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Calcium Carbide Ripening Fruits Health Risk; Chemical Mango Seized

Calcium Carbide Ripening Fruits Health Risk; Chemical Mango Seized

हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने केमिकल से पके फलों की बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 200 किलो केमिकल से पके आम सीज किए गए। इन्हें पकाने के लिए ‘कैल्शियम कार्बाइड’ यूज किया गया था।

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कैल्शियम कार्बाइड से पके आम खाने से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ऐसे में बाजार से आम खरीदते समय सावधानी बरतनी जरूरी है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज केमिकल से पके आम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • इससे क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
  • केमिकल से पके आम कैसे पहचानें?

एक्सपर्ट:

डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश

डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- कैल्शियम कार्बाइड क्या है? इससे आम कैसे पकाए जाते हैं?

जवाब- ये एक इंडस्ट्रियल केमिकल है, जिसका इस्तेमाल गैस ‘वेल्डिंग’ के काम में होता है।

  • कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आते ही एक गैस बनाता है, जिसे एसीटिलीन कहते हैं।
  • यह गैस प्राकृतिक रूप से फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है, इसलिए फल जल्दी पक जाते हैं।
  • व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसका यूज करते हैं।

कार्बाइड से आम कैसे पकाया जाता है?

  • कच्चे आम को बॉक्स में बंद कमरे में रखा जाता है।
  • बीच-बीच में कैल्शियम कार्बाइड के छोटे टुकड़े/पाउडर के पैकेट रखे जाते हैं।
  • केमिकल पर हल्का पानी डाला जाता है।
  • इसके रिएक्शन से एसीटिलीन गैस निकलती है।
  • यह फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है।
  • इससे 1–2 दिन में ही आम पक जाते हैं।

सवाल- कार्बाइड से पके आम और पेड़ पर नेचुरल तरीके से पके आम में क्या फर्क होता है?

जवाब- कार्बाइड से पके आम और नेचुरली पके आम में स्वाद, न्यूट्रिशन और क्वालिटी का फर्क होता है। इसे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या कार्बाइड से पका आम खाना सेफ है?

जवाब- नहीं, कार्बाइड से पका आम खाना सेफ नहीं है। इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स हो सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।

सवाल- क्या फल को अच्छे से धोकर, छिलका उतारकर खाना सेफ है?

जवाब- नहीं, सिर्फ धोने और छिलका उतारने से कार्बाइड का असर पूरी तरह खत्म नहीं होता है।

  • धोने और छीलने से बाहरी केमिकल कम हो सकते हैं, लेकिन आम पूरी तरह सेफ नहीं होता है।
  • कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस आम के गूदे (पल्प) को भी प्रभावित करती है।
  • ऐसे में इसे खाने से टॉक्सिन्स शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं।
  • इसके कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

सवाल- कार्बाइड से पका आम खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब- कुछ मामलों में असर तुरंत दिखाई देता है। कुछ में यह लंबे समय में सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कार्बाइड फलों के जरिए शरीर में कैसे प्रवेश करता है और बॉडी को धीरे-धीरे कैसे डैमेज करता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कार्बाइड शरीर में कैसे पहुंचता है?
  • फल धोने के बाद भी सतह पर कुछ केमिकल रह जाते हैं। ये खाने के साथ पेट में जा सकते हैं।
  • कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस और आर्सेनिक, फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते हैं।
  • केमिकल का असर फल के गूदे में भी होता है। खाने पर यह सीधे ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाता है।

यह सेहत को कैसे प्रभावित करता है?

  • डाइजेस्टिव सिस्टम को इरिटेट करता है।
  • इससे एसिडिटी, गैस, अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • टॉक्सिन्स खून के जरिए पूरे शरीर में फैलते हैं।
  • यह धीरे-धीरे लिवर, किडनी, नर्व्स और सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • लिवर की कार्यक्षमता घटती है।
  • टॉक्सिन्स शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ाते हैं।
  • इससे सेल्स डैमेज होते हैं।
  • लॉन्ग टर्म में कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है।

धीरे-धीरे असर क्यों दिखता है?

  • रोज थोड़ा-थोड़ा एक्सपोजर होता है।
  • टॉक्सिन्स शरीर में जमा होते जाते हैं।
  • शुरुआत में हल्के लक्षण दिखते हैं।
  • लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

सवाल- आम खरीदते हुए कैसे पहचानें कि ये नेचुरली पका है या केमिकल से पकाया गया है?

जवाब- इसकी पहचान रंग, खुशबू, टेक्सचर और स्मेल से की जा सकती है। सभी तरीके ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले क्या सावधानी बरतें?

जवाब- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले सावधानी जरूरी है, ताकि गंदगी या केमिकल का असर कम हो सके। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या आम को बिना केमिकल के भी पका सकते हैं?

जवाब- हां, घर पर नेचुरल तरीके से आम पकाया जा सकता है। सभी तरीके पॉइंटर्स में देखिए-

अखबार/पेपर बैग में रखकर

  • कच्चे आम को अखबार/पेपर बैग में लपेट दें।
  • कमरे के तापमान पर 5 से 7 दिन रखें।
  • आम नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ता है, जिससे धीरे-धीरे पकता है।

घास या भूसे (हस्क) में दबाकर

  • आम को सूखी घास/भूसे में दबाकर 5 से 7 दिन रखें।
  • गर्मी से समान रूप से पकते हैं।

चावल के डिब्बे में रखकर

  • आम को चावल से भरे कंटेनर में 5 से 7 दिन रखें।
  • गर्माहट से पकने की प्रक्रिया तेज होती है।

केला या सेब के साथ रखकर

  • आम के साथ पका हुआ केला या सेब 2-3 दिन तक रखें।
  • यह नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ते हैं।
  • इससे पकने की प्रक्रिया तेज होती है।

कपड़े में लपेटकर

  • आम को सूती कपड़े में लपेटकर किसी गर्म जगह पर रखें।
  • यह नमी और गर्माहट बनाए रखता है।
  • इससे आम करीब एक हफ्ते में पक जाता है।

कार्डबोर्ड बॉक्स में रखकर

  • आम को ढीले-ढाले तरीके से बॉक्स में रखें और ऊपर से ढक दें।
  • अंदर की गर्मी से पकने में मदद मिलती है।

नेचुरल तरीके से आम पकाने में क्या गलतियां न करें?

  • फ्रिज में रखकर पकाने की कोशिश न करें।
  • धूप में सीधे न रखें। खराब हो सकता है।
  • कार्बाइड का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

क्यों बेहतर है नेचुरल पकाना?

  • स्वाद ज्यादा मीठा और असली होता है।
  • सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
  • सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है।
  • नेचुरल तरीके से पका आम सबसे स्वादिष्ट और हेल्दी होता है।
  • थोड़ी देर ज्यादा लगती है, लेकिन सेहत के लिए यही सही है।

ऊपर बताए घरेलू तरीके आम को धीरे-धीरे पकाते हैं, जिससे स्वाद और क्वालिटी अच्छे रहते हैं।

सवाल- कार्बाइड यूज पर फूड सेफ्टी एजेंसियाें की गाइडलाइन क्या है?

जवाब- फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए सख्त गाइडलाइन जारी की हैं।

  • लाइसेंस प्राप्त और मॉनिटर किए गए चैंबर में ही फल पकाए जाएं।
  • फलों को पकाने के लिए रिपनिंग चैंबर में एथिलीन गैस का निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल मान्य है।
  • तापमान और गैस की मात्रा तय मानकों के अनुसार हो।
  • मानकों का उल्लंघन करने पर फलों को सीज करने के साथ भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।

सवाल- अगर एक्सेस कार्बाइड यूज का शक हो तो कहां और कैसे शिकायत करें?

जवाब- इसकी शिकायत सीधे फूड सेफ्टी अथॉरिटी से की जा सकती है।

  • फूड सेफ्टी कनेक्ट एप (FSSAI) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • FSSAI की वेबसाइट पर जाकर शिकायत करें।
  • टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 पर कॉल करें।
  • नजदीकी फूड सेफ्टी ऑफिस में लिखित शिकायत दें।
  • शक होने पर फलों की फोटो/वीडियो सबूत के तौर पर जरूर रखें।
  • शिकायत करते समय दुकान/मार्केट का नाम और लोकेशन बताएं।

……………………

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  • इससे क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
  • केमिकल से पके आम कैसे पहचानें?

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सवाल- कैल्शियम कार्बाइड क्या है? इससे आम कैसे पकाए जाते हैं?

जवाब- ये एक इंडस्ट्रियल केमिकल है, जिसका इस्तेमाल गैस ‘वेल्डिंग’ के काम में होता है।

  • कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आते ही एक गैस बनाता है, जिसे एसीटिलीन कहते हैं।
  • यह गैस प्राकृतिक रूप से फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है, इसलिए फल जल्दी पक जाते हैं।
  • व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसका यूज करते हैं।

कार्बाइड से आम कैसे पकाया जाता है?

  • कच्चे आम को बॉक्स में बंद कमरे में रखा जाता है।
  • बीच-बीच में कैल्शियम कार्बाइड के छोटे टुकड़े/पाउडर के पैकेट रखे जाते हैं।
  • केमिकल पर हल्का पानी डाला जाता है।
  • इसके रिएक्शन से एसीटिलीन गैस निकलती है।
  • यह फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है।
  • इससे 1–2 दिन में ही आम पक जाते हैं।

सवाल- कार्बाइड से पके आम और पेड़ पर नेचुरल तरीके से पके आम में क्या फर्क होता है?

जवाब- कार्बाइड से पके आम और नेचुरली पके आम में स्वाद, न्यूट्रिशन और क्वालिटी का फर्क होता है। इसे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या कार्बाइड से पका आम खाना सेफ है?

जवाब- नहीं, कार्बाइड से पका आम खाना सेफ नहीं है। इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स हो सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।

सवाल- क्या फल को अच्छे से धोकर, छिलका उतारकर खाना सेफ है?

जवाब- नहीं, सिर्फ धोने और छिलका उतारने से कार्बाइड का असर पूरी तरह खत्म नहीं होता है।

  • धोने और छीलने से बाहरी केमिकल कम हो सकते हैं, लेकिन आम पूरी तरह सेफ नहीं होता है।
  • कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस आम के गूदे (पल्प) को भी प्रभावित करती है।
  • ऐसे में इसे खाने से टॉक्सिन्स शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं।
  • इसके कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

सवाल- कार्बाइड से पका आम खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब- कुछ मामलों में असर तुरंत दिखाई देता है। कुछ में यह लंबे समय में सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कार्बाइड फलों के जरिए शरीर में कैसे प्रवेश करता है और बॉडी को धीरे-धीरे कैसे डैमेज करता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कार्बाइड शरीर में कैसे पहुंचता है?
  • फल धोने के बाद भी सतह पर कुछ केमिकल रह जाते हैं। ये खाने के साथ पेट में जा सकते हैं।
  • कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस और आर्सेनिक, फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते हैं।
  • केमिकल का असर फल के गूदे में भी होता है। खाने पर यह सीधे ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाता है।

यह सेहत को कैसे प्रभावित करता है?

  • डाइजेस्टिव सिस्टम को इरिटेट करता है।
  • इससे एसिडिटी, गैस, अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • टॉक्सिन्स खून के जरिए पूरे शरीर में फैलते हैं।
  • यह धीरे-धीरे लिवर, किडनी, नर्व्स और सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • लिवर की कार्यक्षमता घटती है।
  • टॉक्सिन्स शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ाते हैं।
  • इससे सेल्स डैमेज होते हैं।
  • लॉन्ग टर्म में कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है।

धीरे-धीरे असर क्यों दिखता है?

  • रोज थोड़ा-थोड़ा एक्सपोजर होता है।
  • टॉक्सिन्स शरीर में जमा होते जाते हैं।
  • शुरुआत में हल्के लक्षण दिखते हैं।
  • लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।

सवाल- आम खरीदते हुए कैसे पहचानें कि ये नेचुरली पका है या केमिकल से पकाया गया है?

जवाब- इसकी पहचान रंग, खुशबू, टेक्सचर और स्मेल से की जा सकती है। सभी तरीके ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले क्या सावधानी बरतें?

जवाब- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले सावधानी जरूरी है, ताकि गंदगी या केमिकल का असर कम हो सके। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या आम को बिना केमिकल के भी पका सकते हैं?

जवाब- हां, घर पर नेचुरल तरीके से आम पकाया जा सकता है। सभी तरीके पॉइंटर्स में देखिए-

अखबार/पेपर बैग में रखकर

  • कच्चे आम को अखबार/पेपर बैग में लपेट दें।
  • कमरे के तापमान पर 5 से 7 दिन रखें।
  • आम नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ता है, जिससे धीरे-धीरे पकता है।

घास या भूसे (हस्क) में दबाकर

  • आम को सूखी घास/भूसे में दबाकर 5 से 7 दिन रखें।
  • गर्मी से समान रूप से पकते हैं।

चावल के डिब्बे में रखकर

  • आम को चावल से भरे कंटेनर में 5 से 7 दिन रखें।
  • गर्माहट से पकने की प्रक्रिया तेज होती है।

केला या सेब के साथ रखकर

  • आम के साथ पका हुआ केला या सेब 2-3 दिन तक रखें।
  • यह नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ते हैं।
  • इससे पकने की प्रक्रिया तेज होती है।

कपड़े में लपेटकर

  • आम को सूती कपड़े में लपेटकर किसी गर्म जगह पर रखें।
  • यह नमी और गर्माहट बनाए रखता है।
  • इससे आम करीब एक हफ्ते में पक जाता है।

कार्डबोर्ड बॉक्स में रखकर

  • आम को ढीले-ढाले तरीके से बॉक्स में रखें और ऊपर से ढक दें।
  • अंदर की गर्मी से पकने में मदद मिलती है।

नेचुरल तरीके से आम पकाने में क्या गलतियां न करें?

  • फ्रिज में रखकर पकाने की कोशिश न करें।
  • धूप में सीधे न रखें। खराब हो सकता है।
  • कार्बाइड का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

क्यों बेहतर है नेचुरल पकाना?

  • स्वाद ज्यादा मीठा और असली होता है।
  • सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।
  • सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है।
  • नेचुरल तरीके से पका आम सबसे स्वादिष्ट और हेल्दी होता है।
  • थोड़ी देर ज्यादा लगती है, लेकिन सेहत के लिए यही सही है।

ऊपर बताए घरेलू तरीके आम को धीरे-धीरे पकाते हैं, जिससे स्वाद और क्वालिटी अच्छे रहते हैं।

सवाल- कार्बाइड यूज पर फूड सेफ्टी एजेंसियाें की गाइडलाइन क्या है?

जवाब- फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए सख्त गाइडलाइन जारी की हैं।

  • लाइसेंस प्राप्त और मॉनिटर किए गए चैंबर में ही फल पकाए जाएं।
  • फलों को पकाने के लिए रिपनिंग चैंबर में एथिलीन गैस का निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल मान्य है।
  • तापमान और गैस की मात्रा तय मानकों के अनुसार हो।
  • मानकों का उल्लंघन करने पर फलों को सीज करने के साथ भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।

सवाल- अगर एक्सेस कार्बाइड यूज का शक हो तो कहां और कैसे शिकायत करें?

जवाब- इसकी शिकायत सीधे फूड सेफ्टी अथॉरिटी से की जा सकती है।

  • फूड सेफ्टी कनेक्ट एप (FSSAI) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • FSSAI की वेबसाइट पर जाकर शिकायत करें।
  • टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 पर कॉल करें।
  • नजदीकी फूड सेफ्टी ऑफिस में लिखित शिकायत दें।
  • शक होने पर फलों की फोटो/वीडियो सबूत के तौर पर जरूर रखें।
  • शिकायत करते समय दुकान/मार्केट का नाम और लोकेशन बताएं।

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