Sunday, 19 Apr 2026 | 02:16 PM

Trending :

EXCLUSIVE

डॉक्टर के पास गया एसिडिटी का इलाज कराने, निकल गया कैंसर, समय रहते बच गई जान, आपके साथ हो ऐसा तो क्या करेंगे

authorimg

Last Updated:

Early Warning Sign of oesophageal cancer: आमतौर पर जब हमें एसिडिटी या हार्टबर्न होती है तो हम इसका कुछ मामूली इलाज कर इसे छोड़ देते हैं. अगर यह लगातार भी होती है तो भी कुछ इधर-उधर की दवा ले लेते हैं लेकिन इलाज कराने नहीं जाते. लेकिन यह हार्टबर्न और एसिडिटी कभी-कभी गले का कैंसर में भी बदल सकता है. एक व्यक्ति एसिडिटी की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गया और जांच हुई तो पता चला कि उसे कैंसर है. गनीमत यह थी कि कैंसर एकदम शुरुआती दौर में था, इसलिए उस व्यक्ति का पूरी तरह से इलाज हो गया. लेकिन हर इंसान को सतर्क होने की जरूरत है.

Zoom

एसोफेजल कैंसर. (सांकेतिक तस्वीर) AI Photo

52 साल के एक शख्स को थोड़ी एसिडिटी रहती थी और उसे खाना निगलने में थोड़ी परेशानी महसूस हो रही थी. उसे यह समस्या चार महीने से थी. उन्हें लगा कि यह सिर्फ एसिडिटी है. इसलिए पहले खाने की आदतों में थोड़ा बदलाव किया. छोटे-छोटे कौर लेकर खाना शुरू किया और पानी पीने की मात्रा को बढ़ा दिया. इसके बावजूद भी लक्षण में कोई सुधार नहीं दिखा. फिर उन्हें सीने में जकड़न की तरह महसूस हुआ और वजन भी कम होने लगा. अब डॉक्टरों के पास जाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था. इंडियन एक्सप्रेस में डॉ. अक्षत मलिक लिखते हैं कि इसके बाद मरीज मेरे पास आया. मैंने उनसे पूछताछ शुरू की तो पता चला कि वह कभी-कभार स्मोकिंग और शराब भी पीते थे. इसके अलावा वह रेगुलर तंबाकू चबाते थे. ये सारे इशारे एसोफेगल कैंसर की ओर संकेत कर रहा था. मैंने जब उनसे कई तरह की जांच करवाई तो शक सच साबित हुआ.

समय रहते हो गया इलाज
डॉ. अक्षत मलिक उनकी सारी मेडिकल हिस्ट्री और लगातार बने लक्षणों को देखते हुए हमने अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की, जिसमें निचले इसोफेगस यानी भोजन की नली में एक संदिग्ध घाव दिखाई दिया. बायोप्सी से शुरुआती स्टेज का इसोफेगल कैंसर कन्फर्म हुआ. लेकिन अच्छी बात यह रही कि समय रहते बीमारी का पता चल गया. इस स्टेज में पूरी तरह इलाज संभव है. मरीज की सबसे पहले सर्जरी के जरिए इसोफेगस के प्रभावित हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया गया. इसके बाद पाचन तंत्र का पुनर्निर्माण किया गया ताकि मरीज धीरे-धीरे सामान्य तरीके से खाना खा सके. सर्जरी के बाद ट्यूमर की प्रकृति के अनुसार टार्गेटेड थेरेपी दी गई, जिससे बीमारी के दोबारा होने का खतरा कम किया जा सके. साथ ही डाइट में सुधार किया गया. तंबाकू, स्मोकिंग, शराब सब कुछ छोड़ने के लिए कहा गया. अच्छी बात यह रही कि मरीज ने इस मल्टीडिसीप्लिरी इलाज पर रिस्पॉन्स दिया. फिलहाल वह पूरी तरह स्वस्थ हैं. अगर जांच में थोड़ी भी देर और हो जाती तो फिर पूरी तरह से ठीक होना मुश्किल था. इसलिए सही समय पर जांच के कारण ही मरीज की जान बच गई.

इसोफेगल कैंसर के कारण क्या हैं?
इसोफेगल का मतलब होता है भोजन नली. यानी भोजन नली में होने वाले कैंसर को इसोफेगल कैंसर कहा जाता है. यह नली मुंह से पेट तक जुड़ी होती है. इसकी अंदरूनी परत बेहद संवेदनशील कोशिकाओं से बनी होती है. अगर इसमें लंबे समय तक जलन हो तो इससे परत को नुकसान हो सकता है. जब यह परत बार-बार हानिकारक चीजों के संपर्क में आती है, तो कोशिकाओं में बदलाव होने लगते हैं और धीरे-धीरे वे प्री-कैंसरस रूप ले सकती हैं. यानी कैंसर से पहले वाली कोशिकाओं में बदल जाती है. तंबाकू इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. चाहे इसे स्मोकिंग के रूप में लिया जाए या चबाया जाए, यह भोजन नली की परत को लगातार नुकसान पहुंचाता है. समय के साथ यह नुकसान बढ़ता जाता है और शरीर इसे ठीक नहीं कर पाता. शराब भी इस खतरे को और बढ़ा देती है. यह एक रासायनिक उत्तेजक की तरह काम करती है, जो इसोफेगस की सुरक्षा परत को कमजोर कर देती है. दोनों का साथ में सेवन खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स भी कैंसर का एक बड़ा कारण बन सकता है. पेट का एसिड बार-बार ऊपर आने से निचली भोजन नली को नुकसान पहुंचता है, जिससे जटिल स्थिति बन सकती है. यह आगे चलकर कैंसर में बदल सकती है. अगर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो, मोटापा हो, गर्म पेय पीने की आदत हो तो भी कैंसर का खतरा हो सकता है.

किन लोगों को इसोफेगल कैंसर का खतरा
इसोफेगल कैंसर आमतौर पर अचानक से सामने नहीं आता. यह धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआत में सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं जैसा लगता है, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है.हालांकि यह किसी को भी हो सकता है लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. जैसे जो लोग लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, जो रेगुलर शराब पीते हैं, जिन्हें लंबे समय एसिडिटी है, जिनका खराब खान-पान है, जो लोग अधिक वजन के हैं. भारत में अक्सर ये सभी कारण एक साथ पाए जाते हैं, इसलिए जागरुकता और समय पर जांच बेहद जरूरी है.

About the Author

authorimg

Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
'ये प्यार इस बात की घोषणा...', असम के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी

April 1, 2026/
12:04 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम चुनाव की घोषणा के बाद कहा कि गोगामुख में अपनी पहली पत्नी को सजा देते...

Women Urine Hold Health Risk; Bladder Damage

April 9, 2026/
4:30 am

3 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक अक्सर महिलाएं काम की व्यस्तता, ट्रैफिक या गंदे पब्लिक टॉयलेट के डर से...

असम बीजेपी की पहली लिस्ट में 88 नाम, प्रद्युत बोरदोलोई को मिला इनाम, सीएम हिमंत इस सीट से लड़ेंगे

March 19, 2026/
12:07 pm

असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने बेरोजगारी की पहली और पूरी सूची...

India vs Zimbabwe Live Cricket Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Stay updated with IND vs ZIM Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Chennai. (Picture Credit: AFP)

February 12, 2026/
6:46 pm

आखरी अपडेट:फ़रवरी 12, 2026, 18:46 IST वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 14 सामाजिक क्षेत्र...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

डॉक्टर के पास गया एसिडिटी का इलाज कराने, निकल गया कैंसर, समय रहते बच गई जान, आपके साथ हो ऐसा तो क्या करेंगे

authorimg

Last Updated:

Early Warning Sign of oesophageal cancer: आमतौर पर जब हमें एसिडिटी या हार्टबर्न होती है तो हम इसका कुछ मामूली इलाज कर इसे छोड़ देते हैं. अगर यह लगातार भी होती है तो भी कुछ इधर-उधर की दवा ले लेते हैं लेकिन इलाज कराने नहीं जाते. लेकिन यह हार्टबर्न और एसिडिटी कभी-कभी गले का कैंसर में भी बदल सकता है. एक व्यक्ति एसिडिटी की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गया और जांच हुई तो पता चला कि उसे कैंसर है. गनीमत यह थी कि कैंसर एकदम शुरुआती दौर में था, इसलिए उस व्यक्ति का पूरी तरह से इलाज हो गया. लेकिन हर इंसान को सतर्क होने की जरूरत है.

Zoom

एसोफेजल कैंसर. (सांकेतिक तस्वीर) AI Photo

52 साल के एक शख्स को थोड़ी एसिडिटी रहती थी और उसे खाना निगलने में थोड़ी परेशानी महसूस हो रही थी. उसे यह समस्या चार महीने से थी. उन्हें लगा कि यह सिर्फ एसिडिटी है. इसलिए पहले खाने की आदतों में थोड़ा बदलाव किया. छोटे-छोटे कौर लेकर खाना शुरू किया और पानी पीने की मात्रा को बढ़ा दिया. इसके बावजूद भी लक्षण में कोई सुधार नहीं दिखा. फिर उन्हें सीने में जकड़न की तरह महसूस हुआ और वजन भी कम होने लगा. अब डॉक्टरों के पास जाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था. इंडियन एक्सप्रेस में डॉ. अक्षत मलिक लिखते हैं कि इसके बाद मरीज मेरे पास आया. मैंने उनसे पूछताछ शुरू की तो पता चला कि वह कभी-कभार स्मोकिंग और शराब भी पीते थे. इसके अलावा वह रेगुलर तंबाकू चबाते थे. ये सारे इशारे एसोफेगल कैंसर की ओर संकेत कर रहा था. मैंने जब उनसे कई तरह की जांच करवाई तो शक सच साबित हुआ.

समय रहते हो गया इलाज
डॉ. अक्षत मलिक उनकी सारी मेडिकल हिस्ट्री और लगातार बने लक्षणों को देखते हुए हमने अपर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी की, जिसमें निचले इसोफेगस यानी भोजन की नली में एक संदिग्ध घाव दिखाई दिया. बायोप्सी से शुरुआती स्टेज का इसोफेगल कैंसर कन्फर्म हुआ. लेकिन अच्छी बात यह रही कि समय रहते बीमारी का पता चल गया. इस स्टेज में पूरी तरह इलाज संभव है. मरीज की सबसे पहले सर्जरी के जरिए इसोफेगस के प्रभावित हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया गया. इसके बाद पाचन तंत्र का पुनर्निर्माण किया गया ताकि मरीज धीरे-धीरे सामान्य तरीके से खाना खा सके. सर्जरी के बाद ट्यूमर की प्रकृति के अनुसार टार्गेटेड थेरेपी दी गई, जिससे बीमारी के दोबारा होने का खतरा कम किया जा सके. साथ ही डाइट में सुधार किया गया. तंबाकू, स्मोकिंग, शराब सब कुछ छोड़ने के लिए कहा गया. अच्छी बात यह रही कि मरीज ने इस मल्टीडिसीप्लिरी इलाज पर रिस्पॉन्स दिया. फिलहाल वह पूरी तरह स्वस्थ हैं. अगर जांच में थोड़ी भी देर और हो जाती तो फिर पूरी तरह से ठीक होना मुश्किल था. इसलिए सही समय पर जांच के कारण ही मरीज की जान बच गई.

इसोफेगल कैंसर के कारण क्या हैं?
इसोफेगल का मतलब होता है भोजन नली. यानी भोजन नली में होने वाले कैंसर को इसोफेगल कैंसर कहा जाता है. यह नली मुंह से पेट तक जुड़ी होती है. इसकी अंदरूनी परत बेहद संवेदनशील कोशिकाओं से बनी होती है. अगर इसमें लंबे समय तक जलन हो तो इससे परत को नुकसान हो सकता है. जब यह परत बार-बार हानिकारक चीजों के संपर्क में आती है, तो कोशिकाओं में बदलाव होने लगते हैं और धीरे-धीरे वे प्री-कैंसरस रूप ले सकती हैं. यानी कैंसर से पहले वाली कोशिकाओं में बदल जाती है. तंबाकू इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. चाहे इसे स्मोकिंग के रूप में लिया जाए या चबाया जाए, यह भोजन नली की परत को लगातार नुकसान पहुंचाता है. समय के साथ यह नुकसान बढ़ता जाता है और शरीर इसे ठीक नहीं कर पाता. शराब भी इस खतरे को और बढ़ा देती है. यह एक रासायनिक उत्तेजक की तरह काम करती है, जो इसोफेगस की सुरक्षा परत को कमजोर कर देती है. दोनों का साथ में सेवन खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स भी कैंसर का एक बड़ा कारण बन सकता है. पेट का एसिड बार-बार ऊपर आने से निचली भोजन नली को नुकसान पहुंचता है, जिससे जटिल स्थिति बन सकती है. यह आगे चलकर कैंसर में बदल सकती है. अगर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो, मोटापा हो, गर्म पेय पीने की आदत हो तो भी कैंसर का खतरा हो सकता है.

किन लोगों को इसोफेगल कैंसर का खतरा
इसोफेगल कैंसर आमतौर पर अचानक से सामने नहीं आता. यह धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआत में सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं जैसा लगता है, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है.हालांकि यह किसी को भी हो सकता है लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. जैसे जो लोग लंबे समय से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, जो रेगुलर शराब पीते हैं, जिन्हें लंबे समय एसिडिटी है, जिनका खराब खान-पान है, जो लोग अधिक वजन के हैं. भारत में अक्सर ये सभी कारण एक साथ पाए जाते हैं, इसलिए जागरुकता और समय पर जांच बेहद जरूरी है.

About the Author

authorimg

Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.