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फरमान से शादी करने वाली मोना लिसा की उम्र की होगी जांच, पर कैसे होता है यह टेस्ट, विज्ञान के हिसाब से जानिए

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Mona Lisa Age Test: सोशल मीडिया सेंसेशन मोना लिसा ने जब से केरल के एक्टर फरमान से शादी की है तब से वह विवादों में है. कहा जा रहा है मोना लिसा नाबालिग है. इसलिए फरमान के साथ यह शादी अवैध है. ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और केरल और मध्य प्रदेश पुलिस को 7 दिनों के अंदर जांच करने के आदेश दिए हैं. इस बीच पुलिस ने मोना लिसा की उम्र का पता लगाने के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट करने का फैसला किया है. अब सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. आइए जानते हैं.

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mona_lisa_0007 इंस्टाग्राम पेज से ली गई मोना लिसा और फरमान खान की फोटो.

कुंभ मेले से सोशल मीडिया में रातों-रात सनसनी बनीं मोना लिसा की उम्र की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. दरअसल, उनकी उम्र को लेकर विवाद गहरा गया है. केरल के फरमान से शादी के बाद हिन्दू पक्षों ने कई जगहें शिकायतें पहुंचाई हैं. शिकायत में कहा गया है कि कुंभ के दौरान एक वीडियो में मोना लिसा ने अपनी उम्र 16 साल बताई थी. इस हिसाब से अभी उसकी उम्र 17 साल ही होगी लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत जानकारी दी गई है. ऐसे में मोना लिसा नाबालिग है और इस हिसाब से फरमान ने नाबालिग से शादी की है. इस तरह फरमान पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए. इसी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. अब सवाल है कि उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. क्या विज्ञान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा कि मोना लिसा शादी के वक्त नाबालिग थी या बालिग?

विज्ञान के हिसाब से उम्र का पता
विज्ञान में उम्र का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. यह केवल एक सामान्य चेकअप नहीं बल्कि फॉरेंसिक विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है जिसे ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इसमें हड्डियों के जुड़ाव की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद डेंटल एजिंग टेस्ट है. इसमें दांतों और उसकी जड़ों की बनावट को आंका जाता है. वहीं उम्र का पता लगाने के लिए हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है.

ओसिफिकेशन टेस्ट या बोन डेंसिटी टेस्ट-विज्ञान में उम्र का अंदाजा लगाने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट प्रमुख है. कोई व्यक्ति नाबालिग है या बालिग, इसका पता लगाने के लिए इस टेस्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक्स-रे के जरिए हाथ की कलाई की हड्डियों के जुड़ाव की जांच की जाती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां आपस में जुड़ती हैं. विज्ञान के हिसाब से, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर की हड्डियां आपस में जुड़ती हैं और उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. एक्स-रे और डेंटल स्कैन के जरिए डॉक्टर इन्हीं हड्डियों के घनत्व और दांतों की बनावट का विश्लेषण करते हैं. इस विश्लेषण के आधार पर यह देखा जाता है कि व्यक्ति बालिग है या नाबालिग. हालांकि इसकी सटीकता 80% से 90% तक होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है.

दांतों का विश्लेषण-जीवित व्यक्तियों और हाल के शवों की उम्र पता करने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों में दांतों के निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है.

टेलोमेयर विश्लेषण-टेलोमेयर टेस्ट जेनेटिक टेस्ट है. यह उम्र पता करने की एक आधुनिक जेनेटिक विधि है. वास्तव में हमारे डीएनए के सिरों पर टेलोमेयर्स होते हैं. हर बार जब कोशिका विभाजित होती है, टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं. इनकी लंबाई मापकर बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जाता है. यह बायोलॉजिकल उम्र बताने में तो सटीक है लेकिन क्रोनोलॉजिकल उम्र (जन्म तिथि के हिसाब से) बताने में इसमें 5-8 साल का अंतर हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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कुंभ मेले से सोशल मीडिया में रातों-रात सनसनी बनीं मोना लिसा की उम्र की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. दरअसल, उनकी उम्र को लेकर विवाद गहरा गया है. केरल के फरमान से शादी के बाद हिन्दू पक्षों ने कई जगहें शिकायतें पहुंचाई हैं. शिकायत में कहा गया है कि कुंभ के दौरान एक वीडियो में मोना लिसा ने अपनी उम्र 16 साल बताई थी. इस हिसाब से अभी उसकी उम्र 17 साल ही होगी लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत जानकारी दी गई है. ऐसे में मोना लिसा नाबालिग है और इस हिसाब से फरमान ने नाबालिग से शादी की है. इस तरह फरमान पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए. इसी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. अब सवाल है कि उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. क्या विज्ञान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा कि मोना लिसा शादी के वक्त नाबालिग थी या बालिग?

विज्ञान के हिसाब से उम्र का पता
विज्ञान में उम्र का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. यह केवल एक सामान्य चेकअप नहीं बल्कि फॉरेंसिक विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है जिसे ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इसमें हड्डियों के जुड़ाव की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद डेंटल एजिंग टेस्ट है. इसमें दांतों और उसकी जड़ों की बनावट को आंका जाता है. वहीं उम्र का पता लगाने के लिए हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है.

ओसिफिकेशन टेस्ट या बोन डेंसिटी टेस्ट-विज्ञान में उम्र का अंदाजा लगाने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट प्रमुख है. कोई व्यक्ति नाबालिग है या बालिग, इसका पता लगाने के लिए इस टेस्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक्स-रे के जरिए हाथ की कलाई की हड्डियों के जुड़ाव की जांच की जाती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां आपस में जुड़ती हैं. विज्ञान के हिसाब से, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर की हड्डियां आपस में जुड़ती हैं और उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. एक्स-रे और डेंटल स्कैन के जरिए डॉक्टर इन्हीं हड्डियों के घनत्व और दांतों की बनावट का विश्लेषण करते हैं. इस विश्लेषण के आधार पर यह देखा जाता है कि व्यक्ति बालिग है या नाबालिग. हालांकि इसकी सटीकता 80% से 90% तक होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है.

दांतों का विश्लेषण-जीवित व्यक्तियों और हाल के शवों की उम्र पता करने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों में दांतों के निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है.

टेलोमेयर विश्लेषण-टेलोमेयर टेस्ट जेनेटिक टेस्ट है. यह उम्र पता करने की एक आधुनिक जेनेटिक विधि है. वास्तव में हमारे डीएनए के सिरों पर टेलोमेयर्स होते हैं. हर बार जब कोशिका विभाजित होती है, टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं. इनकी लंबाई मापकर बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जाता है. यह बायोलॉजिकल उम्र बताने में तो सटीक है लेकिन क्रोनोलॉजिकल उम्र (जन्म तिथि के हिसाब से) बताने में इसमें 5-8 साल का अंतर हो सकता है.

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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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