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यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी:NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया

यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी:NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया

एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) यूपी में हुई आगजनी की करीब 26 घटनाओं की आतंकी एंगल से जांच करेगी। ऐसा पिछले दिनों लखनऊ में पकड़े गए 4 आतंकियों के इनपुट के आधार पर किया जा रहा है। यूपी के अलग-अलग जिलों में गाड़ियों में आग लगने की इन घटनाओं को हादसा बताकर केस बंद कर दिया गया था। अब इनकी गहराई से तफ्तीश की जाएगी। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी मामले में तफ्तीश करेगी। दरअसल, 3 अप्रैल को पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में बताया था कि वे आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर वीडियो बनाते थे। उन्हें पाकिस्तान में हैंडलर्स को भेज देते थे। इसके बदले उन्हें QR कोड के जरिए पाकिस्तान से पैसे भेजे जाते थे। इनका मकसद देश में डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पूरी कहानी शुरुआत से समझते हैं… यूपी में बड़ी घटना की तैयारी थी, इससे पहले 4 आतंकी धरे गए
यूपी ATS ने 2 अप्रैल को लखनऊ से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर उसका वीडियो बनाते थे। फिर उसे पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजते थे। वीडियो के जरिए वे अपने काम का सबूत देते थे। बदले में अबू बकर उन्हें पैसे भेजता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इन लोगों ने पहले छोटे स्तर की आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर अपने हैंडलर्स को ‘ट्रायल’ दिखाया था। चारों आतंकी यूपी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले ही पकड़े गए। आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ बाबू, उर्फ पपला पंडित और अरबाब के रूप में हुई थी। साकिब गैंग का सरगना है। इन आतंकियों के मोबाइल से कई अहम सबूत मिले थे, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फोन में आगजनी के VIDEO, लोकेशन और टाइमिंग पता की जा रही
एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश बताते हैं- आमतौर पर आग की घटनाओं को हादसा मान कर रिपोर्ट लगा दी जाती है। लेकिन, गाड़ियों में आगजनी के बदले पैसे मिलने की बात सामने आने पर उन मामलों में नए सिरे से जांच की जा रही है। इसके लिए जांच टीम ने 6 महीने में हुए 26 मामलों की पहचान की है। इनमें अलीगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, बरेली और प्रयागराज जिले में हुई घटनाएं शामिल हैं। छानबीन में सामने आया कि लखनऊ में पकड़े गए आतंकियों ने 4 मार्च को एक पिकअप में आग लगाकर उसके वीडियो बनाए थे। आगजनी किरतपुर इलाके में हुई थी। इनके पास मिले 7 मोबाइलों में ऐसे और भी वीडियो हैं। ये वीडियो कब और कहां के हैं, इसकी जांच की जा रही है। जली हुई गाड़ियों की जांच नहीं होती, इसका फायदा उठाया
अमिताभ यश कहते हैं- वेस्ट यूपी के बुलंदशहर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, हापुड़ जिलों में पिछले 6 महीने में गाड़ियों, दुकानों और छोटे प्रतिष्ठानों में हुई आगजनी की घटनाओं के रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। जिससे पता लग सके कि आतंकियों का इन घटनाओं से क्या कनेक्शन है? हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये तफ्तीश ATS के लिए आसान नहीं होगी, क्योंकि घटनाएं पुरानी हो चुकी हैं। जांच एजेंसी को फोरेंसिक सबूत और CCTV फुटेज निकालने में खासी दिक्कत आएगी। ऐसे में आसपास के लोगों से पूछताछ और उनके बयान ही अहम होंगे। संदिग्ध लेन-देन मिलने के बाद शुरू की जांच
जांच के दौरान पता चला था कि आगजनी के बदले इन आतंकियों को पैसे दिए जाते थे। गिरफ्तार आतंकियों के बैंकखातों की जांच में कुछ संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। अब ट्रांजेक्शन की तारीख को आगजनी की तारीख से मैच किया जा रहा है। जिससे पता किया जा सके कि किस घटना के बाद कौन-सा पैसा आया? केंद्रीय एजेंसियों को भेजी गई जानकारी
सूत्रों का कहना है कि तफ्तीश के दौरान यूपी एटीएस को दूसरे राज्यों के कुछ संदिग्ध नंबर मिले हैं। इसके बाद पूरी जानकारी एनआईए से भी साझा की गई है। इसमें महाराष्ट्र के कुछ नंबर अहम बताए जा रहे हैं। इस बारे में एडीजी अमिताभ यश बताते हैं कि इनके पास मिले वीडियो में कुछ अन्य आतंकी हथियार के साथ नजर आ रहे थे। उनकी पहचान आकिब, महजुल, आजाद और उबैद मलिक के रूप में हुई है। इनके खिलाफ सेंट्रल एजेंसी के जरिए बिजनौर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ये मामला NIA के साथ भी साझा किया गया। जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका में रह रहे महजुल, सऊदी अरब में रह रहे आकिब और आजाद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। दो तरह से पाकिस्तानी हैंडलर से करते थे संपर्क
अमिताभ यश ने बताया- जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ये लोग पाकिस्तान के अबु बकर को 2 तरह से संपर्क करते थे। 1. कॉलिंग के लिए सिंग्नल ऐप का इस्तेमाल करते थे। 2. डॉक्यूमेंट, वीडियो फाइल भेजने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते थे। पकड़े न जाएं, इसलिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल करते थे। यही वजह है कि IP एड्रेस ट्रेस करने पर ज्यादा नंबर अफगानिस्तान की लोकेशन के दिख रहे हैं। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की थी प्लानिंग
एटीएस के मुताबिक, गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। उनका मकसद 2 अप्रैल को बड़ा विस्फोट और बड़ी जनहानि करना था, जिससे दहशत फैल सके। हालांकि, एटीएस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई थी। टीम ने समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। यूट्यूब की सर्च हिस्ट्री में लिखा मिला- केमिकल बम कैसे बनाते हैं
शाकिब और अरबाब के मोबाइल के यूट्यूब की सर्च में मिला है- टाइम बम कैसे बनाया जाता है? कैमिकल बम कैसे बनाया जाता है? सटीक निशाना लगाने की टेक्निक क्या हैं? इन्होंने कई वीडियो देखे भी हैं। कुछ लिंक और वीडियो अबु बकर ने उन्हें भेजे हैं। ये लोग कितना कुछ सीख सके थे, अब ये 5 दिन की रिमांड के बाद ही क्लियर हो सकेगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सबसे ज्यादा वोटर भाजपा की सीटों पर घटे, योगी की सीट पर 33 हजार, नेता विपक्ष की सीट पर 41 हजार नाम कटे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है। पूरी खबर पढ़ें…

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यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी:NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया

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एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) यूपी में हुई आगजनी की करीब 26 घटनाओं की आतंकी एंगल से जांच करेगी। ऐसा पिछले दिनों लखनऊ में पकड़े गए 4 आतंकियों के इनपुट के आधार पर किया जा रहा है। यूपी के अलग-अलग जिलों में गाड़ियों में आग लगने की इन घटनाओं को हादसा बताकर केस बंद कर दिया गया था। अब इनकी गहराई से तफ्तीश की जाएगी। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी मामले में तफ्तीश करेगी। दरअसल, 3 अप्रैल को पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में बताया था कि वे आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर वीडियो बनाते थे। उन्हें पाकिस्तान में हैंडलर्स को भेज देते थे। इसके बदले उन्हें QR कोड के जरिए पाकिस्तान से पैसे भेजे जाते थे। इनका मकसद देश में डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पूरी कहानी शुरुआत से समझते हैं… यूपी में बड़ी घटना की तैयारी थी, इससे पहले 4 आतंकी धरे गए
यूपी ATS ने 2 अप्रैल को लखनऊ से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर उसका वीडियो बनाते थे। फिर उसे पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजते थे। वीडियो के जरिए वे अपने काम का सबूत देते थे। बदले में अबू बकर उन्हें पैसे भेजता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इन लोगों ने पहले छोटे स्तर की आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर अपने हैंडलर्स को ‘ट्रायल’ दिखाया था। चारों आतंकी यूपी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले ही पकड़े गए। आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ बाबू, उर्फ पपला पंडित और अरबाब के रूप में हुई थी। साकिब गैंग का सरगना है। इन आतंकियों के मोबाइल से कई अहम सबूत मिले थे, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फोन में आगजनी के VIDEO, लोकेशन और टाइमिंग पता की जा रही
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अमिताभ यश कहते हैं- वेस्ट यूपी के बुलंदशहर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, हापुड़ जिलों में पिछले 6 महीने में गाड़ियों, दुकानों और छोटे प्रतिष्ठानों में हुई आगजनी की घटनाओं के रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। जिससे पता लग सके कि आतंकियों का इन घटनाओं से क्या कनेक्शन है? हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये तफ्तीश ATS के लिए आसान नहीं होगी, क्योंकि घटनाएं पुरानी हो चुकी हैं। जांच एजेंसी को फोरेंसिक सबूत और CCTV फुटेज निकालने में खासी दिक्कत आएगी। ऐसे में आसपास के लोगों से पूछताछ और उनके बयान ही अहम होंगे। संदिग्ध लेन-देन मिलने के बाद शुरू की जांच
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एटीएस के मुताबिक, गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। उनका मकसद 2 अप्रैल को बड़ा विस्फोट और बड़ी जनहानि करना था, जिससे दहशत फैल सके। हालांकि, एटीएस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई थी। टीम ने समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। यूट्यूब की सर्च हिस्ट्री में लिखा मिला- केमिकल बम कैसे बनाते हैं
शाकिब और अरबाब के मोबाइल के यूट्यूब की सर्च में मिला है- टाइम बम कैसे बनाया जाता है? कैमिकल बम कैसे बनाया जाता है? सटीक निशाना लगाने की टेक्निक क्या हैं? इन्होंने कई वीडियो देखे भी हैं। कुछ लिंक और वीडियो अबु बकर ने उन्हें भेजे हैं। ये लोग कितना कुछ सीख सके थे, अब ये 5 दिन की रिमांड के बाद ही क्लियर हो सकेगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सबसे ज्यादा वोटर भाजपा की सीटों पर घटे, योगी की सीट पर 33 हजार, नेता विपक्ष की सीट पर 41 हजार नाम कटे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है। पूरी खबर पढ़ें…

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