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तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन ‘विजय’, वोटर बोले-असली कौन है भाई?

तमिल चुनाव में नाम का कन्फ्यूजन! एक सीट, तीन-तीन 'विजय', वोटर बोले-असली कौन है भाई?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुद्दा, वादे और वादे पीछे छोड़ दिए गए हैं।सियासत का खेल भी दिलचस्प और पेचीदा होता जा रहा है। इस बार कॉम्पिटिशन सिर्फ यूनिवर्सल के बीच नहीं, बल्कि यूनिवर्सल के बीच भी है। चेन्नई के कई दावों पर हमनाम गुलामी की वे ने राजनीतिक गणित को लेकर चर्चा की है और सबसे ज्यादा असर विजय और उनकी पार्टी तमिलगात्री कजगम (टीवीके) पर पड़ा है।

चेन्नई की कई सिफारिशों पर ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव नहीं, ऑलवेस्ट की कॉपी-पेस्ट प्रतियोगिता चल रही हो और सबसे ज्यादा ‘टारगेट’ बने हैं सुपरस्टार-से-नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके)।

6 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त हुई ही तस्वीर साफ हो गई कि चेन्नई के कई नामांकन पर एक ही नाम के कई उम्मीदवार मैदान में हैं, राजनीतिक विशेषज्ञ इसे कोई संयोग नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रेरित करना और समर्थकों का समूह बनाना है।

एक विजय नहीं, संपूर्ण ‘विजय परिवार’ मैदान में
पेरम्बूर सीट पर असली विजय चुनाव लड़ रहे हैं… लेकिन मजा तब आया जब बैलेट दो पर और ‘विजय’ भी कूद पड़े। पेरम्बूर सीट, जहां अभिनेता विजय के लिए खुद चुनाव लड़ रहे हैं, वहां दो और सोलो ने बिल्कुल एक ही नाम से नामांकन किया है। ऐसे में बैलेट पर एक ही नाम के कई बार प्रदर्शन और प्रदर्शन से शुरू होगा कन्न फ़ुजन का खेल।

टीवीके के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार बड़े स्तर पर इलिनोइस में उतरी है और उसकी पहचान अभी भी मजबूत नहीं हुई है। अब सोचिये सामने वाले वोटर का मामला, ईवीएम के बेकार दिमाग में सिर्फ एक सवाल: “यार, मेरा वाला विजय कौन है?”

हर सीट पर ‘नाम क्लोन’
सिर्फ पेरम्बूर ही नहीं, बल्कि चेन्नई की कई रेवेरेशंस पर येरे रेवेरेशंस दिख रहे हैं। हार्बर में “सिनोरा” नाम का पूरा ज्वालामुखी उतरा हुआ है। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन-तीन जयकुमार लाइन में हैं- जैसे टिकटें खिड़की पर फॉर्म की मंजूरी आ गई। हार्बर सीट पर टीवीके उम्मीदवार सिनोरा पीएस अशोक के खिलाफ दो और “सिनोरा” नाम वाले प्रतियोगी मैदान में हैं। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन हमनाम प्रतियोगी हैं।

चेपॉक-ट्रिपलिकेन सीट पर टीवीके उम्मीदवार डी सेल्वम चेपॉक-ट्रिपलिकन में उधयोदय स्टालिन के सामने टीवीके के डी सेल्वम हैं… लेकिन उनके तीन ‘डुप्लीकेट’ भी मौजूद हैं, जहां उनका मुकाबला उधयोदय स्टालिन से है।
थाउजेंड लाइट्स में तो हाल ही में यह है कि जेसीडी एम्बालैब्स को भी शायद दो बार चेक करना पड़ा कि “मैं असली हूं या नहीं!” थाउजेंड लाइट्स सीट पर जेसीडी प्रभावशाली के सामने भी तीन हमनाम प्रतियोगी प्रतियोगी हैं। वहीं विल्लीवक्कम और एग्मोर की पसंद पर भी यही रणनीति देखने को मिल रही है।

मीम्स की बाढ़ आ गई—सोशल मीडिया पर उठो सवाल
टीवीके चक ने सोशल मीडिया पर हाफनामों की कॉपी साझा करते हुए आरोप लगाया है कि हमनाम मासूम के दस्तावेज में एक नोट हीरी वकील से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, जब इन नामांकित से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। एक कॉल पर जवाब आया- “गलत नंबर है” और फोन कट गया। दूसरे ने अपने नामांकन का उद्देश्य शैल साध ली पर रखा।

“एक नाम, तीन उम्मीदवार- 1 खरीदें 2 मुफ़्त पाएं!”
फ़ोन करो तो जवाब दो- “गलत नंबर है”
जब इन हमनाम शौक़ीन से बात करनी चाही, तो एक ने फ़ोन करके कहा- “गलत नंबर है” और फ़ोन कट गया। दूसरे ने तो इतनी रहस्यमयी शैलियां साधी कि लगे जैसे चुनाव नहीं, कोई अंडरकवर मिशन चल रहा हो।

ये मजाक नहीं, पूरी रणनीति है, क्या है इस ‘नाम वाले गेम’ का असर?
राजनीतिक सिद्धांतों का कहना है कि हमनाम उम्मीदवार के लिए कोई नई बात नहीं है। करीबी मुकाबलों में यह रणनीति अपनाई जाती है ताकि वोटरों को धोखा दिया जा सके और असली दावेदार के वोट कट सके।
इस बार चेन्नई के 16 नामांकनों में कुल 628 नामांकन शामिल हैं। पेरूर में सबसे ज्यादा 66 उम्मीदवार हैं, जबकि मालापुर में सबसे कम 25. अब हंसी अपनी जगह है, लेकिन राजनीति में यह पुराना खेल है- वोट काटने की रणनीति।

जब मुकाबला टक्कर का हो, तो नाम का कन्फ्यूजन पैदा करो… और वोटर को मजबूर कर दो। चेन्नई के 16 क्वार्टरों में कुल 628 प्रतियोगी मैदान हैं। पेरूर में 66 उम्मीदवार-यानी ईवीएम भी शायद सोच रही होगी, “इतने नाम कहां फिट होगा?”

रियल एस्टेट अभी बाकी है, असर क्या होगा?
यह ‘नाम का खेल’ वैज्ञानिकता पर कितना असर डालेगा, यह तो 4 मई को तीसरी के बाद ही साफ होगा। लेकिन इतना है कि इस बार मतदाताओं को सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि सही नाम भी पहचानना होगा।

तमिल की राजनीति में यह परिवर्तन नया सा संकेत देता है-अब चुनाव सिर्फ नाम या फिर आख़री का नहीं, बल्कि पहचान और भ्रम की लड़ाई भी बन गई है। अब जब वोटिंग होगी और रियल कॉमेडी उस दिन देखने को मिल सकती है, जब वोटर ईवीएम के सामने नाम आएगा… और फिर मिचमिचाकर सोचेंगे- “भाई, ये वाला विजय मेरा वाला है या अगले वाला?”

तमिल इलेक्शन 2026 में एक बात साफ कर दी गई है- ये सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि पहचान की हकीकत बन गई है।

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राजनीति

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुद्दा, वादे और वादे पीछे छोड़ दिए गए हैं।सियासत का खेल भी दिलचस्प और पेचीदा होता जा रहा है। इस बार कॉम्पिटिशन सिर्फ यूनिवर्सल के बीच नहीं, बल्कि यूनिवर्सल के बीच भी है। चेन्नई के कई दावों पर हमनाम गुलामी की वे ने राजनीतिक गणित को लेकर चर्चा की है और सबसे ज्यादा असर विजय और उनकी पार्टी तमिलगात्री कजगम (टीवीके) पर पड़ा है।

चेन्नई की कई सिफारिशों पर ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव नहीं, ऑलवेस्ट की कॉपी-पेस्ट प्रतियोगिता चल रही हो और सबसे ज्यादा ‘टारगेट’ बने हैं सुपरस्टार-से-नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके)।

6 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त हुई ही तस्वीर साफ हो गई कि चेन्नई के कई नामांकन पर एक ही नाम के कई उम्मीदवार मैदान में हैं, राजनीतिक विशेषज्ञ इसे कोई संयोग नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे एक सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रेरित करना और समर्थकों का समूह बनाना है।

एक विजय नहीं, संपूर्ण ‘विजय परिवार’ मैदान में
पेरम्बूर सीट पर असली विजय चुनाव लड़ रहे हैं… लेकिन मजा तब आया जब बैलेट दो पर और ‘विजय’ भी कूद पड़े। पेरम्बूर सीट, जहां अभिनेता विजय के लिए खुद चुनाव लड़ रहे हैं, वहां दो और सोलो ने बिल्कुल एक ही नाम से नामांकन किया है। ऐसे में बैलेट पर एक ही नाम के कई बार प्रदर्शन और प्रदर्शन से शुरू होगा कन्न फ़ुजन का खेल।

टीवीके के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार बड़े स्तर पर इलिनोइस में उतरी है और उसकी पहचान अभी भी मजबूत नहीं हुई है। अब सोचिये सामने वाले वोटर का मामला, ईवीएम के बेकार दिमाग में सिर्फ एक सवाल: “यार, मेरा वाला विजय कौन है?”

हर सीट पर ‘नाम क्लोन’
सिर्फ पेरम्बूर ही नहीं, बल्कि चेन्नई की कई रेवेरेशंस पर येरे रेवेरेशंस दिख रहे हैं। हार्बर में “सिनोरा” नाम का पूरा ज्वालामुखी उतरा हुआ है। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन-तीन जयकुमार लाइन में हैं- जैसे टिकटें खिड़की पर फॉर्म की मंजूरी आ गई। हार्बर सीट पर टीवीके उम्मीदवार सिनोरा पीएस अशोक के खिलाफ दो और “सिनोरा” नाम वाले प्रतियोगी मैदान में हैं। रॉयपुरम में डी जयकुमार के सामने तीन हमनाम प्रतियोगी हैं।

चेपॉक-ट्रिपलिकेन सीट पर टीवीके उम्मीदवार डी सेल्वम चेपॉक-ट्रिपलिकन में उधयोदय स्टालिन के सामने टीवीके के डी सेल्वम हैं… लेकिन उनके तीन ‘डुप्लीकेट’ भी मौजूद हैं, जहां उनका मुकाबला उधयोदय स्टालिन से है।
थाउजेंड लाइट्स में तो हाल ही में यह है कि जेसीडी एम्बालैब्स को भी शायद दो बार चेक करना पड़ा कि “मैं असली हूं या नहीं!” थाउजेंड लाइट्स सीट पर जेसीडी प्रभावशाली के सामने भी तीन हमनाम प्रतियोगी प्रतियोगी हैं। वहीं विल्लीवक्कम और एग्मोर की पसंद पर भी यही रणनीति देखने को मिल रही है।

मीम्स की बाढ़ आ गई—सोशल मीडिया पर उठो सवाल
टीवीके चक ने सोशल मीडिया पर हाफनामों की कॉपी साझा करते हुए आरोप लगाया है कि हमनाम मासूम के दस्तावेज में एक नोट हीरी वकील से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, जब इन नामांकित से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। एक कॉल पर जवाब आया- “गलत नंबर है” और फोन कट गया। दूसरे ने अपने नामांकन का उद्देश्य शैल साध ली पर रखा।

“एक नाम, तीन उम्मीदवार- 1 खरीदें 2 मुफ़्त पाएं!”
फ़ोन करो तो जवाब दो- “गलत नंबर है”
जब इन हमनाम शौक़ीन से बात करनी चाही, तो एक ने फ़ोन करके कहा- “गलत नंबर है” और फ़ोन कट गया। दूसरे ने तो इतनी रहस्यमयी शैलियां साधी कि लगे जैसे चुनाव नहीं, कोई अंडरकवर मिशन चल रहा हो।

ये मजाक नहीं, पूरी रणनीति है, क्या है इस ‘नाम वाले गेम’ का असर?
राजनीतिक सिद्धांतों का कहना है कि हमनाम उम्मीदवार के लिए कोई नई बात नहीं है। करीबी मुकाबलों में यह रणनीति अपनाई जाती है ताकि वोटरों को धोखा दिया जा सके और असली दावेदार के वोट कट सके।
इस बार चेन्नई के 16 नामांकनों में कुल 628 नामांकन शामिल हैं। पेरूर में सबसे ज्यादा 66 उम्मीदवार हैं, जबकि मालापुर में सबसे कम 25. अब हंसी अपनी जगह है, लेकिन राजनीति में यह पुराना खेल है- वोट काटने की रणनीति।

जब मुकाबला टक्कर का हो, तो नाम का कन्फ्यूजन पैदा करो… और वोटर को मजबूर कर दो। चेन्नई के 16 क्वार्टरों में कुल 628 प्रतियोगी मैदान हैं। पेरूर में 66 उम्मीदवार-यानी ईवीएम भी शायद सोच रही होगी, “इतने नाम कहां फिट होगा?”

रियल एस्टेट अभी बाकी है, असर क्या होगा?
यह ‘नाम का खेल’ वैज्ञानिकता पर कितना असर डालेगा, यह तो 4 मई को तीसरी के बाद ही साफ होगा। लेकिन इतना है कि इस बार मतदाताओं को सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि सही नाम भी पहचानना होगा।

तमिल की राजनीति में यह परिवर्तन नया सा संकेत देता है-अब चुनाव सिर्फ नाम या फिर आख़री का नहीं, बल्कि पहचान और भ्रम की लड़ाई भी बन गई है। अब जब वोटिंग होगी और रियल कॉमेडी उस दिन देखने को मिल सकती है, जब वोटर ईवीएम के सामने नाम आएगा… और फिर मिचमिचाकर सोचेंगे- “भाई, ये वाला विजय मेरा वाला है या अगले वाला?”

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