नौरादेही अभयारण्य से एक बाघिन लापता हो गई है। इस बाघिन के गले में रेडियो कॉलर लगा है, इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारियों की टीम उसे तलाश नहीं कर पा रही है। अब गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बाघिन कहां है, यह विभाग की जानकारी में नहीं है। इस मामले में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने जांच की मांग की है और कहा है कि मध्य प्रदेश में रेडियो कॉलर वाले बाघों का गायब होना राष्ट्रीय चिंता का विषय है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे के अनुसार, नौरादेही में एक बाघिन के लापता होने और माधव राष्ट्रीय उद्यान, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रहस्यमय ढंग से बाघों के गायब होने के बाद एमपी का “बाघ राज्य” का दर्जा खतरे में है। अगर रेडियो कॉलर सुरक्षा प्रदान नहीं कर रहे हैं, तो फिर विभाग क्या कर रहा है? उन्होंने कहा कि बाघिन को सुरक्षित न तलाश पाए विभाग के अफसर अब मुनादी कराकर अपनी जिम्मेदारी खत्म मान रहे हैं। बाघिन के अलावा एक बाघ भी गायब है। रेडिया कॉलर लगे होने के बाद भी इनका पता नहीं चल पाना गंभीर विषय है। दुबे ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कहा है कि सभी फील्ड डायरेक्टरों से लापता बाघों की स्थिति का अनिवार्य प्रमाण पत्र लिया जाए। साथ ही सैटेलाइट कॉलर निगरानी प्रणाली का व्यापक प्रदर्शन ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जवाबदेही हमारे बाघों की तरह “लापता” नहीं हो सकती।














































