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Monsoon Deficit Alert | MP, Punjab, Haryana, Rajasthan Rain Less Than Normal

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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 mm है -फाइल

इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है।

जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 mm है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है।

जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं।

मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने के आसार हैं। अगस्त-सितंबर में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश की आशंका है।

जुलाई से बारिश में कमी होने का अनुमान

  • 101% बारिश एलपीए के मुकाबले जून में संभव। इस माह का एलपीए 165.3 मिमी है।
  • 89% बारिश का पूर्वानुमान सितंबर में एलपीए के मुकाबले। एलपीए 167.9 मिमी है।
  • 95% बारिश एलपीए के मुकाबले जुलाई में होगी। इस माह एलपीए 280.5 मिमी है।
  • 92% बारिश अगस्त में एलपीए के मुकाबले संभव। इस माह का एलपीए 254.9 मिमी है।

क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी LPA

इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है।

मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना

स्काईमेट वेदर से जुड़े जतिन सिंह ने कहा कि मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) मजबूत हो तो अल-नीनो का असर कुछ कम होता है। अभी आईओडी सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है। इससे मानसून की शुरुआत ठीक होगी, लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा।

अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं-

अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।

ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

साल 2025: तय समय से 8 दिन पहले केरल पहुंचा था मानसून

पिछले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून तय समय से 8 दिन पहले 24 मई को केरल पहुंचा था। ऐसा 16 साल बाद हुआ था। 2009 में 23 मई को केरल पहुंचा था। मुंबई में बारिश लाने वाला सिस्टम 16 दिन पहले ही एक्टिव हो गया था जो 1950 के बाद से सबसे जल्दी था।

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है।

भारत में पिछले साल मानसून जल्दी पहुंचने की मुख्य वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हुई नमी थी। समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा रहा, जिससे मानसूनी हवाएं तेजी से सक्रिय हुईं थीं।

पश्चिमी हवाओं और चक्रवातों की हलचल ने भी मानसून को आगे बढ़ने में मदद की थी। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन भी मौसम के पैटर्न में बदलाव की एक बड़ी वजह बना था।

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जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 mm है -फाइल

इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है।

जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 mm है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है।

जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं।

मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने के आसार हैं। अगस्त-सितंबर में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश की आशंका है।

जुलाई से बारिश में कमी होने का अनुमान

  • 101% बारिश एलपीए के मुकाबले जून में संभव। इस माह का एलपीए 165.3 मिमी है।
  • 89% बारिश का पूर्वानुमान सितंबर में एलपीए के मुकाबले। एलपीए 167.9 मिमी है।
  • 95% बारिश एलपीए के मुकाबले जुलाई में होगी। इस माह एलपीए 280.5 मिमी है।
  • 92% बारिश अगस्त में एलपीए के मुकाबले संभव। इस माह का एलपीए 254.9 मिमी है।

क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी LPA

इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है।

मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना

स्काईमेट वेदर से जुड़े जतिन सिंह ने कहा कि मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) मजबूत हो तो अल-नीनो का असर कुछ कम होता है। अभी आईओडी सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है। इससे मानसून की शुरुआत ठीक होगी, लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा।

अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं-

अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।

ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

साल 2025: तय समय से 8 दिन पहले केरल पहुंचा था मानसून

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आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है।

भारत में पिछले साल मानसून जल्दी पहुंचने की मुख्य वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हुई नमी थी। समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा रहा, जिससे मानसूनी हवाएं तेजी से सक्रिय हुईं थीं।

पश्चिमी हवाओं और चक्रवातों की हलचल ने भी मानसून को आगे बढ़ने में मदद की थी। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन भी मौसम के पैटर्न में बदलाव की एक बड़ी वजह बना था।

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