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Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue

Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue
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  • Ice Cream Health Risks; Cooling Saturated Food Digestion Issue | WJPLS Study Updates

19 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। ये शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ता है।

गर्मियों में हीट स्ट्रेस बॉडी फंक्शन को कमजोर कर देता है। ऐसे में आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज आइसक्रीम से होने वाले हेल्थ रिस्क की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • आइसक्रीम के कौन से इंग्रीडिएंट्स सेहत के लिए नुकसानदायक हैं?
  • ज्यादा आइसक्रीम खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’

सवाल- क्या आइसक्रीम खाने से शरीर को सचमुच ठंडक मिलती है?

जवाब- आइसक्रीम खाने से मुंह और गले में तुरंत ठंडक का एहसास होता है, लेकिन यह अस्थायी होता है। इससे शरीर का कोर बॉडी टेम्परेचर कम नहीं होता। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

आइसक्रीम खाने पर तुरंत क्या होता है?

  • मुंह और गले में ठंडक महसूस होती है।
  • ब्रेन में ‘कूलिंग सिग्नल’ जाता है।
  • ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है।
  • थोड़ी देर के लिए ताजगी और खुशी का एहसास होता है।

शरीर के अंदर क्या प्रोसेस शुरू होता है?

  • हाई शुगर के कारण इंसुलिन तेजी से रिलीज होता है।
  • फैट डाइजेशन के लिए पाचन तंत्र एक्टिव हो जाता है।
  • बॉडी खुद को नॉर्मल करने के लिए थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया (हीट प्रोडक्शन) बढ़ाती है।

आधे घंटे बाद क्या होता है?

  • एनर्जी लेवल गिरने लगता है।
  • शरीर को फिर से ठंडक की जरूरत महसूस होती है।
  • प्यास बढ़ सकती है।
  • हैवीनेस या सुस्ती महसूस हो सकती है।

कुल मिलाकर आइसक्रीम से मिली ठंडक कुछ मिनटों की होती है। लंबे समय में यह शरीर को गर्म करती है, ठंडा नहीं।

सवाल- क्या गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम खाना बॉडी टेम्परेचर का बैलेंस बिगाड़ सकता है?

जवाब- हां, ज्यादा आइसक्रीम खाने से शरीर का थर्मल बैलेंस बिगड़ सकता है। जब शरीर में कोई ठंडी चीज जाती है तो शरीर उसे संतुलित करने के लिए अंदर से गर्मी पैदा करता है। बार-बार ऐसा होने पर शरीर का बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इससे थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है।

सवाल- आइसक्रीम में ऐसे कौन से इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं?

जवाब- आइसक्रीम में स्वाद के लिए मिलाए गए कई तत्व सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। नीचे ग्राफिक में सभी इंग्रीडिएंट्स देखिए-

सवाल- गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- आइसक्रीम में मौजूद हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट शरीर में इंफ्लेमेशन, मोटापा और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का कारण बन सकते हैं। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- आइसक्रीम हमारे डाइजेशन को कैसे प्रभावित करती है?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • आइसक्रीम में मौजूद हाई शुगर और फैट डाइजेशन की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
  • ठंडी चीज पेट में जाने से डाइजेस्टिव एंजाइम्स की एक्टिविटी स्लो हो जाती है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।
  • हाई फैट चीजें पचने में ज्यादा समय लेती हैं, जिससे भारीपन और सुस्ती महसूस होती है।
  • ज्यादा शुगर गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकती है, जिससे गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं होती हैं।
  • जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस (इसमें शरीर डेयरी प्रोडक्ट्स में मौजूद लैक्टोज शुगर नहीं पचा पाता) है, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

सभी असर ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या ज्यादा ठंडी चीजें हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर करती हैं?

जवाब- पॉइंटर्स में देखिए–

  • ज्यादा ठंडी चीजें कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
  • ये म्यूकस मेम्ब्रेन (नाक और गले की प्रोटेक्टिव लेयर) को सिकोड़ सकती हैं।
  • इससे शरीर की बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • इस कारण गले में खराश, सर्दी-जुकाम और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
  • बच्चों और बुजुर्गों में इसका रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- क्या रात में आइसक्रीम खाना सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है?

जवाब- विज्ञापनों में रात में आइसक्रीम ऑर्डर करना मजेदार और रिलैक्सिंग दिखाया जाता है। लेकिन सेहत के लिहाज से यह गलत है। इसके कारण हैं–

  • आइसक्रीम हैवी शुगर, हैवी फैट आइटम है।
  • रात में बॉडी का मेटाबॉलिज्म स्लो होता है।
  • इससे आइसक्रीम में मौजूद शुगर और फैट आसानी से पचते नहीं।
  • इससे अपच और एसिडिटी होती है।
  • स्लीप क्वालिटी खराब होती है।
  • देर रात खाया गया मीठा फैट सेल्स बनकर बॉडी में जमा होता है यानी इससे मोटापा बढ़ता है।
  • रात में ठंडा खाने से गले में खराश या कफ हो सकता है।

सवाल- क्या खाली पेट आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है?

जवाब- हां, खाली पेट आइसक्रीम खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और इंसुलिन स्पाइक होता है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव डालता है, जिससे एसिडिटी, गैस या ऐंठन हो सकती है।

सवाल- क्या शुगर-फ्री आइसक्रीम या लो-फैट वाली आइसक्रीम सचमुच में हेल्दी होती है?

जवाब- नहीं, शुगर-फ्री या लो-फैट आइसक्रीम में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो गट हेल्थ पर नेगेटिव प्रभाव डालते हैं। इसलिए ये हेल्दी विकल्प नहीं है।

सवाल- क्या गर्मी के मौसम में ज्यादा आइसक्रीम खाना टूथ सेंसिटिविटी को बढ़ा सकता है?

जवाब- हां, ठंडी और मीठी चीजों का कॉम्बिनेशन दांतों के इनेमल को कमजोर करता है। इससे सेंसिटिविटी और कैविटी का खतरा बढ़ता है।

सवाल- क्या घर पर बनी आइसक्रीम हेल्दी होती है?

जवाब- हां, ये कंपनी मेड आइसक्रीम से बेहतर होती है, क्योंकि इसमें आप शुगर और फैट को कंट्रोल कर सकते हैं। इसमें फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स और नेचुरल स्वीटनर डाल सकते हैं। लेकिन घर की बनी आइसक्रीम भी सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि ठंडा और मीठे का प्रभाव वही रहता है।

…………………

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गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। ये शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ता है।

गर्मियों में हीट स्ट्रेस बॉडी फंक्शन को कमजोर कर देता है। ऐसे में आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज आइसक्रीम से होने वाले हेल्थ रिस्क की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • आइसक्रीम के कौन से इंग्रीडिएंट्स सेहत के लिए नुकसानदायक हैं?
  • ज्यादा आइसक्रीम खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’

सवाल- क्या आइसक्रीम खाने से शरीर को सचमुच ठंडक मिलती है?

जवाब- आइसक्रीम खाने से मुंह और गले में तुरंत ठंडक का एहसास होता है, लेकिन यह अस्थायी होता है। इससे शरीर का कोर बॉडी टेम्परेचर कम नहीं होता। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

आइसक्रीम खाने पर तुरंत क्या होता है?

  • मुंह और गले में ठंडक महसूस होती है।
  • ब्रेन में ‘कूलिंग सिग्नल’ जाता है।
  • ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है।
  • थोड़ी देर के लिए ताजगी और खुशी का एहसास होता है।

शरीर के अंदर क्या प्रोसेस शुरू होता है?

  • हाई शुगर के कारण इंसुलिन तेजी से रिलीज होता है।
  • फैट डाइजेशन के लिए पाचन तंत्र एक्टिव हो जाता है।
  • बॉडी खुद को नॉर्मल करने के लिए थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया (हीट प्रोडक्शन) बढ़ाती है।

आधे घंटे बाद क्या होता है?

  • एनर्जी लेवल गिरने लगता है।
  • शरीर को फिर से ठंडक की जरूरत महसूस होती है।
  • प्यास बढ़ सकती है।
  • हैवीनेस या सुस्ती महसूस हो सकती है।

कुल मिलाकर आइसक्रीम से मिली ठंडक कुछ मिनटों की होती है। लंबे समय में यह शरीर को गर्म करती है, ठंडा नहीं।

सवाल- क्या गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम खाना बॉडी टेम्परेचर का बैलेंस बिगाड़ सकता है?

जवाब- हां, ज्यादा आइसक्रीम खाने से शरीर का थर्मल बैलेंस बिगड़ सकता है। जब शरीर में कोई ठंडी चीज जाती है तो शरीर उसे संतुलित करने के लिए अंदर से गर्मी पैदा करता है। बार-बार ऐसा होने पर शरीर का बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इससे थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है।

सवाल- आइसक्रीम में ऐसे कौन से इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं?

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  • ठंडी चीज पेट में जाने से डाइजेस्टिव एंजाइम्स की एक्टिविटी स्लो हो जाती है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।
  • हाई फैट चीजें पचने में ज्यादा समय लेती हैं, जिससे भारीपन और सुस्ती महसूस होती है।
  • ज्यादा शुगर गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकती है, जिससे गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं होती हैं।
  • जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस (इसमें शरीर डेयरी प्रोडक्ट्स में मौजूद लैक्टोज शुगर नहीं पचा पाता) है, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

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जवाब- पॉइंटर्स में देखिए–

  • ज्यादा ठंडी चीजें कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
  • ये म्यूकस मेम्ब्रेन (नाक और गले की प्रोटेक्टिव लेयर) को सिकोड़ सकती हैं।
  • इससे शरीर की बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
  • इस कारण गले में खराश, सर्दी-जुकाम और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
  • बच्चों और बुजुर्गों में इसका रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- क्या रात में आइसक्रीम खाना सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है?

जवाब- विज्ञापनों में रात में आइसक्रीम ऑर्डर करना मजेदार और रिलैक्सिंग दिखाया जाता है। लेकिन सेहत के लिहाज से यह गलत है। इसके कारण हैं–

  • आइसक्रीम हैवी शुगर, हैवी फैट आइटम है।
  • रात में बॉडी का मेटाबॉलिज्म स्लो होता है।
  • इससे आइसक्रीम में मौजूद शुगर और फैट आसानी से पचते नहीं।
  • इससे अपच और एसिडिटी होती है।
  • स्लीप क्वालिटी खराब होती है।
  • देर रात खाया गया मीठा फैट सेल्स बनकर बॉडी में जमा होता है यानी इससे मोटापा बढ़ता है।
  • रात में ठंडा खाने से गले में खराश या कफ हो सकता है।

सवाल- क्या खाली पेट आइसक्रीम खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है?

जवाब- हां, खाली पेट आइसक्रीम खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और इंसुलिन स्पाइक होता है। यह डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव डालता है, जिससे एसिडिटी, गैस या ऐंठन हो सकती है।

सवाल- क्या शुगर-फ्री आइसक्रीम या लो-फैट वाली आइसक्रीम सचमुच में हेल्दी होती है?

जवाब- नहीं, शुगर-फ्री या लो-फैट आइसक्रीम में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो गट हेल्थ पर नेगेटिव प्रभाव डालते हैं। इसलिए ये हेल्दी विकल्प नहीं है।

सवाल- क्या गर्मी के मौसम में ज्यादा आइसक्रीम खाना टूथ सेंसिटिविटी को बढ़ा सकता है?

जवाब- हां, ठंडी और मीठी चीजों का कॉम्बिनेशन दांतों के इनेमल को कमजोर करता है। इससे सेंसिटिविटी और कैविटी का खतरा बढ़ता है।

सवाल- क्या घर पर बनी आइसक्रीम हेल्दी होती है?

जवाब- हां, ये कंपनी मेड आइसक्रीम से बेहतर होती है, क्योंकि इसमें आप शुगर और फैट को कंट्रोल कर सकते हैं। इसमें फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स और नेचुरल स्वीटनर डाल सकते हैं। लेकिन घर की बनी आइसक्रीम भी सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि ठंडा और मीठे का प्रभाव वही रहता है।

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गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी पोषक तत्व बाहर निकलते हैं। इससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान हो सकती है। फल नेचुरल सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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