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जल-मिट्टी-चिता सत्याग्रह के बाद कल सांकेतिक फांसी:छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना का विरोध तेज; प्रदर्शनकारी जमीन नहीं छोड़ने पर अड़े

जल-मिट्टी-चिता सत्याग्रह के बाद कल सांकेतिक फांसी:छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना का विरोध तेज; प्रदर्शनकारी जमीन नहीं छोड़ने पर अड़े

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और किसानों का आंदोलन पहले से और तेज हो गया। मंगलवार को जिले में कई मोर्चों पर एक साथ प्रदर्शन हुए, जिनमें ‘जल सत्याग्रह’, ‘मिट्टी सत्याग्रह’ और ‘चिता आंदोलन’ शामिल थे। आंदोलनकारियों ने कल (बुधवार) को सांकेतिक फांसी की घोषणा की है। आज (मंगलवार) बड़ी संख्या में ग्रामीण केन नदी में उतरकर घंटों पानी में खड़े रहे। उन्होंने अपने विस्थापन के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस केन नदी के पानी के नाम पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वही अब उनके उजड़ने का कारण बन रही है। आंदोलनकारियों ने इसे “जीवन और अस्तित्व की अंतिम लड़ाई” बताया। बोले- पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे
‘मिट्टी सत्याग्रह’ का मंगलवार को दूसरा दिन था। ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर संकल्प लिया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं, ‘चिता आंदोलन’ दसवें दिन भी जारी रहा, जहां लोग प्रतीकात्मक चिताओं के पास बैठकर विस्थापन के दर्द को व्यक्त कर रहे हैं। इसके साथ ही कई प्रभावित गांवों में ‘चूल्हा बंद’ रखा गया। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भूखे रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, जिससे गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आरोप- फर्जी ग्राम सभाएं कराई गईं
प्रभावितों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फर्जी ग्राम सभाएं कराई गईं, अधूरा मुआवजा दिया गया और दबाव बनाकर बेदखली की कोशिश की जा रही है। आंदोलनकारियों का दावा है कि रुंज, मझगांय और नेगुवा बांध से जुड़ी ग्राम सभाएं केवल कागजों में पूरी कर ली गईं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांवों में बिचौलिये सक्रिय हैं, जो मुआवजे की राशि में अवैध कटौती कर रहे हैं। पहचान पत्रों के नाम पर गरीबों से पैसे वसूले जा रहे हैं। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के अनुसार, प्रशासन के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जमीनी सच्चाई से दूर रहकर केवल कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। भटनागर ने कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश स्वीकार नहीं करेंगे।” कल सांकेतिक फांसी का ऐलान
आंदोलनकारियों ने बुधवार को ‘सांकेतिक फांसी आंदोलन’ की घोषणा की है। उनका कहना है कि जमीन और आजीविका छिनने के बाद जीवन का कोई अर्थ नहीं बचता। यह प्रदर्शन प्रशासन को चेतावनी देने के लिए किया जाएगा। फिलहाल हजारों ग्रामीण प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। ‘भूख-पड़ताल’ जारी है और आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है, “हम पानी में खड़े हैं, भूखे हैं और चिता पर लेटने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।”

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‘मिट्टी सत्याग्रह’ का मंगलवार को दूसरा दिन था। ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर संकल्प लिया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं, ‘चिता आंदोलन’ दसवें दिन भी जारी रहा, जहां लोग प्रतीकात्मक चिताओं के पास बैठकर विस्थापन के दर्द को व्यक्त कर रहे हैं। इसके साथ ही कई प्रभावित गांवों में ‘चूल्हा बंद’ रखा गया। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भूखे रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, जिससे गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आरोप- फर्जी ग्राम सभाएं कराई गईं
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आंदोलनकारियों ने बुधवार को ‘सांकेतिक फांसी आंदोलन’ की घोषणा की है। उनका कहना है कि जमीन और आजीविका छिनने के बाद जीवन का कोई अर्थ नहीं बचता। यह प्रदर्शन प्रशासन को चेतावनी देने के लिए किया जाएगा। फिलहाल हजारों ग्रामीण प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। ‘भूख-पड़ताल’ जारी है और आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है, “हम पानी में खड़े हैं, भूखे हैं और चिता पर लेटने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।”

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