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मूवी रिव्यूः भूत बंगला:भूल भुलैया जैसी उम्मीद देकर अक्षय कुमार-प्रियदर्शन की जोड़ी ने किया निराश, डर-कॉमेडी में अधूरापन, कहानी और म्यूजिक भी बेअसर

मूवी रिव्यूः भूत बंगला:भूल भुलैया जैसी उम्मीद देकर अक्षय कुमार-प्रियदर्शन की जोड़ी ने किया निराश, डर-कॉमेडी में अधूरापन, कहानी और म्यूजिक भी बेअसर

रेटिंग- 2.5/5 रनटाइम- 174 मिनट 57 सेकंड स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, वामिका गब्बी, तबू, परेश रावल, राजपाल यादव डायरेक्टर- प्रियदर्शन
अक्षय कुमार और प्रियदर्शन जब भी साथ आते हैं, दर्शकों को भूल भुलैया, हेरा फेरी, भागम भाग जैसी एंटरटेनिंग फिल्मों की उम्मीद होती है। लेकिन फिल्म भूत बंगला में ये जोड़ी इस बार वैसा कमाल नहीं दिखा पाती। फिल्म हॉरर, कॉमेडी और मिस्ट्री का मिक्स तो है, लेकिन इसका असर हर जगह बराबर नहीं दिखता। एक नजर भूत बंगला के रिव्यू पर- कैसी है फिल्म की कहानी?
कहानी की शुरुआत होती है श्रापित गांव मंगलपुर से, जहां यह माना जाता है कि शादी करना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि यहां नई दुल्हन को वधुसुर नाम का राक्षस उठा ले जाता है।
अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) लंदन में अपने पिता वासुदेव और बहन मीरा के साथ रहते हैं। मीरा की शादी तय होती है, तभी उन्हें पता चलता है कि उनके दादा 500 करोड़ की संपत्ति और मंगलपुर की हवेली मीरा के नाम कर गए हैं। अर्जुन, मीरा की शादी उसी पुश्तैनी हवेली में करने के लिए मंगलपुर पहुंचता है। लेकिन जैसे-जैसे शादी करीब आती है, हवेली में अजीब और डरावनी घटनाएं शुरू हो जाती हैं। इसी दौरान अर्जुन के सामने कई पुराने राज खुलते हैं और उसे पता चलता है कि मीरा ही वधुसुर के निशाने पर है, क्योंकि उसे मारकर वधुसुर अमर हो सकता है। अब कहानी इस सवाल पर आकर टिकती है कि क्या अर्जुन अपनी बहन और मंगलपुर को इस खतरे से बचा पाएगा। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग?
अक्षय कुमार इस बार उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है, यहां बनावटी और ज्यादा मेहनत करती हुई लगती है। राजपाल यादव फिल्म के असली मजबूत सहारा बनकर उभरते हैं, उनकी कॉमेडी ही कई जगह फिल्म को संभालती है। परेश रावल का काम ठीक-ठाक है, लेकिन उनसे जो उम्मीद रहती है, वो यहां नजर नहीं आती। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने आधे मन से अभिनय किया हो।
फिल्म की लीड एक्ट्रेस वामिका गब्बी को बहुत कम स्क्रीन टाइम मिला है और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री भी जबरदस्ती की लगती है। तब्बू, मिथिला पालकर और जेस्सु सेनगुप्ता जैसे कलाकारों का इस्तेमाल भी सीमित और अधूरा लगता है। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू? प्रियदर्शन इस बार अपने ही बनाए मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। फिल्म का स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ महसूस होता है, जहां पहला भाग काफी खिंचा हुआ और उबाऊ लगता है, वहीं दूसरा भाग थोड़ी रफ्तार पकड़ता है और कहानी को कुछ हद तक संभालता है। हॉरर एलिमेंट्स में साउंड का इस्तेमाल कुछ जगह असरदार है, लेकिन डर का माहौल लगातार नहीं बन पाता। VFX कई जगह कमजोर और बनावटी लगता है, जिससे फिल्म का प्रभाव कम हो जाता है। डायलॉग्स औसत हैं और कॉमिक पंच कई बार ऐसे लगते हैं जैसे पहले से सुने हुए हों, जिससे हंसी कम और निराशा ज्यादा होती है। कुल मिलाकर निर्देशन में वो धार और कसावट नहीं दिखती, जिसकी इस जोड़ी से उम्मीद की जाती है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक?
फिल्म का म्यूजिक इसका सबसे कमजोर पक्ष है। भूल भुलैया के गाने आज भी लोगों को याद हैं, लेकिन भूत बंगला का एक भी गाना ऐसा नहीं जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए। फाइनल वर्डिक्ट:फिल्म देखें या नहीं?
भूत बंगला एक ऐसी फिल्म है जो भूल भुलैया की याद दिलाती है, लेकिन उस स्तर का मनोरंजन नहीं दे पाती। कमजोर स्क्रीनप्ले, फीका म्यूजिक और औसत अभिनय इसे पूरी तरह असरदार बनने से रोकते हैं।
अगर आप हल्की-फुल्की हॉरर-कॉमेडी और राजपाल यादव की कॉमेडी के लिए फिल्म देखना चाहते हैं, तो एक बार देख सकते हैं।

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कहानी की शुरुआत होती है श्रापित गांव मंगलपुर से, जहां यह माना जाता है कि शादी करना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि यहां नई दुल्हन को वधुसुर नाम का राक्षस उठा ले जाता है।
अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) लंदन में अपने पिता वासुदेव और बहन मीरा के साथ रहते हैं। मीरा की शादी तय होती है, तभी उन्हें पता चलता है कि उनके दादा 500 करोड़ की संपत्ति और मंगलपुर की हवेली मीरा के नाम कर गए हैं। अर्जुन, मीरा की शादी उसी पुश्तैनी हवेली में करने के लिए मंगलपुर पहुंचता है। लेकिन जैसे-जैसे शादी करीब आती है, हवेली में अजीब और डरावनी घटनाएं शुरू हो जाती हैं। इसी दौरान अर्जुन के सामने कई पुराने राज खुलते हैं और उसे पता चलता है कि मीरा ही वधुसुर के निशाने पर है, क्योंकि उसे मारकर वधुसुर अमर हो सकता है। अब कहानी इस सवाल पर आकर टिकती है कि क्या अर्जुन अपनी बहन और मंगलपुर को इस खतरे से बचा पाएगा। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग?
अक्षय कुमार इस बार उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है, यहां बनावटी और ज्यादा मेहनत करती हुई लगती है। राजपाल यादव फिल्म के असली मजबूत सहारा बनकर उभरते हैं, उनकी कॉमेडी ही कई जगह फिल्म को संभालती है। परेश रावल का काम ठीक-ठाक है, लेकिन उनसे जो उम्मीद रहती है, वो यहां नजर नहीं आती। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने आधे मन से अभिनय किया हो।
फिल्म की लीड एक्ट्रेस वामिका गब्बी को बहुत कम स्क्रीन टाइम मिला है और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री भी जबरदस्ती की लगती है। तब्बू, मिथिला पालकर और जेस्सु सेनगुप्ता जैसे कलाकारों का इस्तेमाल भी सीमित और अधूरा लगता है। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू? प्रियदर्शन इस बार अपने ही बनाए मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। फिल्म का स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ महसूस होता है, जहां पहला भाग काफी खिंचा हुआ और उबाऊ लगता है, वहीं दूसरा भाग थोड़ी रफ्तार पकड़ता है और कहानी को कुछ हद तक संभालता है। हॉरर एलिमेंट्स में साउंड का इस्तेमाल कुछ जगह असरदार है, लेकिन डर का माहौल लगातार नहीं बन पाता। VFX कई जगह कमजोर और बनावटी लगता है, जिससे फिल्म का प्रभाव कम हो जाता है। डायलॉग्स औसत हैं और कॉमिक पंच कई बार ऐसे लगते हैं जैसे पहले से सुने हुए हों, जिससे हंसी कम और निराशा ज्यादा होती है। कुल मिलाकर निर्देशन में वो धार और कसावट नहीं दिखती, जिसकी इस जोड़ी से उम्मीद की जाती है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक?
फिल्म का म्यूजिक इसका सबसे कमजोर पक्ष है। भूल भुलैया के गाने आज भी लोगों को याद हैं, लेकिन भूत बंगला का एक भी गाना ऐसा नहीं जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए। फाइनल वर्डिक्ट:फिल्म देखें या नहीं?
भूत बंगला एक ऐसी फिल्म है जो भूल भुलैया की याद दिलाती है, लेकिन उस स्तर का मनोरंजन नहीं दे पाती। कमजोर स्क्रीनप्ले, फीका म्यूजिक और औसत अभिनय इसे पूरी तरह असरदार बनने से रोकते हैं।
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