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मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

एक्ट्रेस मुस्कान वर्मा ने छोटे शहर रुड़की से निकलकर मुंबई में अपनी पहचान बनाई। म्यूजिक सीखने वाली मुस्कान के भीतर एक्टिंग का सपना उनकी मां ने जगाया, जो खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष, रिजेक्शन और लोगों के ताने झेलने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में बिन्नी के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुस्कान ने अपने स्ट्रगल, कास्टिंग काउच, परिवार के सपोर्ट, रणदीप हुड्डा के साथ काम करने का अनुभव और भावुक क्रिमेशन सीन से जुड़ी यादें साझा कीं। सवाल: आपकी जर्नी बहुत खूबसूरत रही है। रुड़की जैसे शहर से मुंबई तक पहुंचना आसान नहीं होता। सबसे पहले एक्टिंग का सपना कब देखा? जवाब: सच कहूं तो यह सपना मेरी मम्मी का था। वह खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उस समय लड़कियों की जल्दी शादी हो जाती थी। उनका सपना अधूरा रह गया। धीरे-धीरे वही सपना मेरे अंदर आने लगा। मम्मी मुझे बचपन से दो रिबन, काजल और लिपस्टिक लगाकर हीरोइन की तरह तैयार करती थीं। लोग कहते थे कि जिस तरह यह बच्ची को तैयार करती है, यह जरूर फिल्मों में जाएगी। सवाल: यानी कहीं न कहीं मम्मी ने आपके अंदर वह सपना डाल दिया था? जवाब: बिल्कुल। फिर मैंने म्यूजिक का छह साल का कोर्स किया। मेरी मैम कहती थीं कि तुम्हें मुंबई जाकर कोशिश करनी चाहिए। उसके बाद मम्मी-पापा ने मुझे एक-दो साल का समय दिया कि जाओ और ट्राई करो। सवाल: जब घर से सीमित समय मिला था, तब मुंबई आने के बाद पहला मौका कैसे मिला? जवाब: मैं कोविड से थोड़ा पहले मुंबई आई थी और जल्दी ही मुझे एक टीवीसी ऐड मिल गया। फिर लगा कि शायद मैं सही दिशा में जा रही हूं। कोविड के दौरान पापा ने कहा था कि अब वापस आ जाओ, क्योंकि उस समय बहुत लोग मुंबई छोड़ रहे थे। लेकिन तभी मुझे ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ मिल गई। सवाल: मुंबई में शुरुआत कैसे हुई? पहली बार कहां रुकी थीं? जवाब: शुरुआत में मैं न्यू म्हाडा में रुकी थी। रिश्तेदारों के जरिए रहने की व्यवस्था हुई। धीरे-धीरे ऑडिशन देना शुरू किया, लोगों से मिलती गई और इंडस्ट्री को समझती गई। सवाल: छोटे शहर से आने वाले लोगों के लिए मुंबई को समझना आसान नहीं होता। आपने कैसे सीखा? जवाब: ऑडिशन में जाती गई और लोगों से मिलती गई। फिर दोस्त बने। किसी ने बताया कि ऐसे ऑडिशन देना होता है और ऐसे कास्टिंग डायरेक्टर से मिलना होता है। बाद में मैं मेडिटेशन और ब्रह्माकुमारी से भी जुड़ गई। मुझे लगता है कि भगवान कृष्ण की कृपा से सब होता चला गया। सवाल: आपने म्यूजिक की पढ़ाई की। तो सपना सिंगर बनने का था या एक्ट्रेस बनने का? जवाब: शुरुआत में सपना सिंगिंग का था। मेरी आवाज की तारीफ होती थी। लेकिन धीरे-धीरे एक्टिंग की तरफ झुकाव बढ़ता गया। सच कहूं तो अब काफी समय से मैंने रियाज नहीं किया है। एक्टिंग में इतना बिजी हो गई हूं कि म्यूजिक थोड़ा पीछे छूट गया। लेकिन अगर आगे कभी मौका मिला, तो मैं अपनी किसी फिल्म या प्रोजेक्ट में जरूर गाना चाहूंगी। सवाल: आपको कब लगा कि एक्टिंग ही करनी है? जवाब: जब मम्मी दिन में सोती थीं, तब मैं साड़ी पहनकर माधुरी दीक्षित के गानों पर डांस करती थी। शायद वहीं से सब शुरू हुआ। सवाल: पेरेंट्स क्या करते हैं और परिवार में सबसे ज्यादा सपोर्ट किसका मिला? जवाब: मेरे पापा पत्रकार हैं और मम्मी टीचर हैं। सबसे ज्यादा सपोर्ट मम्मी का मिला। पापा थोड़े स्ट्रिक्ट थे। म्यूजिक क्लास मम्मी ने उनसे छुपाकर कराई। उन्हें डर था कि मेरे सपने कहीं खत्म न हो जाएं। सवाल: मुंबई में संघर्ष कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। यहां अच्छे और गलत दोनों तरह के लोग मिले। कॉम्प्रोमाइज जैसी बातें सुननी पड़ीं। लेकिन मैंने ऐसे कई प्रोजेक्ट छोड़ दिए। मुझे लगा कि गलत रास्ते से सफलता नहीं चाहिए। सवाल: उस दौरान आर्थिक स्थिति कैसे संभाली? जवाब: मैंने यहां लगभग एक साल नौकरी की। एक ऑफिस में काम करती थी। मैं घर से ज्यादा पैसे नहीं मांगती थी, क्योंकि डर था कि पापा वापस बुला लेंगे। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री को लेकर छोटे शहरों में बहुत गलत धारणाएं होती हैं। आपके साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, बहुत हुआ। लोगों ने कहा कि मुंबई जाकर पता नहीं क्या कर रही होगी। लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया। मैंने सोचा कि एक दिन मेरा काम ही जवाब देगा। आज वही लोग टीवी पर मुझे देखकर तारीफ करते हैं। सवाल: एक्टिंग में पहला बड़ा मौका कौन सा मिला? जवाब: मैंने पहले स्टार भारत के शो ‘राधा कृष्ण’ में चित्रलेखा का रोल किया। उसका ऑडिशन दिया और भूल गई थी। रात 12:30 बजे कॉल आया कि सुबह 6 बजे शूट के लिए निकलना है। सवाल: उस शो से कितना फायदा मिला? जवाब: सीखने को बहुत मिला, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मैं टीवी सीरियल्स के लिए नहीं बनी हूं। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। सवाल: कभी ऐसा लगा कि शायद यह इंडस्ट्री आपके लिए नहीं है? जवाब: हां। एक बड़े शो में मैं फाइनल हो गई थी, लेकिन शूट से एक रात पहले रिप्लेस कर दिया गया। मैं डिप्रेशन में चली गई थी। लगा कि शायद मैं टैलेंटेड नहीं हूं। लेकिन बाद में समझ आया कि शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ बड़ा सोच रखा था। सवाल: फिर ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में काम करने का मौका कैसे मिला? जवाब: एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझे कॉल किया और कहा कि एक डायरेक्टर से मिल लो। मैं उस समय इसे सीरियस नहीं ले रही थी। उन्होंने चार-पांच बार कॉल किया, तब मैं मिलने गई। वहां मेरी मुलाकात डायरेक्टर नीरज पाठक से हुई और मुझे बिन्नी का रोल मिल गया। सवाल: पहली बार इतने बड़े सेट पर पहुंचीं। कैसा अनुभव रहा? जवाब: बहुत शानदार। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं पहली बार काम कर रही हूं। नीरज पाठक सर इतने सपोर्टिव थे कि हर चीज प्यार से समझाते थे। वह किसी भी एक्टर से बेहतरीन एक्टिंग निकलवा लेते हैं। सवाल: रणदीप हुड्डा के साथ पहला सीन कैसा था? जवाब: बहुत अच्छा। उन्होंने मुझे कभी जूनियर जैसा महसूस नहीं कराया। हमारे बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता बन गया था। पहला सीन वही था, जिसमें मेरा किरदार कॉलेज टॉप करता है और पूरा एसटीएफ परिवार घर आता है। सवाल: दूसरे सीजन में आपका किरदार और मजबूत दिखा। उसके बारे में बताइए? जवाब: इसमें दिखाया गया है कि बेटियां किसी बेटे से कम नहीं होतीं। एक भावुक सीन है, जहां मेरे किरदार को अपने पिता को मुखाग्नि देनी पड़ती है। लोगों ने उस सीन को बहुत पसंद किया। सवाल: उस सीन को करते समय क्या महसूस हुआ? जवाब: उस समय मैंने सच में सोच लिया था कि सामने लेटे हुए मेरे असली पापा हैं। मैं इतनी भावुक हो गई थी कि सीन खत्म होने के बाद खुद को संभालने में समय लगा। सवाल: एक्टिंग की तैयारी कैसे करती हैं? जवाब: मैं गहरी वर्कशॉप्स करती हूं। मेरे ट्रेनर सिखाते हैं कि सीन करते समय पूरी ईमानदारी होनी चाहिए। उस पल वही रिश्ता सच लगना चाहिए। अगर सामने वाला मेरा भाई या पिता है, तो उस समय मैं सच में वही महसूस करती हूं। सवाल: इस सीरीज के बाद सबसे खूबसूरत कॉम्प्लीमेंट क्या मिला? जवाब: लोगों ने कहा कि ऐसा लग ही नहीं रहा कि मैं एक्टिंग कर रही हूं। सबको सब कुछ नैचुरल लगा। सवाल: आपके पेरेंट्स ने सीरीज देखकर क्या कहा? सवाल: आपके पेरेंट्स ने सीरीज देखकर क्या कहा? जवाब: बहुत प्राउड फील किया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी मेहनत अब स्क्रीन पर दिख रही है। सवाल: आगे क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: अभी दो फिल्में और एक वेब सीरीज कर रही हूं। नाम नहीं बता सकती, लेकिन जल्दी ही सब सामने आएगा।

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मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

एक्ट्रेस मुस्कान वर्मा ने छोटे शहर रुड़की से निकलकर मुंबई में अपनी पहचान बनाई। म्यूजिक सीखने वाली मुस्कान के भीतर एक्टिंग का सपना उनकी मां ने जगाया, जो खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष, रिजेक्शन और लोगों के ताने झेलने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में बिन्नी के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुस्कान ने अपने स्ट्रगल, कास्टिंग काउच, परिवार के सपोर्ट, रणदीप हुड्डा के साथ काम करने का अनुभव और भावुक क्रिमेशन सीन से जुड़ी यादें साझा कीं। सवाल: आपकी जर्नी बहुत खूबसूरत रही है। रुड़की जैसे शहर से मुंबई तक पहुंचना आसान नहीं होता। सबसे पहले एक्टिंग का सपना कब देखा? जवाब: सच कहूं तो यह सपना मेरी मम्मी का था। वह खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उस समय लड़कियों की जल्दी शादी हो जाती थी। उनका सपना अधूरा रह गया। धीरे-धीरे वही सपना मेरे अंदर आने लगा। मम्मी मुझे बचपन से दो रिबन, काजल और लिपस्टिक लगाकर हीरोइन की तरह तैयार करती थीं। लोग कहते थे कि जिस तरह यह बच्ची को तैयार करती है, यह जरूर फिल्मों में जाएगी। सवाल: यानी कहीं न कहीं मम्मी ने आपके अंदर वह सपना डाल दिया था? 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जवाब: शुरुआत में सपना सिंगिंग का था। मेरी आवाज की तारीफ होती थी। लेकिन धीरे-धीरे एक्टिंग की तरफ झुकाव बढ़ता गया। सच कहूं तो अब काफी समय से मैंने रियाज नहीं किया है। एक्टिंग में इतना बिजी हो गई हूं कि म्यूजिक थोड़ा पीछे छूट गया। लेकिन अगर आगे कभी मौका मिला, तो मैं अपनी किसी फिल्म या प्रोजेक्ट में जरूर गाना चाहूंगी। सवाल: आपको कब लगा कि एक्टिंग ही करनी है? जवाब: जब मम्मी दिन में सोती थीं, तब मैं साड़ी पहनकर माधुरी दीक्षित के गानों पर डांस करती थी। शायद वहीं से सब शुरू हुआ। सवाल: पेरेंट्स क्या करते हैं और परिवार में सबसे ज्यादा सपोर्ट किसका मिला? जवाब: मेरे पापा पत्रकार हैं और मम्मी टीचर हैं। सबसे ज्यादा सपोर्ट मम्मी का मिला। पापा थोड़े स्ट्रिक्ट थे। म्यूजिक क्लास मम्मी ने उनसे छुपाकर कराई। उन्हें डर था कि मेरे सपने कहीं खत्म न हो जाएं। सवाल: मुंबई में संघर्ष कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। यहां अच्छे और गलत दोनों तरह के लोग मिले। कॉम्प्रोमाइज जैसी बातें सुननी पड़ीं। लेकिन मैंने ऐसे कई प्रोजेक्ट छोड़ दिए। मुझे लगा कि गलत रास्ते से सफलता नहीं चाहिए। सवाल: उस दौरान आर्थिक स्थिति कैसे संभाली? जवाब: मैंने यहां लगभग एक साल नौकरी की। एक ऑफिस में काम करती थी। मैं घर से ज्यादा पैसे नहीं मांगती थी, क्योंकि डर था कि पापा वापस बुला लेंगे। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री को लेकर छोटे शहरों में बहुत गलत धारणाएं होती हैं। आपके साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, बहुत हुआ। लोगों ने कहा कि मुंबई जाकर पता नहीं क्या कर रही होगी। लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया। मैंने सोचा कि एक दिन मेरा काम ही जवाब देगा। आज वही लोग टीवी पर मुझे देखकर तारीफ करते हैं। सवाल: एक्टिंग में पहला बड़ा मौका कौन सा मिला? जवाब: मैंने पहले स्टार भारत के शो ‘राधा कृष्ण’ में चित्रलेखा का रोल किया। उसका ऑडिशन दिया और भूल गई थी। रात 12:30 बजे कॉल आया कि सुबह 6 बजे शूट के लिए निकलना है। सवाल: उस शो से कितना फायदा मिला? जवाब: सीखने को बहुत मिला, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मैं टीवी सीरियल्स के लिए नहीं बनी हूं। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। सवाल: कभी ऐसा लगा कि शायद यह इंडस्ट्री आपके लिए नहीं है? जवाब: हां। एक बड़े शो में मैं फाइनल हो गई थी, लेकिन शूट से एक रात पहले रिप्लेस कर दिया गया। मैं डिप्रेशन में चली गई थी। लगा कि शायद मैं टैलेंटेड नहीं हूं। लेकिन बाद में समझ आया कि शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ बड़ा सोच रखा था। सवाल: फिर ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में काम करने का मौका कैसे मिला? जवाब: एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझे कॉल किया और कहा कि एक डायरेक्टर से मिल लो। मैं उस समय इसे सीरियस नहीं ले रही थी। उन्होंने चार-पांच बार कॉल किया, तब मैं मिलने गई। वहां मेरी मुलाकात डायरेक्टर नीरज पाठक से हुई और मुझे बिन्नी का रोल मिल गया। सवाल: पहली बार इतने बड़े सेट पर पहुंचीं। कैसा अनुभव रहा? जवाब: बहुत शानदार। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं पहली बार काम कर रही हूं। नीरज पाठक सर इतने सपोर्टिव थे कि हर चीज प्यार से समझाते थे। वह किसी भी एक्टर से बेहतरीन एक्टिंग निकलवा लेते हैं। सवाल: रणदीप हुड्डा के साथ पहला सीन कैसा था? जवाब: बहुत अच्छा। उन्होंने मुझे कभी जूनियर जैसा महसूस नहीं कराया। हमारे बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता बन गया था। पहला सीन वही था, जिसमें मेरा किरदार कॉलेज टॉप करता है और पूरा एसटीएफ परिवार घर आता है। सवाल: दूसरे सीजन में आपका किरदार और मजबूत दिखा। उसके बारे में बताइए? जवाब: इसमें दिखाया गया है कि बेटियां किसी बेटे से कम नहीं होतीं। एक भावुक सीन है, जहां मेरे किरदार को अपने पिता को मुखाग्नि देनी पड़ती है। लोगों ने उस सीन को बहुत पसंद किया। सवाल: उस सीन को करते समय क्या महसूस हुआ? जवाब: उस समय मैंने सच में सोच लिया था कि सामने लेटे हुए मेरे असली पापा हैं। मैं इतनी भावुक हो गई थी कि सीन खत्म होने के बाद खुद को संभालने में समय लगा। सवाल: एक्टिंग की तैयारी कैसे करती हैं? जवाब: मैं गहरी वर्कशॉप्स करती हूं। मेरे ट्रेनर सिखाते हैं कि सीन करते समय पूरी ईमानदारी होनी चाहिए। उस पल वही रिश्ता सच लगना चाहिए। अगर सामने वाला मेरा भाई या पिता है, तो उस समय मैं सच में वही महसूस करती हूं। सवाल: इस सीरीज के बाद सबसे खूबसूरत कॉम्प्लीमेंट क्या मिला? जवाब: लोगों ने कहा कि ऐसा लग ही नहीं रहा कि मैं एक्टिंग कर रही हूं। सबको सब कुछ नैचुरल लगा। सवाल: आपके पेरेंट्स ने सीरीज देखकर क्या कहा? सवाल: आपके पेरेंट्स ने सीरीज देखकर क्या कहा? जवाब: बहुत प्राउड फील किया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी मेहनत अब स्क्रीन पर दिख रही है। सवाल: आगे क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: अभी दो फिल्में और एक वेब सीरीज कर रही हूं। नाम नहीं बता सकती, लेकिन जल्दी ही सब सामने आएगा।

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