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SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud
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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए।

ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए।

बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं।

पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो।

खाते को फ्रॉड घोषित करने के लिए RBI की प्रक्रिया

1. सबसे पहले जांच और ऑडिट

बैंक को शक होने पर अकाउंट की जांच की जाती है। अक्सर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाता है, इसमें ट्रांजेक्शन, फंड फ्लो और दस्तावेजों की पड़ताल होती है

2. नोटिस दिया जाता है

बैंक सीधे फ्रॉड घोषित नहीं कर सकता, उधार लेने वाले को लिखित नोटिस दिया जाता है। इसमें आरोप और आधार स्पष्ट बताना होता है। जिस आधार पर फैसला लिया जा रहा है ,जैसे फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आदि की कॉपी देना जरूरी है। इसके बाद उधार लेने वाले को अपनी सफाई देने का मौका मिलता है। वह दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आपत्ति दे सकता है।

5. बैंक का अंतिम फैसला

जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक निर्णय लेता है। अगर आरोप सही लगे, तो अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया जाता है।

6.RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है

RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है। CBI/ED जैसी एजेंसियों को मामला भेजा जा सकता है। उधार लेने वाले का नाम ‘फ्रॉड लिस्ट’ में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

——————————

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केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर…

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जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए।

ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए।

बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं।

पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो।

खाते को फ्रॉड घोषित करने के लिए RBI की प्रक्रिया

1. सबसे पहले जांच और ऑडिट

बैंक को शक होने पर अकाउंट की जांच की जाती है। अक्सर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाता है, इसमें ट्रांजेक्शन, फंड फ्लो और दस्तावेजों की पड़ताल होती है

2. नोटिस दिया जाता है

बैंक सीधे फ्रॉड घोषित नहीं कर सकता, उधार लेने वाले को लिखित नोटिस दिया जाता है। इसमें आरोप और आधार स्पष्ट बताना होता है। जिस आधार पर फैसला लिया जा रहा है ,जैसे फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आदि की कॉपी देना जरूरी है। इसके बाद उधार लेने वाले को अपनी सफाई देने का मौका मिलता है। वह दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आपत्ति दे सकता है।

5. बैंक का अंतिम फैसला

जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक निर्णय लेता है। अगर आरोप सही लगे, तो अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया जाता है।

6.RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है

RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है। CBI/ED जैसी एजेंसियों को मामला भेजा जा सकता है। उधार लेने वाले का नाम ‘फ्रॉड लिस्ट’ में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

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