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विजयवर्गीय बोले-एसपी को बचाने अनुनय की थी दिग्विजय ने:विधानसभा समितियों के पावर विधानसभा जैसे, सदस्य चाहें तो अधिकारी की खाट खड़ी कर सकते हैं

विजयवर्गीय बोले-एसपी को बचाने अनुनय की थी दिग्विजय ने:विधानसभा समितियों के पावर विधानसभा जैसे, सदस्य चाहें तो अधिकारी की खाट खड़ी कर सकते हैं

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा की समितियों को विधानसभा के बराबर बताते हुए कहा है कि इन समितियों के सदस्य और सभापति के अधिकार ऐसे हैं कि अधिकारी झुकने को मजबूर हो जाते हैं। विधायक यह न समझें कि समितियां कम पावर की होती हैं। मैं समिति का सदस्य रहने के दौरान स्टडी करके जब सवाल करता था तो अधिकारियों की खाट खड़ी हो जाती थी। समिति के तथ्यों को गंभीरता से रखा जाए तो ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। मंत्री विजयवर्गीय ने ये बातें मंगलवार को विधानसभा में विधानसभा की समितियों के सभापतियों और सदस्यों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा की यह समिति जो होती हैं, इसके महत्व को आप विधायक लोग बढ़ा सकते हैं। समितियों की रिपोर्ट को सरकार भी गंभीरता से लेती है ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। एसपी-कलेक्टर ने बदसलूकी की तो तबके सीएम दिग्विजय सिंह ने जोड़े थे हाथ संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा जब वे पहली बार के विधायक थे तो विशेषाधिकार समिति में थे। उस समय सागर के कलेक्टर-एसपी ने विधायकों के साथ बदसलूकी की थी। तब एसपी को प्रताड़ित किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पर्सनली बात की थी और कहा था कि अधिकारी के जीवन में दाग लग जाएगा। उन्होंने बहुत अनुनय विनय की थी। दिग्विजय सिंह अनुनय विनय में माहिर थे। उन्होंने कहा था कि जो नाराजगी है, विधायक उनसे कह सकते हैं। तब जाकर सब माने थे। इसके बाद ब्यूरोक्रेसी में एक अच्छा मैसेज गया। विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है समितियों की रिपोर्ट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो महत्व विधानसभा का है वही महत्व विधानसभा की समिति का है। विधानसभा की समिति जो रिपोर्ट प्रस्तुत करती है वह विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार विधानसभा अध्यक्ष से और पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह से उन्होंने समितियों के कामकाज को लेकर पूछा था कि समितियों की क्या हाल हैं तो उन्होंने बताया था कि बहुत स्लो गति है। फिर हम लोगों ने तय किया कि एक बार बैठकर सभी कमेटी के लोगों से चर्चा करना चाहिए। विजयवर्गीय ने कहा कि इस समिति को आप बहुत छोटा नहीं समझें, हर समिति बड़ी महत्वपूर्ण होती है। आश्वासन समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेती है सरकार मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि अभी मैंने पिछले दिनों अपने विभाग के आश्वासन समिति की रिपोर्ट का अध्ययन किया और एसीएस को कहा कि आश्वासन समिति की रिपोर्ट देखिए। इसके बाद बताया गया कि 95 प्रतिशत आश्वासन पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समितियों की रिपोर्ट पर सुनना पड़ता है। जरूरी है कि आपकी समिति एक निर्णय ऐसा दे दे जो सिस्टम की गंभीरता से जुड़ा हो। विधायकों के विशेष अधिकार की सुरक्षा का ध्यान रखती है विशेषाधिकार समिति विजयवर्गीय ने कहा कि विशेष अधिकार समिति आपके अधिकारों की सुरक्षा का ध्यान रखती है। इसलिए विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष का दायित्व है कि वह हर 15 दिन में 10 दिन में बैठक करे। विधायक प्रॉपर तरीके से शिकायत करेंगे तो अधिकारियों पर कार्रवाई समिति कर सकती है। उन्होंने कहा कि मीटिंग में जाने से पहले एजेंडे को पढ़ना, समझना जरूरी है। सदस्य समिति की महत्व को समझेंगे और गंभीरता से लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे तो समितियों के परिणाम बहुत अच्छे आएंगे। समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए-तोमर इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अगर सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा है तो पंचायत व नगरीय निकाय छोटी इकाई हैं। विधानसभा पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करती है। विधानसभा की भूमिका मां की तरह होती है। जिस तरह मां अपने बच्चे को जन्म देती है, उसका लालन−पालन कर उसे देश के हित में तैयार करने की कल्पना करती है, ठीस उसी तरह हम भी विधानसभा को मां की भूमिका में देखेंगे तो हम भी अपने दायित्व को उसके संपूर्ण रूप में देख पाएंगे। तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश के विधायी इतिहास में विधानसभा की समितियों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। मगर बीते कुछ वर्षों में कुछ सदस्य लगातार इन समितियों की बैठकों में अनुपस्थित रहे। इस पर चिंतन की आवश्यकता बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। एक वर्ष में कम से कम 12 बैठकें होने की अपेक्षा है। समिति की बैठक होने से विधानसभा के कार्य व्यवहार में सुधार की संभावना होगी। समितियों की बैठक का यदि परिणाम नहीं भी निकलता है तो भी अध्ययन प्रक्रिया से हमारा ज्ञान समृद्ध होगा। सदस्यों के आचरण पर चिंतन की जरूरत- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में कुछ सदस्यों के आचरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार कुछ सदस्य दायरे के बाहर जाकर कार्य कर जाते हैं। सकारात्मक आलोचना का स्वागत है, लेकिन इस तरह का आचरण अपेक्षित नहीं होता। ऐसे में संसदीय समितियों का बड़ा महत्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय ज्ञान व नवाचारों के माध्यम से मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाहियां संसदीय इतिहास की परंपरा को समृद्ध करेगी। समितियों की संयुक्त बैठक को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन प्राक्कलन समिति के सभापति अजय विश्नोई ने किया। इस बैठक में मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 21 समितियों के सभापति एवं सदस्यगण तथा मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा एवं सचिवालय के अधिकारीगण उपस्थित थे।

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संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा की समितियों को विधानसभा के बराबर बताते हुए कहा है कि इन समितियों के सदस्य और सभापति के अधिकार ऐसे हैं कि अधिकारी झुकने को मजबूर हो जाते हैं। विधायक यह न समझें कि समितियां कम पावर की होती हैं। मैं समिति का सदस्य रहने के दौरान स्टडी करके जब सवाल करता था तो अधिकारियों की खाट खड़ी हो जाती थी। समिति के तथ्यों को गंभीरता से रखा जाए तो ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। मंत्री विजयवर्गीय ने ये बातें मंगलवार को विधानसभा में विधानसभा की समितियों के सभापतियों और सदस्यों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा की यह समिति जो होती हैं, इसके महत्व को आप विधायक लोग बढ़ा सकते हैं। समितियों की रिपोर्ट को सरकार भी गंभीरता से लेती है ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। एसपी-कलेक्टर ने बदसलूकी की तो तबके सीएम दिग्विजय सिंह ने जोड़े थे हाथ संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा जब वे पहली बार के विधायक थे तो विशेषाधिकार समिति में थे। उस समय सागर के कलेक्टर-एसपी ने विधायकों के साथ बदसलूकी की थी। तब एसपी को प्रताड़ित किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पर्सनली बात की थी और कहा था कि अधिकारी के जीवन में दाग लग जाएगा। उन्होंने बहुत अनुनय विनय की थी। दिग्विजय सिंह अनुनय विनय में माहिर थे। उन्होंने कहा था कि जो नाराजगी है, विधायक उनसे कह सकते हैं। तब जाकर सब माने थे। इसके बाद ब्यूरोक्रेसी में एक अच्छा मैसेज गया। विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है समितियों की रिपोर्ट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो महत्व विधानसभा का है वही महत्व विधानसभा की समिति का है। विधानसभा की समिति जो रिपोर्ट प्रस्तुत करती है वह विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार विधानसभा अध्यक्ष से और पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह से उन्होंने समितियों के कामकाज को लेकर पूछा था कि समितियों की क्या हाल हैं तो उन्होंने बताया था कि बहुत स्लो गति है। फिर हम लोगों ने तय किया कि एक बार बैठकर सभी कमेटी के लोगों से चर्चा करना चाहिए। विजयवर्गीय ने कहा कि इस समिति को आप बहुत छोटा नहीं समझें, हर समिति बड़ी महत्वपूर्ण होती है। आश्वासन समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेती है सरकार मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि अभी मैंने पिछले दिनों अपने विभाग के आश्वासन समिति की रिपोर्ट का अध्ययन किया और एसीएस को कहा कि आश्वासन समिति की रिपोर्ट देखिए। इसके बाद बताया गया कि 95 प्रतिशत आश्वासन पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समितियों की रिपोर्ट पर सुनना पड़ता है। जरूरी है कि आपकी समिति एक निर्णय ऐसा दे दे जो सिस्टम की गंभीरता से जुड़ा हो। विधायकों के विशेष अधिकार की सुरक्षा का ध्यान रखती है विशेषाधिकार समिति विजयवर्गीय ने कहा कि विशेष अधिकार समिति आपके अधिकारों की सुरक्षा का ध्यान रखती है। इसलिए विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष का दायित्व है कि वह हर 15 दिन में 10 दिन में बैठक करे। विधायक प्रॉपर तरीके से शिकायत करेंगे तो अधिकारियों पर कार्रवाई समिति कर सकती है। उन्होंने कहा कि मीटिंग में जाने से पहले एजेंडे को पढ़ना, समझना जरूरी है। सदस्य समिति की महत्व को समझेंगे और गंभीरता से लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे तो समितियों के परिणाम बहुत अच्छे आएंगे। समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए-तोमर इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अगर सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा है तो पंचायत व नगरीय निकाय छोटी इकाई हैं। विधानसभा पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करती है। विधानसभा की भूमिका मां की तरह होती है। जिस तरह मां अपने बच्चे को जन्म देती है, उसका लालन−पालन कर उसे देश के हित में तैयार करने की कल्पना करती है, ठीस उसी तरह हम भी विधानसभा को मां की भूमिका में देखेंगे तो हम भी अपने दायित्व को उसके संपूर्ण रूप में देख पाएंगे। तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश के विधायी इतिहास में विधानसभा की समितियों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। मगर बीते कुछ वर्षों में कुछ सदस्य लगातार इन समितियों की बैठकों में अनुपस्थित रहे। इस पर चिंतन की आवश्यकता बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। एक वर्ष में कम से कम 12 बैठकें होने की अपेक्षा है। समिति की बैठक होने से विधानसभा के कार्य व्यवहार में सुधार की संभावना होगी। समितियों की बैठक का यदि परिणाम नहीं भी निकलता है तो भी अध्ययन प्रक्रिया से हमारा ज्ञान समृद्ध होगा। सदस्यों के आचरण पर चिंतन की जरूरत- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में कुछ सदस्यों के आचरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार कुछ सदस्य दायरे के बाहर जाकर कार्य कर जाते हैं। सकारात्मक आलोचना का स्वागत है, लेकिन इस तरह का आचरण अपेक्षित नहीं होता। ऐसे में संसदीय समितियों का बड़ा महत्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय ज्ञान व नवाचारों के माध्यम से मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाहियां संसदीय इतिहास की परंपरा को समृद्ध करेगी। समितियों की संयुक्त बैठक को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन प्राक्कलन समिति के सभापति अजय विश्नोई ने किया। इस बैठक में मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 21 समितियों के सभापति एवं सदस्यगण तथा मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा एवं सचिवालय के अधिकारीगण उपस्थित थे।

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