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दुनिया में इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे 130 करोड़ लोग, अभी न सुधरे तो हर कोई बन जाएगा मरीज !

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Global Liver Disease Surge: लिवर डिजीज के मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है. लैंसेट की एक स्टडी में पता चला है कि साल 2023 में दुनिया भर में लगभग 130 करोड़ लोग लिवर डिजीज से प्रभावित पाए गए. खराब लाइफस्टाइल, मोटापा और बढ़ता शुगर लेवल इसके मुख्य कारण हैं. एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर वक्त रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो 2050 तक मरीजों की संख्या 180 करोड़ तक पहुंच सकती है. फिर इसे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

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दुनिया भर में लिवर डिजीज के 130 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं.

Liver Disease Crisis Worldwide: मॉडर्न लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान ने पूरी दुनिया की सेहत बिगाड़ दी है. लगातार बीमारियों का कहर बढ़ता जा रहा है और हर उम्र के लोग मरीज बन रहे हैं. आमतौर पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज को सबसे बड़ी बीमारियां माना जाता है, लेकिन लैंसेट की एक स्टडी में बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है. इसमें पता चला है कि साल 2023 में दुनिया भर में 130 करोड़ लोग मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयाटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से जूझ रहे थे. आप सोचकर देखिए कि दुनिया की पूरी आबादी 800 करोड़ है और उसमें से 130 करोड़ से ज्यादा लोग लिवर डिजीज का शिकार हो चुके हैं.

द लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी के अनुसार साल 2023 में करीब 130 करोड़ लोग लिवर डिजीज से पीड़ित थे. यह संख्या 1990 के मुकाबले लगभग 143 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है, जो बेहद चिंताजनक है. यह स्टडी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी 2023 के डाटा पर आधारित है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2050 तक MASLD के मरीजों की संख्या बढ़कर 180 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसके पीछे मुख्य कारण तेजी से बढ़ती जनसंख्या, खराब लाइफस्टाइल, मोटापा और हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याएं हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इस स्टडी में यह भी सामने आया कि उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में लिवर डिजीज के मरीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हैं. हालांकि एक राहत की बात यह है कि बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद इससे होने वाली मौतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसका मतलब है कि इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण लोग पहले की तुलना में ज्यादा समय तक और बेहतर जीवन जी पा रहे हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार MASLD के मामलों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा शुरुआती स्टेज में देखने को मिल रहा है. इसके बावजूद खतरा कम नहीं हुआ है, क्योंकि समय के साथ यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकती है.

चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अब कम और मिडिल इनकम वाले देशों में युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रही है. शहरीकरण, फास्ट फूड की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है. यह अध्ययन बताता है कि MASLD अब एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है. इससे निपटने के लिए जरूरी है कि सरकारें और स्वास्थ्य संस्थाएं जागरुकता अभियान चलाएं, बेहतर नीतियां बनाएं और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें. समय रहते कदम उठाने से ही इस बढ़ते खतरे को रोका जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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दुनिया भर में लिवर डिजीज के 130 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं.

Liver Disease Crisis Worldwide: मॉडर्न लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान ने पूरी दुनिया की सेहत बिगाड़ दी है. लगातार बीमारियों का कहर बढ़ता जा रहा है और हर उम्र के लोग मरीज बन रहे हैं. आमतौर पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज को सबसे बड़ी बीमारियां माना जाता है, लेकिन लैंसेट की एक स्टडी में बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है. इसमें पता चला है कि साल 2023 में दुनिया भर में 130 करोड़ लोग मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयाटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से जूझ रहे थे. आप सोचकर देखिए कि दुनिया की पूरी आबादी 800 करोड़ है और उसमें से 130 करोड़ से ज्यादा लोग लिवर डिजीज का शिकार हो चुके हैं.

द लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित नई स्टडी के अनुसार साल 2023 में करीब 130 करोड़ लोग लिवर डिजीज से पीड़ित थे. यह संख्या 1990 के मुकाबले लगभग 143 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है, जो बेहद चिंताजनक है. यह स्टडी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी 2023 के डाटा पर आधारित है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2050 तक MASLD के मरीजों की संख्या बढ़कर 180 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसके पीछे मुख्य कारण तेजी से बढ़ती जनसंख्या, खराब लाइफस्टाइल, मोटापा और हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याएं हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इस स्टडी में यह भी सामने आया कि उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में लिवर डिजीज के मरीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हैं. हालांकि एक राहत की बात यह है कि बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद इससे होने वाली मौतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसका मतलब है कि इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण लोग पहले की तुलना में ज्यादा समय तक और बेहतर जीवन जी पा रहे हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार MASLD के मामलों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा शुरुआती स्टेज में देखने को मिल रहा है. इसके बावजूद खतरा कम नहीं हुआ है, क्योंकि समय के साथ यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकती है.

चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अब कम और मिडिल इनकम वाले देशों में युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रही है. शहरीकरण, फास्ट फूड की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है. यह अध्ययन बताता है कि MASLD अब एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है. इससे निपटने के लिए जरूरी है कि सरकारें और स्वास्थ्य संस्थाएं जागरुकता अभियान चलाएं, बेहतर नीतियां बनाएं और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें. समय रहते कदम उठाने से ही इस बढ़ते खतरे को रोका जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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