7 न्यायिक अधिकारी 1 अप्रैल को मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। इनमें तीन महिलाएं थीं। तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया।पुलिस ने इस मामले में 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

मालदा हमले के गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीरें

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को हमले के आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

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1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए

एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई।

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मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था।

इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई।

मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा।

यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पूरी खबर पढ़ें…

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा। खाना-पानी तक नहीं मिला। यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पढ़ें पूरी खबर…

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