Thursday, 22 Oct 2026 | 09:02 AM

Trending :

Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises

Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises
  • Hindi News
  • International
  • Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान में 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध एशिया-प्रशांत इलाके पर उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से और ज्यादा असर डाल रहा है। शुरुआत में लगा था कि तेल और गैस की कमी का असर धीरे-धीरे दिखेगा, लेकिन हकीकत में कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम जिंदगी पर अचानक बड़ा झटका लगा है। कई विशेषज्ञ इसकी तुलना कोविड जैसे बड़े संकट से कर रहे हैं।

भले ही जल्द शांति समझौता हो जाए, लेकिन इस पूरे क्षेत्र पर इसका असर लंबे समय तक रहने वाला है। आने वाले महीनों में उड़ानें रद्द होने, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने, फैक्ट्रियों के रुकने, सामान की सप्लाई में देरी और बाजारों में रोजमर्रा की चीजों की कमी देखने को मिल सकती है। इसमें प्लास्टिक बैग, इंस्टेंट नूडल्स, वैक्सीन, सिरिंज, लिपस्टिक, माइक्रोचिप और स्पोर्ट्सवियर जैसी चीजें भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट के रास्तों से व्यापार कुछ और हफ्तों तक बाधित रहा, तो कई देशों में हालात बिगड़ सकते हैं, अशांति फैल सकती है और मंदी आ सकती है। कई कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर हैं और सरकारें महंगाई को काबू में रखने के लिए भारी कर्ज ले रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, साल के अंत तक एशिया में लाखों लोग गरीबी में जा सकते हैं।

तेहरान की एक बिल्डिंग पर होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा बैनर लगा है। इसमें दिखाया गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है।

तेहरान की एक बिल्डिंग पर होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा बैनर लगा है। इसमें दिखाया गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है।

भारत से श्रीलंका तक आर्थिक संकट का खतरा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था लगभग हर जगह धीमी हो रही है क्योंकि दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई बाजार से बाहर हो गई है। मिडिल ईस्ट से आने वाला तेल-गैस रुकने से पूरे एशिया की सप्लाई चेन हिल गई है।

एशिया-प्रशांत पर सबसे ज्यादा असर इसलिए पड़ा क्योंकि यह क्षेत्र मिडिल ईस्ट के तेल और गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर है, यहां की अर्थव्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी है और पहले से ही ऊर्जा की मांग ज्यादा थी जबकि सप्लाई कम पड़ रही थी।

यहां तक कि अगर होर्मुज की समस्या कल ही ठीक भी हो जाए तो भी तेल और गैस की सप्लाई को पहले जैसे स्तर पर आने में सालों लग सकते हैं।

चीन जैसे अमीर देशों पर असर थोड़ा कम होगा क्योंकि उनके पास ज्यादा संसाधन हैं, लेकिन बाकी एशिया में हालात ज्यादा खराब हैं। कई देशों की असली स्थिति उतनी अच्छी नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

वियतनाम के किसान, भारत के मजदूर, श्रीलंका के होटल मालिक, फिलीपींस के ड्राइवर और हांगकांग-सिंगापुर के कारोबारी सबकी चिंता बढ़ी हुई है। कई सरकारें बाहर से शांत दिखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अंदर ही अंदर हालात संभालना मुश्किल हो रहा है। ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार ये तीनों बड़े सेक्टर एक साथ दबाव में हैं।

संकट में ट्रांसपोर्ट सेक्टर, सप्लाई खतरे में

ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भारी संकट आ गया है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होते ही एशिया में ट्रक, जहाज और विमान प्रभावित होने लगे। मार्च में दुनिया भर में 92,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हुईं, जो पहले के मुकाबले दोगुनी हैं, और इसका सबसे ज्यादा असर एशिया-प्रशांत में दिखा।

मिडिल ईस्ट के रास्ते उड़ान भरने वाली एयरलाइंस ने दुबई जैसे बड़े हब के लिए उड़ानें तुरंत रोक दीं। जेट फ्यूल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई और सप्लाई भी खतरे में पड़ गई, जिससे एयरलाइंस ने कई रूट बंद कर दिए। क्वांटस, एयर न्यूजीलैंड, लायन एयर, वियेटजेट, एयरएशिया, एयर इंडिया और कैथे पैसिफिक जैसी कई कंपनियों ने सेवाएं कम की हैं। मलेशिया की बाटिक एयर ने तो 35% उड़ानें घटा दीं ताकि दिवालिया होने से बच सके।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एशिया-प्रशांत में हवाई ट्रैफिक एक तिहाई तक गिर चुका है। छोटी एयरलाइंस हर हफ्ते करोड़ों का नुकसान झेल रही हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। यहां तक कि कोविड के समय भी इतनी अनिश्चितता नहीं थी जितनी अब है।

इसका असर दूरदराज इलाकों पर भी पड़ा है, जहां अब पहुंचना और मुश्किल हो गया है। ट्रैवल एजेंसी, होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार अचानक गिर गया है। श्रीलंका में एक होटल मालिक के मुताबिक, टिकट के दाम तीन गुना हो गए हैं और होटल की बुकिंग 80-90% तक गिर गई है।

श्रीलंका के एक बीच पर पर्यटक; साउथ एशिया के कई होटलों में ऑक्यूपेंसी में तेज गिरावट दर्ज हुई है।

श्रीलंका के एक बीच पर पर्यटक; साउथ एशिया के कई होटलों में ऑक्यूपेंसी में तेज गिरावट दर्ज हुई है।

कच्चे माल की किल्लत, फैक्ट्रियां धीमी, सप्लाई चेन टूटी

फैक्ट्रियों में भी संकट गहराता जा रहा है। कई उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल मिडिल ईस्ट से आता है और अब भंडार खत्म होने लगा है। इंडोनेशिया में निकेल उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि गैस और सल्फर की कमी हो गई है।

बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर में भी उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। धागे की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है और फैक्ट्रियों के लिए काम चलाना मुश्किल हो रहा है।

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री भी प्रभावित हो रही है क्योंकि कतर में हीलियम उत्पादन रुक गया है, जो चिप बनाने के लिए जरूरी है। इससे कीमतें बढ़ गई हैं और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

ढाका की एक गार्मेंट फैक्ट्री में काम करती महिलाएं। ईरान युद्ध के कारण उत्पादन और शिपमेंट में बड़े स्तर पर बाधाएं देखी जा रही हैं।

ढाका की एक गार्मेंट फैक्ट्री में काम करती महिलाएं। ईरान युद्ध के कारण उत्पादन और शिपमेंट में बड़े स्तर पर बाधाएं देखी जा रही हैं।

डोमिनो इफेक्ट: एक संकट से कई संकट

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ‘डोमिनो इफेक्ट’ तेजी से फैल रहा है। यानी कि एक समस्या दूसरी समस्या को जन्म दे रही है। प्लास्टिक की कमी से ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सप्लाई घट रही है, खाद की कमी से वियतनाम में खेती प्रभावित हो रही है और ऑस्ट्रेलिया में मांस की कमी का खतरा बढ़ गया है।

इसका सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, एशिया-प्रशांत में करीब 88 लाख लोग गरीबी में जा सकते हैं, जिनमें से लगभग 50 लाख सिर्फ ईरान में होंगे।

रोजगार कम हो रहा है, खर्च बढ़ रहा है और दवाइयों व वैक्सीन की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। कई जगह स्कूल-कॉलेज भी प्रभावित हो रहे हैं और बिजली के लिए फिर से कोयले का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।

भारत में कई औद्योगिक इलाके ईंधन की कमी से बंद पड़े हैं और मजदूर वापस गांव लौट रहे हैं। दवाइयों के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलीपींस में ट्रांसपोर्ट महंगा होने से लोग काम पर नहीं जा पा रहे और ड्राइवरों ने हड़ताल तक कर दी है।

एक्सपर्ट बोले- सुनामी जैसा है ये आर्थिक संकट

छोटे कारोबारियों की हालत और खराब है। पहले जहां रोज 40 (करीब 3600 रुपए) डॉलर कमाने वाले लोग अब 10 डॉलर (900 रुपए) से भी कम कमा पा रहे हैं क्योंकि ग्राहक ही नहीं आ रहे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस युद्ध से एशिया-प्रशांत को 97 अरब से 299 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

नीचे स्तर पर देखें तो लोगों की परेशानी की शुरुआत महंगाई और बेरोजगारी से होती है। आमदनी घटती है और खर्च बढ़ता है। कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि सब्जियां खेतों में ही खराब हो रही हैं क्योंकि उन्हें बाजार तक ले जाने का खर्च नहीं उठाया जा पा रहा।

एटोक (फिलीपींस) में एक किसान अपने गोभी के खेत को देखता हुआ। किसान ने फसल काटने से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि डिलीवरी के लिए बढ़ती ईंधन लागत के कारण घाटे में फसल बेचने से बेहतर है कि वह इसे खेत में ही सड़ने दे। तस्वीर मार्च की है।

एटोक (फिलीपींस) में एक किसान अपने गोभी के खेत को देखता हुआ। किसान ने फसल काटने से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि डिलीवरी के लिए बढ़ती ईंधन लागत के कारण घाटे में फसल बेचने से बेहतर है कि वह इसे खेत में ही सड़ने दे। तस्वीर मार्च की है।

कुल मिलाकर, यह संकट बहुत तेजी से फैला है और इसे संभालना आसान नहीं होगा। भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति हो जाए, लेकिन महंगाई और कमी का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। एक एक्सपर्ट ने इसे सुनामी जैसा बताया है, जो बहुत तेजी से फैलती है। उनका कहना है कि यह देखकर हैरानी होती है कि कुछ लोग अब भी मानते हैं कि वे इससे बच जाएंगे।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भोपाल में घर में नमाज पढ़ने को लेकर विवाद:पड़ोसियों ने पुलिस से की शिकायत, कहा- मस्जिद के रूप में हो रहा उपयोग

February 27, 2026/
11:04 pm

भोपाल के साकेत नगर इलाके में एक मकान में नमाज अदा किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। पड़ोस...

इंडक्शन यूजिंग टिप्स: गैस की रसोई में चूल्हे का उपयोग कैसे किया जाता है? तो जान लें ये स्मार्ट उपाय ऑलिव ग्रोथ एक्सटेंशन मुश्किल

March 19, 2026/
2:44 pm

19 मार्च 2026 को 14:44 IST पर अपडेट किया गया रसोई सुरक्षा युक्तियाँ: यदि आप भी विशेष चूल्हा यूज़ कर...

वॉलमार्ट का दांव- छोटे-बड़े हर ऑपरेशन में एआई तैनात:20 लाख कर्मचारियों वाला वॉलमार्ट एआई से रिटेल और शॉपिंग का तरीका बदल रहा

June 9, 2026/
1:19 pm

ग्लोबल रिटेल चेन वॉलमार्ट की सालाना मीटिंग में यह साफ हो गया है कि कंपनी बिजनेस की रफ्तार बढ़ाने के...

गांधी सागर में चीतों 'प्रभास-पावक' का एक साल पूरा:नए माहौल में ढले, हाईटेक निगरानी में सुरक्षित और स्वस्थ

April 21, 2026/
9:14 am

मन्दसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण की एक ऐतिहासिक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां बसे...

हिमाचल में 2 दिन भारी ओलावृष्टि का अलर्ट:7 मई तक बारिश से नहीं मिलेगी राहत; लाहौल-किन्नौर में हो सकती है बर्फबारी

May 2, 2026/
5:45 am

हिमाचल प्रदेश में आज रात से वेस्टर्न डिस्टरबेंस फिर स्ट्रांग होकर बरसेगा। मौसम विभाग (IMD) इसे देखते हुए कल और...

Jinping to meet Kim Jong in rare visit to North Korea

June 6, 2026/
2:09 pm

बीजिंग/प्योंगयांग27 मिनट पहले कॉपी लिंक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया के दौरे पर जाएंगे और वहां...

राजनीति

Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises

Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises
  • Hindi News
  • International
  • Asia Energy Crisis Deepens | Iran War Impact; Flights Cancelled, Supply Chain Hit, Inflation Rises

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान में 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध एशिया-प्रशांत इलाके पर उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से और ज्यादा असर डाल रहा है। शुरुआत में लगा था कि तेल और गैस की कमी का असर धीरे-धीरे दिखेगा, लेकिन हकीकत में कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम जिंदगी पर अचानक बड़ा झटका लगा है। कई विशेषज्ञ इसकी तुलना कोविड जैसे बड़े संकट से कर रहे हैं।

भले ही जल्द शांति समझौता हो जाए, लेकिन इस पूरे क्षेत्र पर इसका असर लंबे समय तक रहने वाला है। आने वाले महीनों में उड़ानें रद्द होने, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने, फैक्ट्रियों के रुकने, सामान की सप्लाई में देरी और बाजारों में रोजमर्रा की चीजों की कमी देखने को मिल सकती है। इसमें प्लास्टिक बैग, इंस्टेंट नूडल्स, वैक्सीन, सिरिंज, लिपस्टिक, माइक्रोचिप और स्पोर्ट्सवियर जैसी चीजें भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट के रास्तों से व्यापार कुछ और हफ्तों तक बाधित रहा, तो कई देशों में हालात बिगड़ सकते हैं, अशांति फैल सकती है और मंदी आ सकती है। कई कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर हैं और सरकारें महंगाई को काबू में रखने के लिए भारी कर्ज ले रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, साल के अंत तक एशिया में लाखों लोग गरीबी में जा सकते हैं।

तेहरान की एक बिल्डिंग पर होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा बैनर लगा है। इसमें दिखाया गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है।

तेहरान की एक बिल्डिंग पर होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा बैनर लगा है। इसमें दिखाया गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है।

भारत से श्रीलंका तक आर्थिक संकट का खतरा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था लगभग हर जगह धीमी हो रही है क्योंकि दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई बाजार से बाहर हो गई है। मिडिल ईस्ट से आने वाला तेल-गैस रुकने से पूरे एशिया की सप्लाई चेन हिल गई है।

एशिया-प्रशांत पर सबसे ज्यादा असर इसलिए पड़ा क्योंकि यह क्षेत्र मिडिल ईस्ट के तेल और गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर है, यहां की अर्थव्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी है और पहले से ही ऊर्जा की मांग ज्यादा थी जबकि सप्लाई कम पड़ रही थी।

यहां तक कि अगर होर्मुज की समस्या कल ही ठीक भी हो जाए तो भी तेल और गैस की सप्लाई को पहले जैसे स्तर पर आने में सालों लग सकते हैं।

चीन जैसे अमीर देशों पर असर थोड़ा कम होगा क्योंकि उनके पास ज्यादा संसाधन हैं, लेकिन बाकी एशिया में हालात ज्यादा खराब हैं। कई देशों की असली स्थिति उतनी अच्छी नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

वियतनाम के किसान, भारत के मजदूर, श्रीलंका के होटल मालिक, फिलीपींस के ड्राइवर और हांगकांग-सिंगापुर के कारोबारी सबकी चिंता बढ़ी हुई है। कई सरकारें बाहर से शांत दिखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अंदर ही अंदर हालात संभालना मुश्किल हो रहा है। ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार ये तीनों बड़े सेक्टर एक साथ दबाव में हैं।

संकट में ट्रांसपोर्ट सेक्टर, सप्लाई खतरे में

ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भारी संकट आ गया है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होते ही एशिया में ट्रक, जहाज और विमान प्रभावित होने लगे। मार्च में दुनिया भर में 92,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हुईं, जो पहले के मुकाबले दोगुनी हैं, और इसका सबसे ज्यादा असर एशिया-प्रशांत में दिखा।

मिडिल ईस्ट के रास्ते उड़ान भरने वाली एयरलाइंस ने दुबई जैसे बड़े हब के लिए उड़ानें तुरंत रोक दीं। जेट फ्यूल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई और सप्लाई भी खतरे में पड़ गई, जिससे एयरलाइंस ने कई रूट बंद कर दिए। क्वांटस, एयर न्यूजीलैंड, लायन एयर, वियेटजेट, एयरएशिया, एयर इंडिया और कैथे पैसिफिक जैसी कई कंपनियों ने सेवाएं कम की हैं। मलेशिया की बाटिक एयर ने तो 35% उड़ानें घटा दीं ताकि दिवालिया होने से बच सके।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एशिया-प्रशांत में हवाई ट्रैफिक एक तिहाई तक गिर चुका है। छोटी एयरलाइंस हर हफ्ते करोड़ों का नुकसान झेल रही हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं। यहां तक कि कोविड के समय भी इतनी अनिश्चितता नहीं थी जितनी अब है।

इसका असर दूरदराज इलाकों पर भी पड़ा है, जहां अब पहुंचना और मुश्किल हो गया है। ट्रैवल एजेंसी, होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार अचानक गिर गया है। श्रीलंका में एक होटल मालिक के मुताबिक, टिकट के दाम तीन गुना हो गए हैं और होटल की बुकिंग 80-90% तक गिर गई है।

श्रीलंका के एक बीच पर पर्यटक; साउथ एशिया के कई होटलों में ऑक्यूपेंसी में तेज गिरावट दर्ज हुई है।

श्रीलंका के एक बीच पर पर्यटक; साउथ एशिया के कई होटलों में ऑक्यूपेंसी में तेज गिरावट दर्ज हुई है।

कच्चे माल की किल्लत, फैक्ट्रियां धीमी, सप्लाई चेन टूटी

फैक्ट्रियों में भी संकट गहराता जा रहा है। कई उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल मिडिल ईस्ट से आता है और अब भंडार खत्म होने लगा है। इंडोनेशिया में निकेल उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि गैस और सल्फर की कमी हो गई है।

बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर में भी उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। धागे की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है और फैक्ट्रियों के लिए काम चलाना मुश्किल हो रहा है।

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री भी प्रभावित हो रही है क्योंकि कतर में हीलियम उत्पादन रुक गया है, जो चिप बनाने के लिए जरूरी है। इससे कीमतें बढ़ गई हैं और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

ढाका की एक गार्मेंट फैक्ट्री में काम करती महिलाएं। ईरान युद्ध के कारण उत्पादन और शिपमेंट में बड़े स्तर पर बाधाएं देखी जा रही हैं।

ढाका की एक गार्मेंट फैक्ट्री में काम करती महिलाएं। ईरान युद्ध के कारण उत्पादन और शिपमेंट में बड़े स्तर पर बाधाएं देखी जा रही हैं।

डोमिनो इफेक्ट: एक संकट से कई संकट

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ‘डोमिनो इफेक्ट’ तेजी से फैल रहा है। यानी कि एक समस्या दूसरी समस्या को जन्म दे रही है। प्लास्टिक की कमी से ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सप्लाई घट रही है, खाद की कमी से वियतनाम में खेती प्रभावित हो रही है और ऑस्ट्रेलिया में मांस की कमी का खतरा बढ़ गया है।

इसका सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, एशिया-प्रशांत में करीब 88 लाख लोग गरीबी में जा सकते हैं, जिनमें से लगभग 50 लाख सिर्फ ईरान में होंगे।

रोजगार कम हो रहा है, खर्च बढ़ रहा है और दवाइयों व वैक्सीन की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। कई जगह स्कूल-कॉलेज भी प्रभावित हो रहे हैं और बिजली के लिए फिर से कोयले का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।

भारत में कई औद्योगिक इलाके ईंधन की कमी से बंद पड़े हैं और मजदूर वापस गांव लौट रहे हैं। दवाइयों के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलीपींस में ट्रांसपोर्ट महंगा होने से लोग काम पर नहीं जा पा रहे और ड्राइवरों ने हड़ताल तक कर दी है।

एक्सपर्ट बोले- सुनामी जैसा है ये आर्थिक संकट

छोटे कारोबारियों की हालत और खराब है। पहले जहां रोज 40 (करीब 3600 रुपए) डॉलर कमाने वाले लोग अब 10 डॉलर (900 रुपए) से भी कम कमा पा रहे हैं क्योंकि ग्राहक ही नहीं आ रहे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस युद्ध से एशिया-प्रशांत को 97 अरब से 299 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

नीचे स्तर पर देखें तो लोगों की परेशानी की शुरुआत महंगाई और बेरोजगारी से होती है। आमदनी घटती है और खर्च बढ़ता है। कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि सब्जियां खेतों में ही खराब हो रही हैं क्योंकि उन्हें बाजार तक ले जाने का खर्च नहीं उठाया जा पा रहा।

एटोक (फिलीपींस) में एक किसान अपने गोभी के खेत को देखता हुआ। किसान ने फसल काटने से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि डिलीवरी के लिए बढ़ती ईंधन लागत के कारण घाटे में फसल बेचने से बेहतर है कि वह इसे खेत में ही सड़ने दे। तस्वीर मार्च की है।

एटोक (फिलीपींस) में एक किसान अपने गोभी के खेत को देखता हुआ। किसान ने फसल काटने से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि डिलीवरी के लिए बढ़ती ईंधन लागत के कारण घाटे में फसल बेचने से बेहतर है कि वह इसे खेत में ही सड़ने दे। तस्वीर मार्च की है।

कुल मिलाकर, यह संकट बहुत तेजी से फैला है और इसे संभालना आसान नहीं होगा। भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति हो जाए, लेकिन महंगाई और कमी का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। एक एक्सपर्ट ने इसे सुनामी जैसा बताया है, जो बहुत तेजी से फैलती है। उनका कहना है कि यह देखकर हैरानी होती है कि कुछ लोग अब भी मानते हैं कि वे इससे बच जाएंगे।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.