Thursday, 09 Jul 2026 | 09:27 AM

Trending :

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर कहा कि बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं होती। घर संभालना, बच्चों की देखभाल और परिवार की मदद करना भी काम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। ऐसे में गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करना गलत है। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए इस फैसले में कहा कि घरेलू काम का भी आर्थिक महत्व होता है और इसे नजरअंदाज करना नाइंसाफी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी खाली नहीं बैठती, वह ऐसा काम करती है जिससे कमाने वाला पति सही तरीके से काम कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में अक्सर शादी के बाद महिला से नौकरी छोड़ने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बाद में उसी बात को लेकर पति भत्ता देने से बचते हैं। ऐसी दलील को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। क्या है मामला मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अंतरिम मेंटेनेंस की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। अपीलीय अदालत ने भी कोई राहत नहीं दी। हाईकोर्ट में पति ने दलील दी कि वह बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है और पत्नी खाली बैठकर मेंटेनेंस नहीं मांग सकती। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कमाने में सक्षम है। पत्नी को ₹50 हजार मेंटेनेंस का आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं काम करना चाहती हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, लेकिन सिर्फ इस आधार पर भत्ता रोकना कि वह कमाने लायक है, गलत सोच है। घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना, परिवार का साथ देना और पति के ट्रांसफर के हिसाब से खुद को ढालना, ये सब भी काम ही हैं। कोर्ट ने आगे कहा- कानून को यह देखना होगा कि जिसने सालों परिवार के लिए मेहनत की, वह आर्थिक रूप से असहाय न रह जाए। कोर्ट ने माना कि शादी या परिवार के कारण करियर छोड़ने वाली महिला बाद में उसी स्तर और सैलरी पर नौकरी शुरू नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में महिला की कोई कमाई साबित नहीं हुई, इसलिए उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गुजारा भत्ता के मामले अक्सर बहुत ज्यादा विवादित और टकराव वाले बन जाते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में लंबी लड़ाई की बजाय आपसी बातचीत और सुलह का रास्ता बेहतर होता है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमेबाजी में अक्सर पत्नी खर्च बढ़ाकर बताती है और पति अपनी कमाई कम बताता है, जिससे सुलह मुश्किल हो जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ask search icon

April 3, 2026/
11:54 am

Last Updated:April 03, 2026, 11:54 IST खीरा त्वचा के लिए भी बेहद उपयोगी होता है.इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को...

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

March 10, 2026/
5:42 pm

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में...

Thalapathy Vijay & Trisha Affair Rumours

March 7, 2026/
12:54 pm

3 दिन पहले कॉपी लिंक तमिल एक्टर थलपति विजय इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। एक...

authorimg

May 5, 2026/
5:43 pm

Last Updated:May 05, 2026, 17:43 IST चेहरे पर जिद्दी दाग-धब्बे और असमान स्किन टोन से परेशान लोग अक्सर जल्दी रिजल्ट...

केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया:50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा

April 18, 2026/
3:25 pm

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी...

फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

May 27, 2026/
1:30 pm

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर...

ग्वालियर स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते वक्त गिरी महिला:RPF जवान ने बचाया, घटना का सीसीटीवी वीडियो आया सामने

April 13, 2026/
10:54 am

ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर शनिवार देर रात जीटी एक्सप्रेस में चढ़ते समय एक महिला प्लेटफॉर्म और...

अमेरिका में लुधियाना के अवतार सिंह की हत्या का खुलासा:किसी और का करना था किडनैप, बदमाशों ने सवाल पूछे, सही जवाब ना देने पर किया मर्डर

February 25, 2026/
11:04 am

अमेरिका के ट्रेसी शहर के गुरुद्वारा साहिब परिसर से लुधियाना के 57 वर्षीय अवतार सिंह को 17 फरवरी को किडनैप...

राजनीति

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर कहा कि बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं होती। घर संभालना, बच्चों की देखभाल और परिवार की मदद करना भी काम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। ऐसे में गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करना गलत है। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए इस फैसले में कहा कि घरेलू काम का भी आर्थिक महत्व होता है और इसे नजरअंदाज करना नाइंसाफी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी खाली नहीं बैठती, वह ऐसा काम करती है जिससे कमाने वाला पति सही तरीके से काम कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में अक्सर शादी के बाद महिला से नौकरी छोड़ने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बाद में उसी बात को लेकर पति भत्ता देने से बचते हैं। ऐसी दलील को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। क्या है मामला मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अंतरिम मेंटेनेंस की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। अपीलीय अदालत ने भी कोई राहत नहीं दी। हाईकोर्ट में पति ने दलील दी कि वह बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है और पत्नी खाली बैठकर मेंटेनेंस नहीं मांग सकती। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कमाने में सक्षम है। पत्नी को ₹50 हजार मेंटेनेंस का आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं काम करना चाहती हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, लेकिन सिर्फ इस आधार पर भत्ता रोकना कि वह कमाने लायक है, गलत सोच है। घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना, परिवार का साथ देना और पति के ट्रांसफर के हिसाब से खुद को ढालना, ये सब भी काम ही हैं। कोर्ट ने आगे कहा- कानून को यह देखना होगा कि जिसने सालों परिवार के लिए मेहनत की, वह आर्थिक रूप से असहाय न रह जाए। कोर्ट ने माना कि शादी या परिवार के कारण करियर छोड़ने वाली महिला बाद में उसी स्तर और सैलरी पर नौकरी शुरू नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में महिला की कोई कमाई साबित नहीं हुई, इसलिए उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गुजारा भत्ता के मामले अक्सर बहुत ज्यादा विवादित और टकराव वाले बन जाते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में लंबी लड़ाई की बजाय आपसी बातचीत और सुलह का रास्ता बेहतर होता है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमेबाजी में अक्सर पत्नी खर्च बढ़ाकर बताती है और पति अपनी कमाई कम बताता है, जिससे सुलह मुश्किल हो जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.