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होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा-तेल 86 डॉलर पर आया:13 प्रतिशत सस्ता हुआ; अमेरिकी शेयर बाजार 2% चढ़ा, डाउ जोन्स 49,500 के पार

होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा-तेल 86 डॉलर पर आया:13 प्रतिशत सस्ता हुआ; अमेरिकी शेयर बाजार 2% चढ़ा, डाउ जोन्स 49,500 के पार

ईरान के होर्मुज रूट को कॉमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 13% सस्ता हुआ है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को दाम करीब 13 डॉलर गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 99.39 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के दौरान दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। तब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल सस्ता होने से अब यह आशंकाएं भी खत्म हो गई हैं। अमेरिका का डाउ जोन्स करीब 1,000 अंक चढ़ा कच्चे तेल की कीमत गिरने से ग्लोबल मार्केट में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका का डाउ जोन्स करीब 1,000 अंक की तेजी के साथ 49,500 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। SP 500 में 1.12% और नैस्डैक इंडेक्स में 1.04% की बढ़त देखने को मिल रही है। ईरान के विदेश मंत्री ने होर्मुज खोलने की जानकारी दी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम के मद्देनजर होर्मुज रूट को सभी व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। ट्रम्प बोले- ईरान होर्मुज को कभी बंद नहीं करेगा ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा- ‘ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर कभी बंद न करने पर सहमति जताई है। अब इसका इस्तेमाल दुनिया के खिलाफ एक हथियार के तौर पर नहीं किया जाएगा।’ कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। रुपये को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर करंट अकाउंट डेफिसिट में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी और महंगाई में करीब 0.5% राहत मिल सकती है। तेल सप्लाई में रुकावट से जूझ रही थी दुनिया आईएनजी (ING) के एनालिसिस के अनुसार, युद्ध की वजह से बाजार में रोजाना लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही थी। हालांकि, वैकल्पिक पाइपलाइन रूटों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सप्लाई पर दबाव बना रहा। अब इस जलमार्ग के खुलने से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और एनर्जी मार्केट में स्थिरता लौटेगी। ट्रम्प के बयान से शांति की उम्मीद जगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था कि ईरान युद्ध जल्द ही खत्म होना चाहिए। लास वेगास के एक कार्यक्रम में उन्होंने संघर्ष के सकारात्मक दिशा में बढ़ने की बात कही और कहा कि तेहरान ‘डील’ करने के लिए काफी उत्सुक है। ट्रम्प के मुताबिक, इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम शुरू हो चुका है और जल्द ही दोनों देशों के प्रमुखों को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया जा सकता है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चा तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए थे। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। इस सप्लाई संकट के कारण अमेरिका में गैस की कीमतें 4.15 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थीं और महंगाई दर में भी उछाल आया था। मार्च में क्रूड ऑयल 60% महंगा हुआ था मार्च में कच्चे तेल में 60% उछाल आया था। यह 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। फरवरी अंत में 72.48 डॉलर से बढ़कर मार्च में 120 डॉलर पार पहुंच गया था। इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है भारत कच्चे तेल के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में कुल आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कीमत बढ़ने से आयात बिल तेजी से बढ़ रहा था। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 505 अंक चढ़कर 78,494 पर बंद: निफ्टी में भी 157 अंकों की तेजी, 24,354 पर पहुंचा; FMCG शेयरों में खरीदारी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी शुक्रवार 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में FMCG,मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी शेयरों में बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…

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होर्मुज रूट खुलने के बाद कच्चा-तेल 86 डॉलर पर आया:13 प्रतिशत सस्ता हुआ; अमेरिकी शेयर बाजार 2% चढ़ा, डाउ जोन्स 49,500 के पार

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