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हीट स्ट्रोक क्या है और यह कितना खतरनाक, अगर इसका शिकार हो जाएं तो क्या करें? इमरजेंसी के डॉक्टर से समझें

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Heat Stroke in Summer: हीट स्ट्रोक एक खतरनाक कंडीशन है, जिसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो जाता है. इसके कारण दिमाग, दिल और किडनी को नुकसान हो सकता है. अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो इससे मौत भी हो सकती है. हीट स्ट्रोक की कंडीशन में तुरंत ठंडी जगह पर ले जाना, शरीर को ठंडा करना और डॉक्टर की मदद लेना जरूरी होता है. इससे बचने के लिए धूप से बचाव और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है.

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हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो जानलेवा हो सकती है.

Heat Stroke Emergency: गर्मियों में तापमान जब 45 डिग्री के पार चला जाता है, तब यह सेहत के लिए खतरनाक हो जाता है. इतनी गर्मी में घर से लंबे समय तक बाहर रहना नुकसानदायक होता है. तेज धूप और लू के कारण कई बार लोगों के शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है और इसकी वजह से हीट स्ट्रोक की कंडीशन पैदा हो सकती है. यह केवल सामान्य गर्मी लगना नहीं है, बल्कि एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है. जो लोग गर्मी में धूप में घंटों काम करते रहते हैं, उन्हें हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा होता है.

लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया हमारा शरीर गर्मी में पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है. इसे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम माना जाता है. जब तापमान 45 डिग्री से ज्यादा होता है और कोई व्यक्ति लंबे समय तक धूप व लू में रहे, तो हमारे शरीर को ठंडा करने की प्रक्रिया फेल हो जाती है. इससे शरीर का तापमान 40°C या उससे ज्यादा पहुंच जाता है और शरीर के कई अंगों का कामकाज रुक जाता है. इसे मेडिकल की भाषा में हीट स्ट्रोक कहा जाता है और यह एक इमरजेंसी कंडीशन है. वक्त रहते शरीर को ठंडा न किया जाए, तो इससे मौत हो सकती है.

डॉक्टर ने बताया कि हीट स्ट्रोक होने पर शुरुआत में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और अत्यधिक प्यास लगना महसूस होता है. स्थिति गंभीर होने पर शरीर गर्म और सूखा हो जाता है, पसीना आना बंद हो सकता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और व्यक्ति कन्फ्यूजन या बेहोशी की हालत में भी जा सकता है. कई मामलों में उल्टी, दौरे और मानसिक स्थिति में बदलाव भी देखने को मिलता है. हीट स्ट्रोक कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह शरीर के अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह ब्रेन डैमेज, किडनी फेलियर और मौत का कारण भी बन सकता है. इसलिए हीट स्ट्रोक को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इमरजेंसी के डॉक्टर ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाए, तो तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. सबसे पहले उसे छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं. उसके कपड़े ढीले करें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें. ठंडे पानी की पट्टियां रखना, पंखा चलाना या ठंडे पानी से स्पंज करना बहुत जरूरी होता है. अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन दें. अगर वह बेहोश है, तो मुंह से कुछ भी न दें और तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं.

हीट स्ट्रोक से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है. इसके लिए तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर के अंदर रहें. हल्के और ढीले कपड़े पहनें, खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. बाहर जाते समय सिर को ढकें और जरूरत पड़ने पर छाता या टोपी का इस्तेमाल करें. हीट स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो जानलेवा हो सकती है.

Heat Stroke Emergency: गर्मियों में तापमान जब 45 डिग्री के पार चला जाता है, तब यह सेहत के लिए खतरनाक हो जाता है. इतनी गर्मी में घर से लंबे समय तक बाहर रहना नुकसानदायक होता है. तेज धूप और लू के कारण कई बार लोगों के शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है और इसकी वजह से हीट स्ट्रोक की कंडीशन पैदा हो सकती है. यह केवल सामान्य गर्मी लगना नहीं है, बल्कि एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है. जो लोग गर्मी में धूप में घंटों काम करते रहते हैं, उन्हें हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा होता है.

लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया हमारा शरीर गर्मी में पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है. इसे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम माना जाता है. जब तापमान 45 डिग्री से ज्यादा होता है और कोई व्यक्ति लंबे समय तक धूप व लू में रहे, तो हमारे शरीर को ठंडा करने की प्रक्रिया फेल हो जाती है. इससे शरीर का तापमान 40°C या उससे ज्यादा पहुंच जाता है और शरीर के कई अंगों का कामकाज रुक जाता है. इसे मेडिकल की भाषा में हीट स्ट्रोक कहा जाता है और यह एक इमरजेंसी कंडीशन है. वक्त रहते शरीर को ठंडा न किया जाए, तो इससे मौत हो सकती है.

डॉक्टर ने बताया कि हीट स्ट्रोक होने पर शुरुआत में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और अत्यधिक प्यास लगना महसूस होता है. स्थिति गंभीर होने पर शरीर गर्म और सूखा हो जाता है, पसीना आना बंद हो सकता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और व्यक्ति कन्फ्यूजन या बेहोशी की हालत में भी जा सकता है. कई मामलों में उल्टी, दौरे और मानसिक स्थिति में बदलाव भी देखने को मिलता है. हीट स्ट्रोक कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह शरीर के अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह ब्रेन डैमेज, किडनी फेलियर और मौत का कारण भी बन सकता है. इसलिए हीट स्ट्रोक को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

इमरजेंसी के डॉक्टर ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाए, तो तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. सबसे पहले उसे छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं. उसके कपड़े ढीले करें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें. ठंडे पानी की पट्टियां रखना, पंखा चलाना या ठंडे पानी से स्पंज करना बहुत जरूरी होता है. अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन दें. अगर वह बेहोश है, तो मुंह से कुछ भी न दें और तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं.

हीट स्ट्रोक से बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है. इसके लिए तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर के अंदर रहें. हल्के और ढीले कपड़े पहनें, खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. बाहर जाते समय सिर को ढकें और जरूरत पड़ने पर छाता या टोपी का इस्तेमाल करें. हीट स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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