Monday, 07 Sep 2026 | 03:25 AM

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Udaipur Divyang Student Lakshit Scores 100100 in 10th Class

Udaipur Divyang Student Lakshit Scores 100100 in 10th Class

सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित लक्षित परमार ने RBSE 10वीं की दिव्यांग कैटेगरी में 100 प्रतिशत नंबर हासिल किए हैं। 18 साल के लक्षित को लिखने में दिक्कत होती है। वह खुद का नाम भी नहीं लिख पाता।

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बोर्ड के नियमों के अनुसार उसे परीक्षा में एक राइटर मिला। राइटर एक क्लास जूनियर होना चाहिए यानी लक्षित का पेपर 9वीं कक्षा के एक छात्र ने लिखा।

RBSE ने लक्षित का रिजल्ट गुरुवार दोपहर जारी किया। उसका रिजल्ट होल्ड पर था। बेटे की इस उपलब्धि पर उनके पिता दिनेश कुमार परमार भावुक हो गए।

पिता दिनेश कुमार ने कहा- परिवार के कुछ लोग मेरे बेटे की शारीरिक क्षमता पर सवाल करते थे। आज वही मुझे फोन कर बधाई दे रहे हैं। वह अपने हाथ-पैर से कुछ काम नहीं कर सकता।

अपनी मर्जी से ज्यादा हिल भी नहीं पाता। ज्यादा देर बैठ भी नहीं सकता। उसे मैं गोद में उठाकर स्कूल लेकर जाता था। उसका सपना है कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलेक्टर बने।

माता-पिता और छोटी बहनों के साथ छात्र लक्षित परमार।

दिक्कतों को छोड़कर खुद पर फोकस करना चाहिए

लक्षित ने बताया- मैं रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ता था। रोज सारे सब्जेक्ट पढ़ता था। फेवरेट सब्जेक्ट साइंस है। फिलॉसफी पढ़ने में भी बहुत मजा आता था। स्कूल में हमेशा नॉर्मल व्यवहार रहा है। कभी अलग महसूस नहीं हुआ। दोस्त बहुत सपोर्ट करते थे। मुझे अपनी हालत पर कभी दुख नहीं होता, क्योंकि मैं जो हूं, उसमें बहुत खुश हूं।

मैं हमेशा लेटे-लेटे पढ़ता था। ज्यादातर टाइम मैंने ऑनलाइन पढ़ाई की। फैमिली का बहुत सपोर्ट रहा। हर चीज में माता-पिता और बहनों का सपोर्ट रहा। कभी मुझे इस बीमारी के बारे में महसूस नहीं होने दिया। मुझे हमेशा लगता है कि जो फैमिली मेरे लिए इतना कर रही है, उसके लिए मुझे कुछ करना चाहिए।

लक्षित ने बताया- दिक्कतें तो सभी के जीवन में आती हैं। मेरी भले ही यह दिक्कत है, किसी और को मुझसे भी ज्यादा दिक्कत होगी। हमें दिक्कतों को छोड़कर खुद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आगे बढ़ो और पढ़ो।

लक्षित का कहना है कि हमें हमेशा आगे बढ़ने पर फोकस करना चाहिए।

लक्षित का कहना है कि हमें हमेशा आगे बढ़ने पर फोकस करना चाहिए।

पिता बोले- बेटे ने नाम रोशन किया

पिता दिनेश ने बताया- हम पुरोहितों की मादड़ी के रहने वाले हैं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मेरे बेटे ने सचमुच वो कर दिखाया है, जो वो रोजाना करने को कहा करते थे।

18 साल से जिस बेटे को रोजाना गोद में उठाकर उसके हर काम और मूवमेंट में मदद करते थे। उसे स्कूल तक लेकर जाते थे, उस बेटे ने वाकई उनके नाम को बढ़ा दिया है।

बीमारी का इलाज नहीं हो पाया

लक्षित की मां रेखा परमार ने बताया- बचपन से उसे मूवमेंट करने में दिक्कत थी। देशभर के अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो पाया। लक्षित की 2 छोटी बहनें हैं, जो लगातार उसके हर काम में मदद करती हैं।

रेखा ने बताया- लक्षित ज्यादा देर बैठ नहीं पाता, ऐसे में वह लेटे हुए लगातार कभी मोबाइल फोन से तो कभी किताबों से पढ़ता रहता था। लक्षित स्कूल में नॉर्मल बच्चों के साथ पढ़ता था। वह नॉर्मल बच्चों के साथ पढ़ाई कर उनसे भी ज्यादा नंबर लाने में कामयाब रहा है। लगातार कुछ न कुछ पढ़ते रहना और स्कूल की स्टडी को रोजाना 3 से 4 घंटे तक दोहराना उसकी आदत में था।

स्कूल टीचर्स के साथ लक्षित। टीचर्स ने घर पहुंचकर बधाई दी और मिठाई खिलाई।

स्कूल टीचर्स के साथ लक्षित। टीचर्स ने घर पहुंचकर बधाई दी और मिठाई खिलाई।

नॉवेल्स पढ़ने का बहुत शौक

रेखा ने बताया- लक्षित को नॉवेल्स पढ़ने का बहुत शौक है। वह आए दिन नए नॉवेल्स मंगवाकर पढ़ता है। उसे एटॉमिक हैबिट्स, साइकोलॉजी ऑफ मनी, डीप वर्क जैसे नॉवेल्स में बहुत दिलचस्पी है। लक्षित को 8वीं क्लास में ए ग्रेड (91-100) मिली, जबकि 9वीं क्लास में भी उसके 86% बने थे।

लक्षित की क्लास टीचर निर्मला सालवी ने बताया- वह काफी जिज्ञासु बच्चा है। उसे एक बार समझाने पर कोई भी टॉपिक समझ आ जाता है। वह बहुत सवाल करने के बजाय सेल्फ लेवल पर उसे हल करने की कोशिश करता रहता था।

यूनीक सवाल पूछते हैं

लक्षित की बहन दीया 9वीं क्लास में पढ़ती है। दीया ने बताया कि हर छोटे काम में उनके भाई यूनीक सवाल पूछते हैं। वह हमें कभी डांटते नहीं हैं। सिर्फ पढ़ाई को अपना हथियार बनाने की बात कहते हैं। पढ़कर हर वो काम किया जा सकता है, जो भले ही सोचने में असंभव लगता हो।

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बोर्ड के नियमों के अनुसार उसे परीक्षा में एक राइटर मिला। राइटर एक क्लास जूनियर होना चाहिए यानी लक्षित का पेपर 9वीं कक्षा के एक छात्र ने लिखा।

RBSE ने लक्षित का रिजल्ट गुरुवार दोपहर जारी किया। उसका रिजल्ट होल्ड पर था। बेटे की इस उपलब्धि पर उनके पिता दिनेश कुमार परमार भावुक हो गए।

पिता दिनेश कुमार ने कहा- परिवार के कुछ लोग मेरे बेटे की शारीरिक क्षमता पर सवाल करते थे। आज वही मुझे फोन कर बधाई दे रहे हैं। वह अपने हाथ-पैर से कुछ काम नहीं कर सकता।

अपनी मर्जी से ज्यादा हिल भी नहीं पाता। ज्यादा देर बैठ भी नहीं सकता। उसे मैं गोद में उठाकर स्कूल लेकर जाता था। उसका सपना है कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलेक्टर बने।

माता-पिता और छोटी बहनों के साथ छात्र लक्षित परमार।

दिक्कतों को छोड़कर खुद पर फोकस करना चाहिए

लक्षित ने बताया- मैं रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ता था। रोज सारे सब्जेक्ट पढ़ता था। फेवरेट सब्जेक्ट साइंस है। फिलॉसफी पढ़ने में भी बहुत मजा आता था। स्कूल में हमेशा नॉर्मल व्यवहार रहा है। कभी अलग महसूस नहीं हुआ। दोस्त बहुत सपोर्ट करते थे। मुझे अपनी हालत पर कभी दुख नहीं होता, क्योंकि मैं जो हूं, उसमें बहुत खुश हूं।

मैं हमेशा लेटे-लेटे पढ़ता था। ज्यादातर टाइम मैंने ऑनलाइन पढ़ाई की। फैमिली का बहुत सपोर्ट रहा। हर चीज में माता-पिता और बहनों का सपोर्ट रहा। कभी मुझे इस बीमारी के बारे में महसूस नहीं होने दिया। मुझे हमेशा लगता है कि जो फैमिली मेरे लिए इतना कर रही है, उसके लिए मुझे कुछ करना चाहिए।

लक्षित ने बताया- दिक्कतें तो सभी के जीवन में आती हैं। मेरी भले ही यह दिक्कत है, किसी और को मुझसे भी ज्यादा दिक्कत होगी। हमें दिक्कतों को छोड़कर खुद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आगे बढ़ो और पढ़ो।

लक्षित का कहना है कि हमें हमेशा आगे बढ़ने पर फोकस करना चाहिए।

लक्षित का कहना है कि हमें हमेशा आगे बढ़ने पर फोकस करना चाहिए।

पिता बोले- बेटे ने नाम रोशन किया

पिता दिनेश ने बताया- हम पुरोहितों की मादड़ी के रहने वाले हैं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि मेरे बेटे ने सचमुच वो कर दिखाया है, जो वो रोजाना करने को कहा करते थे।

18 साल से जिस बेटे को रोजाना गोद में उठाकर उसके हर काम और मूवमेंट में मदद करते थे। उसे स्कूल तक लेकर जाते थे, उस बेटे ने वाकई उनके नाम को बढ़ा दिया है।

बीमारी का इलाज नहीं हो पाया

लक्षित की मां रेखा परमार ने बताया- बचपन से उसे मूवमेंट करने में दिक्कत थी। देशभर के अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो पाया। लक्षित की 2 छोटी बहनें हैं, जो लगातार उसके हर काम में मदद करती हैं।

रेखा ने बताया- लक्षित ज्यादा देर बैठ नहीं पाता, ऐसे में वह लेटे हुए लगातार कभी मोबाइल फोन से तो कभी किताबों से पढ़ता रहता था। लक्षित स्कूल में नॉर्मल बच्चों के साथ पढ़ता था। वह नॉर्मल बच्चों के साथ पढ़ाई कर उनसे भी ज्यादा नंबर लाने में कामयाब रहा है। लगातार कुछ न कुछ पढ़ते रहना और स्कूल की स्टडी को रोजाना 3 से 4 घंटे तक दोहराना उसकी आदत में था।

स्कूल टीचर्स के साथ लक्षित। टीचर्स ने घर पहुंचकर बधाई दी और मिठाई खिलाई।

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लक्षित की क्लास टीचर निर्मला सालवी ने बताया- वह काफी जिज्ञासु बच्चा है। उसे एक बार समझाने पर कोई भी टॉपिक समझ आ जाता है। वह बहुत सवाल करने के बजाय सेल्फ लेवल पर उसे हल करने की कोशिश करता रहता था।

यूनीक सवाल पूछते हैं

लक्षित की बहन दीया 9वीं क्लास में पढ़ती है। दीया ने बताया कि हर छोटे काम में उनके भाई यूनीक सवाल पूछते हैं। वह हमें कभी डांटते नहीं हैं। सिर्फ पढ़ाई को अपना हथियार बनाने की बात कहते हैं। पढ़कर हर वो काम किया जा सकता है, जो भले ही सोचने में असंभव लगता हो।

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