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लव बाइट: लव बीटा कब होता है, किस समय का लाभ लेना बेहद जरूरी है? जानिए सब कुछ

लव बाइट: लव बीटा कब होता है, किस समय का लाभ लेना बेहद जरूरी है? जानिए सब कुछ

लव बाईट (लव बाइट या हिक्की) के बारे में तो हर कोई जानता होगा। इनसाइड के बीच पियाटर को स्पष्ट करने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा सा निशान आपकी जान का दुश्मन बन सकता है? यह शायद आपको पता चल गया हो, लेकिन स्थिरता से मुंह मोड़ने में जरा भी समझदारी की बात नहीं है।

तो आइए सबसे पहले कहते हैं लव बीटा क्या होता है और कैसे बनता है। लव बेबा का कहना है कि जो लंबे समय तक किसी भी तरह की त्वचा पर क्रीड़ा या फूल से बनी रहती है। यह त्वचा के नीचे की ओर छोटे पत्थर के टुकड़े और खून के जमाव से लाल-घरा दाग दिखता है। आमतौर पर यह मामूली घाव होता है जो कुछ दिनों से आपके लिए ठीक हो जाता है।

यह कब सामान्य है और कब खतरा है?

छोटे हिक्की आम होते हैं, दर्द होता है और रंग कुछ दिनों में खराब हो जाता है। ज्यादातर मामलों में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता। लेकिन जब निशान बहुत गहरे या नीले-नीले रंग के हों तो सावधान रहना चाहिए। निशान के आसपास सूजन बहुत अधिक हो। या फिर बोल में चक्कर आना लगे, सिरदर्द हो या शरीर के किसी भी हिस्से में झुनझुनी/सूनापन हो, चाल में परेशानी हो या किसी भी तरह की अचानक दुर्बलता महसूस हो तो डॉक्टर के डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

लवबेबी से कैसे जान पर खतरा

मुखिया पर अधिक दबाव: गर्दन में कैरोटिड धमनी जैसी प्रमुख धमनियाँ होती हैं। बहुत जोर से और लंबे समय तक क्रीड़ा या स्क्रैच से इन धमनियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

धमनी की क्षति या फटना: दुर्लभ लेकिन संभव है कि अंदर की कोई धमनियां या नसें फैट। इससे खून का थक्का बन सकता है या खून के अंदर दबाव डाला जा सकता है।

थक्का ब्रेन उभर कर आया (इस्केमिक स्ट्रोक): अगर किसी स्थान पर थक्का बना है और वह खून के साथ दिमाग की तरफ चला जाए तो दिमाग में रक्त का प्रवाह रुक सकता है। जिससे स्ट्रोक हो सकता है। ऐसी स्थिति चक्कर आना, अचानक बेहोशी, घुटने में दर्द, चेहरे की मुद्रा जैसी दिखाई देती है।

ब्रांड का फटना और तेजी से टूटना: नाक के अंदर गंभीर दबाव से चर्बी हो सकती है, जिससे तेजी से खून बह सकता है और रक्तचाप में गिरावट/हृदय की दर पर असर पड़ सकता है।

प्रारंभिक घरेलू उपचार (जब मार्क मार्जिन हो)

तुरंत बर्फ़ की सिकाई: शुरुआत में 24-48 घंटे में बर्फ (कपड़े में लपेटकर) 10-15 मिनट के अंतराल पर 3-4 बार सूजन और दर्द कम हो जाता है। सीधी बर्फ त्वचा पर न रखें।

48-72 घंटे बाद गर्म सिकाई: प्रारंभिक सूजन कम होने पर प्रभाव गर्म-साधन (गर्मी का कपड़ा या हीट पैड, 10-15 मिनट) गठन से रक्त सर्कोलेशन बढ़ता है और तेजी से पीलिया के रूप में रंग के अवशोषण में मदद मिलती है।

कब डॉक्टर का परिचय (इमरजेंसी संकेत)

  • चक्कर आना, सिरदर्द या सिरदर्द महसूस होना।
  • शरीर या शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सुन्नपन या कमजोरी।
  • अकेले या अलग होने में, चेहरे के एक हिस्से का झटकाना।
  • घाव से तेज़ खून बहना या लगातार बढ़ता दर्द।

इसे भी पढ़ें- अज्ञात राजघराने में सौतन विवाद, बाबा राजा की पहली पत्नी ने दूसरी बार मारी गोली, खूनी संघर्ष से कांप उठा राजपरिवार

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लव बाईट (लव बाइट या हिक्की) के बारे में तो हर कोई जानता होगा। इनसाइड के बीच पियाटर को स्पष्ट करने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा सा निशान आपकी जान का दुश्मन बन सकता है? यह शायद आपको पता चल गया हो, लेकिन स्थिरता से मुंह मोड़ने में जरा भी समझदारी की बात नहीं है।

तो आइए सबसे पहले कहते हैं लव बीटा क्या होता है और कैसे बनता है। लव बेबा का कहना है कि जो लंबे समय तक किसी भी तरह की त्वचा पर क्रीड़ा या फूल से बनी रहती है। यह त्वचा के नीचे की ओर छोटे पत्थर के टुकड़े और खून के जमाव से लाल-घरा दाग दिखता है। आमतौर पर यह मामूली घाव होता है जो कुछ दिनों से आपके लिए ठीक हो जाता है।

यह कब सामान्य है और कब खतरा है?

छोटे हिक्की आम होते हैं, दर्द होता है और रंग कुछ दिनों में खराब हो जाता है। ज्यादातर मामलों में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता। लेकिन जब निशान बहुत गहरे या नीले-नीले रंग के हों तो सावधान रहना चाहिए। निशान के आसपास सूजन बहुत अधिक हो। या फिर बोल में चक्कर आना लगे, सिरदर्द हो या शरीर के किसी भी हिस्से में झुनझुनी/सूनापन हो, चाल में परेशानी हो या किसी भी तरह की अचानक दुर्बलता महसूस हो तो डॉक्टर के डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

लवबेबी से कैसे जान पर खतरा

मुखिया पर अधिक दबाव: गर्दन में कैरोटिड धमनी जैसी प्रमुख धमनियाँ होती हैं। बहुत जोर से और लंबे समय तक क्रीड़ा या स्क्रैच से इन धमनियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

धमनी की क्षति या फटना: दुर्लभ लेकिन संभव है कि अंदर की कोई धमनियां या नसें फैट। इससे खून का थक्का बन सकता है या खून के अंदर दबाव डाला जा सकता है।

थक्का ब्रेन उभर कर आया (इस्केमिक स्ट्रोक): अगर किसी स्थान पर थक्का बना है और वह खून के साथ दिमाग की तरफ चला जाए तो दिमाग में रक्त का प्रवाह रुक सकता है। जिससे स्ट्रोक हो सकता है। ऐसी स्थिति चक्कर आना, अचानक बेहोशी, घुटने में दर्द, चेहरे की मुद्रा जैसी दिखाई देती है।

ब्रांड का फटना और तेजी से टूटना: नाक के अंदर गंभीर दबाव से चर्बी हो सकती है, जिससे तेजी से खून बह सकता है और रक्तचाप में गिरावट/हृदय की दर पर असर पड़ सकता है।

प्रारंभिक घरेलू उपचार (जब मार्क मार्जिन हो)

तुरंत बर्फ़ की सिकाई: शुरुआत में 24-48 घंटे में बर्फ (कपड़े में लपेटकर) 10-15 मिनट के अंतराल पर 3-4 बार सूजन और दर्द कम हो जाता है। सीधी बर्फ त्वचा पर न रखें।

48-72 घंटे बाद गर्म सिकाई: प्रारंभिक सूजन कम होने पर प्रभाव गर्म-साधन (गर्मी का कपड़ा या हीट पैड, 10-15 मिनट) गठन से रक्त सर्कोलेशन बढ़ता है और तेजी से पीलिया के रूप में रंग के अवशोषण में मदद मिलती है।

कब डॉक्टर का परिचय (इमरजेंसी संकेत)

  • चक्कर आना, सिरदर्द या सिरदर्द महसूस होना।
  • शरीर या शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सुन्नपन या कमजोरी।
  • अकेले या अलग होने में, चेहरे के एक हिस्से का झटकाना।
  • घाव से तेज़ खून बहना या लगातार बढ़ता दर्द।

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