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Rajasthan Refinery Project Gets ₹79,459 Cr Nod; DAP Bag ₹1,350 for Farmers

Rajasthan Refinery Project Gets ₹79,459 Cr Nod; DAP Bag ₹1,350 for Farmers
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नई दिल्ली25 मिनट पहले

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केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी 8 अप्रैल को ₹1.74 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स और प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों में कृषि, ऊर्जा और शहरी परिवहन शामिल है।

1. खरीफ 2026 के लिए ₹41,534 करोड़ की खाद सब्सिडी

कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए NBS स्कीम को मंजूरी दी है। सरकार फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों करीब 41,533 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह पिछले साल के बजट से करीब ₹4,317 करोड़ ज्यादा है। नई दरें 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक लागू रहेंगी।

सरकार के इस फैसले का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाना है। कोरोना के बाद DAP की कीमतें तेजी से बढ़ी है, लेकिन सरकार ने किसानों के लिए खुदरा कीमत को ₹1,350 प्रति 50 किलो बैग पर स्थिर रखा है।

2. राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर ₹79,459 करोड़ खर्च होंगे

सरकार ने HPCL राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रोजेक्ट पर ₹79,459 करोड़ खर्च होंगे। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित यह रिफाइनरी 9 MMTPA क्षमता वाली होगी। ऑपरेशन जुलाई से शुरू हो सकते हैं।

3. जयपुर मेट्रो फेज-2 में ₹13,038 करोड़ से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मेट्रो विस्तार के लिए फेज-2 को मंजूरी मिल गई है। ₹13,038 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनेगा। इससे जयपुर और आसपास के इलाकों में ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहतर होगा।

4. हाइड्रोपावर सेक्टर के लिए ₹40,000 करोड़ के दो बड़े प्रोजेक्ट

ऊर्जा सुरक्षा के लिए कैबिनेट ने दो बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। 1,720 मेगावाट क्षमता वाले कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर ₹26,070 करोड़ खर्च होंगे। वहीं 1,200 मेगावाट के कलई-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर ₹14,106 करोड़ खर्च होंगे।

नॉलेज पार्ट

  • NBS क्या है: NBS का पूरा नाम न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी है। यह योजना 2010 से लागू है। सरकार खाद की बोरी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर की मात्रा के हिसाब से कंपनियों को पैसे देती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के दाम बढ़ने पर भी किसानों को मिलने वाली बोरी की कीमत नहीं बढ़ती।
  • हाइड्रोपावर क्यो जरूरी: हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी केवल बिजली बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसमें कोयले की तरह धुआं नहीं निकलता। इन प्रोजेक्ट्स के लिए बने बांधों का पानी बाद में सिंचाई और पीने के काम भी आता है।

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केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी 8 अप्रैल को ₹1.74 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स और प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों में कृषि, ऊर्जा और शहरी परिवहन शामिल है।

1. खरीफ 2026 के लिए ₹41,534 करोड़ की खाद सब्सिडी

कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए NBS स्कीम को मंजूरी दी है। सरकार फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों करीब 41,533 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह पिछले साल के बजट से करीब ₹4,317 करोड़ ज्यादा है। नई दरें 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक लागू रहेंगी।

सरकार के इस फैसले का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाना है। कोरोना के बाद DAP की कीमतें तेजी से बढ़ी है, लेकिन सरकार ने किसानों के लिए खुदरा कीमत को ₹1,350 प्रति 50 किलो बैग पर स्थिर रखा है।

2. राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट पर ₹79,459 करोड़ खर्च होंगे

सरकार ने HPCL राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट के लिए संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रोजेक्ट पर ₹79,459 करोड़ खर्च होंगे। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित यह रिफाइनरी 9 MMTPA क्षमता वाली होगी। ऑपरेशन जुलाई से शुरू हो सकते हैं।

3. जयपुर मेट्रो फेज-2 में ₹13,038 करोड़ से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मेट्रो विस्तार के लिए फेज-2 को मंजूरी मिल गई है। ₹13,038 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनेगा। इससे जयपुर और आसपास के इलाकों में ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहतर होगा।

4. हाइड्रोपावर सेक्टर के लिए ₹40,000 करोड़ के दो बड़े प्रोजेक्ट

ऊर्जा सुरक्षा के लिए कैबिनेट ने दो बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। 1,720 मेगावाट क्षमता वाले कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर ₹26,070 करोड़ खर्च होंगे। वहीं 1,200 मेगावाट के कलई-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर ₹14,106 करोड़ खर्च होंगे।

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  • NBS क्या है: NBS का पूरा नाम न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी है। यह योजना 2010 से लागू है। सरकार खाद की बोरी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर की मात्रा के हिसाब से कंपनियों को पैसे देती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के दाम बढ़ने पर भी किसानों को मिलने वाली बोरी की कीमत नहीं बढ़ती।
  • हाइड्रोपावर क्यो जरूरी: हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी केवल बिजली बनाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसमें कोयले की तरह धुआं नहीं निकलता। इन प्रोजेक्ट्स के लिए बने बांधों का पानी बाद में सिंचाई और पीने के काम भी आता है।

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